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VIDEO: लाश संग 1993KM और 29 घंटे का सफर, जनरल कोच में रखे बैग की दहशतभरी कहानी
आगरा कैंट स्टेशन लाश के टुकड़ों से भरा एक बैग मिलने से सनसनी फैल गई। आरपीएफ और जीआरपी इस बैग की जांच में जुटी हैं। लाश के टुकड़ों से भरा बैग ट्रेन के जनरल कोच में रखा रहा। ट्रेन दौड़ती रही। इस दौरान 1993 किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया। करीब 29 घंटे और 8 स्टेशन गुजरने के दौरान भी किसी को भनक तक न लगी। जब बदबू और खून रिसना शुरू हुआ तो सुरक्षा जवानों ने बैग खोला। बैग के अंदर का दृश्य देख हर किसी के होश उड़ गए। चेन्नई से दिल्ली जा रही तमिलनाडु एक्सप्रेस ने 1993 किमी का सफर तय किया। 8 स्टेशन से होकर भी गुजरी। यात्रियों से खचाखच भरी जनरल बोगी की सीट के नीचे लावारिस ट्राली बैग पड़ा रहा। उससे खून रिसता रहा और दुर्गंध भी आती रही मगर ट्रेनों में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले आरपीएफ कर्मियों को भनक तक नहीं लग सकी। इस मामले की जांच भले ही शुरू कर दी गई है मगर सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं कि अगर कहीं बैग में कोई विस्फोटक होता तो क्या होता? ग्वालियर से पहले रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर मंगलवार रात को बुलंदशहर के जहांगीराबाद निवासी यात्री विशाल ने सूचना दी थी कि एक ट्राली बैग से खून रिस रहा है। दुर्गंध भी आ रही है। यह भी बताया कि चेन्नई से ट्रेन रवाना होने के पहले भी बैग सीट के नीचे रखा था। ग्वालियर में ट्रेन को चेक नहीं किया जा सका। बाद में बैग को बुधवार तड़के करीबन 3:05 बजे कैंट स्टेशन पर जीआरपी ने कब्जे में लिया था। बाद में करीब 5:30 बजे एक कर्मी ने बैग खोला तो पॉलिथीन में लिपटे मानव लाश के टुकड़े मिले। इनमें पैर का पंजा, कमर के ऊपर और पसलियों के हिस्से बरामद हुए। आशंका जताई गई कि किसी व्यक्ति की हत्या के बाद लाश के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए।अब सवाल उठ रहा है कि 1993 किलोमीटर का सफर कर आगरा कैंट स्टेशन पहुंची तमिलनाडु एक्सप्रेस चेन्नई के बाद विजयवाड़ा, खम्मम, वारंगल, बल्हारशाह, नागपुर, इटारसी, भोपाल, वीरांगना लक्ष्मीबाई, ग्वालियर स्टेशन होते हुए आगरा पहुंची। इसके बावजूद जनरल बोगी में रखा संदिग्ध ट्रॉली बैग किसी को नजर नहीं आया। उससे खून रिस रहा था। दुर्गंध भी आ रही थी। लंबी दूरी की ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ का सुरक्षा दस्ता भी रहता है। किसी की नजर इस बैग पर क्यों नहीं पड़ी? सवाल उठ रहा है कि तमिलनाडु एक्सप्रेस के अलग-अलग हिस्सों में ड्यूटी करने वाली जीआरपी और आरपीएफ के एस्काॅर्ट क्या कर रहे थे? स्टेशनों पर भी जांच के लिए टीम रहती हैं। उन्होंने इसे क्यों नहीं देखा। बैग रखने वाला उसकी निगरानी के लिए बोगी में भी हो सकता है। अगर समय रहते बैग को देखने के बाद यात्रियों से पूछताछ होती तो हत्याकांड खुल सकता था।
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