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दुनिया का सबसे अनोखा है ये 'लीला चित्र मंदिर', यहां दीवार पर लिखी है संपूर्ण गीता

गीता प्रेस गीता प्रेस

कोरोना काल में इन मरीजों को खोजेगा स्वास्थ्य विभाग, कराना होगा समय से इलाज

गोरखपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा है कि समुदाय के बीच आशा कार्यकर्ता की मदद से कुष्ठ और कालाजार के रोगियों को ढूंढ कर समय से इलाज उपलब्ध करवाया जाए। समय से बीमारी की पहचान और अति शीघ्र इलाज की मदद से इन दोनों बीमारियों का उन्मूलन किया जा सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि यह बात समुदाय के बीच जानी चाहिए कि कुष्ठ और कालाजार का निःशुल्क इलाज उपलब्ध है, इसलिए लक्षण दिखने पर लोग बीमारी की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), पाथ, पीसीआई और जीएचएस जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं भी इन बीमारियों की रोकथाम में मदद कर रही हैं।

संवेदनशील मंडल है गोरखपुर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कालाजार के दृष्टि से गोरखपुर मंडल संवेदनशील है, हांलाकि गोरखपुर जिले में इस वर्ष सिर्फ एक केस सामने आया है। पूरे मंडल में कुल 36 केस हैं, जिनमें सबसे ज्यादा देवरिया और कुशीनगर जिले के हैं। चूंकि इन जिलों से प्रवास भी गोरखपुर में होता है, इसलिए जनपद में भी अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर पर काला चकत्ता पड़ जाता है।

 
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सरसों और मेंथा की खेती से संवार रहे तकदीर, जानिए त्रिभुवन ने कैसे की आय दोगुनी

महराजगंज जिले के जिन खेतों में कल तक दो ही फसल लगाया जाता था। आज उसी खेत में तीन फसल लगाकर किसान ने अपनी आमदनी को बढ़ा लिया। होने वाली आय से घर गृहस्थी की गाड़ी आसानी से चल रही है। निचलौल विकास खंड क्षेत्र के जयश्री निवासी किसान त्रिभुवन उर्फ राजू पटेल ने सीजन के अनुसार बड़े पैमाने पर तीन फसलों का उत्पादन कर विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

वह सीजन के मुताबिक तकनीकी का प्रयोग कर तीन फसल काटने में महारथ हासिल कर लिए हैं। किसान त्रिभुवन उर्फ राजू पटेल ने स्नातक तक शिक्षा हासिल की इंटरमीडिएट कृषि विषय से हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद नई तकनीकी से कृषि कार्य में जुट गए। इनके पास कुल 11 एकड़ खेती की भूमि है। जिसमें से आठ एकड़ खेती में सरसों की फसल लगा रखे हैं।

उन्होंने बताया कि एक वर्ष में तीन फसलों की कटाई कर आमदनी को दोगुनी कर रहे हैं। धान की कटाई के बाद खेतों को कृषि योग्य बनाते हैं। उसके बाद 15 से 30 अक्तूबर के बीच सरसों की बुआई कर देते हैं। सरसों की फसल लगाने में प्रति एकड़ करीब छह से सात हजार की लागत आती है। जिसमें प्रति एकड़ आठ से नौ क्विंटल सरसों की पैदावार होती है। बाजारों में साढ़े चार हजार से पांच हजार के बीच आसानी से बिक जाती है।

जनवरी माह के अंतिम में सरसों फसल की कटाई कर मेंथा की फसल लगाने के लिए खेतों को तैयार करते हैं। फरवरी माह में 10 से 25 तारीख के बीच मेंथा की रोपाई कर देते हैं। जो धान की रोपाई से पहले करीब 70 से 90 दिनों के बीच में मेंथा की फसल पक कर तैयार हो जाती है।

मेंथा की खेती में करीब 12 से 15 हजार रुपये की लागत आती है। इसकी पैदावार प्रति एकड़ 50 से 60 किलो होता है। जिसकी कीमत बाजारों में एक हजार से लेकर तीन हजार तक रहता है। इस प्रकार से इनकी आमदनी आम किसानों से प्रतिवर्ष दोगुनी होती रहती है।

 
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Exclusive: ऑनलाइन कराएं एफआईआर, पुलिस नहीं कर पाएगी आनाकानी

सरसों के खेत में त्रिभुवन।
आप किसी अपराध के शिकार हुए हैं और पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही है तो परेशान न हों। आप ऑनलाइन एफआईआर करा सकते हैं। ऐसा करने से एफआईआर की जानकारी सीधे पुलिस के आला अफसरों तक जाएगी। फिर थाना या चौकी पुलिस ज्यादा तेजी से कार्रवाई करेगी।

इसका ताजा उदाहरण गीडा थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां शादी समारोह में गए एक युवक को गोली मार दी गई थी। पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी करने लगी तो ऑनलाइन ही एफआईआर दर्ज करा दी गई। इस प्रक्रिया में थाना पुलिस का सहयोग नहीं लेना पड़ा। वहीं तहरीर में भी किसी तरह का बदलाव संभव नहीं था। नतीजतन, बिना पैरवी के ही अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। अब पुलिस विवेचना करके आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

केस एक
गीडा इलाके के जिगिना गांव के एक मैरिज लॉन में सिकरीगंज के महुई निवासी राणा प्रताप सिंह को गोली मारी गई थी। गोली गले में फंसी थी लेकिन पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। तहरीर देने के बाद भी केस न दर्ज होने पर राणा की पत्नी ने ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। उन्हें न सिर्फ एफआईआर की कॉपी मिल गई बल्कि पुलिस ने इस प्रकरण में कार्रवाई भी शुरू कर दी। आरोप था कि थाने पर तहरीर देने पर पुलिस ने केस दर्ज करने की जगह इलाज कराने की सलाह देकर वापस भेज दिया था।

केस दो
कुशीनगर के तरकुलहा थाना क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे की मदद से कॉलेज की एक छात्रा का अश्लील वीडियो बनाकर कुछ लोगों ने वायरल किया था। विद्यालय के एक कमरे में एक युवक के साथ मौजूद छात्रा का यह वीडियो फरवरी में वायरल हुआ था। प्रबंधक ने थाने पर संपर्क किया तो केस दर्ज करने में आनाकानी की गई। 6 मई 2020 को छात्रा ने ऑनलाइन केस दर्ज कराया। ऑनलाइन केस होने पर अफसरों को भी इसकी जानकारी हो गई और तत्काल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
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मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर सहित यूपी के 1825 सड़कों का किया शिलान्यास, सांसद-विधायक ने किया अनावरण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गोरखपुर सहित प्रदेश की जिला पंचायतों की 1825 सड़कों का शिलान्यास किया। इनमें गोरखपुर जनपद की 21 सड़कें शामिल हैं। इन पर साढ़े सात करोड़ खर्च होगा। कार्यक्रम के दौरान जिले की पीएमजीएसवाई की दो सड़कों का शिलान्यास किया गया।

शिलान्यास कार्यक्रम वर्चुअल हुआ। सीएम योगी इसमें लखनऊ से शामिल रहे। जनपद स्तर पर सभी सांसद व विधायक तथा जिला पंचायत अध्यक्ष कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सेंटर पर उपस्थित रहे। जनप्रतिनिधि गण जिला पंचायत के प्रांगण में स्थित सड़कों के शिलापटों का अनावरण किया।

कार्यक्रम के दौरान गोरखपुर के जिला पंचायत परिसर में उपस्थित सांसद रवि किशन, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक संत प्रसाद, विधायक महेंद्र पाल सिंह, विधायक विपिन सिंह, विधायक शीतल पांडेय व अन्य लोगों ने शिलान्यास किया।
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गोरखपुर के इस अस्पताल में आसान होगा कैंसर का इलाज, स्विट्जरलैंड से आएगी 18 करोड़ की ये खास मशीन

विद्यार्थियों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं 65 फीसदी माता-पिता, बोले- 'बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं'

राजकीय, अनुदानित और वित्त विहीन विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा पांचवीं से आठवीं के 65 फीसदी विद्यार्थियों को माता-पिता स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। इस सिलसिले में जिला विद्यालय निरीक्षक ने फीडबैक लिया था। अब स्कूल खोलने के लिए प्रधानाचार्यों से राय मांगी गई है।
 
कोरोना संकट के बीच कक्षा नौ से कक्षा बारहवीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जा रही है। लिहाजा, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कक्षा छह से कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का खाका तैयार किया। इससे पहले ही माता-पिता से राय मांगी गई। इसकी रिपोर्ट आई तो विभागीय अफसर चुप हो गए।

माता-पिता ने जो राय दी, उसके मुताबिक 65 फीसदी विद्यार्थियों को घर पर ही पढ़ाने के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि जब तक कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं आएगी, तब तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। वैक्सीन लगने के बाद ही स्कूल भेजने पर निर्णय लेंगे। हालात सामान्य होने तक बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
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संतकबीरनगर के बंदी की बस्ती जेल में मौत, तबियत खराब होने पर अस्पताल में किया गया था शिफ्ट

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