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प्रयागराज

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यूपीपीएससी : पेपर लीक मामले में छह आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में आरोपी चोलापुर थाना के दशनीपुर के शैलेंद्र कुमार सिंह, जौनपुर के नेवढ़िया के अजीत कुमार व अजय कुमार चौहान, गाजीपुर के सुहवल के प्रभुदयाल सिंह यादव और आसनसोल के गणेश व रंजीत की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। यह आदेश विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम चतुर्थ रामचंद्र की अदालत ने दिए।

आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध प्रभारी डीजीसी मुन्नालाल यादव और एडीजीसी विनय कुमार सिंह ने किया। यूपीपीएससी द्वारा जुलाई 2018 में आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई धांधली का 28 मई 2019 को एसटीएफ ने खुलासा किया था।

प्रकरण में कोलकाता निवासी प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार कर और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले की जांच कर रहे विवेचक के अनुसार, चोलापुर थाने में दर्ज इस मुकदमे की तफ्तीश अंतिम दौर में हैं और चार्जशीट जल्द ही अदालत में दाखिल की जाएगी।
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वाराणसी : ट्रेन से उतरते वक्त नीचे गिरा जवान, अस्पताल में इलाज के दौरान थम गईं सांसें

प्रयागराज जंक्शन पर सोमवार रात हुए हादसे में आरएएफ जवान की मौत हो गई। प्लेटफार्म पर उतरते वक्त वह नीचे गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गए, जिससे गंभीर चोटें आईं। इलाज के लिए जवान को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर रात उनकी सांसें थम गईं।

वाराणसी के बड़ागांव थाना अंतर्गत हसनपुर गांव निवासी राघवेंद्र सिंह(40) शांतिपुरम स्थित आरएएफ 101 बटालियन की डी कंपनी में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। पिछले दिनों छुट्टी पर वह दिल्ली गए थे, जहां से सोमवार को वह संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस से फाफामऊ में बटालियन परिसर स्थित अपने आवास पर लौट रहे थे।

रात 12.48 बजे के करीब ट्रेन प्लेटफार्म नंबर चार से होकर गुजर रही थी। इसी दौरान राघवेंद्र ने नीचे उतरने का प्रयास किया। हालांकि इस दौरान वह खुद को संभाल नहीं सके और ट्रैक पर गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में उनके पैर कट गए और शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आईं।
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मोबाइल चोरी होने पर कांवरियों ने किया चक्का जाम, पुलिस ने ढूंढने के लिए मांगा समय

वाराणसी में मंगलवार को प्रयागराज से चले कांवरिया काशी में जल चढ़ाकर वापस लौटने लगे। वह जैसे ही मंडुवाडीह में खड़े अपने वाहन के पास पहुंचे तो पता चला कि उनके मोबाइल से भरे बैग गायब हैं। दिनभर इंतजार के बाद जब मोबाइल नहीं मिले तो गुस्साए कांवरियों ने मंडुवाडीह थाने के पास चक्का जाम कर दिया।

जानकारी के अनुसार सोमवार को प्रयागराज से जल भर कर कौलापुर गोपीगंज से तकरीबन 25 की संख्या में मैजिक गाड़ी के साथ आए कांवरियों की गाड़ी को जाम के चलते मडुंवाडीह पुलिस ने त्रिमुहानी पर खड़ा करा दिया। ड्राइवर को छोड़ सभी कांवरिया दर्शन और जलाभिषेक के लिए बाबा विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हो गए।

गाड़ी पर केवल जितेंद्र कुमार दूबे और गुलाब धर दूबे रुक गए। मंगलवार सुबह में लगभग 4 बजे दोनों उठकर के गाड़ी के बगल में लघुशंका के लिए गए। इस दौरान उन लोगों ने लघु शंका कर लौट कर आते वक्त गाड़ी से कुछ दूरी पर दो औरतों को देखा। दोनों गाड़ी के पास पहुंचे तो एक ही बैग में रखे हुए 14 कांवरियों के मोबाइल व लगभग 15 सौ रुपये नगदी समेत बैग गायब थे।
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प्रयागराज: बेलन नदी के पुल पर सगे भाइयों समेत तीन का शव मिलने से सनसनी, पिता ने लगाया हत्या का आरोप, जांच में जुटी पुलिस

Prayagraj triple murder Prayagraj triple murder

भर्ती घोटाला : यूपीएसएसएससी के पांच कर्मियों पर चलेगा मुकदमा, विजिलेंस जांच में पाए गए हैं दोषी 

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से सपा शासन काल में हुई 54 विभागों में वैयक्तिक सहायक व आशु लिपिक 808 पदों पर हुई भर्ती में अनियमितता की पुष्टि हुई है। इस मामले में सतर्कता अधिष्ठान ने आयोग के पांच अधिकारियों को दोषी माना है और शासन से इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियोजन स्वीकृति मांगी है।

जानकारी के अनुसार सपा शासन काल में कुल 54 विभागों में वैयक्तिक सहायक व आशु लिपिक के 808 पदों पर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भर्तियां की थीं। इन भर्तियों की जांच 2017 में योगी सरकार ने सतर्कता अधिष्ठान को सौंप दी थी। सतर्कता अधिष्ठान ने इस मामले में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पांच अधिकारियों को दोषी माना है। 

इसमें तत्कालीन अनुभाग अधिकारी राम बाबू यादव, प्रवर वर्ग सहायक अनुराग यादव, जंग बहादुर, विरेंद्र कुमार यादव और सुरेंद्र कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 166, 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत अभियोजन की कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस मामले में कार्मिक विभाग ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई के लिए सतर्कता निदेशक को स्वीकृति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। 

चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट
दर असल इस पूरे मामले में शिकायत की गई थी कि पात्र अभ्यर्थियों की जगह पर अपात्रों को नियुक्ति दे दी गई। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने सभी भर्तियों की जांच कराई। इसमें 54 विभागों के वैयक्तिक सहायक व आशु लिपिक  के यह 808 पद भी शामिल थे। यह सभी मौजूदा समय में अपने अपने विभागों में नौकरी कर रहे हैं। सतर्कता की जांच के बाद अब इनके भविष्य पर भी संकट गहरा गया है।
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प्रयागराज डबल मर्डर केस : बहू ने ही कराई थी अपनी सास-ननद की हत्या, पुलिस ने किया खुलासा

औद्योगिक क्षेत्र स्थित मियां का पूरा गांव में मां-बेटी की हत्या का खुलासा करते हुए शनिवार को पुलिस ने बहु सलोनी तथा उसके पति के दोस्त शोभनाथ उर्फ शोभई को गिरफ्तार कर लिया। सलोनी खुद हत्या में शामिल थी। हत्या के बाद दोनों ने घर से गहने भी चुराए थे ताकि यह मामला लूट का लगे।

पुलिस को दिए बयान में सलोनी ने बताया कि ससुराल वाले उसकी छह साल की बेटी से उसे नहीं मिलने देते थे। इसी कारण उसने हत्या को अंजाम दिया। पुलिस ने उनके पास से गहने बरामद किए हैं। मियां का पूरा में मंगलवार रात प्रेमपति देवी और उसकी बेटी तनु 17 की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। प्रेमपति के पति बजरंग बहादुर पटेल उफ नचऊ पटेल पर जानलेवा हमला किया गया था। घटना के वक्त बजरंग की छह साल की पोती अंशिका भी थी लेकिन कातिलों ने उसे छोड़ दिया था।

इस मामले में पुरानी रंजिश के आधार पर पड़ोसी परिवार के चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई लेकिन पुलिस को मामला कुछ और ही लग रहा था। जांच में पता चला कि बजरंग के बेटे ने कुछ साल पहले आत्महत्या कर ली थी। उसकी पत्नी सलोनी ने दूसरी शादी कर ली थी। अंशिका सलोनी की बेटी है। सलोनी की कॉल डीटेल्स खंगाला गया तो पुलिस को काफी कुछ जानकारी मिल गई। इसके बाद सलोनी और शोभनाथ उर्फ शोभई को पकड़ लिया गया। शोभनाथ सलोनी के पति का दोस्त है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा : दीमक की तरह देश को चाट रहा है साइबर अपराध, व्यवस्था पर सवाल

साइबर ठगों के देश भर में फैले नेटवर्क पर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि साइबर ठग दीमक की तरह पूरे देश को चाट रहे हैं। देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रहे हैं। साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों का पैसा न डूबे, इसकी जवाबदेही तय किया जाना जरूरी है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि ईमानदार नागरिकों की गाढ़ी कमाई साइबर ठगी से कैसे सुरक्षित हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि बैंक व पुलिस की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। याचिका की सुनवाई 14 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने नीरज मंडल उर्फ राकेश की अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने डीजीपी कार्यालय, लखनऊ, एसपी क्राइम व निरीक्षक साइबर क्राइम (प्रयागराज) से प्रदेश व प्रयागराज में एक लाख से अधिक व एक लाख से कम की
साइबर ठगी के दर्ज अपराधों व उनकी स्थिति की जानकारी मांगी थी। अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे में संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा सकी। कोर्ट ने कहा इससे लगता है बैंक व पुलिस दोनों गंभीर नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि आश्चर्य होता है कि लोगों की जीवन की पूंजी लुट जाती है और उनसे कह दिया जाता है कि ठगी दूरदराज इलाके से हुई है। नक्सल एरिया में
पुलिस भी जाने से डरती है। धन वापसी मुश्किल है। लोग भाग्य को दोष देकर बैठ जाते हैं। बैंक व पुलिस की सुस्ती का लाभ साइबर अपराधी उठाते हैं।

साइबर ठगों से जज भी नहीं है सुरक्षित
कोर्ट ने कहा साइबर ठगी से जब जज भी सुरक्षित नहीं तो आम आदमी के बारे में क्या कहा जाए। राज्य सरकार को ठगी रोकने और बैंक व पुलिस की जवाबदेही तय करनी चाहिए। एक पूर्व जज से एक लाख रुपये की ठगी हुई। गिरफ्तार अभियुक्त ने कहा कि गिरोह काम करता है। यह गाढ़े समय या शादी आदि के लिए जमा पैसे निकाल कर ले जाते हैं। लोगों के अरमानों पर पानी फेर देते हैं। बिचौलिए लोगों का पैसा न खा जाए, इसके लिए प्रधानमंत्री ने जन-धन खाते खुलवाए। सरकारी योजनाओं का पैसा खाते में जमा किया जा रहा है।

बैंक में भी सुरक्षित नहीं है पैसा
अदालत काला धन रखने वाले सफेदपोश की बात नहीं कर रही, वह ईमानदार गरीब नागरिकों की बात कर रही, जिनका पैसा बैंक में जमा होता है। जो देश के विकास में खर्च होता है। ठगों की वजह से गरीब का पैसा बैंक में भी सुरक्षित नहीं है। जमा पैसे की गारंटी लेनी होगी। जिम्मेदारी तय हो कि गरीब का पैसा कैसे वापस आए। इसकी जिम्मेदारी किस पर तय हो। ग्राहकों के पैसे कैसे सुरक्षित हों, जिम्मेदारी तय किया जाना जरूरी है।
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घर के बाहर खड़े किसान की गोली मारकर हत्या, हत्यारों का सुराग लगाने में जुटी पुलिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट
थाना क्षेत्र के डेराबारी गांव में रहने वाले किसान पुष्कर नाथ द्विवेदी (48) की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात तब हुई जब वह घर केबाहर मौजूद थे। हत्या किसने और क्यों की, इस बारे में खबर लिखे जाने तक कुछ पता नहीं चल सका था। अफसर मौकेपर पहुंचकर जांच पड़ताल में जुटे रहे।

पुष्कर नाथ पुत्र वाचस्पति डेराबारी गांव में रहकर किसानी करते हैं। शनिवार रात 11 बजे के करीब वह घर केबाहर टहल रहे थे तभी गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। गोली चलने की आवाज सुनकर आए परिजन लहुुलुहान हाल में उन्हें शंकरगढ़ सीएचसी ले जाने लगे लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हत्या की जानकारी पर गांव में सनसनी फैल गई। हत्यारे कौन थे देर रात तक इसका पता नहीं चल सका था। परिजनों में चीखपुकार मची रही। मामले में एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि घटना की जानकारी मिली है। मौकेपर पहुंचकर पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है। फिलहाल कोई तहरीर नहीं मिली है। 
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प्रयागराज: तीन दिन के भीतर कत्ल की छठवीं वारदात, सनसनी

हत्या की वारदात दर वारदात से जिले में सनसनी फैल गई है। हाल यह है कि 72 घंटे यानी तीन दिन के भीतर ही हत्या की छह वारदातें सामने आ चुकी हैं। जिनमें कुल सात लोगों को मार डाला गया। इनमें से तीन को तो नृशंस तरीके से धारदार हथियार से वार कर मौत के घाट उतारा गया। इससे कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जिले के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों में आपराधिक घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। गंगापार व यमुनापार में हत्या के प्रयास, लूट, छेड़छाड़ के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मेजा में पिछले दिनों छेड़छाड़ केविरोध पर पिता की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत का हवाला देकर मामला संभालने की कोशिश की थी लेकिन सच यही है कि बेरहमी से पिटाई के बाद ही उसकी हालत बिगड़ी थी।

17 जुलाई को सरायइनायत में राजू नामक युवक की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। तीन जुलाई की रात सरायइनायत में 11 वर्षीय बालिका की हत्या कर लाश गड्ढे में फेंक दी गई। छह जुलाई को लाश मिलने पर वारदात की जानकारी हुई। पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया था कि बालिका की मां केप्रेमी ने वारदात को अंजाम दिया। लेकिन घरवालों ने इस खुलासे पर सवाल उठाए थे। इससे पहले 17 मई को सरायइनायत केयरना गांव में आईटीआई के छात्र 17 वर्षीय अरुण उर्फ गोलू की हत्या कर दी गई थी।
है।

सात स्पेशल टीमें, फिर भी क्राइम कंट्रोल नहीं

ऐसा नहीं है कि क्राइम कंट्रोल के लिए पुलिस अफसरों की ओर से कवायद नहीं की जा रही है। लेकिन फिलहाल सारी कवायदें नाकाफी साबित हो रही हैं। गौरतलब है कि जिले में अपराधियों पर लगाम व खुलासे केलिए सात स्पेशल टीमें भी बनाई गई हैं। इनमें गंगापार, यमुनापार, शहर उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी एसओजी के साथ ही नारकोटिक्स व सर्विलांस टीम शामिल है। इन टीमों में 70 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। सूत्रों का कहना है कि इनमें से ज्यादातर जुगाड़ से लंबे समय से एसओजी में जमे हैं। इसके अलावा एसओजी टीमों की कमान अनुभवहीन हाथों में सौंपे जाने से भी काम प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
 
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प्रयागराज तिहरे हत्याकांड में सामने आया चौंकाने वाला सच, पुलिस ने सुना होता तो जिंदा होते तीन लोग!

प्रयागराज में विस्फोट कर माघ मेले को श्मशान बनाने की धमकी देने वाला देवरिया से गिरफ्तार

सीएए वापस न लेने पर देवरिया महोत्सव और प्रयागराज माघ मेले में बम विस्फोट की धमकी देने वाले रामपुर कारखाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। एसएसपी प्रयागराज का फोन आने के बाद देवरिया पुलिस ने यह कार्रवाई की। उससे पूछताछ चल रही है। साथ ही उसके मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है।

हालांकि आरोपी का दावा है कि उसने पांच-छह महीने पहले ही उस मोबाइल नंबर को बंद कर दिया था जिससे धमकी देने की बात की जा रही है।

एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र के मुताबिक सीएए वापस न लेने पर देवरिया महोत्सव और प्रयागराज के माघ मेले में बम विस्फोट का धमकी भरा मैसेज वायरल हो रहा है। इसे देख जब प्रयागराज की पुलिस ने जांच की तो पता चला कि संदेश भेजनेे वाला शख्स देवरिया के रामपुर कारखाना क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला है।

बृहस्पतिवार की रात प्रयागराज के एसएसपी ने इस मामले से अवगत कराया। इसके बाद रामपुर कारखाना पुलिस को आरोपी को पकड़ने भेजा गया। रात में ही पुलिस उसके घर पहुंची। वह घर पर मिल गया। थाने में स्वॉट और सर्विलांस टीम उससे पूछताछ कर रही है।

एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र का कहना है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी के नंबर का इस्तेमाल कर विदेश से धमकी भरा संदेश भेजा गया है। पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है। जल्दी ही इस मामले पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
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