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लखनऊ में शिया पीजी व अन्य कॉलेजों में अब भी प्रवेश का मौका
राजधानी लखनऊ के विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया पर विराम लग चुका है लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध शहर के कॉलेजों में अब भी एडमिशन का मौका है। ज्यादातर कॉलेजों में सीटें खाली हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति परास्नातक पाठ्यक्रमों की है जहां पर सीटें नहीं भर पा रही हैं। कॉलेजों में प्रवेश के लिए लखनऊ यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन नंबर (एलयूआरएन) अभी 15 सितंबर तक खोले रखने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान कॉलेजों में खाली सीटों पर प्रवेश का रास्ता खुला रहेगा।
शिया पीजी कॉलेज में परास्नातक पाठ्यक्रमों की बात करें तो एमए समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, उर्दू, इतिहास, अंग्रेजी और एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार में अभी सीटें खाली हैं, जिनके लिए विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा कॉलेज में कई पाठ्यक्रमों में 33 फीसदी सीटें बढ़ाई गई थीं, जिनमें से बीसीए, बीए, बीएससी गणित और बीएससी जीव विज्ञान में भी सीटें खाली हैं।
कॉलेज के प्रवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल प्रवेश के लिए अंतिम तिथि 10 सितंबर रखी गई है। वहीं खुनखुन जी डिग्री कॉलेज में बीए की करीब 100 सीटें अभी खाली हैं। बीकॉम में पांच और एमए हिंदी, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान और एमए शिक्षाशास्त्र में भी सीटें खाली हैं।
कॉलेज की प्राचार्य और लखनऊ विवि संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) की महामंत्री प्रो. अंशु केडिया ने बताया कि जिन विद्यार्थियों को प्रवेश लेना है, वे 15 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि लविवि से संबद्ध महिला कॉलेजों में प्रवेश की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां पिछले कई सालों से लगभग सभी कॉलेजों में सीटें रिक्त रह जाती हैं। इसके अलावा डीएवी डिग्री कॉलेज, लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज, विद्यांत हिंदू कॉलेज, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, एपी सेन मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज, करामत हुसैन कॉलेज, नारी शिक्षा निकेतन, महिला डिग्री कॉलेज समेत अन्य कॉलेजों में प्रवेश के लिए भी एलयूआरएन को 15 सितंबर तक खोला गया है।
डॉ. शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विवि और ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में भी नए प्रवेश बंद हो चुके हैं। लविवि में पीजी के जिन 43 पाठ्यक्रमों में सीटें खाली रह गई थीं, उनमें फीस जमा करने की अंतिम प्रक्रिया चल रही है। पुनर्वास विवि में स्नातक में आर्ट्स की सभी सीटें भर चुकी थीं जबकि एमएससी में 50 फीसदी सीटें खाली रह गईं। एमए अंग्रेजी में भी करीब छह सीटें खाली हैं। वहीं खेल कोटे के तहत 100 से अधिक खाली सीटों पर विवि की ओर से आवेदन मांगे गए थे।
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