बाढ़ गई, डर रह गया: नेपाल बाढ़ में 1355 मौतों के बाद बच्चों के सामने कौन सा संकट, बचाव अभियान की स्थिति क्या?
नेपाल में भीषण बाढ़ का पानी भले ही उतर गया है, लेकिन तबाही का डर अब भी हजारों लोगों के मन में जिंदा है। सात सितंबर की सुबह तक 1355 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। करीब 4996 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव का काम जारी है। अब सबसे बड़ी चिंता उन बच्चों की है जो अपने परिवार, घर और सुरक्षा खोने के बाद रात में डरकर उठ रहे हैं। बाढ़ से बच जाने के बाद इन बच्चों को उस डर से कैसे बचाया जाएगा? नेपाल में बचाव अभियान कैसा चल रहा? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...
विस्तार
नेपाल में बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन मरने वालो का और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। नेपाल सरकार के अनुसार अब 1355 शव बरामद किए गए हैं। करीब 4996 लोग अभी भी लापता हैं। इसमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अब तक 13396 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और 6672 घायलों का इलाज हुआ है। हालांकि इन सबके एक बहुत बड़ी समस्या लोगों के सामने है। वो है उनके अंदर बैठा खौफ। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ा रहा है। इस पर काठमांडो पोस्ट ने एक रिपोर्ट भी बनाई। आइए, विस्तार से जानते हैं।
क्या पानी उतरने के बाद बच्चों के लिए नया संकट शुरू हो गया?
- बाढ़ से बचने वाले बच्चों में अब डर, बेचैनी और नींद की परेशानी सामने आ रही है। काठमांडो पोस्ट ने बताया नुवाकोट की 16 साल की समीक्षा डंगोल इसका उदाहरण हैं। 26 अगस्त को स्कूल से घर लौटते समय उन्हें पता चला कि उनके बड़े भाई, बहन और दो बुआ बाढ़ में लापता हैं।
- इसके बाद वह अस्थायी शिविर में रहीं और फिर ननिहाल चली गईं। पानी उतर गया, लेकिन उस दिन की यादें उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं। उन्हें नींद नहीं आती और भाई-बहन के साथ बिताया समय बार-बार याद आता है। सिरदर्द की समस्या बढ़ने के बाद उन्हें अस्पताल भी ले जाना पड़ा।

कितने बच्चों पर बाढ़ का असर पड़ा और कितने छात्र अब भी नहीं मिले?
- नेपाल में बच्चों पर इस आपदा का असर बहुत बड़ा है। करीब 17 हजार बच्चों के प्रभावित होने का अनुमान है। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के 19 स्कूलों के 6,901 छात्र प्रभावित हुए हैं। रसुवा और नुवाकोट में 622 छात्र अब भी लापता बताए गए हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिन्हें कई घंटे या कई दिन बाद बचाया गया।
- 28 अगस्त को तिमुरे से छह साल की एक बच्ची को बचाया गया। सशस्त्र पुलिस बल की टीम ने उसके रोने की आवाज सुनी और उसे घायल हालत में बाहर निकाला। काठमांडू के अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। परिवार के मुताबिक वह शुरुआती दिनों में बहुत कम बोल रही थी और डॉक्टरों ने याददाश्त पर असर तथा निमोनिया की बात कही।
क्या बच्चों में बाढ़ के बाद डर और मानसिक तनाव बढ़ रहा है?
विशेषज्ञों के मुताबिक आपदा के बाद बच्चों में नींद न आना, दिल तेजी से धड़कना, पसीना आना, तेजी से सांस चलना और अचानक डर जाना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर यह स्थिति कई हफ्तों तक बनी रहे तो चिंता या अवसाद जैसी परेशानी बढ़ सकती है। जिन बच्चों ने सीधे तबाही देखी या अपने परिजनों को खोया है, उनमें लंबे समय तक मानसिक आघात की स्थिति भी बन सकती है। रसुवा में एक 21 महीने का बच्चा तेज आवाज और हेलीकॉप्टर की आवाज से डरने लगा है। बाढ़ के समय उसकी मां उसे लेकर भागी थी और तब से सामान्य आवाजें भी उसे डरा देती हैं।
राहत शिविरों में बच्चों को सामान्य जिंदगी में लौटाने के लिए क्या किया जा रहा है?
राहत शिविरों में बच्चों को खेल, कहानी और चित्र बनाने जैसी गतिविधियों में लगाया जा रहा है। नुवाकोट के एक होल्डिंग सेंटर में शुरुआत में कई बच्चे अकेले बैठे रहते थे और किसी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेते थे। धीरे-धीरे स्वयंसेवकों ने उनके साथ समय बिताया, खेल खिलाए और कहानियां सुनाईं तो बच्चे खुलने लगे। सरकार और सहायता संगठन मानसिक और सामाजिक मदद भी दे रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रभावित इलाकों में 150 स्वास्थ्यकर्मियों को तैनात किया है। परिवार से अलग हुए बच्चों के लिए आवासीय व्यवस्था की तैयारी भी की जा रही है।

राहत और बचाव अभियान की स्थिति अभी क्या है?
- राहत कार्य में कुल 21,402 सुरक्षाकर्मी जुटे हैं। इनमें नेपाल पुलिस के 7,912, नेपाली सेना के 9,287 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं। 39 होल्डिंग सेंटरों में 3,533 लोग रह रहे हैं। इनमें रसुवा में 669, नुवाकोट में 2,651 और धादिंग में 213 लोग हैं।
- नेपाली सेना ने अब तक 1,157 हेलीकॉप्टर उड़ानें भरी हैं, जिनमें सात सितंबर को 39 उड़ानें शामिल हैं। सशस्त्र पुलिस बल ने 193 और काठमांडू से निजी क्षेत्र ने 129 उड़ानें संचालित की हैं। रसुवा में 78 प्रतिशत, नुवाकोट में 96.7 प्रतिशत और धादिंग में 99.8 प्रतिशत घरों में बिजली बहाल हो चुकी है।
क्या प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और जरूरी ईंधन पहुंच रहा है?
नेपाल सरकार ने रसुवा और नुवाकोट को 10-10 मिलियन नेपाली रुपये तथा धादिंग को 5 मिलियन नेपाली रुपये की नकद सहायता दी है। 15 प्रभावित स्थानीय सरकारों को 135 मिलियन नेपाली रुपये दिए गए हैं। 6 सितंबर को हेलीकॉप्टर से रसुवा में खाद्य सामग्री पहुंचाई गई। चार ट्रकों से जनरेटर, स्वच्छता किट और छात्रों के लिए जरूरी सामग्री भेजी गई।
प्रभावित इलाकों में 58 हजार लीटर डीजल, 25 हजार लीटर पेट्रोल, 13 हजार लीटर विमानन ईंधन और 457 एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध हैं। संचार व्यवस्था भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। एनटीसी के 120 में से 117 और एनसेल के 78 में से 76 मोबाइल टावर बहाल किए जा चुके हैं।

अब नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
- बाढ़ के बाद सड़क, पुल, बिजली और घरों को दोबारा खड़ा करना जरूरी है, लेकिन बच्चों के मन में बैठे डर को खत्म करना भी उतना ही जरूरी है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों को बार-बार आपदा की घटना बताने के लिए मजबूर करने के बजाय उन्हें सुरक्षित महसूस कराना चाहिए। जहां माता-पिता मौजूद हैं, वहां परिवार उनकी मदद कर सकता है।
- जिन बच्चों ने माता-पिता या अभिभावक खो दिए हैं, वहां रिश्तेदारों, समुदाय और सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बच्चों को सुनना, उनके साथ रहना, उन्हें खेलने देना और हालात सामान्य होते ही स्कूल से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
- नेपाल में बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन समीक्षा जैसे बच्चों के लिए 26 अगस्त अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके लिए असली राहत तभी होगी, जब तबाही की यादों के साथ जीने का डर भी धीरे-धीरे कम हो।
क्या बाढ़ के बाद बच्चों के शोषण का खतरा भी बढ़ गया है?
परिवार या अभिभावक खो चुके बच्चों के सामने मानसिक परेशानी के साथ एक और बड़ा खतरा है। ऐसे बच्चे मानव तस्करी, बाल मजदूरी, हिंसा और शोषण का शिकार हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर बाढ़ प्रभावित बच्चों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। ऐसे में मदद के नाम पर बच्चों को अपने साथ ले जाने के दावों की भी सावधानी से जांच जरूरी है। बच्चों की तस्वीर, वीडियो या निजी जानकारी सार्वजनिक करने से उनकी निजता और मानसिक स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है। बाल अधिकार अधिकारियों ने बच्चों की पहचान उजागर न करने और उनकी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखने की जरूरत बताई है।