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मंडी: प्रो. अनुपमा सिंह बोलीं- हिमाचल में नए जिलों की कवायद पर उठे सवाल, पहले गारंटियों का हिसाब दे सरकार
Ankesh Dogra
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:17 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में नए जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित किए जाने के बाद सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि जब चुनावी गारंटियों की पूर्ति को लेकर जनता सवाल कर रही है, तो सरकार को नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की कवायद से पहले अपने पुराने वादों का हिसाब देना चाहिए।
प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि नए जिले बनाने का विचार अपने आप में गलत नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाना और सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान करना जरूरी है। हालांकि, किसी भी नए जिले के गठन से पहले उसके संभावित लाभ, वित्तीय खर्च और प्रशासनिक जरूरतों का आकलन सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नए जिले बनने पर कार्यालयों, भवनों, कर्मचारियों और आधारभूत ढांचे के लिए अतिरिक्त खर्च करना होगा। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इसके लिए वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे और नए प्रशासनिक ढांचे से आम लोगों को क्या ठोस लाभ मिलेगा।
प्रो. सिंह ने सवाल उठाया कि क्या नई प्रशासनिक इकाइयों की चर्चा से अधूरी चुनावी गारंटियों और प्रदेश की आर्थिक स्थिति से जुड़े सवालों से ध्यान हटने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार चुनावी गारंटियों की स्थिति पर विस्तृत सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करे। साथ ही, नए जिलों के गठन पर संभावित खर्च, आयोग की सिफारिशों और प्रशासनिक पुनर्गठन से होने वाले लाभों की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।
प्रो. अनुपमा सिंह ने प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया में स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में नए जिलों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के गठन का फैसला भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना भी होनी चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि जनता को घोषणाओं से ज्यादा धरातल पर परिणाम चाहिए। सरकार को न
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