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Lucknow News: 25 साल बाद वैध होंगी इमारतें
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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बुलडोजर चलने के डर से शहर में करीब 25 साल पहले बनीं अवैध इमारतों को वैध कराने वालों की संख्या बढ़ रही है। सिर्फ अलीगंज में ही एक महीने में चिह्नित की गईं 51 अवैध इमारतों में से 30 के मालिकों ने शमन मानचित्र का आवेदन एलडीए में कर दिया है।
एलडीए की अलीगंज योजना करीब चार दशक पुरानी है। यहां मुख्य सड़क पर बने मकानों में से अधिकतर में दो दशक से अवैध तरीके से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कपूरथला चौराहा, सेक्टर बी, ई, एच, के आई व जे आदि क्षेत्रों की मुख्य सड़कों पर मौजूद 90 फीसदी से अधिक आवासीय भूखंडों पर कॉम्प्लेक्स, रेस्टोरेंट, होटल और अस्पताल बन चुके हैं।
अलीगंज सेक्टर डी में 22 जून को अवैध इमारत में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की जान गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने घटना पर सख्त रुख अपनाया था। इसके बाद एलडीए ने रिपोर्ट पेश की थी कि इलाके में आवासीय भू-उपयोग में मानकों के विपरीत बने 51 व्यावसायिक निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन पर कार्रवाई होगी।
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नई भवन निर्माण उपविधि दे सकती है राहत
बीते साल जुलाई में नई भवन निर्माण उपविधि को लागू किया गया। इसे पहले से सरल बनाया गया है, जिससे आवासीय सहित अन्य गतिविधियों के लिए कम जमीन पर ज्यादा से ज्यादा निर्माण हो सके। इसमें 24 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़क पर मौजूद आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई है। भवन की ऊंचाई पर से भी प्रतिबंध हटा दिया। इसी तरह 12 मीटर तक चौड़ी सड़क पर मौजूद आवासीय प्लॉट पर सिर्फ व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति की छूट दी गई, लेकिन इसके लिए शमन मानचित्र पास कराना अनिवार्य होगा। इससे व्यावसायिक भू-उपयोग करने के लिए सेटबैक और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकेंगी और इमारत का जितना हिस्सा अवैध है उसे तोड़ा जा सकेगा। अलीगंज में चिह्नित 51 अवैध इमारतों में से ज्यादातर 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर हैं। ऐसे में जिन लोगों ने यहां आवासीय में व्यावसायिक निर्माण किया है उन्हें नई भवन निर्माण उपविधि का लाभ मिल सकता है।
एक करोड़ रुपये के करीब आएगा खर्च
एलडीए के इंजीनियर ने बताया कि 2500 से 3000 वर्गफीट तक के भूखंडों पर अवैध इमारतें बनी हैं।
एक मंजिल तक निर्माण का शमन मानचित्र पास कराने का खर्च करीब एक करोड़ रुपये आएगा। लोग यह खर्च बचाने के लिए इंजीनियरों से मिलकर अवैध निर्माण कराते हैं। यदि शमन मानचित्र पास करा लेंगे तो हमेशा का झंझट खत्म हो जाएगा।
अभी जारी रहेगी कार्रवाई
एलडीए ने अलीगंज में अभी तक 51 में से 17 अवैध इमारतें ही सील की हैं। बची इमारतों पर भी कार्रवाई होगी। शनिवार को सर्वे के लिए आई सुप्रीम कोर्ट की टीम ने सभी इमारतों के सील न होने पर सवाल उठाया था। इस पर एलडीए ने सफाई दी कि कुछ मामले विहित न्यायालय में हैं और कई में शमन की कार्यवाही चल रही है। एलडीए अब उन इमारतों को सील करेगा जिनमें अभी प्रक्रिया लंबित है या शुरू नहीं हुई है।
कोट
नई भवन निर्माण उपविधि के तहत जो निर्माण वैध किए जा सकते हैं उनके लिए आवेदन आएंगे तो विचार होगा। वैसे शमन के आवेदनों की संख्या बढ़ी है। अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए
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एलडीए की अलीगंज योजना करीब चार दशक पुरानी है। यहां मुख्य सड़क पर बने मकानों में से अधिकतर में दो दशक से अवैध तरीके से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कपूरथला चौराहा, सेक्टर बी, ई, एच, के आई व जे आदि क्षेत्रों की मुख्य सड़कों पर मौजूद 90 फीसदी से अधिक आवासीय भूखंडों पर कॉम्प्लेक्स, रेस्टोरेंट, होटल और अस्पताल बन चुके हैं।
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अलीगंज सेक्टर डी में 22 जून को अवैध इमारत में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की जान गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने घटना पर सख्त रुख अपनाया था। इसके बाद एलडीए ने रिपोर्ट पेश की थी कि इलाके में आवासीय भू-उपयोग में मानकों के विपरीत बने 51 व्यावसायिक निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन पर कार्रवाई होगी।
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नई भवन निर्माण उपविधि दे सकती है राहत
बीते साल जुलाई में नई भवन निर्माण उपविधि को लागू किया गया। इसे पहले से सरल बनाया गया है, जिससे आवासीय सहित अन्य गतिविधियों के लिए कम जमीन पर ज्यादा से ज्यादा निर्माण हो सके। इसमें 24 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़क पर मौजूद आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई है। भवन की ऊंचाई पर से भी प्रतिबंध हटा दिया। इसी तरह 12 मीटर तक चौड़ी सड़क पर मौजूद आवासीय प्लॉट पर सिर्फ व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति की छूट दी गई, लेकिन इसके लिए शमन मानचित्र पास कराना अनिवार्य होगा। इससे व्यावसायिक भू-उपयोग करने के लिए सेटबैक और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा सकेंगी और इमारत का जितना हिस्सा अवैध है उसे तोड़ा जा सकेगा। अलीगंज में चिह्नित 51 अवैध इमारतों में से ज्यादातर 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर हैं। ऐसे में जिन लोगों ने यहां आवासीय में व्यावसायिक निर्माण किया है उन्हें नई भवन निर्माण उपविधि का लाभ मिल सकता है।
एक करोड़ रुपये के करीब आएगा खर्च
एलडीए के इंजीनियर ने बताया कि 2500 से 3000 वर्गफीट तक के भूखंडों पर अवैध इमारतें बनी हैं।
एक मंजिल तक निर्माण का शमन मानचित्र पास कराने का खर्च करीब एक करोड़ रुपये आएगा। लोग यह खर्च बचाने के लिए इंजीनियरों से मिलकर अवैध निर्माण कराते हैं। यदि शमन मानचित्र पास करा लेंगे तो हमेशा का झंझट खत्म हो जाएगा।
अभी जारी रहेगी कार्रवाई
एलडीए ने अलीगंज में अभी तक 51 में से 17 अवैध इमारतें ही सील की हैं। बची इमारतों पर भी कार्रवाई होगी। शनिवार को सर्वे के लिए आई सुप्रीम कोर्ट की टीम ने सभी इमारतों के सील न होने पर सवाल उठाया था। इस पर एलडीए ने सफाई दी कि कुछ मामले विहित न्यायालय में हैं और कई में शमन की कार्यवाही चल रही है। एलडीए अब उन इमारतों को सील करेगा जिनमें अभी प्रक्रिया लंबित है या शुरू नहीं हुई है।
कोट
नई भवन निर्माण उपविधि के तहत जो निर्माण वैध किए जा सकते हैं उनके लिए आवेदन आएंगे तो विचार होगा। वैसे शमन के आवेदनों की संख्या बढ़ी है। अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
- प्रथमेश कुमार, वीसी एलडीए