चंद्रशेखर आजाद नगर विकासखंड के ग्राम अमनकुआ में शासकीय भूमि पर कथित तौर पर वर्षों से चल रहे पत्थर और मुरम के उत्खनन ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे नंबर 260 और 620 की शासकीय भूमि पर लंबे समय से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, सर्वे नंबर 260 की जमीन से करीब आठ वर्षों से पत्थर और मुरम निकालने के साथ उसका परिवहन किया जा रहा है। लगातार खुदाई के कारण जमीन का स्वरूप बदल गया है और कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से हादसे का खतरा भी बना रहता है।
धूल, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से परेशानी का आरोप
ग्रामीणों ने शिकायत में खनन के साथ धूल और प्रदूषण की समस्या का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि कथित ब्लास्टिंग और भारी मशीनों के इस्तेमाल से आसपास के मकानों में कंपन महसूस होता है। ग्रामीणों ने कृषि भूमि, बोर और नलकूपों के जलस्तर पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई है।
पढ़ें: 'रैपर को बुलाने की जरूरत क्या है, राहुल गांधी खुद ही काफी हैं’: विजयवर्गीय का तंज, पीएम मोदी के कसीदे गढ़े
कागजी जांच नहीं, मौके पर तकनीकी सर्वे की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि मामले की जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहे। उन्होंने ETS मशीन से मौके का तकनीकी सर्वे कराने, पूरे खनन क्षेत्र की वीडियोग्राफी करने और वास्तविक उत्खनन की मात्रा का वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की है। इसके लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित भूमि पर किसे, कितनी और किन शर्तों पर खनन की अनुमति दी गई थी। अनुमति और राजस्व रिकॉर्ड से लेकर मौके पर हुए वास्तविक उत्खनन तक का मिलान किया जाए।
‘कितना निकला और कितना दर्ज हुआ’, हो भौतिक सत्यापन
शिकायत में ग्रामीणों ने कथित उत्खनन की मात्रा का भौतिक सत्यापन कराने के साथ शासन को देय रॉयल्टी और राजस्व का आकलन करने की मांग की है। यदि जांच में अवैध या नियम विरुद्ध उत्खनन सामने आता है तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और राजस्व की वसूली सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। यदि ETS सर्वे और मौके की वीडियोग्राफी कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमनकुआ की शासकीय भूमि से वास्तव में कितना खनिज निकाला गया और इसके लिए वैध अनुमति थी या नहीं। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर वाले आवेदन के बाद मामला प्रशासन के सामने गंभीरता से उठाया गया है।