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एआई शेयरों में गिरावट: विकास पर ब्रेक की मांग से दुनियाभर में शेयर धड़ाम, क्या अरबों का निवेश फंस सकता है?
Mon, 14 Sep 2026 09:35 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:35 PM IST
सार
एआई के तेजी से विकास से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर दुनिया की बड़ी एआई कंपनियों के प्रमुखों ने इसकी रफ्तार धीमी करने की मांग की। इसके बाद अमेरिका, यूरोप और एशिया में एआई से जुड़े शेयरों में भारी गिरावट आई। ओपनएआई ने इस साल आईपीओ नहीं लाने की बात कही है, जबकि ट्रंप ने एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ बीमार साजिश का आरोप लगाया है। क्या एआई की तेज दौड़ अब संकट में है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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एआई शेयरों में अमेरिका से एशिया तक भारी गिरावट
- फोटो : AI
विस्तार
एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेज दौड़ पर अब सुरक्षा का सवाल भारी पड़ता दिख रहा है। दुनिया की बड़ी एआई कंपनियों के प्रमुखों ने तकनीक के विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत बताई। इसके बाद सोमवार को एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया तक भारी गिरावट आई। एआई में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है और इसी निवेश ने हाल के वर्षों में दुनिया के शेयर बाजारों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे में विकास की रफ्तार धीमी करने की बात ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एआई पर नियंत्रण बढ़ाने की मांग का विरोध किया है और कहा है कि एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ एक साजिश चल रही है।
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एआई कंपनियों के प्रमुखों ने विकास धीमा करने की मांग क्यों की?
एआई उद्योग के भीतर ही अब इसकी तेज रफ्तार को लेकर चिंता सामने आ रही है। एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई ने शनिवार को एक विस्तृत लेख में एआई कंपनियों से मॉडल की क्षमता बढ़ाने की गति कम करने की अपील की। उन्होंने एआई के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरे को गंभीर बताया। एक्सएआई चलाने वाले एलन मस्क और ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने भी अमोडेई की चिंता से सहमति जताई। ऑल्टमैन ने एआई से इंसानों के अस्तित्व को होने वाले जोखिम को अस्वीकार्य बताया। अमोडेई ने चेतावनी दी कि अगले छह से 12 महीनों में एआई एजेंट इंटरनेट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करने में सक्षम हो सकते हैं और इससे सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
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एआई को लेकर सुरक्षा की चिंता अचानक इतनी बड़ी कैसे हुई?
एआई से होने वाले संभावित नुकसान की चिंता इस महीने और बढ़ गई। एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने इस्तीफा देते समय एआई के संभावित खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी। इसके कुछ दिन बाद एंथ्रोपिक ने एक खतरा संबंधी रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि उसके क्लॉड एआई मॉडल का इस्तेमाल हथियारों के विकास, साइबर गतिविधियों, निगरानी और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में किया गया। इसके अलावा हाल के महीनों में ऐसे साइबर हमले भी सामने आए हैं, जिनमें एआई एजेंटों के गलत इस्तेमाल की चिंता बढ़ी है। डेटा सेंटरों के निर्माण को लेकर आम लोगों के विरोध ने भी एआई उद्योग पर दबाव बढ़ाया है। इन घटनाओं के कारण अब सवाल केवल एआई कितना तेजी से आगे बढ़ सकता है, यह नहीं रह गया है, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि उसे सुरक्षित तरीके से कितना आगे बढ़ाया जाए।अमेरिका, यूरोप और एशिया के शेयर बाजारों में कितना असर पड़ा?
एआई कंपनियों की चेतावनियों के बाद सोमवार को शेयर बाजारों में तेज बिकवाली हुई। अमेरिका के प्रमुख तकनीकी सूचकांक नैस्डैक 100 में शुरुआती कारोबार में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। एआई की तेजी में बड़ी भूमिका निभाने वाली चिप कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखा। फिलाडेल्फिया चिप सूचकांक 5.1 प्रतिशत गिरा। एनवीडिया 3.6 प्रतिशत, एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज 5.6 प्रतिशत और माइक्रोन छह प्रतिशत नीचे आए। लैम रिसर्च और एप्लाइड मैटेरियल्स में भी छह-छह प्रतिशत की गिरावट आई। ब्लूम एनर्जी 6.8 प्रतिशत और जीई वर्नोवा 7.4 प्रतिशत गिर गए। यूरोप के तकनीकी क्षेत्र में 2.2 प्रतिशत की गिरावट आई। एएसएमएल 5.9 प्रतिशत नीचे आया। एशिया में सॉफ्टबैंक में एक समय 13.2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। टीएसएमसी और एसके हाइनिक्स भी दबाव में रहे।क्या एआई पर ट्रंप और तकनीकी कंपनियां आमने-सामने आ गई हैं?
एआई की सुरक्षा को लेकर तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों की चिंता और ट्रंप के रुख में साफ अंतर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के कई सांसद एआई के तेजी से बढ़ते विकास को लेकर चिंता जता चुके हैं और नए नियमों की मांग कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप ने एआई पर ज्यादा नियंत्रण की कोशिशों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ एक बीमार साजिश चल रही है और इससे केवल चीन खुश है। ट्रंप का संकेत है कि ज्यादा पाबंदियां अमेरिका की एआई दौड़ को कमजोर कर सकती हैं। उनका रुख यह है कि अमेरिका को एआई के विकास की रफ्तार कम करने के बजाय अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
ओपनएआई ने इस साल आईपीओ नहीं लाने का फैसला क्यों किया?
एआई सुरक्षा को लेकर चिंता का असर ओपनएआई की कारोबारी योजना पर भी दिखाई दे रहा है। कंपनी के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि ओपनएआई इस साल आईपीओ यानी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगी। इसके लिए सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया गया है। हालांकि, दूसरी तरफ एंथ्रोपिक अपने सार्वजनिक बाजार में उतरने की योजना को आगे बढ़ा रही है। उसके अगले महीने तक बाजार में आने की उम्मीद है। इसी बीच एनवीडिया के एंथ्रोपिक में प्रमुख निवेशक बनने को लेकर बातचीत की खबर है। यानी एआई उद्योग में सुरक्षा को लेकर बहस तेज होने के बावजूद बड़ी कंपनियों की कारोबारी और निवेश योजनाएं पूरी तरह रुकी नहीं हैं।एआई पर होने वाले भारी खर्च को लेकर बाजार क्यों चिंतित है?
एआई के विकास में कंपनियां बहुत बड़ी रकम लगा रही हैं। इस खर्च को पूरा करने के लिए कंपनियां कर्ज और आपस में जुड़े वित्तीय इंतजामों पर भी निर्भर हो रही हैं। दूसरी तरफ दुनिया में कर्ज लेने की लागत बढ़ी हुई है और बॉन्ड से मिलने वाली ब्याज दरें कई वर्षों के ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में अगर एआई कंपनियां विकास की रफ्तार धीमी करती हैं तो इसका असर केवल तकनीकी कंपनियों पर नहीं पड़ेगा। एआई पर खर्च से जुड़े कई दूसरे क्षेत्रों पर भी इसका प्रभाव हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अगर एआई पर होने वाला खर्च अचानक कम हुआ तो उन शेयरों और क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है, जिन्हें इस निवेश से लगातार फायदा मिल रहा है।क्या एआई की वजह से शेयर बाजारों में आई तेजी अब खतरे में है?
ओपनएआई की ओर से 2022 में चैटजीपीटी जारी किए जाने के बाद एआई से जुड़े कारोबार ने वैश्विक शेयर बाजारों को काफी सहारा दिया। एआई चिप, डेटा सेंटर, ऊर्जा और तकनीकी ढांचे से जुड़ी कंपनियों में निवेश तेजी से बढ़ा। इससे शेयरों में भी जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब एआई के गलत इस्तेमाल, साइबर हमलों और डेटा सेंटरों के निर्माण को लेकर विरोध ने इस कहानी का दूसरा पक्ष सामने रखा है। अगर कंपनियों को सुरक्षा कारणों से अपनी योजनाओं की गति कम करनी पड़ी तो बाजार में एआई से जुड़े निवेश की भविष्य की कमाई को लेकर सवाल उठ सकते हैं। यही वजह है कि सोमवार की बिकवाली को निवेशक केवल एक दिन की गिरावट के तौर पर नहीं देख रहे हैं।
चीन के सस्ते एआई मॉडल से बड़ी कंपनियों को क्या चुनौती है?
एआई उद्योग में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा भी लगातार बढ़ रही है। ओपनएआई और एंथ्रोपिक के सामने चीन के कम लागत वाले एआई मॉडल एक नई चुनौती बन रहे हैं। मूनशॉट एआई का किमी के-3, अलीबाबा का क्वेन और डीपसीक के मॉडल कम कीमत में एआई सेवाएं देने की प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं। इससे बड़े और महंगे एआई मॉडल तैयार करने वाली कंपनियों पर अपनी कीमत कम करने का दबाव आ सकता है। यानी कंपनियों को एक तरफ सुरक्षा के सवालों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कम लागत वाले चीनी मॉडल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं। ट्रंप भी एआई के मामले में चीन से अमेरिका की बढ़त बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।क्या अमेरिका और चीन एआई सुरक्षा पर बातचीत करेंगे?
अमेरिका और चीन की सरकारों के बीच इस महीने होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में एआई सुरक्षा का मुद्दा भी उठने की उम्मीद है। हालांकि, चीन की सरकारी समर्थन वाली ग्लोबल टाइम्स ने अमोडेई के लेख की आलोचना की है। अखबार ने इसे चीन की तकनीकी प्रगति को रोकने की कोशिश बताते हुए शीत युद्ध की रणनीति जैसा बताया। इससे पता चलता है कि एआई अब केवल कंपनियों के बीच कारोबार की लड़ाई नहीं है। यह दोनों बड़ी ताकतों के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा भी बन चुका है। ऐसे में एआई की सुरक्षा, विकास की रफ्तार और सरकारी नियमों पर अमेरिका और चीन की सोच का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।