{"_id":"6abb69c54eb9647178068ffb","slug":"video-shimla-geyty-theatre-simpex-2026-rare-stamp-postcard-exhibition-2026-09-29","type":"video","status":"publish","title_hn":"शिमला: गेयटी थियेटर में सजी डाक टिकटों की अनोखी दुनिया, ब्रिटिश दौर की यादें भी दिखीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिमला: गेयटी थियेटर में सजी डाक टिकटों की अनोखी दुनिया, ब्रिटिश दौर की यादें भी दिखीं
Ankesh Dogra
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:09 PM IST
Link Copied
मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जब संदेश कुछ सेकंड में दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच जाता है, ऐसे समय में पुराने डाक टिकट और पोस्टकार्ड लोगों को उस दौर की याद दिला रहे हैं, जब चिट्ठियां ही संवाद का सबसे खास जरिया हुआ करती थीं।
शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में इन दिनों डाक टिकटों की इसी पुरानी और रोचक दुनिया को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। यहां शिमला डाक मंडल की ओर से सिमपेक्स-2026 जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
दो दिवसीय प्रदर्शनी में अलग-अलग दौर के दुर्लभ डाक टिकट, पुराने पोस्टकार्ड और पोस्टमार्क प्रदर्शित किए गए हैं। इन संग्रहों के माध्यम से डाक व्यवस्था के विकास के साथ-साथ बीते समय की सामाजिक और ऐतिहासिक झलक भी देखने को मिलती है।
प्रदर्शनी में ब्रिटिश काल से जुड़ी फिलाटेलिक सामग्री विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पुराने टिकटों और डाक सामग्री के जरिए उस दौर की कई यादें यहां संजोई गई हैं।
आयोजकों के अनुसार प्रदर्शनी में प्रख्यात फिलाटेलिस्टों के पुरस्कार प्राप्त संग्रह भी लोगों के लिए प्रदर्शित किए गए हैं। दुर्लभ डाक टिकटों और ऐतिहासिक सामग्री को एक जगह देखना डाक टिकट संग्रह में रुचि रखने वालों के लिए खास अनुभव है।
इस आयोजन की एक खास बात यह है कि इसमें केवल शिमला जिले के निवासियों की प्रविष्टियों को शामिल किया गया है। यानी प्रदर्शनी में स्थानीय संग्रहकर्ताओं के दुर्लभ और दिलचस्प संग्रह देखने को मिल रहे हैं।
डाक टिकटों की इस दुनिया से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश भी प्रदर्शनी में नजर आ रही है। 16 स्कूलों के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया है। इससे बच्चों को फिलाटेली के साथ इतिहास और पुरानी संचार व्यवस्था को समझने का अवसर मिल रहा है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
डाक टिकटों का संग्रह महज शौक नहीं, बल्कि इतिहास को सहेजने का एक तरीका भी है। पुराने टिकटों, पोस्टकार्ड और पोस्टमार्क में किसी दौर की घटनाओं, व्यक्तित्वों, संस्कृति और डाक व्यवस्था की कहानी दर्ज होती है। यही वजह है कि गेयटी थियेटर में लगी यह प्रदर्शनी पुराने दौर और नई पीढ़ी के बीच एक दिलचस्प सेतु का काम कर रही है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।