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बाराबंकी: जलस्तर घटा, फिर भी तेज कटान से 15 मकान नदी में समाए
बाराबंकी: सरयू नदी का जलस्तर घटने के बाद भी हेतमापुर गांव में कटान की रफ्तार कम नहीं हुई है। तेज कटान की चपेट में आकर अब तक करीब 15 मकान नदी में समा चुके हैं। वहीं करीब 150 वर्ष पुरानी मस्जिद भी कटान की जद में आ गई है। नदी लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। कई परिवार अपने मकान तोड़कर ईंट, दरवाजे और गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने समय रहते कटान रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। जब नदी कई मकानों को निगल चुकी है, तब अब बोल्डर मंगाकर कटान रोकने की कवायद शुरू की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही मजबूत कटानरोधी कार्य करा दिए जाते तो कई मकानों और जमीन को बचाया जा सकता था। इससे पहले बांस के कैरेट, पेड़ की डालियां और बोरियों से कटान रोकने के प्रयास भी नदी की तेज धारा में बह चुके हैं।
कटान की भयावह स्थिति को देखते हुए ग्रामीण घरों को बचाने की उम्मीद छोड़कर उनका सामान निकाल रहे हैं। मकान तोड़कर निकाली गई ईंटों और अन्य सामान को ट्रैक्टर-ट्राली से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इसके लिए करीब एक हजार रुपये प्रति ट्राली किराया देना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने घर और सामान दोनों बचाने की चुनौती है।
बाबा नारायण दास समाधि स्थल के महंत उपेंद्र दास ने बताया कि उनकी जानकारी में करीब पांच बार सरयू नदी समाधि स्थल तक पहुंच चुकी है। हर बार समाधि स्थल के करीब पांच ईंटें नदी के कटान में बह जाती हैं, इसके बाद नदी का कटान रुक जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस बार भी नदी समाधि स्थल तक पहुंचने के बाद कटान रोक सकती है। हालांकि फिलहाल नदी की धारा लगातार जमीन काट रही है और समाधि स्थल पर भी खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान से लगातार जमीन और मकान गंवाने के बावजूद प्रशासन की ओर से उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। परिवार अपने स्तर से सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। गांव में जगह-जगह टूटते मकान, सामान समेटते परिवार और नदी की बढ़ती धारा लोगों की बेबसी को बयां कर रही है।
कटान को लेकर ग्रामीणों में बाढ़ खंड के अधिकारियों के प्रति काफी रोष है। उनका कहना है कि अब बोल्डर लगाए जाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन यह काम पहले शुरू होता तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।
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