अजमेर नगर निगम चुनाव में सबसे चर्चित और हॉट सीट मानी जा रही वार्ड संख्या-4 पर चुनावी मुकाबला अब और अधिक रोचक हो गया है। भाजपा के टिकट पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ रहीं मोनिका जैन के नामांकन और नगर निगम द्वारा जारी की गई एनओसी को लेकर निर्दलीय प्रत्याशी एवं दो बार के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत ने आपत्ति दर्ज कराई है। हेमा गहलोत ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए मोनिका जैन का नामांकन खारिज करने की मांग की है। अब इस मामले में प्रशासन और निर्वाचन अधिकारी को निर्णय लेना है।
हेमा गहलोत की ओर से उनके पति एवं अजमेर के दो बार के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति लेकर पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मोनिका जैन ने नामांकन के साथ प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र और नगर निगम से संबंधित दस्तावेजों में अपने परिवार और पति के नाम नगर निगम की देय बकाया राशि का सही एवं पूर्ण विवरण नहीं दिया है।
पति पर 57 लाख से अधिक की देनदारी का आरोप
पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से मोनिका जैन के पति दीपक जैन पर वर्ष 2020 से करीब 57 लाख रुपए की देनदारी बताई गई थी, जो वर्तमान में बढ़कर इससे अधिक हो सकती है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस तथ्य को मोनिका जैन द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र में जान-बूझकर छिपाया गया। हेमा गहलोत की ओर से इसे चुनावी नियमों का उल्लंघन बताते हुए संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में धारा 28 के तहत कार्रवाई और धारा 35 के तहत मोनिका जैन का नामांकन खारिज करने की मांग की गई है।
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जाति प्रमाण पत्र की जांच की भी मांग
हेमा गहलोत ने मोनिका जैन के जाति प्रमाण पत्र की जांच की भी मांग उठाई है। शिकायत में कहा गया है कि मोनिका जैन मूल रूप से गंगानगर की निवासी बताई जा रही हैं, ऐसे में उनके जाति प्रमाण पत्र की भी जांच कर यह पुष्टि की जाए कि प्रमाण पत्र श्रीगंगानगर से विधिवत जारी हुआ है या नहीं।
इस्तीफा देने के बाद आमने-सामने पूर्व मेयर का परिवार और भाजपा
वार्ड संख्या-4 का मुकाबला राजनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प हो गया है। निर्दलीय प्रत्याशी हेमा गहलोत के पति धर्मेन्द्र गहलोत भाजपा से दो बार अजमेर के मेयर रह चुके हैं और उन्होंने हाल ही में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। इसके बाद अब उनकी पत्नी इसी वार्ड से निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने मोनिका जैन को अपना प्रत्याशी बनाया है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने वार्ड संख्या-4 से अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है, जिससे इस सीट पर मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच केंद्रित हो गया है।
इस वार्ड को निगम के 80 वार्डों में सबसे हॉट सीटों में से एक माना जा रहा है। खास बात यह भी है कि इसी वार्ड के एक बूथ पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का मतदान केंद्र है। धर्मेन्द्र गहलोत भाजपा छोड़ने से पहले और पार्टी से अलग होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में वार्ड-4 की लड़ाई अब केवल पार्षद पद का चुनाव नहीं, बल्कि अजमेर की राजनीति में प्रतिष्ठा और सियासी वर्चस्व की जंग बनती दिखाई दे रही है। अब सबकी निगाहें निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर टिकी हैं कि मोनिका जैन के नामांकन और एनओसी को लेकर दर्ज आपत्ति पर प्रशासन क्या निर्णय करता है। यदि आपत्ति पर कोई बड़ी कार्रवाई होती है तो अजमेर नगर निगम चुनाव की इस सबसे चर्चित सीट का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।