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Lucknow News: पुनर्वास विवि में 71 मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्स को मंजूरी

Tue, 08 Sep 2026 03:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2026 03:00 AM IST
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Approval granted for 71 multidisciplinary courses at the Rehabilitation University.
पुनर्वास विवि
अभिषेक सहज
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लखनऊ। विज्ञान के छात्र भी अब ज्योतिष की पढ़ाई कर सकेंगे तो वहीं कला वर्ग के छात्र विज्ञान, कॉमर्स या कंप्यूटर से जुड़े तकनीकी विषय ले सकेंगे। यह सुविधा इसी वर्ष से मिलने जा रही है शकुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय में। विवि ने 71 मल्टीडिसिप्लिनरी (बहुविषयक) कोर्स लॉन्च किए हैं जिनमें से 56 का संचालन इसी वर्ष सत्र 2026-27 से शुरू हो रहा है। इसके तहत छात्र अपने मुख्य विषय के अलावा किसी अन्य संकाय या भिन्न क्षेत्र के विषयों का भी अध्ययन कर सकेंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत बहुविषयक शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे स्नातक तैयार करना है जो विभिन्न विषयों की समझ रखते हों और जटिल समस्याओं का समाधान बहुआयामी दृष्टिकोण से कर सकें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पुनर्वास विवि ने विभिन्न संकायों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है।
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अब तक ज्यादातर छात्र केवल अपने विषय तक ही सीमित रहते थे, लेकिन नई व्यवस्था में वे कला, विज्ञान, प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, सामाजिक विज्ञान, योग, पर्यावरण, उद्यमिता, संचार कौशल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विविध क्षेत्रों के पाठ्यक्रम भी चुन सकेंगे। विवि में स्नातक स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में 3 क्रेडिट का एक मल्टीडिसिप्लिनरी विषय चुनना अनिवार्य किया गया है।
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विवि के नियमानुसार, छात्र अपनी स्ट्रीम या संकाय से बाहर का कोई भी विषय चुन सकते हैं लेकिन वह विषय मुख्य (मेजर) या गौण (माइनर) विषय में शामिल नहीं होना चाहिए। एनईपी के नियमों के अनुसार, अगर बीए में आपका मुख्य विषय हिंदी है तो इसके साथ में कंप्यूटर एप्लीकेशन, साइबर सुरक्षा, पर्यावरण विज्ञान जैसे व्यावहारिक तकनीकी कोर्स लेकर कॅरिअर को बेहतर बना सकते हैं। विवि के प्रवक्ता यशवंत वीरोदय का कहना है कि शेष 15 पाठ्यक्रम भी आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाएंगे।


रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
कुलपति आचार्य संजय सिंह के अनुसार बहुविषयक पाठ्यक्रम छात्रों को अपनी रुचि के अनुरूप विषय चुनने की स्वतंत्रता देंगे। इससे न केवल अकादमिक लचीलापन बढ़ेगा, बल्कि उच्च शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को अपने मुख्य विषय के साथ अन्य क्षेत्रों का ज्ञान देकर उन्हें अधिक सक्षम बनाना है। इससे विद्यार्थियों में बहुआयामी सोच विकसित होगी और बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल भी बढ़ेगा।
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