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Land of Asceticism for Saints: Gudha Historic Village of Bhiwani—Becomes a Symbol of Heroic Martyrdom and Development
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संतों की तपोभूमि: वीरों की शहादत और विकास कीपहचान बना भिवानी का ऐतिहासिक गांव गुढ़ा
भिवानी जिले का ऐतिहासिक गांव गुढ़ा अपनी प्राचीन विरासत, धार्मिक आस्था, देशभक्ति और सामाजिक भाईचारे के कारण पूरे क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। करीब 451 वर्ष पूर्व राजस्थान के नागौर जिले के गांव कचेरा से आए दयाराम नामक व्यक्ति ने इस गांव को बसाया था।
बुजुर्गों के अनुसार उस समय यह स्थान चारों ओर से सुरक्षित और शांत क्षेत्र माना जाता था। इसी कारण इसका नाम “गुढ़ा” पड़ा, जिसका अर्थ सुरक्षित अथवा छिपा हुआ स्थान माना जाता है। समय बीतने के साथ यह गांव अपनी ऐतिहासिक पहचान, संत परंपरा और सुनियोजित बसावट के कारण क्षेत्र में अलग पहचान बना चुका है।
करीब 64 एकड़ क्षेत्र में बसे इस गांव की बनावट आज भी लोगों को आकर्षित करती है। गांव की फिरनी और गलियों का स्वरूप पूरी तरह चौरस है जो किसी शहर की सेक्टर योजना जैसा दिखाई देता है।
गांव में करीब 700 घर, लगभग 4500 की आबादी और करीब 2500 मतदाता हैं। गांव जिला मुख्यालय भिवानी से लगभग 70 किलोमीटर तथा खंड कार्यालय सिवानी से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है।
गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है और यहां गेहूं, चना, मूंग, मोठ, कपास और बाजरा की खेती बड़े स्तर पर की जाती है।
गांव में तीन प्राचीन कुएं भी स्थित हैं, जिनमें से एक कुआं मीठे पानी का है जबकि अन्य दो कुएं खारे पानी के हैं।
पुराने समय में यही कुएं ग्रामीणों की प्यास बुझाने का मुख्य साधन हुआ करते थे और आज भी ये गांव की ऐतिहासिक धरोहर माने जाते हैं।
गुढ़ा गांव धार्मिक आस्था और संत परंपरा के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। गांव में करीब 400 वर्ष पुराना भगवान विष्णु मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा बाबा रामदेव मंदिर, दादा भोमिया मंदिर, श्री श्याम धाम, शिव परिवार, बालाजी मंदिर गांव की धार्मिक पहचान को और मजबूत करते हैं। गांव में स्थित संत कृष्ण दास, संत गोपाल दास, बीरम दास और बाबा बालक दास की समाधियां ग्रामीणों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं।
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