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ध्रुव जुरैल के टैटू में छिपी कहानी: क्यों दिया 'जय जवान, जय किसान' का संदेश, पिता ने बताई पूरी बात

Wed, 26 Aug 2026 11:44 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 26 Aug 2026 11:44 AM IST
सार

श्रीलंका के खिलाफ शतक के बाद ध्रुव जुरैल की बांह पर दिखे ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की छह दशक पुरानी विरासत को फिर चर्चा में ला दिया। टैटू से प्रभावित होकर पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री ने ध्रुव के पिता नेम सिंह जुरैल को फोन कर कहा कि बच्चे ने उनके पिता का संदेश फिर जिंदा कर दिया।
 

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Dhruv Jurel Jai Jawan Jai Kisan Tattoo Prompts Call From Anil Shastri To His Father
ध्रुव जुरैल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीलंका के खिलाफ ध्रुव जुरैल के शतक के बाद उनकी बांह पर दिखा ‘जय जवान, जय किसान’ का टैटू देशभर में चर्चा में है। इस टैटू ने छह दशक पुरानी उस विरासत को फिर सामने ला दिया, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश को दिया था। ध्रुव के इस अंदाज से प्रभावित होकर शास्त्री के बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री ने उनके पिता नेम सिंह जुरैल को फोन किया।
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बातचीत की शुरुआत नेम सिंह ने ‘जय हिंद’ और ‘जय जवान, जय किसान’ से की। अनिल शास्त्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज एक बच्चे ने लाल बहादुर शास्त्री के नारे को फिर जीवित किया। उन्होंने कहा कि पिता ने करीब 60 वर्ष पहले यह नारा दिया था और यह उनकी दूरदर्शिता थी कि आज भी यह पूरी तरह प्रासंगिक है।
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उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री हमेशा मानते थे कि जो देश अपना पेट नहीं भर सकता, उसे दुनिया में कहीं भी इज्जत नहीं मिल सकती। जवान देश की सीमा की रक्षा करता है और किसान देश का पेट भरता है, इसलिए दोनों देश की ताकत हैं।
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‘हम और ध्रुव के दादा भी हुए थे प्रभावित’
नेम सिंह जुरैल ने कहा कि जिस समय पूर्व प्रधानमंत्री ने यह नारा दिया था, उस समय वह खुद और ध्रुव के दादाजी भी इससे बहुत प्रभावित हुए थे। आज बेटे की बांह पर यही संदेश देखकर उन्हें गर्व महसूस होता है। ध्रुव के दादा किसान थे और पिता सेना में रहे हैं। इसलिए शतक के बाद ध्रुव का सैल्यूट और ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू उनकी पारिवारिक जड़ों का भी प्रतीक बन गया।
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