विजयादशमी पर्व पर इस वर्ष एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया है। नगर के उत्कृष्ट विद्यालय मैदान में रावण दहन के दौरान वर्षों से चली आ रही परंपरा का दृश्य अचानक बदल गया। भगवान राम के तीर चलाने से पहले ही रावण का पुतला धूं-धूं कर जल उठा। इस अप्रत्याशित नजारे को देखकर मैदान में मौजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक हैरत में पड़ गए। दरअसल, आतिशबाजी के दौरान निकली एक अनजानी चिंगारी इस पूरे घटनाक्रम की वजह बनी।
विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी रावण दहन के लिए नगर के नए श्रीराम मंदिर से एक भव्य चल समारोह निकाला गया था। गाजे-बाजे और धार्मिक जयकारों के साथ यह चल समारोह उत्कृष्ट विद्यालय मैदान पहुंचा। मैदान में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के गगनचुंबी पुतले खड़े किए गए थे, जिनका दहन किया जाना था।
ये भी पढ़ें- झमाझम बारिश ने फीका किया दशहरे का रंग: खंडवा में ऐतिहासिक रावण दहन कार्यक्रम स्थगित; अब कल होगा आयोजन
स्थापित परंपरा के अनुसार, चल समारोह के मैदान में पहुंचने के बाद हनुमान जी भगवान राम को अपने कंधों पर विराजमान करते हैं और फिर रावण के पुतले की परिक्रमा की जाती है। इस पारंपरिक परिक्रमा के पूरा होने के बाद ही भगवान राम अपने धनुष से अग्निबाण चलाकर रावण का वध करते हैं। नियमानुसार, सबसे पहले मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है और अंत में रावण के पुतले को आग के हवाले किया जाता है।
लेकिन इस वर्ष नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही मैदान में हनुमान जी और उनकी वानर सेना की टोली पहुंची, उत्सव का माहौल बनाने के लिए भव्य आतिशबाजी शुरू कर दी गई। इसी दौरान आसमान में चमकती आतिशबाजी की एक जलती हुई चिंगारी सीधे रावण के पुतले पर जा गिरी। चिंगारी लगते ही पुतले के भीतर रखे पटाखों ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते रावण का पुतला समय से पहले ही जल उठा। हालांकि, परंपरा में आए इस अचानक बदलाव के बावजूद लोगों ने इसे प्रभु श्रीराम की लीला मानकर जय श्रीराम के गगनभेदी नारे लगाए।