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Gorakhpur News: गीता वाटिका में उमड़ा भक्ति का उल्लास, दधिकीच से खेली होली

Mon, 21 Sep 2026 02:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 02:32 AM IST
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Wave of devotional joy sweeps through Gita Vatika; Holi celebrated with curd and buttermilk.
गोरखपुर। गीता वाटिका में चल रहे राधारानी प्राकट्य महोत्सव के तहत रविवार को दधिकर्दमोत्सव (दधिकांदो) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पंडाल में सुबह से ही राधे-राधे के जयघोष गूंजते रहे। दही, हल्दी, गुलाबजल और चंदन से बनी दधिकीच (दही) से प्रेम की होली भक्तों ने खेली।
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नाम-संकीर्तन और राधारानी के पदों के गायन से पूरा वातावरण राधामय हो गया। गोप बालकों ने डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह नाम-संकीर्तन से हुआ। इसके बाद राधारानी की महिमा से जुड़े विभिन्न पदों का गायन किया गया। गोप बालकों ने पद गायन करते हुए पंडाल में प्रवेश किया। अल्पना स्थली पर पूजन-अर्चन के बाद बधाई के पद गाए गए। इसके बाद भाईजी की अमृतवाणी का श्रवण कराया गया।
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घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के बीच राधे-राधे का संकीर्तन शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने दही, हल्दी, गुलाबजल, केसर, चंदन और इत्र से तैयार दधिकीच से प्रेम की होली खेली। गोप बालकों ने डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया। आरती के बाद कार्यक्रम संपन्न हुआ। भक्तों ने पावन समाधि पर प्रणाम कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर अनुराग डालमिया, विष्णु प्रसाद अजितसरिया, उमेश कुमार सिंहानिया, रसेंदु फोगला, हरिकृष्ण दुजारी, रमेश कुमार थरड, डॉ. चंद्रेश, मनमोहन जाजोदिया, अंजलि पराशर, कनक हरि अग्रवाल, दीपक गुप्ता समेत कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
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रासमंडली ने दिखाई सुदामा की भक्ति और मित्रता
शाम को रामजी शर्मा व कुंजबिहारी शर्मा की रासमंडली ने प्रिया-प्रियतम के नित्य रासविहार और मयूर नृत्य के बाद सुदामा लीला का मंचन किया। इसमें कृष्ण और सुदामा की मित्रता, सुदामा की गरीबी और पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। द्वारका पहुंचने पर द्वारपालों की ओर से रोके जाने और कृष्ण को अपने बालसखा के आने की जानकारी मिलने का दृश्य भावपूर्ण रहा। सुदामा के आने का समाचार सुनकर कृष्ण नंगे पांव उनसे मिलने दौड़ पड़े और उन्हें प्रेमपूर्वक महल में ले आए। रानी रुक्मिणी ने भी सुदामा की सेवा की। सुदामा की ओर से लाई गई चावल की पोटली को कृष्ण ने स्वयं लेकर प्रेम से चावल ग्रहण किए। इसके बाद सुदामा जब घर लौटे तो झोपड़ी की जगह भव्य महल देखकर आश्चर्यचकित रह गए। लीला के माध्यम से मित्रता, प्रेम और भक्ति का संदेश दिया गया।

रासमंडली ने दिखाई सुदामा की भक्ति और मित्रता
शाम को रामजी शर्मा व कुंजबिहारी शर्मा की रासमंडली ने प्रिया-प्रियतम के नित्य रासविहार और मयूर नृत्य के बाद सुदामा लीला का मंचन किया। इसमें कृष्ण और सुदामा की मित्रता, सुदामा की गरीबी और पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचने का प्रसंग दिखाया गया। द्वारका पहुंचने पर द्वारपालों की ओर से रोके जाने और कृष्ण को अपने बालसखा के आने की जानकारी मिलने का दृश्य भावपूर्ण रहा। सुदामा के आने का समाचार सुनकर कृष्ण नंगे पांव उनसे मिलने दौड़ पड़े और उन्हें प्रेमपूर्वक महल में ले आए। रानी रुक्मिणी ने भी सुदामा की सेवा की। सुदामा की ओर से लाई गई चावल की पोटली को कृष्ण ने स्वयं लेकर प्रेम से चावल ग्रहण किए। इसके बाद सुदामा जब घर लौटे तो झोपड़ी की जगह भव्य महल देखकर आश्चर्यचकित रह गए। लीला के माध्यम से मित्रता, प्रेम और भक्ति का संदेश दिया गया।
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