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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   CM Yogi gifts cashless medical treatment facility to the state's lawyers; says public trust in the courts mus

UP : सीएम योगी ने प्रदेश के अधिवक्ताओं को दी कैशलेश इलाज की सौगात, बोले- अदालत पर आम आदमी का विश्वास हो कायम

Mon, 14 Sep 2026 05:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 14 Sep 2026 05:33 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। मजबूत बार और बेंच के समन्वय से ही न्याय का रथ आगे बढ़ेगा। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें निर्दोष को भय न हो, अपराधी बच न सके और हर नागरिक को बिना भेदभाव समय पर न्याय मिले।

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CM Yogi gifts cashless medical treatment facility to the state's lawyers; says public trust in the courts mus
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट भी दिए जाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को हाईकोर्ट क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित बार एसोसिएशन के सम्मान समारोह में की।

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समारोह में मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता कक्ष भवन की सांकेतिक चाबी एसोसिएशन को सौंपी। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बनी 2400 चैंबर्स वाली बिल्डिंग का उद्घाटन 31 मई 2025 को हो चुका है। यहां मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी का निर्माण कराया गया है। सीएम ने कहा कि चैंबर में बुनियादी सुविधाओं के लिए फर्नीचर और उपकरण उपलब्ध कराने के संबंध में न्यायपालिका की ओर से जो भी प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें पूरा सहयोग करेगी।

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सीएम योगी ने कहा कि अधिवक्ता कल्याण निधि में दी जाने वाली सहायता राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की जा चुकी है। अधिवक्ता की मृत्यु पर परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की आयु सीमा भी 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा काैशाम्बी, लखनऊ, कासगंज और श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जिलों में अधिवक्ता चैंबर के निर्माण के लिए सरकार ने धनराशि उपलब्ध कराई है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राज्य के प्रतिनिधि के रूप में काम करने वाले विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। इसी क्रम में आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा।

योगी ने कहा कि आज साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, बौद्धिक संपदा और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसे नए क्षेत्र सामने आए हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं को तकनीक, अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे बदलावों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रख सकती है।


स्वतंत्रता आंदोलन में प्रयागराज अमूल्य योगदान

देश के प्रबुद्ध समाज में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समाज की विचारधारा को दिशा देने और उसके विश्वास का प्रतीक बनने में अधिवक्ताओं का योगदान रहा है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से लेकर स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन की व्यवस्था के संचालन और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती प्रदान करने तक अधिवक्ता समाज की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रयागराज की धरती इसकी गवाह रही है। अनेक ऐसे अधिवक्ता रहे हैं, जिन्होंने इलाहाबाद में विधि व्यवसाय किया और स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। मोतीलाल नेहरू और महामना मदन मोहन मालवीय जैसे नाम देश के स्वतंत्रता आंदोलन को लंबे समय तक आगे बढ़ाने वालों में रहे। वे हर क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी के लिए खड़े होते दिखाई दिए।

400 राज्य विधि अधिकारियों को मिलेगा टैबलेट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक तकनीकी से जोड़ने के सरकार 400 विधि अधिकारियों को टैबलेट देगी। जिससे शासन के कौन से  मुकदमे कोर्ट में चल रहे हैं इसकी जानकारी उनको मिलती रहेगी।  

राजेंद्र प्रसाद की भारतीय संस्कृति में थी आस्था

प्रयागराज आने पर जब संगम में डुबकी लगाते हैं तो देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का स्मरण होता है। प्रत्येक कुंभ के दौरान उनका यहां प्रवास होता था। वे माघ मेले में कल्पवास भी करते थे। उनका कल्पवास केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना का विषय नहीं था, बल्कि उन्होंने राष्ट्र जीवन के लिए जो मर्यादा तय की थी और राष्ट्रसेवा का जो संकल्प लिया था, उन आदर्शों का यहां पालन किया।

कुंभ और माघ मेले के दौरान उनका लंबे समय तक रहना भारत की विरासत और जनआस्था के प्रति उनके गहरे सम्मान का उदाहरण था। राष्ट्रपति बनने के बाद जब उन्हें सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया तो उन्होंने स्वयं इसमें भाग लेकर स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली विरासत को सम्मान देने का कार्य किया। यह आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है।

हमारी सरकार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम पर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया है। विश्वविद्यालय का कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसका भव्य परिसर भी बहुत जल्द तैयार होगा। प्रयागराज की धरती ने भारत की संवैधानिक चेतना और विधिक विमर्श को दिशा दी है। यहां से अनेक न्यायविद, अधिवक्ता और जननेता निकले, जिन्होंने भारत की संवैधानिक और राजनीतिक दिशा में मील के पत्थर स्थापित किए।

बार और बेंच न्याय व्यवस्था के पहिये

लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के अनुसार कार्य करते हैं। इनके बीच समन्वय से ही लोकतंत्र मजबूत होता है। भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और विधि का शासन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बार और बेंच न्याय व्यवस्था के रथ के दो पहिए हैं। दोनों के बीच सदैव समन्वय दिखाई देना चाहिए। न्याय प्रशासन के लिए आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद और सहयोग बार-बेंच के बीच निरंतर बना रहना चाहिए।

2017 से पहले हमारे सामने चुनौती संसाधनों की ही नहीं, बल्कि व्यवस्था की थी। प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक आधारभूत ढांचे से जुड़ी अनेक चुनौतियां थीं।

पुलिस के प्रशिक्षण की व्यवस्था बदली

2017 से पहले उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। जब भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई तो प्रशिक्षण क्षमता भी सीमित थी। उत्तर प्रदेश पुलिस एक वर्ष में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को ही प्रशिक्षण दे पाती थी। बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। हमने प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाकर सात हजार की और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

हर जनपद में पुलिस के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। जो लोग 12-12 घंटे ड्यूटी करते हैं, उनके लिए बेहतर आवासीय और अन्य सुविधाएं होना जरूरी है। यदि हम रक्षक के रूप में पुलिस से बेहतर भूमिका की अपेक्षा करते हैं तो उन्हें आवश्यक सुविधाएं देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

इसी प्रकार न्यायपालिका के पास भी बेहतरीन आधारभूत सुविधाएं होनी चाहिए। अधीनस्थ न्यायालयों की दशा पहले खराब थी। कई न्यायालय किराए के भवनों में चल रहे थे। अधिवक्ताओं के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं थी।

उत्तर प्रदेश में पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पहले गंभीर अपराधों के मामलों में गवाहों के मुकर जाने से दोषियों को सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए जर्जर और असुरक्षित वाहनों का इस्तेमाल होता था और हमलों की शिकायतें भी आती थीं।

अभियोजन प्रणाली को किया गया है ऑनलाइन

कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय के साथ सुशासन को जनता की प्राथमिकता बनाया गया है। आधुनिकीकरण के दौर में प्रदेश पीछे न रहे, इसके लिए न्यायिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। जेलों और न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि मुकदमों की सुनवाई में लगने वाले समय को कम किया जा सके। न्यायालयों में साक्ष्य समय से प्रस्तुत किए जा सकें, इसके लिए भी तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है। न्यायिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण और उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को भी तेज किया गया है।

एकीकृत न्यायालय परिसर की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों से एकीकृत न्यायालय परिसर की अवधारणा को आगे बढ़ाया गया है, जिसमें एक ही परिसर के अंतर्गत सभी प्रकार के न्यायिक कार्यों की व्यवस्था होगी। इसमें आवासीय सुविधाओं के साथ खेल सुविधाएं, अधिवक्ताओं के चैंबर, इनडोर स्टेडियम और कैंटीन जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। प्रदेश में 900 न्यायालयों के गठन को मंजूरी दी गई है। लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक चैंबर, पुस्तकालय और सामुदायिक कक्ष आदि के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए दी जाने वाली राशि में भी वृद्धि की गई है। अधिवक्ताओं की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाई गई है और 70 वर्ष की आयु तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। कौशाम्बी, श्रावस्ती और कासगंज सहित विभिन्न जनपदों में अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, विधायक दीपक पटेल आदि मौजूद रहे।  

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