नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क पर उतर आया है। बाहरी प्रत्याशी को टिकट दिए जाने के विरोध में मुस्लिम समाज के लोगों ने दरगाह से सटे अंदरकोट इलाके में प्रदर्शन कर कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूंका। वहीं, कांग्रेस से नाराज पूर्व अल्पसंख्यक मोर्चा पदाधिकारी तौसीफ पठान ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सिंबल पर नामांकन दाखिल कर पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बाहरी प्रत्याशी को टिकट देने का विरोध
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कांग्रेस ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े लोगों की अनदेखी कर बाहरी प्रत्याशी को टिकट दिया है। लोगों का कहना है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की जगह बाहरी व्यक्ति को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा। टिकट वितरण से नाराज कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व पदाधिकारी तौसीफ पठान ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
धर्मेंद्र सिंह राठौड़ का पुतला फूंका
टिकट वितरण को लेकर गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन के दौरान पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ का पुतला फूंका। इस दौरान कांग्रेस और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है और उनकी भावनाओं को नजरअंदाज किया गया।
तौसीफ पठान ने RLP से दाखिल किया नामांकन
कांग्रेस से नाराज चल रहे तौसीफ पठान ने टिकट विवाद के बीच राजनीतिक बगावत का रास्ता अपना लिया है। उन्होंने सोमवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सिंबल पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। तौसीफ पठान कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा में पदाधिकारी रह चुके हैं। उनके आरएलपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस के लिए चुनौती और बढ़ गई है।
अंदरकोट में विरोध से बढ़ी कांग्रेस की चिंता
नगर निगम चुनाव के बीच मुस्लिम बहुल अंदरकोट इलाके में कांग्रेस के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन को पार्टी के लिए अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। एक तरफ टिकट नहीं मिलने से कई कार्यकर्ता बगावती तेवर अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बाहरी प्रत्याशी के विरोध में समाज के लोगों के सड़क पर उतरने से चुनावी समीकरण भी प्रभावित होने की संभावना है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह दूर करता है और बागी तेवर अपनाने वाले कार्यकर्ताओं को वापस अपने साथ लाने में कितना सफल रहता है। आगामी दिनों में टिकट विवाद और बगावत का असर अजमेर नगर निगम चुनाव के समीकरणों पर साफ दिखाई दे सकता है।