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भिवानी में खेत में सूखे 1423 किसानों के अरमान, किसानों की सूखे की चपेट में धान, ग्वार और मूंग
अगस्त के बाद बारिश नहीं होने की वजह से धान रोपाई करने वाले किसानों के खेतों में सिर्फ फसलों के नाम पर अवशेष दिखाई दे रहे हैं, जबकि पौध पूरी तरह से झुलस चुकी है। दरअसल भिवानी जिले में हजाड़ में किसानों ने धान रोपाई की थी, लेकिन 1423 किसानों के अरमान खेत में ही सूख गए हैं।
जिनकी 2225 एकड़ में धान की फसल बिन पानी तेज धूप की वजह से झुलस चुकी है। इतना ही नहीं लोहारू क्षेत्र के मरुस्थली इलाके में भी कम बारिश के चलते खरीफ सीजन की ग्वार और मूंग की फसल पर भी बुरा असर पड़ा है। अधिकांश किसानों की ग्वार और मूंग की फसल भी अब तेज धूप में झुलस रही है। कृषि विभाग फिलहाल किसानों की सूखा की वजह से खराब हो रही फसल को लेकर कोई आंकलन नहीं कर पाया है। जबकि कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के पास किसान अपनी फसल बचाने की जुगत में उपचार जानने पहुंच रहे हैं।
भिवानी जिले में 6,16,290 एकड़ भूमि में खरीफ फसलों की बिजाई की गई है। जिले के करीब 96,000 से अधिक किसान अपनी फसलों का भी पंजीकरण पोर्टल पर करा चुके हैं। आम तौर पर भिवानी जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार किसान धान, बाजरा, कपास, गन्ना और दलहन की फसलों की बिजाई करते हैं। किसान 80,000 हेक्टेयर में बाजरा की बिजाई कर चुके हैं। करीब 500 हेक्टेयर दायरे में किसान मक्का की फसल भी ले रहे हैं। वहीं सबसे अधिक एक लाख हेक्टेयर भूमि में कपास है। करीब 74,000 हेक्टेयर में किसानों ने बाजरा की फसल ले रहे हैं। करीब पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलें हैं। करीब 60 हजार एकड़ में किसानों की धान रोपाई है।
इन गांवों में धान की फसल चौपट
गांव तोशाम क्षेत्र के गांव बापोड़ा, दांग, बलियाली, सूई, धनाना, मुंढाल, गुजरानी, घुसकानी, प्रेमनगर, चांग, सांगवान, सिवासा, बीरण सहित कई गांव शामिल हैं। जबकि लोहारू और बहल, जूई, ढिगावा क्षेत्र के करीब 55 से अधिक गांवों में किसानों की ग्वार और मूंग की फसल भी सूखा की चपेट में आ चुकी है। किसान शमशेर सिंह, महाबीर का कहना है कि धान रोपाई के लिए दस से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च किया था, मगर अब बिना बारिश और पानी के धान सूख चुकी है।
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