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VIDEO: नेपाल से बहकर आए पांच हाथियों की जिंदगी चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर बची
नेपाल के जंगलों से निकला पांच जंगली हाथियों का कुनबा मंगलवार सुबह घाघरा के प्रचंड बहाव में जिंदगी और मौत के बीच फंस गया। गेरुआ-कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहते हुए तीन वयस्क हाथी और दो नन्हे शावक चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज की ओर पहुंच गए। शावक तेज धारा में खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। उन्हें बचाने के लिए वयस्क हाथी भी उफनती धारा में लगातार संघर्ष कर रहे थे। इस खतरनाक दृश्य को देखकर बैराज पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
हाथियों के बैराज की ओर पहुंचने की सूचना मिलते ही कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। वन विभाग को आशंका थी कि यदि हाथियों का कुनबा बैराज के फाटकों और तेज बहाव के बीच फंस गया तो पांचों की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। सूचना मिलते ही कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ वन दारोगा राधेश्याम, डिप्टी रेंजर मयंक पांडेय और वनकर्मियों की टीम के साथ तत्काल बैराज पहुंच गए।
फाटकों ने थामा पानी का प्रचंड वेग
मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने सबसे पहले हाथियों की स्थिति का जायजा लिया। तेज बहाव में शावकों के संघर्ष को देखते हुए तत्काल सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया। दोनों विभागों के बीच समन्वय के बाद बैराज के फाटकों को नीचे करवाया गया। फाटक नीचे होने के बाद पानी का दबाव और बहाव कुछ कम हुआ तो हाथियों को संभलने का मौका मिला। वयस्क हाथियों ने शावकों को अपने साथ सुरक्षित दिशा में ले जाना शुरू कर दिया।
शावकों के लिए वयस्क हाथियों ने झोंकी ताकत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नदी की तेज धारा में सबसे ज्यादा परेशानी दोनों शावकों को हो रही थी। वे बार-बार बहाव में असंतुलित हो रहे थे। वयस्क हाथी उनके आसपास रहकर उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे थे। शावकों को बचाने की कोशिश में बड़े हाथी भी तेज धारा के बीच फंस गए थे। इसी दौरान वन विभाग और सिंचाई विभाग की त्वरित कार्रवाई से नदी का वेग कम हुआ और हाथियों के लिए सुरक्षित निकलने का रास्ता बना।
हांका लगाकर जंगल की ओर मोड़ा
बहाव कम होने के बाद हाथियों का कुनबा बैराज के आसपास पहुंच गया। यहां मौजूद लोगों की भीड़ के कारण भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई थी। वन विभाग की टीम ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए हाथियों को सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए हांका लगाया। लगातार निगरानी और नियंत्रित हांके के बाद हाथियों ने बैराज के गेट की तरफ जाने के बजाय किनारे का रास्ता पकड़ा और नदी से बाहर निकलकर सघन वन क्षेत्र की ओर बढ़ गए।
कुछ देर तक वन विभाग की टीम हाथियों के पीछे निगरानी करती रही। जब पांचों हाथी सुरक्षित रूप से जंगल में प्रवेश कर गए, तब अधिकारियों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग की टीम अब हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है।
नेपाल से आए होने की आशंका
वन विभाग के अनुसार यह इलाका हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्र और हाथी कॉरिडोर से जुड़ा है। सीमा पार नेपाल के जंगलों से भी हाथियों का इस क्षेत्र में आवागमन होता रहता है। मंगलवार को पांच हाथियों का यह कुनबा गेरुआ-कौड़ियाला नदी क्षेत्र में तेज बहाव की चपेट में आने के बाद बहते हुए बैराज की तरफ पहुंच गया। वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
भीड़ बढ़ती तो और मुश्किल हो सकती थी
हाथियों को देखने के लिए बैराज पर कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोग जुट गए। वन विभाग के लिए हाथियों को सुरक्षित निकालने के साथ भीड़ को नियंत्रित करना भी चुनौती बन गया। हाथी घबराकर यदि भीड़ की ओर बढ़ते तो बड़ा हादसा हो सकता था। वन कर्मियों ने लोगों को दूर रहने की हिदायत दी और हाथियों को सुरक्षित रास्ता देने का प्रयास किया।
वन विभाग की अपील—हाथी दिखे तो दूरी बनाए रखें
वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि पांचों हाथी पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह क्षेत्र हाथी कॉरिडोर से लगा होने के कारण यहां हाथियों का मूवमेंट अक्सर होता रहता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि जंगल अथवा गांव के आसपास हाथी दिखाई देने पर उसके करीब न जाएं, भीड़ न लगाएं और उसे घेरने या छेड़ने का प्रयास न करें। तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि हाथियों को सुरक्षित दिशा में भेजा जा सके।
वन विभाग और सिंचाई विभाग के बीच समय पर हुए समन्वय से मंगलवार को एक बड़ा हादसा टल गया। यदि बैराज के फाटक समय पर नीचे नहीं कराए जाते और पानी का तेज बहाव कम नहीं होता तो शावकों समेत पूरे कुनबे की जान खतरे में पड़ सकती थी। त्वरित कार्रवाई के बाद पांचों हाथियों का सुरक्षित जंगल लौटना वन विभाग और सिंचाई विभाग के लिए बड़ी राहत है।
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