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roar of wrestlers echoes in the court of faith; the Chhinj of Lakhdata Peer Pran Suri has a unique spirit of its own.
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वीडियो: आस्था के दरबार में गूंजती है पहलवानों की हुंकार, लखदाता पीर प्राण सूरी की छिंज का अपना रंग
ऊना जिले के उपमंडल अंब के सूरी गांव स्थित लखदाता पीर प्राण सूरी का दरबार क्षेत्र की धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक छिंज और कुश्ती संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र है। यहां होने वाला मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही ग्रामीण परंपरा, सामाजिक मेल-जोल और पहलवानी के जुनून का संगम बन चुका है। हर वर्ष मेले के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और अखाड़े में पहलवानों की जोरदार कुश्तियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं। स्थानीय लोगों में पीर बाबा के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा दरबार में माथा टेकने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। यही विश्वास इस धार्मिक स्थल को आसपास के गांवों के लोगों के लिए विशेष बनाता है। पीर बाबा से जुड़ी कई मान्यताएं स्थानीय बुजुर्गों से मौखिक रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं। इन कथाओं का विस्तृत लिखित इतिहास उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय लोग इन्हें अपनी श्रद्धा और लोक परंपरा का हिस्सा मानते हैं। लखदाता पीर प्राण सूरी की छिंज मेले की सबसे बड़ी पहचान इसका पारंपरिक दंगल है। यहां होने वाली कुश्तियों में स्थानीय पहलवानों के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों से पहलवान पहुंचते रहे हैं। 2025 के आयोजन में भी कई राज्यों के नामी पहलवानों ने अखाड़े में दमखम दिखाया था। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदला, लेकिन आस्था और दंगल की परंपरा आज भी कायम है। लखदाता पीर प्राण सूरी का मेला इसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है। एक ओर श्रद्धालु पीर बाबा के दरबार में आस्था के साथ माथा टेकते हैं तो दूसरी ओर अखाड़े में पहलवान अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन करते हैं। यही धार्मिक विश्वास और ग्रामीण खेल संस्कृति का मेल इस आयोजन को क्षेत्र के अन्य मेलों से अलग पहचान देता है।
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