Hindi News
›
Video
›
Haryana
›
Panipat News
›
Nursing staff stage two-hour strike against online transfer policy; medical services disrupted from hospitals to CHCs and PHCs.
{"_id":"6ac38923c82e49b9f607eb76","slug":"video-nursing-staff-stage-two-hour-strike-against-online-transfer-policy-medical-services-disrupted-from-hospitals-to-chcs-and-phcs-2026-10-05","type":"video","status":"publish","title_hn":"ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग स्टाफ की दो घंटे हड़ताल, अस्पतालों से सीएचसी-पीएचसी तक इलाज प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग स्टाफ की दो घंटे हड़ताल, अस्पतालों से सीएचसी-पीएचसी तक इलाज प्रभावित
पानीपत। जिले में पहले ही चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसर की कमी है, वहीं सोमवार को नर्सिंग ऑफिसर ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में दो घंटे की हड़ताल पर रही। इससे जिला अस्पताल के साथ सीएचसी और पीएचसी पर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। मरीजों को दोपहर 12 बजे के बाद सही इलाज व दवा मिली। यूनियन ने बुधवार तक हर रोज सुबह 10 से 12 बजे तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है।
नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले सोमवार को आपातकालीन के बाहर हड़ताल पर बैठी। एसोसिएशन की प्रधान सुमन पोड़िया ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन कैथल के आह्वान पर तीन दिवसीय हड़ताल रखी। इस दौरान सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर रहेंगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग कैडर ट्रांसफर पॉलिसी को लागू कर दिया है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। इस ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग कैडर हरियाणा के सभी जिलों में तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं।
सीएचसी और पीएचसी में बढ़ी मुश्किल
सीएचसी-पीएचसी पर पहले ही स्टाफ कम है और सोमवार को नर्सिंग स्टाफ के हड़ताल पर होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रत्येक सीएचसी-पीएचसी पर दो घंटे इलाज प्रभावित हुआ। वहीं जिला नागरिक अस्पताल में गायनी कक्ष में मरीजों की भीड़ ओपीडी समय के बाद भी लगी रही। सबसे ज्यादा परेशानी प्रसव विभाग में जच्चा-बच्चा को हुई। यहां जच्चा को जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। प्रसव विभाग में भर्ती एक गर्भवती ने बताया कि स्टाफ कम होने के कारण उसे बीपी, शुगर और बच्चे की धड़कन जांच के लिए करीब दस मिनट तक इंतजार करना पड़ा। वहीं उपचाराधीन मरीजों को चिकित्सकों ने ही दो घंटे तक इंजेक्शन, ग्लूकोज के साथ दवा दी। सीएमओ डॉ. विजय मलिक ने बताया कि नर्सिंग ऑफिसर की दो घंटे की हड़ताल के दौरान इलाज प्रभावित नहीं होने दिया गया। ट्रेनी के सहयोग से मरीजों की देखभाल की गई है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।