बिजली व्यवस्था सुधारने के नाम पर नानपुर रोड पर किया गया काम अब सवालों के घेरे में है। यहां नया ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए दो विद्युत खंभे खड़े किए गए, लेकिन आरोप है कि मजबूत कंक्रीट और गिट्टी की नींव देने के बजाय खंभों को पत्थर और मिट्टी के सहारे खड़ा कर दिया गया। इसके बाद जल्दबाजी में भारी ट्रांसफॉर्मर भी स्थापित कर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद विद्युत वितरण कंपनी और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जब ट्रांसफॉर्मर का वजन इतना अधिक है, तो उसकी नींव कितनी मजबूत है? क्या खंभों को निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार स्थापित किया गया? क्या ट्रांसफॉर्मर शिफ्ट करने से पहले विभागीय अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया?
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‘पहले ट्रांसफॉर्मर, बाद में सुरक्षा’ का खेल?
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत कार्य में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। कमजोर नींव पर खड़े खंभे और उनके ऊपर स्थापित भारी ट्रांसफॉर्मर भविष्य में गंभीर खतरे का कारण बन सकते हैं। बारिश और तेज हवा के मौसम में स्थिति और चिंताजनक हो सकती है। जयस जिलाध्यक्ष अरविंद कनेश ने पूरे मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निर्माण कार्य की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कार्य निर्धारित मानकों के विपरीत हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और संबंधित ठेकेदार को काम की गुणवत्ता की मंजूरी कैसे मिली?
जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल
अब मांग उठ रही है कि विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर खंभों की नींव, कंक्रीट कार्य और ट्रांसफॉर्मर स्थापना की तकनीकी जांच कराएं। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की भी जांच हो। सवाल सिर्फ दो खंभों का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा का है। यदि विभागीय मानकों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी है। क्योंकि बिजली के खंभे कमजोर हुए तो इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है। मामले में विद्युत विभाग अलीराजपुर के कार्यपालन यंत्री पंकज डावर का कहना है कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। आपसे मुझे पता चला है। मेरे द्वारा जानकारी ली गई तो पता चला है कि इसका कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है, कार्य अभी बाकी है।