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फ्रीडम 250: जयशंकर की अमेरिका को दो टूक, कहा- साझेदारों से भी आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की उम्मीद
Tue, 20 Oct 2026 08:13 PM IST
नितिन गौतम
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 20 Oct 2026 08:13 PM IST
सार
अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर मुंबई में अमेरिकी दूतावास ने फ्रीडम 250 कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका से भी जीरो टॉलरेंस की अपील की।
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फ्रीडम 250
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर मुंबई में आज फ्रीडम 250 समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में भारत दौरे पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। मुंबई में अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित फ्रीडम 250 कार्यक्रम में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर तीखा रुख अपनाया और साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने साझेदारों से आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की उम्मीद रखता है।
जयशंकर ने कहा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, मुंबई के सभी लोग और पूरा भारत, ताज होटल के 26/11 स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आपका आभार व्यक्त करता है। भारत तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए भी शुक्रगुजार है, जो इस हमले के प्रमुख दोषियों में से एक था। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार के बारे में हम स्पष्ट हैं और अपने साझेदारों से भी आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की उम्मीद रखते हैं।'
'भारत की प्रगति पर अमेरिकी निवेशकों को भरोसा'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति पर अमेरिकी निवेशकों का जबरदस्त भरोसा है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 500 से अधिक बड़ी अमेरिकी कंपनियां कारोबार कर रही हैं और भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों में अमेरिकी निवेशकों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
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गोर ने कहा, 'अमेरिकी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने का जश्न आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए भारत की वित्तीय और सांस्कृतिक राजधानी मुंबई से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा, 'जब मैं इस सभागार में मौजूद लोगों को देखता हूं, तो मुझे ऐसे नेता और जोखिम उठाने वाले उद्यमी दिखाई देते हैं, जो अपनी ऊर्जा और पूंजी से हमारे दोनों देशों की प्रगति को गति दे रहे हैं।'
'भारत-अमेरिका साझेदारी तय करेगी 21वीं सदी की दिशा'
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि 21वीं सदी का इतिहास इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच की साझेदारी ही यह तय कर रही है कि यह सदी कैसी होगी। अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम में रुबियो ने भारत के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और एक मजबूत भू-राजनीतिक साझेदार है। अगर आप 21वीं सदी की कहानी और इतिहास के बारे में सोचें, तो यह इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है और अभी इसी वक्त लिखा जा रहा है। एक दिन कोई 21वीं सदी के इतिहास पर किताब लिखेगा। उसमें दुनिया के अन्य क्षेत्रों के बारे में भी एक अध्याय होगा, लेकिन 21वीं सदी कैसी होगी, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, यह इसी बात से तय होगा कि इस क्षेत्र में क्या होता है। हम यह जानते हैं। हम इसे महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'मेरा दृढ़ विश्वास है कि अमेरिका और भारत के बीच के संबंध, कई सकारात्मक मायनों में, यह तय करेंगे कि 21वीं सदी कैसी होगी। भारत और अमेरिका इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सुपरइंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल मानवता के भले के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही इनके नुकसानों को भी कम किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दोनों देश एक ऐसे मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक) की आवश्यकता पर भी सहमत हैं, जहां कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपना प्रभुत्व न जमा सके।'
'मुंबई में 500 से अधिक कंपनियां काम कर रहीं'
गोर ने कहा, 'खूबसूरत मुंबई में 500 से अधिक बड़ी अमेरिकी कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें गूगल, मेटा और आईबीएम जैसी दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा प्रॉक्टर एंड गैंबल और जॉनसन एंड जॉनसन जैसे भरोसेमंद घरेलू ब्रांड, फाइजर, एबॉट और मर्क जैसी प्रमुख दवा कंपनियां तथा सिटी, बैंक ऑफ अमेरिका और जेपी मॉर्गन चेज जैसे दुनिया के अग्रणी वित्तीय संस्थान भी यहां मौजूद हैं।'
'भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य पर भरोसे का बड़ा प्रमाण'
अमेरिकी राजदूत ने भारतीय शेयर बाजार में अमेरिकी निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'मुंबई के शेयर बाजारों में भारतीय शेयरों में निवेश की गई विदेशी पूंजी का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी संस्थागत निवेशकों का है। यह कोई संयोग नहीं है। यह भारत की आर्थिक प्रगति की दिशा और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसे का बहुत बड़ा प्रमाण है।' गोर ने कहा, 'यह सब संयोग से नहीं हुआ है और न ही यह उपलब्धि रातोंरात हासिल हुई है।'
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जयशंकर ने कहा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, मुंबई के सभी लोग और पूरा भारत, ताज होटल के 26/11 स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आपका आभार व्यक्त करता है। भारत तहव्वुर राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए भी शुक्रगुजार है, जो इस हमले के प्रमुख दोषियों में से एक था। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार के बारे में हम स्पष्ट हैं और अपने साझेदारों से भी आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की उम्मीद रखते हैं।'
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'भारत की प्रगति पर अमेरिकी निवेशकों को भरोसा'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति पर अमेरिकी निवेशकों का जबरदस्त भरोसा है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 500 से अधिक बड़ी अमेरिकी कंपनियां कारोबार कर रही हैं और भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों में अमेरिकी निवेशकों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
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गोर ने कहा, 'अमेरिकी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने का जश्न आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए भारत की वित्तीय और सांस्कृतिक राजधानी मुंबई से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती।' उन्होंने कहा, 'जब मैं इस सभागार में मौजूद लोगों को देखता हूं, तो मुझे ऐसे नेता और जोखिम उठाने वाले उद्यमी दिखाई देते हैं, जो अपनी ऊर्जा और पूंजी से हमारे दोनों देशों की प्रगति को गति दे रहे हैं।'
'भारत-अमेरिका साझेदारी तय करेगी 21वीं सदी की दिशा'
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि 21वीं सदी का इतिहास इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच की साझेदारी ही यह तय कर रही है कि यह सदी कैसी होगी। अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित ‘फ्रीडम 250’ कार्यक्रम में रुबियो ने भारत के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और एक मजबूत भू-राजनीतिक साझेदार है। अगर आप 21वीं सदी की कहानी और इतिहास के बारे में सोचें, तो यह इसी क्षेत्र में लिखा जा रहा है और अभी इसी वक्त लिखा जा रहा है। एक दिन कोई 21वीं सदी के इतिहास पर किताब लिखेगा। उसमें दुनिया के अन्य क्षेत्रों के बारे में भी एक अध्याय होगा, लेकिन 21वीं सदी कैसी होगी, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, यह इसी बात से तय होगा कि इस क्षेत्र में क्या होता है। हम यह जानते हैं। हम इसे महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'मेरा दृढ़ विश्वास है कि अमेरिका और भारत के बीच के संबंध, कई सकारात्मक मायनों में, यह तय करेंगे कि 21वीं सदी कैसी होगी। भारत और अमेरिका इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सुपरइंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल मानवता के भले के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही इनके नुकसानों को भी कम किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दोनों देश एक ऐसे मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक) की आवश्यकता पर भी सहमत हैं, जहां कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपना प्रभुत्व न जमा सके।'
'मुंबई में 500 से अधिक कंपनियां काम कर रहीं'
गोर ने कहा, 'खूबसूरत मुंबई में 500 से अधिक बड़ी अमेरिकी कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें गूगल, मेटा और आईबीएम जैसी दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा प्रॉक्टर एंड गैंबल और जॉनसन एंड जॉनसन जैसे भरोसेमंद घरेलू ब्रांड, फाइजर, एबॉट और मर्क जैसी प्रमुख दवा कंपनियां तथा सिटी, बैंक ऑफ अमेरिका और जेपी मॉर्गन चेज जैसे दुनिया के अग्रणी वित्तीय संस्थान भी यहां मौजूद हैं।'
'भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य पर भरोसे का बड़ा प्रमाण'
अमेरिकी राजदूत ने भारतीय शेयर बाजार में अमेरिकी निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'मुंबई के शेयर बाजारों में भारतीय शेयरों में निवेश की गई विदेशी पूंजी का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी संस्थागत निवेशकों का है। यह कोई संयोग नहीं है। यह भारत की आर्थिक प्रगति की दिशा और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसे का बहुत बड़ा प्रमाण है।' गोर ने कहा, 'यह सब संयोग से नहीं हुआ है और न ही यह उपलब्धि रातोंरात हासिल हुई है।'