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सोलन: कालका-शिमला रेललाइन पर फिर कुदरत का कहर, ब्रिज नंबर 57 के पास बहा मरम्मत कार्य
Ankesh Dogra
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:45 PM IST
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विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलमार्ग की बहाली पर एक बार फिर मौसम की मार पड़ी है। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने रेलवे की ओर से किए जा रहे मरम्मत कार्य को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। टकसाल से गुम्मन रेलवे स्टेशन के बीच ब्रिज नंबर 57 के पास दुरुस्त किया गया बड़ा हिस्सा तेज पानी के बहाव में बह गया। इसके चलते ट्रैक के किनारे फिर से गहरी खाई बन गई है। इस नुकसान से रेलवे को लाखों रुपये की चपत लगी है और अब बहाली का काम और लंबा खिंचने की आशंका है।
भारी बारिश से पहले क्षतिग्रस्त हुए हिस्से की मरम्मत के लिए रेलवे ने दो सितंबर को अधिसूचना जारी कर धर्मपुर से शिमला के बीच रेल सेवा शुरू की थी। प्रभावित स्थान पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए सेक्टर-6 से जेसीबी की मदद से अस्थायी रास्ता तैयार किया गया था।
रेलवे की ओर से पानी के रुख को मोड़ने के बाद जेसीबी, ट्रकों और दर्जनों मजदूरों की मदद से क्रेट वॉल यानी सुरक्षा दीवार बनाने का काम किया जा रहा था। मरम्मत कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन नाले में अचानक आए उफान ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज बहाव में क्रेट वॉल के साथ मिट्टी और बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री भी बह गई।
ताजा नुकसान के बाद रेलवे के सामने प्रभावित हिस्से की मरम्मत दोबारा शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिस हिस्से को हाल ही में तैयार किया गया था, उसके फिर बहने से काम काफी पीछे चला गया है। अब ट्रैक किनारे बनी गहरी खाई को भरने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बाद ही रेल यातायात बहाल किया जा सकेगा।
रेलवे ने कालका से ट्रेनों का परिचालन 11 और 13 सितंबर तक रद्द करने की घोषणा की है। हालांकि, ताजा नुकसान को देखते हुए आशंका है कि ट्रैक की बहाली में पहले लगाए गए अनुमान से अधिक समय लग सकता है।
कालका-शिमला रेल सेवा ठप होने से स्थानीय लोगों के साथ शिमला आने वाले पर्यटकों की परेशानी भी बढ़ गई है। पर्यटन सीजन में रेल सेवा यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन है। ट्रेनें रद्द होने के कारण यात्रियों को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है।
लगातार बारिश के बीच रेलवे के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती ट्रैक के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित तरीके से दोबारा तैयार करना और भविष्य में तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव से इसे बचाने की है।
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