राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू है। इसी बीच जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर पार्टी के झंडे लगाने के लिए नगर निगम की क्रेन पहुंचने का मामला सामने आया है। इसे लेकर विपक्ष ने सरकारी संसाधनों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
मामले के अनुसार, भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर पार्टी के झंडे लगाने के लिए एक क्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा था। विपक्ष का दावा है कि यह नगर निगम के काम में इस्तेमाल होने वाली सरकारी मशीनरी है। मौके पर मौजूद मीडिया ने क्रेन ऑपरेटर से बातचीत की तो उसने बताया कि उसे एक अधिकारी का फोन आया था। अधिकारी के निर्देश पर ही वह भाजपा कार्यालय में झंडे लगाने के लिए पहुंचा था।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब चुनाव आचार संहिता लागू है, तब सरकारी वाहन और संसाधनों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल की गतिविधि के लिए कैसे किया जा सकता है। विपक्ष ने यह भी पूछा कि नगर निगम की क्रेन भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक किस अधिकारी के निर्देश पर पहुंची और उसे पार्टी कार्यालय में भेजने का आदेश किस स्तर से दिया गया।
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मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल भाजपा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि नगर निगम की सरकारी मशीनरी जनता के काम के लिए है या भाजपा के झंडे लगाने के लिए। उन्होंने चुनाव आयोग से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मीडिया की मौजूदगी की जानकारी भाजपा पदाधिकारियों को मिलने के बाद झंडे लगाने का बाकी काम रोक दिया गया। इसके बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।
वहीं, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह नगर निगम की नई किराए की गाड़ी है और विपक्ष मनगढ़ंत आरोप लगाता रहता है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा आदर्श आचार संहिता की पूरी तरह पालना कर रही है। पार्टी आचार संहिता को विशेष महत्व देती है और उसके सभी नियमों का पालन कर रही है।