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राजस्थान: मृत शिशु को रेफर कर मौत छुपाने का आरोप, पैसे से समझौते की बात भी सामने आई; नागौर में हंगामा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 09:51 PM IST
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राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के गृह जिले में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। बासनी चौराहे स्थित एसएन किड्स अस्पताल में इलाज के दौरान एक नवजात बालक की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने बच्चे की मौत हो जाने के बावजूद उसे जोधपुर के उम्मेद अस्पताल रेफर कर दिया। जब परिजन जोधपुर पहुंचे तो वहां के डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की मौत करीब पांच घंटे पहले ही हो चुकी थी। अब परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि अस्पताल संचालक डॉ. महेंद्र भांभू ने फोन पर बातचीत में पैसे देकर मामला शांत कराने की बात स्वीकार की है।
एक महीने से अस्पताल में भर्ती था बच्चा
घटना की पृष्ठभूमि यह है कि गांव राजुराम मेघवाल निवासी सोमणा का बच्चा पिछले एक महीने से अधिक समय से एसएन किड्स अस्पताल में भर्ती था। हाल के छह-सात दिनों से वह लगातार अस्पताल में भर्ती रहा। पिता धन्नाराम के अनुसार, कल रात बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद अस्पताल ने आज सुबह उन्हें जोधपुर रेफर कर दिया। उम्मेद अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों का सवाल था कि मृत बच्चे को यहां क्यों लाया गया। धन्नाराम ने आरोप लगाया, “हमारे बच्चे की मौत अस्पताल में ही हो गई थी। फिर भी हमें रेफर कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन सीसीटीवी फुटेज तक नहीं दिखा रहा। हमारे बच्चे को चुरा लिया गया है, हमें न्याय मिले।”
अस्पताल संचालक ने दी अपनी सफाई
रिपोर्टर से हुई बातचीत में अस्पताल संचालक डॉ. महेंद्र भांभू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बच्चे का जन्म सामान्य डिलीवरी से हुआ था और जन्म के समय वजन मात्र 900 ग्राम था। उन्होंने दावा किया कि बच्चे को वेंटिलेटर पर रेफर किया गया था और परिजनों को पल्स रेट आदि सब कुछ सही दिखाकर भेजा गया। डॉक्टर ने जोर देकर कहा, “हमने समय पर ही रेफर कर दिया था। ऐसा कुछ नहीं है कि देर की गई हो। मेरे रेफर करने के बाद जो हुआ, वह वहां का मामला है। मेरा कोई लेना-देना नहीं।”
सबसे चौंकाने वाला हिस्सा तब सामने आया जब डॉ. भांभू ने पैसे से समझौते की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, “परिजन यहां पहुंचे थे। हमने पैसे दे दिए और सब कुछ सेटल कर दिया है। अब मामला ही हमने शांत करवा लिया है।” सीसीटीवी फुटेज के बारे में उन्होंने बताया कि परिजन बाहर सोए हुए थे, वहां कुछ चोरी हो गई थी। दो पुलिस कांस्टेबल आए थे और कंप्यूटर ऑपरेटर ने उन्हें फुटेज दिखा दी थी। डॉक्टर ने रिपोर्टर से कहा, “अभी इसको होल्ड पर रखो। रात को हमने मामला शांत कर लिया है।”
अस्पताल के बाहर जुटी ग्रामीणों की भीड़
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। अस्पताल के बाहर परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के राज में गरीब परिवारों के बच्चों की अस्पताल में मौत हो जाती है और अस्पताल संचालक अपनी लापरवाही छिपाने के लिए गरीबों को पैसे देकर मामला रफा-दफा कर देते हैं? क्या सरकार ऐसे अस्पतालों पर कब कार्रवाई करेगी?
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
परिजनों ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। वे निष्पक्ष जांच, दोषी डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। अभी तक पुलिस या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जांच की पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी लिखित सफाई सामने नहीं आई है।
मौत के बाद रेफर करने पर उठे सवाल
यह मामला न केवल चिकित्सा लापरवाही बल्कि संभावित कवर-अप और समझौते की गंभीर आशंका पैदा करता है। गरीब परिवार के बच्चे की मौत के बाद मृत शरीर को रेफर करने और पैसे से मामला शांत कराने के आरोपों ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। अब देखना यह है कि मंत्री खींवसर के गृह जिले में यह प्रकरण कितनी गंभीरता से लिया जाता है और दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।
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