बुधवार सुबह हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चकसराय क्षेत्र में बारिश के कारण आलू की बिजाई के लिए तैयार किए गए कई खेत जलमग्न हो गए। वहीं, जिन किसानों ने मंगलवार को आलू की बिजाई की थी, उनके खेतों में भी मेड़ों के बीच बारिश का पानी जमा हो गया है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते खेतों से पानी की निकासी नहीं की गई तो मिट्टी में नमी अधिक बढ़ने से आलू के बीज के सड़ने का खतरा पैदा हो सकता है। बारिश के बाद किसान अपने खेतों में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। किसानों का कहना है कि बारिश रुकते ही मेड़ों के बीच जमा पानी को बाहर निकालने का काम शुरू किया जाएगा। लगातार बदल रहे मौसम के कारण आलू की बिजाई का काम प्रभावित हो रहा है और किसानों को अतिरिक्त मेहनत के साथ आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ रहा है। किसान लकी कुमार ने बताया कि किसान पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। बारिश के कारण खेतों को बार-बार ट्रैक्टर से तैयार करवाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ट्रैक्टर चालक अश्वनी कुमार ने बताया कि डीजल की कीमत बढ़ने से खेत तैयार करने और बुआई की लागत में भी इजाफा हुआ है। उनके अनुसार पहले ट्रैक्टर से बुआई का काम 1200 रुपये में किया जाता था, लेकिन बढ़ती लागत के चलते अब 1500 रुपये लेने पड़ रहे हैं। इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है। कृषि प्रसार अधिकारी चंदन कुमार शर्मा ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में बारिश का पानी आलू की मेड़ों के बीच जमा हो गया है, वहां जल्द पानी की निकासी सुनिश्चित करें। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से आलू के बीज को नुकसान हो सकता है। उन्होंने किसानों से मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की अपील की है।