शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर चितावलिया हेमा स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर, कुबेरेश्वरधाम में रविवार को आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। मंदिर में भगवान के दर्शन की लालसा, भक्ति में डूबे चेहरे और भोजन प्रसादी की सेवा में जुटे सेवादारों ने पूरे धाम को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया। विठलेश सेवा समिति की ओर से 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन कर प्रसादी ग्रहण की और सुख-समृद्धि की कामना की।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर कुबेरेश्वरधाम में दिनभर धार्मिक उत्साह बना रहा। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह पर्व भगवान के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की। किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की तो किसी ने जीवन में सुख, शांति और सद्भाव बनाए रखने की प्रार्थना की। भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर भावविभोर नजर आए।
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30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए हुई भोजन प्रसादी की व्यवस्था
धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और समर्पण की भावना भी प्रमुखता से दिखाई दी। विठलेश सेवा समिति की ओर से 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी वितरित की गई। प्रसादी में खिचड़ी, रोटी-सब्जी, नमकीन और नुक्ती शामिल रही। समिति के सदस्यों और सेवादारों ने श्रद्धालुओं तक व्यवस्थित रूप से भोजन पहुंचाने में सहयोग किया। सेवा कार्य में पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादार शामिल रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था ने आयोजन में सेवा और सहभागिता के महत्व को भी रेखांकित किया।
शिव के चंद्रमौली, श्रीरामचंद्र और श्रीकृष्णचंद्र के दिव्य स्वरूपों के दर्शन
शरद पूर्णिमा की शाम श्री मुरली मनोहर मंदिर में विशेष श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा के अनुसार, रविवार शाम चार बजे से भगवान शिव के चंद्रमौली स्वरूप, प्रभु श्रीरामचंद्र और भगवान श्रीकृष्णचंद्र के दिव्य स्वरूपों की मनोहारी झलक श्रद्धालुओं को देखने को मिली। विशेष श्रृंगार के साथ सजे भगवान के स्वरूपों के दर्शन के लिए भक्तों में उत्साह रहा। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की प्रार्थना की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने समझाया सच्ची भक्ति और अच्छे कर्मों का महत्व
महोत्सव के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को कर्तव्यपालन, सदाचार और निस्वार्थ कर्म का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और अहंकार रहित भाव से निभाता है, तो उसका कर्म भी भक्ति का स्वरूप बन जाता है। जीवन में केवल पूजा-पाठ करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आचरण को बेहतर बनाना और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने कर्तव्य से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। दूसरों के प्रति दया, विनम्रता और सहयोग का भाव रखना चाहिए। अहंकार और ईर्ष्या से दूर रहकर सत्य, प्रेम और सदाचार को जीवन में स्थान देना चाहिए। ईश्वर में विश्वास रखते हुए अपने कर्म करते रहना ही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है। जब व्यक्ति अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी से करता है और दूसरों के हित का ध्यान रखता है, तभी भक्ति का वास्तविक महत्व सामने आता है।
आस्था के साथ सेवा और सदाचार की प्रेरणा लेकर लौटे श्रद्धालु
कुबेरेश्वरधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव ने श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ सेवा और सदाचार का संदेश दिया। एक ओर भगवान के दिव्य स्वरूपों के दर्शन ने भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों को भोजन प्रसादी वितरण ने सामूहिक सेवा की भावना को मजबूत किया। पर्व के आयोजन में विठलेश सेवा समिति के सदस्यों और सेवादारों का योगदान रहा। श्रद्धालु भगवान के दर्शन, प्रसादी और पंडित प्रदीप मिश्रा के संदेशों के साथ भक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा लेकर लौटे।