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Why should conferences on education be limited to large universities? Let the campaign for awareness reach the villages as well.
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VIDEO: शिक्षा पर सम्मेलन बड़े विश्वविद्यालयों में ही क्यों, गांवों तक पहुंचे जागरूकता की मुहिम
आगरा। डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की ओर से शुरू हुई सम्मेलन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा। शिक्षा पर मंथन सिर्फ बड़े विश्वविद्यालयों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऐसे कार्यक्रम वहां होने चाहिए, जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है और जहां से शिक्षा के प्रति लोगों की सोच बदली जा सके। लखनऊ विश्वविद्यालय और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में सम्मेलन होना था,लेकिन मैने आगरा डॉ भीमराव विश्वविद्यालय को चुना । अब कानपुर देहात जैसे क्षेत्र में भी शिक्षा को लेकर कार्यक्रम आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल रटने वाली शिक्षा देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। उन्हें ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वे चीजों को समझें और सीखें। जब वह शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी थीं, तब बच्चों को अंकों की पहचान कराना और उनकी बुनियादी समझ विकसित करना महत्वपूर्ण मानती थीं। शिक्षा का मकसद सिर्फ परीक्षा में अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों को सीखने के योग्य बनाना होना चाहिए।
20 हजार शिक्षकों की भर्ती, विरोध के बाद भी फैसले पर रहीं कायम
राज्यपाल ने गुजरात में अपने कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने कक्षाओं में शिक्षकों की कमी देखी तो एक साथ 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कराई। भर्ती में मेरिट को आधार बनाया गया। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में पारदर्शिता जरूरी है। किसी की सिफारिश या दबाव के बजाय योग्यता के आधार पर शिक्षक चुने जाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण पर ध्यान दिया गया, जबकि अन्य शिक्षकों को अनावश्यक रूप से स्थानांतरित नहीं करने का निर्णय लिया। इस फैसले का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया, लेकिन उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी नीति नहीं बदली।
राज्यपाल ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन जरूरी यह है कि काम जनहित में हो। उन्होंने अपने कार्यकाल में ट्यूशन व्यवस्था पर नियंत्रण और नकल रोकने के लिए नियम लागू कराने के प्रयासों का भी जिक्र किया।
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