केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शनिवार को जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान कई राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’, विपक्ष के रवैये, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मालेगांव ब्लास्ट केस सहित कई ज्वलंत विषयों पर टिप्पणी की।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा में विपक्ष को बताया बैकफुट पर
मेघवाल ने कहा कि विपक्ष की मांग पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में चर्चा की गई, जिसे सरकार ने स्वीकार किया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में चर्चा हुई, लेकिन उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यसभा में उनका रवैया बेहद नकारात्मक रहा। उन्होंने कहा कि जब गृहमंत्री बोलने लगे तो विपक्ष ने कहा कि हम उनका भाषण नहीं सुनेंगे और जब प्रधानमंत्री आए तो सवाल उठाए कि वो सदन में क्यों आए।
मेघवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री पहले भी संसद में बोल चुके हैं और ऐसी परंपरा रही है। लेकिन इस बार विपक्ष खुद ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर बैकफुट पर आ गया है।
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चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्ति
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे संवैधानिक संस्थाओं को लेकर गैर-जिम्मेदार रवैया अपना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जैसी भाषा का असर यह होता है कि संविधानिक संस्थाओं को धमकाने की परंपरा बन जाती है। चुनाव आयोग ने आज स्पष्ट किया है कि वह संविधान के अनुरूप कार्य कर रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने मीडिया से प्रतिप्रश्न करते हुए कहा कि मैं आपसे ही पूछ रहा हूं, जो व्यक्ति संसार में नहीं है, क्या उसका नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए?
मालेगांव केस में कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
मालेगांव ब्लास्ट केस पर आए फैसले को लेकर भी मेघवाल ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2010 के बीच तत्कालीन यूपीए सरकार ने झूठा नैरेटिव गढ़ा, जिसे ‘हिंदू आतंकवाद’ और ‘सैफरन टेरर’ जैसे शब्दों से प्रचारित किया गया। उन्होंने कहा कि यह एक पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी थी, जिसे उस समय के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और पी. चिदंबरम ने खड़ा किया।
मेघवाल ने कहा कि न्यायालय ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यह पूरा मामला तथ्यों पर आधारित नहीं था और आरोप निराधार साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे कांग्रेस का नैरेटिव पूरी तरह से बेनकाब हो गया है।
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बिहार चुनाव को लेकर भी दी प्रतिक्रिया
बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और यह प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत होती रही है। उन्होंने दोहराया कि मैं फिर से पूछता हूं कि क्या वोटर लिस्ट में ऐसे व्यक्ति का नाम होना चाहिए, जो इस संसार में ही नहीं है?