मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में पिछले कुछ समय से बच्चों की मौत का बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। इस स्वास्थ्य संकट को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश शासन के जनजाति कार्य विभाग के कैबिनेट मंत्री माननीय डॉ. कुंवर विजय शाह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मंत्री ने जमीनी हकीकत का जायजा लिया और अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि क्षेत्र के किसी भी आदिवासी व्यक्ति को स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित न रखा जाए।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के लिए कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त खाली स्थानों (पदों) पर जल्द से जल्द डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इलाज में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बेहतर रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और पक्के मकान मुहैया कराने के लिए लगातार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इन योजनाओं का लाभ धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अमले की है।बैठक में विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) बैगा समुदाय के उत्थान को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा की गई।
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मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि आगामी 1 साल के अंदर कोई भी बैगा समाज का व्यक्ति कच्चे मकान में नहीं रहेगा। सरकार सभी को पक्के आवास उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा, जिन सुदूर अंचलों में पारंपरिक बिजली नहीं पहुंच पाई है, वहां सड़क और बिजली की व्यवस्था तेजी से की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी सुदूर घर में बिजली लाइन खींचना संभव नहीं है, तो वहां तत्काल सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) के माध्यम से रोशनी पहुंचाने का कार्य किया जाए।
छात्रों की सेहत और पोषण को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने एक और कड़ा कदम उठाया। उन्होंने निर्देश दिया कि आदिवासी छात्रावासों में जो भी भोजन बनता है, उसे छात्रों को परोसने से ठीक पहले उसकी फोटो खींचकर विभागीय पोर्टल या ऐप पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। इससे खाने की गुणवत्ता (Quality) सुनिश्चित होगी और गड़बड़ी करने वालों पर नजर रखी जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा पहुंचे और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।