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युवक को पत्थर और धारदार हथियार से घायल कर तेजाब डाला

बहरिया थाना क्षेत्र के जुगनीडीह गांव निवासी एक युवक को बदमाशों ने चेहरे पर पत्थर और धारदार हथियार से वार करके बुरी तरह जख्मी कर तेजाब डाल दिया। युवक को गंभीर स्थिति में एसआरएन में भर्ती कराया गया है।

युवक एक दिन पहले बाइक और 50 हजार रुपये लेकर घर से निकला था। जानकारी के अनुसार बहरिया थाना क्षेत्र के जुगनीडीह गांव निवासी अमित कुमार यादव (22) पुत्र रमेश चंद यादव सोमवार की सुबह करीब 9 बजे बाइक लेकर घर से निकले थे। शाम शाम तक जब वह वापस नहीं लौटा तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। लेकिन उसका पता नहीं चला।

मंगलवार की सुबह कुछ लोगाें ने जुगनीडीह स्थित पिलखिन देवी मंदिर के पीछे मनसैता नदी के पुल पर एक युवक को बुरी तरह जख्मी और तेजाब से झुलसा देखा। थोड़ी देर में वहाँ लोगों की भीड़ लग गई। पता चला कि युवक जुगनीडीह गांव का अमित है। जानकारी होने पर परिजन भी मौके पर पहुंचे।

इंस्पेक्टर बहरिया बाल लाल प्रसाद और चौकी इंचार्ज सिकंदरा शुभनाथ सहनी मौके पर पहुंचे और युवक को सीएचसी मेधा ले गए। जहां से युवक की हालत गंभीर होने पर एसआरएन के लिए रेफर किया गया है। युवक की पत्नी मीरा देवी ने बताया कि अमित रविवार की सुबह करीब 9 बजे बाइक और घर 50 लेकर घर से निकला था। घटना को अंजाम देने वाले कौन थे पता नहीं चल रहा था। सभी प्रकार की छानबीन है और कुछ नहीं बता पा रहा है।
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यूपी में निर्दोष लोगों के खिलाफ हो रहा है गोहत्या कानून का दुरुपयोग: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में गोवध संरक्षण कानून का निर्दोष लोगों के खिलाफ दुरुपयोग हो रहा है। जब कभी कोई मांस बरामद होता है तो उसे फारेंसिक लैब में जांच कराए बिना गोमांस करार दे दिया जाता है और निर्दोष व्यक्ति को उस अपराध के लिए जेल भेज दिया जाता है, जो शायद उसने किया ही नहीं है। अदालत ने प्रदेश में छुट्टा जानवरों की देखभाल की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश में गोवध अधिनियम को उसकी सही भावना के साथ लागू करने की आवश्यकता है। 

गोवध कानून के तहत जेल में बंद रामू उर्फ रहीमुद्दीन के जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब कभी कोई गोवंश बरामद किया जाता है तो कोई रिकवरी मेमो तैयार नहीं किया जाता है और किसी को नहीं पता होता है कि बरामदगी के बाद उसे कहां ले जाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि गो संरक्षण गृह और गोशाला बूढ़े और दूध न देने वाले पशुओं को नहीं लेते हैं। इनके मालिक भी इनको खिला पाने में सक्षम नहीं है। वह पुलिस और स्थानीय लोगों द्वारा पकड़े जाने के डर से इनको किसी दूसरे राज्य में ले नहीं जा सकते हैं। लिहाजा दूध न देने वाले जानवरों को खुला घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है और वे किसानों की फसल बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे छुट्टा जानवर चाहे सड़क पर हों या खेत में, समाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इनको गो संरक्षण गृह या अपने मालिकों के घर रखे जाने के लिए कोई रास्ता निकालने की आवश्यकता है। 

जमानत प्रार्थनापत्र पर याची के वकील का कहना था कि याची के खिलाफ प्राथमिकी में कोई विशेष आरोप नहीं है। न ही वह घटनास्थल से पकड़ा गया है। पुलिस ने बरामद मांस की वास्तविकता जानने का कोई प्रयास नहीं किया कि वह गोमांस है अथवा किसी अन्य जानवर का। कोर्ट ने कहा कि ज्यादातर मामलों में जब मांस पकड़ा जाता है तो उसे गोमांस बता दिया जाता है और बरामद मांस को फारेंसिक लैब नहीं भेजा जाता है। आरोपी को उस अपराध में जेल जाना होता है जिसमें सात साल तक की सजा है और विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाता है। कोर्ट ने याची की जमानत मंजूर करते हुए उसे निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर रिहा करने का आदेश दिया है।
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फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, यौन शोषण और पास्को एक्ट में गिरफ्तारी पर लगी रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी व परिवार के तीन सदस्यों की यौन शोषण के मामले मे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश करने तक गिरफ्तारी पर रोक लगायी है और विवेचना मे सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

उनके खिलाफ सामान्य आरोप होने के कारण कोर्ट ने राहत दी है। जिसमें नवाज़ुद्दीन के साथ ही उनकी मां मेहरुन्निशा और दो सैनिकों फ़ैयाज़ुद्दीन और अयाज़ुद्दीन शामिल है।

 बच्ची के साथ दुष्कर्म के मुख्य आरोपी एक भाई मिनहाज़ुद्दीन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत नहीं दी, दी है। इसकी याचिका खारिज कर दी है। मुज़फ्फरनगर के बुढ़ाने थाने मे इसी साल 27 जुलाई को नवाज़ुद्दीन और उनके परिवार के खिलाफ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट के तहत प्रथमिकी दर्ज करायी गई है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने दिया है।  
 
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नौवीं के छात्र को कार में खींचकर किया अगवा, घंटे भर में पुलिस ने किया बरामद

थाना क्षेत्र के गणेश मार्केट में नौवीं के छात्र प्रिंस अनितेश को कारसवार तीन लोग अगवा कर ले गए। दिनदहाड़े हुई वारदात से हड़कंप मच गया। सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस ने घंटे भर बाद दो अपहर्ताओं को गिरफ्तार कर अगवा छात्र को सकुशल बरामद कर लिया। जांच में पता चला कि पीड़ित छात्र अपने स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा से बातचीत करता था और इसी को लेकर आरोपी उससे नाराज थे।

आवास विकास योजना कॉलोनी दो में रहने वाले होम्योपैथी चिकित्सक संतोष यादव का 15 वर्षीय बेटा प्रिंस अनितेश नौवीं का छात्र है। बृहस्पतिवार सुबह 10.30 बजे केकरीब वह गणेश मार्केट में स्थित मिठाई की दुकान पर गया था। आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ यादव अपने दो साथियों जीतेंद्र यादव व अभिषेक यादव तीनों निवासी झूंसी के साथ आया और प्रिंस को कार में खींचकर अगवा कर ले गए।

दिनदहाड़े हुई वारदात से हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। जांच पड़ताल के बाद चौतरफा बैरिकेडिंग कराकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। करीब घंटे भर की मशक्कत के बाद एसआई मनोज यादव व उनकी टीम ने सरायतकी झूंसी स्थित इंटर कॉलेज के पीछे स्थित सुनसान स्थान पर पहुंचकर अगवा छात्र को बरामद करते हुए दो आरोपियों ऋषभ व जीतेंद्र को गिरफ्तार किया। जबकि उनका साथी अभिषेक मौके से भाग निकला।

पुलिस के मुताबिक, थाने लाकर पूछताछ में पता चला कि पीड़ित छात्र की अपने स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा से बातचीत होती थी जिसके लिए आरोपी उसे मना करते थे। इसी खुन्नस में उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। एसपी गंगापार धवल जायसवाल ने बताया कि दो आरोपियों को गिररफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एक की तलाश की जा रही है। घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई है।

एलएलबी का छात्र है आरोपी

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला कि मुख्य आरोपी ऋषभ सहसों स्थित कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है। जबकि वारदात में साथ देने वाले उसके दोनों साथी भी छात्र हैं। ऋषभ झूंसी में ही रहने वाले एक मिठाई कारोबारी का भतीजा भी है और पिता की मौत के बाद दुकान पर रहकर ही चाचा का सहयोग करता है। 
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सिर्फ विवाह के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं: हाईकोर्ट 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ विवाह करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं है। क्योंकि ऐसा धर्मपरिवर्तन किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया जाता है। धर्म परिवर्तन के बाद विवाह करने वाले जोड़े को संरक्षण देने का आदेश की मांग करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है।

प्रियांशी उर्फ सबरीन और उसके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से विवाह किया है मगर लड़की के पिता इससे खुश नहीं हैं। दंपति ने कोर्ट से अपने वैवाहिक जीवन में किसी के द्वारा हस्तक्षेप न करने और पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले को देखने से स्पष्ट है कि लड़की जन्म से मुस्लिम है और उसने 29 जून 2020 को धर्म परिवर्तन कर हिन्दू धर्म स्वीकार किया। और 31 जुलाई को उन्होंने हिन्दू रीति से शादी कर ली। इससे स्पष्ट है कि धर्म परिवर्तन सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से किया गया है।

नूर जहां बेगम केस की दी नजीर

कोर्ट ने 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के नूर जहां बेगम केस की नजीर देते हुए कहा कि इसमें कोर्ट ने कहा कि सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। नूर जहां बेगम केस में कई याचिकाओं में एक ही प्रश्न था कि क्या सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन मान्य है जबकि धर्म बदलने वाले को स्वीकार किए गए धर्म के बारे में न तो जानकारी थी और न ही उसमें आस्था और विश्चवास ।

सभी याचिकाओं में एक ही मुद्दा था कि लड़कियों ने  मुस्लिम लड़के के कहने पर इस्लाम स्वीकार किया था। उनको ना तो इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में जानकारी थी और न  ही उसमें आस्था और विश्वास।  अदालत ने इसे कुरान की शिक्षाओं के मद्देनजर स्वीकार्य नहीं माना है।  सुप्रीमकोर्ट ने भी लिली थॉमस केस में कहा है कि इस्लाम में सच्ची आस्था के बिना सिर्फ विवाह के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं है।
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कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हटाए जा सकते नगर पंचायत अध्यक्ष : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी निर्वाचित व्यक्ति को पद से हटाने  की प्रक्रिया कानून में निर्धारित की गई है। इसका पालन करके ही उसे पद से हटाया जा सकता है। कोर्ट ने रामपुर के मसवासी नगर पंचायत के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है । कोर्ट ने कहा है कि जनता की ओर से चुने हुए किसी भी प्रतिनिधि को पद से हटाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पंचायत सदस्य याची को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति डा.वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने नगर पंचायत सदस्य महेश चंद्र भारद्वाज की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने ठेकों के आवंटन एवं विकास कार्यो में भारी वित्तीय अनियमितता की है, जिसकी जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। घोटाले रोकने के लिए उन्हें पद से हटाया जाए।

सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 48 में चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गई है। ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है, खारिज की जाए।

कोर्ट ने संविधान के 74वें संशोधन से स्थानीय चुनी हुई जनतांत्रिक सरकार के उपबंधों एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की मंशा निचले स्तर पर जनतंत्र को लागू करने की है। संविधान संशोधन से लोकल सेल्फ गवर्नमेंट की परिकल्पना को साकार करने का सिस्टम बनाया गया है। पंचायत राज को सांविधानिक दर्जा दिया गया है। चुने हुए प्रतिनिधि को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गयी है। ऐसे में कानून के तहत ही किसी को पद से हटाया जा सकता है। प्रशासनिक आदेश से नहीं। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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टाइनी शाखा संचालक की गला रेतकर हत्या, एक दिन पहले से था गायब

थाना क्षेत्र के लालतारा गांव में टाइनी शाखा संचालक श्रीकांत पटेल 26 की गला रेतकर हत्या कर दी गई। वह बुधवार शाम से लापता था जिस पर परिजनों ने गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि हत्यारे मृतक के पास मौजूद 1.5 लाख रुपये, मोबाइल व बाइक भी लूट ले गए। पुलिस ने बताया कि जांच पड़ताल की जा रही है।

श्रीकांत मेजा व खीरी थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित  सिलौधी गांव में रहने वाले अवध नारायण पटेल के दो बेटों में छोटा था। वह कोहड़ार बाजार में टाइनी शाखा का संचालन करता था। वह रोज बाइक से शाखा पर आता था और शाम को लौट जाता था। बुधवार रात नौ बजे तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। कोहड़ार बाजार के कुछ परिचितों ने बताया कि वह शाम 7.30 बजे केकरीब शाखा बंद कर चला गया था। रात भर खोजबीन के बाद भी कुछ पता नहीं चला तो परिजनों ने सुबह थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस तलाश में जुटी थी कि दोपहर बाद एनटीपीसी के बगल स्थित नहर के पास झाड़ियों में युवक की रक्तरंजित लाश मिली। जानकारी पर आसपास केलोग भी जुट गए और इसी दौरान किसी ने मृतक की शिनाख्त श्रीकांत केरूप में की। तब तक पुलिस भी आ गई। जांच में पता चला कि गला रेतकर उसकी हत्या की गई थी। जानकारी मिली तो परिजन भी आ गए। भाई इंद्रजीत ने बताया कि श्रीकांत ने सुबह ही उससे 1.5 लाख रुपये लिए थे। मौके से उसका मोबाइल व बाइक भी गायब है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल परिवार के लोगों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है।

शाम को हुई थी बात, फिर बंद हो गया मोबाइल

मृतक केपरिजनों ने बताया कि श्रीकांत से उनकी आखिरी बार शाम छह बजे केकरीब बात हुई थी। भाई इंद्रजीत ने बताया कि फोन कर उसने बताया था कि एक घंटे में घर आ जाएगा। आठ बजे तक नहींआया तो लगा कि कहीं रुक गया होगा। नौ बज गए तो खोजबीन शुरू की गई। बताया कि मृतक की दो साल पहले अंजू देवी से शादी हुई थी। पति की मौत पर उसकेआंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर मां फुलवंती व अन्य परिजनों का भी बुरा हाल था। 

मौकेसे मिली शराब की खाली बोतलें, दो संदिग्धों की तलाश

युवक केशव से कुछ दूरी पर शराब की खाली बोतलें मिलीं हैं। उधर जांच पड़ताल में यह भी सामने आया है कि वह कोहड़ार बाजार स्थित टाइनी शाखा से दो युवकों संग बाइक पर जाता दिखा था। हालांकि युवक कौन थे, इसका पता नहीं चल सका है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल परिजनों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है, ऐसे में अज्ञात में केस लिखकर जांच की जा रही है। 
  • दो संदिग्ध युवकों की तलाश की जा रही है। मृतक के पास मौजूद रुपये कहां गए, इसका पता लगाने के लिए उसकेबैंक खाते का विवरण मंगाया जा रहा है। बाइक व मोबाइल का भी पता लगाया जा रहा है। - चक्रेश मिश्रा, एसपी यमुनापार 

पोते ने की थी बुजुर्ग की हत्या, गिरफ्तार

मांडा केभरारी गांव में 72 वर्षीय शोभनाथा यादव की हत्या का बृहस्पतिवार को खुलासा हो गया। पुलिस का दावा है कि वारदात को मृतक केपोते ने ही अंजाम दिया था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शोभनाथ की हत्या नौ सितंबर को रात में सोते समय की गई थी। अफसरों ने बताया कि शक के आधार पर मृतक के पोते नीरज यादव पुत्र रविशंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल ली।

बताया कि वारदात से एक दिन पहले यानी आठ सितंबर को दादा ने उसे खाद लाने केलिए रुपये दिए थे। लेकिन वह खाद लाना भूल गया। यह पता चलने पर दादा ने उसे गालियां देते हुए जमकर पीट दिया। इसी बात पर आपा खोते हुए उसने धक्का मारकर दादा को गिरा दिया जिससे वह चोटिल हो गए। इसकेबाद चक्की का एक पल्ला पैर व दूसरा पल्ला सीने पर रखकर उन्हें मार दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 
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विधायक विजय मिश्रा को फिलहाल राहत, मिला पक्ष रखने का मौका

prayagraj news : श्रीकांत पटेल (फाइल फोटो)
विधायक विजय मिश्रा को बाघंबरी गद्दी स्थित भवन के ध्वस्तीकरण मामले में फिलहाल राहत मिल गई है। बुधवार को सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण का प्रकरण वापस प्रयागराज विकास प्राधिकरण को भेजा और अपीलकर्ता का पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय पारित करने का आदेश दिया। अपीलकर्ता को पक्ष रखने के लिए दो नवंबर तक का समय दिया।

पांच मजिला इस भवन के भूतल पर दुकानें हैं तथा ऊपर के चार मंजिल में फ्लैट हैं। नक्शा स्वीकृति नहीं होने के आधार पर इलाहाबाद (प्रयागराज) विकास प्राधिकरण ने 2007 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। अब गैंगस्टर ऐक्ट के तहत माफियाओं की संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में विजय मिश्रा की इस संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस मामले में दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी के यहां अपील करने का आदेश दिया था।

इसी परिप्रेक्ष्य में अपीलकर्ता ने मंडलायुक्त के यहां अपील की। बुधवार को दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मंडलायुक्त ने अपीलकर्ता को दो नवंबर तक पीडीए के जोनल अधिकारी के सामने पक्ष रखने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया है कि अपीलकर्ता को पूर्व में निर्गत नोटिस तामील कराने में निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके अलावा 2007 यानी, अब 13 वर्ष बाद कार्रवाई के आदेश को अमल में लाया जा रहा है। उन्होंने आदेश दिया कि अब पूरा प्रकरण अपीलकर्ता के संज्ञान में है।

इसलिए अपीलकर्ता दो नवंबर तक जोनल अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित हों। जोनल अधिकारी को भी सुनवाई के बाद छह नवंबर तक संशोधित निर्णय पारित करने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया कि कि अपीलकर्ता यदि दो नवंबर तक अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं होती हैं तो जोनल अधिकारी दिसंबर 2007 में पारित आदेश के क्रम में कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे।
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बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हाकिमलाल के बहाने सपा ने साधे कई तीर, चुनाव से पहले दिखाई ताकत

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधायकों के बगावती तेवर को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस बहाने पार्टी ने कई सियासी समीकरणों को साधा है। पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के खिलाफ सपा ही मुख्य विपक्षी दल है। हालांकि विधायकों ने बसपा से बगावत की बात तो स्वीकार की है, लेकिन वह किस तरफ जाएंगे इसे लेकर अभी उन्होंने मौन साध रखा है। उनकी इस चुप्पी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात को नकाराने को विधायकी बचाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सपा के साथ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक दिख रही है। सभी विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत होने की होड़ है, ताकि मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके। इस कवायद के बीच प्रतापपुर के बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद समेत पांच विधायकों की बगावत सपा के लिए लाभकारी मानी जा रही है। प्रयागराज की सियासी समीकरण को देखें तो सपा के पूरे मंडल में एक मात्र विधायक उज्जवल रमण सिंह है। ऐसे में हाकिम लाल और मुज्तबा सिद्दीकी की बसपा से नाराजगी पर सपा नेताओं की नजर रही। ये दोनों नेता पार्टी में लंबे समय से खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव में इन पर बसपा उम्मीदवार के खिलाफ जाने का भी आरोप लगा था। मौजूदा विधायक होने के बावजूद इनके टिकट कटने की बात भी सामने आने लगी थी। इसके अलावा सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती हाथरस समेत कई मुद्दों पर उस तरह से मुखर होकर सामने नहीं आईं, जोकि उनकी पहचान है।

ऐसे में बसपा विधायकों ने दूसरे दलों में संपर्क साधना शुरू कर दिया। इस नाराजगी को बगावती रूप देने के लिए सपा हाईकमान ने कभी बसपा में रहे अपने वरिष्ठ नेता को आगे किया। बताया जा रहा है कि उन्हीं सपा नेता की अगुवाई में बगावत की पूरी पटकथा लिखी गई और दोनों विधायकों की अखिलेश यादव से मुलाकात भी कराई गई। हालांकि राज्यसभा के लिए सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद बसपा समेत अन्य सभी दावेदारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में बसपा विधायकों के इस बगावत का सपा को तात्कालिक तौर तो बड़ा फायदा होने नहीं जा रहा लेकिन 2022 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर इसे बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

जिले की सियासत को देखें तो खासतौर पर, पिछड़ी जाति बहुल वाले हंडिया और प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इन दोनों विधायकों के आने से सपा को अपने परंपरागत मतों के ध्रुवीकरण में मदद मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बसपा से बगावत करने वाले दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता बची रहती है तो सपा जिले में तीन मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में उतरेगी। वहीं अन्य विपक्षी दलों के खाते में एक भी विधायक नहीं होगा। इसका भी सपा को फायदा हो सकता है। ऐसे में बसपा विधायकों के बगावत को सपा के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
  • ‘बहनजी (मायावती)  आज भी हमारी नेता हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है। हमारी नाराजगी पार्टी कोऑर्डिनेटर से है। पार्टी में हमारी उपेक्षा की जा रही है। बैठकों में हमें नहीं बुलाया जाता है। बैठक में पहुंच भी गए तो पीछे की सीट पर बैठाया गया। बहनजी से मिलने की कोशिश की गई लेकिन उनसे भी नहीं मिलने दिया गया। उनसे मिलकर अपनी बात रख लेते तो हमारा दर्द कुछ कम हो जाता। इसके अलावा हम विधायक हैं। इसके बाद भी दूसरे प्रत्याशी की तलाश की जा रही है। दूसरे दल में जाने का हमलोगों का कोई इरादा नहीं है। हम बसपा में हैं और रहेंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की बात भी झूठी है। यदि पार्टी हमारे के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो हम 2021 तक देखेंगे और हमें लगेगा कि बसपा से टिकट नहीं मिलेगा तो दूसरी राह पकड़ने के बारे में भी विचार करेंगे।’ - हाकिम लाल बिंद, विधायक
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आदेश न मिलने से नहीं गिरा विधायक विजय मिश्रा का कांप्लेक्स, दिन भर जुटी रही तमाशबीनों की भीड़

अल्लापुर पुलिस चौकी के सामने विधायक विजय मिश्रा के पांच मंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स के सामने बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। विजय मिश्रा इन दिनों आगरा जेल में बंद हैं। ध्वस्तीकरण के आदेश के इंतजार में पीडीए अफसर और पुलिस फोर्स भी मुस्तैद रही, लेकिन शाम को ध्वस्तीकरण मामले में रोक के आदेश के बाद सभी लौट गए। 

पीडीए सूत्रों के मुताबिक विजय मिश्रा के कांप्लेक्स को ध्वस्त करने के लिए अफसरों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। पुलिस फोर्स भी तैयार थी, इंतजार था तो बस कमिश्नर के आदेश का, जो शाम तक नहीं मिला। बाद में आए आदेश में कार्रवाई से विधायक को राहत देते हुए सुनवाई का मौका दिया गया है। इस मामले में पीडीए अफसर भी तलब किए गए हैं। 

उधर पीडीए में विजय मिश्रा के कांप्लेक्स और मकान की भूमि संबंधी पत्रावलियों को खंगालने काम जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि अभिलेखों में नक्शा स्वीकृति के संबंध में कोई पत्राचार नहीं पाया गया। वहीं जारी नोटिस और उनकी तामीला के बारे में जानकारी एकत्र की गई। पूरे मामले में पीडीए अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि आदेश का अनुपालन किया जाएगा।

चूंकि विजय मिश्रा की अपील कमिश्नर कोर्ट में थी, इसलिए हर अफसर इस बारे में कुछ बोलने से बचते रहे। वहीं पीडीए ने किराए पर मंगाई गई पोकलैंड मशीन देर शाम वापस ले जाने का मौखिक आदेश दिया गया। प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के लिए पीडीए और नगर निगम की जेसीबी मशीनें दिन भर खड़ी रहीं। प्रवर्तन दल के अधिकारी, कर्मचारी वरिष्ठ अफसरों के आदेश का इंतजार करते रहे। इसके कारण बुधवार को शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया जा सका। 

अल्लापुर पुलिस चौकी के पास उस कांप्लेक्स के पास बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। वाहनों से आने जाने वाले भी, रुककर कार्रवाई के बारे में पूछते और आगे बढ़ जाते। कांप्लेक्स के सामने भी कुछ लोग जुटे रहे। बताया गया कि वह कारोबारी हैं और विजय मिश्रा के कांप्लेक्स में किराएदार थे। देर शाम तक कार्रवाई न होने के कारण लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोग यह भी कहते  सुने गए कि अतीक समेत अन्य माफियाओं के साथ नोटिस, अपील जैसी राहत की बात सामने नहीं आई। इस मामले में ऐसा क्या हो गया कि तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बीच धवस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
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पूर्व सांसद अतीक अहमम के करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू 

अतीक अहमद के 11 खाते सीज करने के बाद अब उसके करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू हो गई है। इतना ही नहीं अतीक गिरोह के खास शूटरों और गुर्गों के बैंक लोन का बैंकों से हिसाब किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि अतीक के परिजनों तथा अन्य करीबियों ने उसके रसूख का इस्तेमाल करते हुए संपत्ति अर्जित की है। ऐसे खातों को गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज किया जा सकता है। पुलिस जल्द ही अतीक के परिजनों तथा अन्य गुर्गों के खातों को सीज कर सकती है। 

अतीक अहमद के अलग-अलग बैंकों में 11 खाते थे जिसमें तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा की रकम थी। सभी खातों को सीज कर उन्हें कुर्क कर दिया गया। अब पुलिस अतीक की पत्नी, बच्चों, भाई और अन्य करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू कर दी है। उनके खातों के बारे में बैंकों से जानकारी ली गई है। परिवार वालों के साथ ही खास गुर्गों और शूटरों के खातों के बारे में पुलिस जानकारी इकट्ठी की है।

उनके खाते जिस बैंक में हैं, अधिकारियों से उनका हिसाब-किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि सभी खातों के लेन-देन का विवरण मिल जाने के बाद उनकी आय, उस आय पर दिये गए इनकम टैक्स समेत तमाम बिंदुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद उन्हें सीज कर कुर्क करने के लिए डीएम से अनुमति मांगी जाएगी। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14-1 के तहत अतीक अहमद की संपत्तियों की जांच करने वाले इंस्पेक्टर नीरज वालिया ने बताया कि अतीक के साथ ही उनके करीबी रिश्तेदारों, शूटरों और गुर्गों के खातों की जांच की जा रही है। 

अशरफ, आबिद और तोता की संपत्तियों की भी जांच 

अतीक अहमद के साथ-साथ अशरफ, आबिद प्रधान और तोता की संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। अशरफ के खिलाफ धूमनगंज थाने में गैंगस्टर की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। गैंगस्टर के उसी मामले में पुलिस आबिद प्रधान और जुल्फिकार उर्फ तोता की भी जांच शुरू कर दी गई है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को जांच सौंपी गई है। इंस्पेक्टर ने बताया कि यह जांच अतीक के गैंगस्टर के मुकदमे से अलग है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि अशरफ, आबिद प्रधान और तोता ने अपराध के माध्यम से कितनी संपत्ति बनाई है। 
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धोखाधड़ी के मुकदमे में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या दोषमुक्त, सरकार ने वापस लिया मुकदमा

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के खिलाफ धोखाधड़ी के एक प्रकरण में अभियोजन द्वारा मुकदमा वापसी की अर्जी मंजूर कर मुकदमा समाप्त कर दिया है। साथ ही केशव मौर्य सहित 10 लोगों को दोषमुक्त कर दिया है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार गुप्ता डीजीसी जीसी अग्रहरि और कुंज बिहारी मिश्रा को सुनकर दिया है।  

उत्तर प्रदेश शासन की ओर से डीएम कौशांबी को मुकदमा वापस लेने का निर्देश दिया गया था, जिसे अभियोजन ने स्पेशल कोर्ट में प्रस्तुत किया था। इसमें यह मांग की गई थी कि केशव मौर्या के विरुद्ध विचाराधीन मुकदमे को वापस लेने की अनुमति प्रदान की जाए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में जनता को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है, इसलिए शासन को यह मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी जाती है। 

यह प्रकरण था

कौशांबी के मोहब्बतपुर पइंसा थाने पर 25 अगस्त 2008 को चंद्रशेखर प्रसाद थाना प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोग फर्जी संस्था ‘जय मां  दुर्गा कमेटी’ बनाकर सभा की अनुमति ली और फिर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने का आयोजन करने लगे। लाउडस्पीकर से उद्घोषणाएं की गईं। इस संबंध में जांच की गई तो पता चला कि संस्था फर्जी है। जिस समय यह सभा की गई, उस समय धारा-144 लगी हुई थी और उसका उल्लंघन किया गया था।

पुलिस ने इस प्रकरण में राधेश्यामश, अनिल दुबे, अशोक मौर्य, रामखेलावन, रमेशचंद्र, विनोद पटेल, विद्वान गोस्वामी, राम लोटन, श्याम प्रसाद और केशव मौर्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय भेजा था। कोर्ट ने संज्ञान लेकर कार्यवाही की, जिसमें केशव मौर्य सहित सभी को जमानत पर रिहा किया गया था। शासन ने इस मुकदमे को जनहित में वापस लिए जाने का निर्णय लिया था। 
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पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत, कोर्ट में पेशी पर रोक, कोर्ट ने अपने ही आदेश पर लगाई रोक

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत देते हुए उसकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेशी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रकरण में आरोप के स्तर पर बचाव पक्ष की बहस नहीं सुन ली जाती है, तब तक अतीक अहमद को व्यक्तिगत रूप से पेश न किया जाए। एक दिन पहले ही अदालत ने अतीक को आरोप तय किए जाने पर सुनवाई के समय हाजिर होने का आदेश दिया था। 

यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने अतीक अहमद की ओर से पेश अर्जी पर उनके अधिवक्ता खान शौकत एवं राधेश्याम पांडे तथा अभियोजन को सुन कर दिया। जानलेवा हमले के प्रकरण में स्पेशल कोर्ट ने 27 अक्तूबर को आदेश दिया था कि आरोप तय होने के लिए अभियुक्त अतीक अहमद की कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी आवश्यक है। कोर्ट ने अतीक अहमद को उपस्थित कराने के लिए गृह सचिव को पत्र लिखे जाने का आदेश दिया था।

बुधवार 28 अक्तूबर को अतीक की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया कि उनके अधिवक्ता बहस के लिए उपस्थित नहीं हो पाए थे। आरोप तय होने के पूर्व उन्हें अपना पक्ष रखना है, जिसके लिए बहस होनी है, इसलिए अतीक अहमद पर आरोप तय किए जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश किए जाने के आदेश को स्थगित रखा जाए और व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाए। कोर्ट ने बचाव पक्ष की अर्जी मंजूर कर ली है।
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