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भारत-चीन संबंध: ब्रिक्स के लिए दिल्ली आ रहे जिनपिंग, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता पर ड्रैगन का रुख क्या?
Sat, 12 Sep 2026 04:16 AM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 12 Sep 2026 04:16 AM IST
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पीएम मोदी और शी जिनपिंग
- फोटो : पीएम मोदी/ एक्स
भारत और चीन दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात कराने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इसी दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात होने की संभावना है।
चीन ने क्या संकेत दिया?
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत जारी रहने का संकेत दिया। अगर यह मुलाकात तय होती है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने मिलेंगे। इससे पहले दोनों नेता रूस के कजान और चीन के तियानजिन में बड़े बहुपक्षीय सम्मेलनों के दौरान द्विपक्षीय बातचीत कर चुके हैं।
चीन भारत से संबंध कैसे चाहता है?
चीनी राजदूत ने कहा कि चीन भारत के साथ रचनात्मक संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के नेताओं की तय रूपरेखा के आधार पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश रणनीतिक और लंबे समय के नजरिये से संबंधों को संभालेंगे। बातचीत बढ़ाएंगे। सहयोग बढ़ाएंगे। मतभेदों को सही तरीके से संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अच्छे पड़ोसी और ऐसे साझेदार बनें, जो एक-दूसरे की सफलता में मदद करें।
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शी जिनपिंग भारत कब आएंगे?
चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। शी 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी भारत आ रहे हैं।
ब्रिक्स में क्या चर्चा होगी?
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में व्यापार और वित्तीय सहयोग पर चर्चा होगी। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी बात होगी। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी एजेंडे में हैं।
शी का भारत दौरा क्यों अहम है?
शी जिनपिंग का भारत दौरा खास माना जा रहा है। यह 2019 में मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अनौपचारिक मुलाकात के बाद उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश कई साल की तनातनी के बाद संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। यह तनाव वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर विवाद के कारण बढ़ा था।
मोदी-शी की मुलाकात पर नजर क्यों?
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की किसी भी बातचीत पर कूटनीतिक नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश के बीच यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।
भारत ने चीन के साथ सहयोग पर क्या कहा?
चीन की ओर से शी के दौरे की पुष्टि से पहले भारत के चीन में राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक लेख लिखा। उन्होंने पिछले साल शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री मोदी से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि शी ने मोदी से कहा था कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के अवसर हैं।
सीमा पर शांति कितनी जरूरी?
भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर शांति दोनों देशों के व्यापक रिश्तों के लिए बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, सीमा पर शांति रहने से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मोदी-शी की पिछली मुलाकात कब हुई?
1 सितंबर को एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया था। यह मुलाकात पारिवारिक तस्वीर के लिए जाने से पहले हुई थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बातचीत में शामिल हुए थे। यह मुलाकात उस समय हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी ने शी को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने का न्योता दिया था। शी ने इसके लिए मोदी को धन्यवाद दिया था। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की भी पेशकश की थी।
ब्रिक्स में भारत की क्या प्राथमिकता है?
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसकी थीम है- 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण'। भारत ब्रिक्स के एजेंडे में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखने की कोशिश कर रहा है।
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चीन ने क्या संकेत दिया?
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत जारी रहने का संकेत दिया। अगर यह मुलाकात तय होती है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने मिलेंगे। इससे पहले दोनों नेता रूस के कजान और चीन के तियानजिन में बड़े बहुपक्षीय सम्मेलनों के दौरान द्विपक्षीय बातचीत कर चुके हैं।
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चीन भारत से संबंध कैसे चाहता है?
चीनी राजदूत ने कहा कि चीन भारत के साथ रचनात्मक संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के नेताओं की तय रूपरेखा के आधार पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश रणनीतिक और लंबे समय के नजरिये से संबंधों को संभालेंगे। बातचीत बढ़ाएंगे। सहयोग बढ़ाएंगे। मतभेदों को सही तरीके से संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अच्छे पड़ोसी और ऐसे साझेदार बनें, जो एक-दूसरे की सफलता में मदद करें।
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शी जिनपिंग भारत कब आएंगे?
चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। शी 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी भारत आ रहे हैं।
ब्रिक्स में क्या चर्चा होगी?
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में व्यापार और वित्तीय सहयोग पर चर्चा होगी। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी बात होगी। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी एजेंडे में हैं।
शी का भारत दौरा क्यों अहम है?
शी जिनपिंग का भारत दौरा खास माना जा रहा है। यह 2019 में मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अनौपचारिक मुलाकात के बाद उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देश कई साल की तनातनी के बाद संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। यह तनाव वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर विवाद के कारण बढ़ा था।
मोदी-शी की मुलाकात पर नजर क्यों?
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की किसी भी बातचीत पर कूटनीतिक नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश के बीच यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।
भारत ने चीन के साथ सहयोग पर क्या कहा?
चीन की ओर से शी के दौरे की पुष्टि से पहले भारत के चीन में राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में एक लेख लिखा। उन्होंने पिछले साल शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री मोदी से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि शी ने मोदी से कहा था कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के अवसर हैं।
सीमा पर शांति कितनी जरूरी?
भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर शांति दोनों देशों के व्यापक रिश्तों के लिए बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, सीमा पर शांति रहने से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मोदी-शी की पिछली मुलाकात कब हुई?
1 सितंबर को एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया था। यह मुलाकात पारिवारिक तस्वीर के लिए जाने से पहले हुई थी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस बातचीत में शामिल हुए थे। यह मुलाकात उस समय हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी ने शी को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने का न्योता दिया था। शी ने इसके लिए मोदी को धन्यवाद दिया था। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की भी पेशकश की थी।
ब्रिक्स में भारत की क्या प्राथमिकता है?
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इसकी थीम है- 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण'। भारत ब्रिक्स के एजेंडे में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखने की कोशिश कर रहा है।