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नेहा की हिरासत पर इंडिया गठबंधन का हल्लाबोल: दिल्ली पुलिस पर क्यों भड़के विपक्षी नेता, क्या है पूरा मामला?
Sun, 04 Oct 2026 11:10 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 04 Oct 2026 11:10 PM IST
सार
दिल्ली में आइसा अध्यक्ष नेहा को हिरासत में लेकर बाद में रिहा किए जाने पर विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि नेहा को बिना नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ी में ले जाया गया और उनके साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। तीन महिला पत्रकारों ने भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच अपराध शाखा करेगी। पुलिस ने नेहा से जुड़े आरोपों को निराधार बताया है और प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों से मारपीट करने का आरोप लगाया है।
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हिरासत में ली गईं नेहा बोरा
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आइसा के सदस्यों का आरोप है कि नेहा को बिना आधिकारिक नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ी में ले जाया गया। उस समय उनके साथियों और समर्थकों को उनकी जानकारी नहीं मिल पा रही थी। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि गाड़ी में कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। बाद में नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया।
विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर क्या कहा?
नेहा को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने उनकी रिहाई पर राहत जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'चिंतित था... यह जानकर राहत मिली कि नेहा को पुलिस की गाड़ी में ले जाने के बाद अब नरेला थाने से रिहा कर दिया गया है। बैठकों से आगे बढ़कर इंडिया गठबंधन जमीन पर भी मजबूती से मौजूद है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा को हिरासत में लेने की कार्रवाई को अपहरण करार दिया था। रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि एक महिला कार्यकर्ता को बिना नंबर प्लेट वाली पुरुषों की गाड़ी में ले जाना और उसे मानसिक रूप से परेशान करने के बाद छोड़ना दिल्ली पुलिस के लिए बेहद निचले स्तर की कार्रवाई है।
मनोज झा और माकपा ने क्या आरोप लगाए?
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस भले ही किसी 'सम्राट' के आदेश पर काम कर रही हो, लेकिन उसे कम से कम एक बार यह सोचना चाहिए कि आम परिवारों के सदस्यों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों का असर लोगों के मन में लंबे समय तक रहेगा और इतिहास गवाह है कि कोई भी 'शाह' हमेशा शाह नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र करवट ले रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी आरोप लगाया कि संसद मार्ग के पास पुलिस ने छात्राओं और युवाओं को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया। पार्टी ने यह सवाल भी उठाया कि एक महिला पत्रकार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जबकि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था।
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यह भी पढ़ें: जस्टिस भुइयां की दो टूक: बोले- लाखों भारतीयों का वोट छीनना संविधान को नकारने जैसा; कांग्रेस ने सीईसी को घेरा
महिला पत्रकारों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि तीन अक्तूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनका यौन उत्पीड़न किया। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और शिकायतों की जांच को लेकर विवाद बढ़ गया है। हालांकि, पुलिस ने नेहा को हिरासत में लेने के संबंध में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र?
आइसा के कार्यकर्ता लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारी आंध्र भवन सर्किल से जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान बैरिकेड पार करने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच थोड़ी देर के लिए झड़प भी हुई। यह आंदोलन चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर चल रहा है।
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विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर क्या कहा?
नेहा को हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने उनकी रिहाई पर राहत जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'चिंतित था... यह जानकर राहत मिली कि नेहा को पुलिस की गाड़ी में ले जाने के बाद अब नरेला थाने से रिहा कर दिया गया है। बैठकों से आगे बढ़कर इंडिया गठबंधन जमीन पर भी मजबूती से मौजूद है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा को हिरासत में लेने की कार्रवाई को अपहरण करार दिया था। रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि एक महिला कार्यकर्ता को बिना नंबर प्लेट वाली पुरुषों की गाड़ी में ले जाना और उसे मानसिक रूप से परेशान करने के बाद छोड़ना दिल्ली पुलिस के लिए बेहद निचले स्तर की कार्रवाई है।
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मनोज झा और माकपा ने क्या आरोप लगाए?
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस भले ही किसी 'सम्राट' के आदेश पर काम कर रही हो, लेकिन उसे कम से कम एक बार यह सोचना चाहिए कि आम परिवारों के सदस्यों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों का असर लोगों के मन में लंबे समय तक रहेगा और इतिहास गवाह है कि कोई भी 'शाह' हमेशा शाह नहीं रहता। उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र करवट ले रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी आरोप लगाया कि संसद मार्ग के पास पुलिस ने छात्राओं और युवाओं को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया। पार्टी ने यह सवाल भी उठाया कि एक महिला पत्रकार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जबकि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था।
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महिला पत्रकारों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि तीन अक्तूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनका यौन उत्पीड़न किया। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, इन शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और शिकायतों की जांच को लेकर विवाद बढ़ गया है। हालांकि, पुलिस ने नेहा को हिरासत में लेने के संबंध में लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र?
आइसा के कार्यकर्ता लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारी आंध्र भवन सर्किल से जंतर-मंतर की ओर बढ़े, लेकिन भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान बैरिकेड पार करने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच थोड़ी देर के लिए झड़प भी हुई। यह आंदोलन चुनाव आयोग के कामकाज में कथित अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर चल रहा है।