बरसाना। रात की नीरवता जैसे ही भोर की पहली आभा में बदलने लगी, बरसाना की धरती पर वह मंगल घड़ी उतर आई, जिसका इंतजार ब्रजवासी और देश-दुनिया से आए श्रद्धालु कर रहे थे। जन्मबेला आते ही भानु भवन में बधाई के स्वर गूंज पड़े। सखियों के मुख से निकले मंगल पदों और ढप की थाप ने वातावरण को आनंद से भर दिया। ऐसा लगा मानो बरसाना का कण-कण अपनी लाडो के आगमन की खुशी में झूम उठा हो। भानु भवन के भीतर जन्म की बधाई गूंज रही थी और बाहर मंदिर की ओर टकटकी लगाए खड़े श्रद्धालुओं के मन में बस एक ही लालसा थी अपनी आराध्य राधारानी के प्राकट्य दर्शन की। किसी के हाथ प्रार्थना में जुड़े थे, किसी की आंखें भावुक थीं और किसी की जुबान पर लगातार राधे-राधे था। जन्म की इस पावन बेला में बरसाना की गलियां और परिक्रमा मार्ग तक ऐसा लग रहा था, जैसे पूरा ब्रज अपनी लाडो के जन्मदिन की खुशी में शामिल हो गया हो।
भानु भवन में बजी बधाई, सखियों पर चढ़ा आनंद -
राधारानी के प्राकट्य के साथ भानु भवन में जन्म की बधाई का उल्लास छा गया। नंदगांव से आए समाजियों के स्वर उठे तो सखी भाव और गहरा हो गया। ढप की थाप के बीच बधाई पदों ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। सखियां आनंद में झूमती रहीं और श्रद्धालु इस मंगल दृश्य को निहारते रहे। कभी बधाई के स्वर ऊंचे होते तो कभी जय राधे का उद्घोष पूरे परिसर को गुंजा देता।
लाडो की एक झलक को आतुर आंखें -
जन्म की खबर के साथ ही राधारानी मंदिर की ओर श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ गई। हाथों में फूल और प्रसाद लिए भक्त अपनी आराध्य के दर्शन को आगे बढ़ते रहे। कोई दोनों हाथ जोड़कर मंदिर की ओर निहार रहा था तो कोई अपने बच्चों और बुजुर्गों को संभालते हुए दर्शन की राह पर था। दूर से मंदिर की ओर उठता जय राधे का स्वर सुनाई देता तो भक्तों के चेहरे खिल उठते।
बधाई के सुरों से महका बरसाना -
भानु भवन में जन्म की बधाई शुरू हुई तो उसका उल्लास बरसाना की गलियों तक महसूस हुआ। कहीं श्रद्धालु हाथ जोड़े जन्मबेला को निहारते रहे तो कहीं समूह में खड़े भक्त राधे-राधे का जाप करते दिखाई दिए। देश-दुनिया से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए राधारानी का जन्मदिन किसी उत्सव से कम नहीं था। महिलाएं भक्ति में मग्न थीं, बच्चे अपने परिवार का हाथ थामे दर्शन की राह देख रहे थे और बुजुर्ग आंखें बंद कर राधे नाम का स्मरण कर रहे थे। जन्म की बधाई और जय राधे के उद्घोष के बीच पूरा बरसाना जैसे अपनी लाडो के जन्म की खुशी में एक साथ डूब गया।
बाजार में भी जन्मदिन की रौनक -
मुख्य बाजार में श्रद्धालुओं की आवाजाही से जन्मोत्सव की रौनक बनी रही। पूजन सामग्री और प्रसाद लेने के लिए भक्त दुकानों पर पहुंचे। बच्चों के हाथों में फूल और बड़ों के हाथों में पूजा की थालियां दिखाई दीं। हर कुछ देर में उठता राधे नाम बाजार की चहल-पहल को भक्ति के रंग में रंग देता रहा।
परिक्रमा में थकते कदम, नहीं थमा राधे नाम -
जन्मोत्सव के बीच बरसाना की परिक्रमा भी जारी रही। नंगे पांव श्रद्धालु राधे-राधे का जाप करते हुए आगे बढ़ते रहे। किसी के हाथ में माला थी तो कोई परिवार के साथ अपनी आराध्य का नाम लेते हुए कदम बढ़ा रहा था। लंबी परिक्रमा की थकान के बावजूद चेहरे पर संतोष था। भक्तों के लिए हर कदम जैसे लाडो के चरणों तक पहुंचने का भाव लिए था।
अपनी आराध्य को जन्मदिन की बधाई -
राधारानी के जन्मदिन पर भक्तों के प्रेम का भी अनोखा रंग दिखाई दिया। कोई हाथ जोड़कर कह रहा था, “राधे, जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई”, तो कोई मुस्कुराते हुए आधुनिक अंदाज में “हैप्पी बर्थ डे राधारानी” कहकर अपनी आराध्य को जन्मदिन की शुभकामना दे रहा था। बच्चों की आंखों में उत्सुकता थी, बुजुर्गों की जुबान पर राधे नाम और युवाओं के चेहरों पर अपनी लाडो के जन्मदिन की खुशी।
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