विज्ञापन
विज्ञापन
आज ही बनवाएं फ्री जन्मकुंडली, और जानें कुंडली पर सूर्य का प्रभाव
Kundali

आज ही बनवाएं फ्री जन्मकुंडली, और जानें कुंडली पर सूर्य का प्रभाव

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

From nearby cities

विज्ञापन
Digital Edition

‘भाई’ यानी अतीक का सबसे खास गुर्गा है तोता, 40 मुकदमे हैं सिर पर

कसारी मसारी के रहने वाले जिस जुल्फिकार उर्फ तोता का तीन मंजिला आशियाना रविवार को ढहाया गया, वह माफिया अतीक अहमद का सबसे खास गुर्गा है। 40 साल के इस हिस्ट्रीशीटर अपराधी पर उसकी उम्र के बराबर मुकदमे दर्ज हैं। कुल 40  मुकदमों का आरोपी तोता आईएस 227 गिरोह का सबसे शॉर्प शूटर है जिस पर हत्या, हत्या केप्रयास, अपहरण, लूट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है।

अतीक अहमद का राइट हैंड माने जाने वाले तोता का पिता अंसार पहलवान कभी अतीक का बेहद भरोसेमंद था। उसकी हत्या के बाद तोता अतीक की पनाह में जा पहुंचा और उसका शागिर्द बन गया। धीरे-धीरे उसने न सिर्फ भरोसा जीता बल्कि अतीक के गिरोह का सबसे खास कारिंदा हो गया। निशाना अचूक होने के कारण ही वह शॉर्प शूटर बन बैठा और फिर अतीक के इशारे पर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा। 2003 में उस पर पर पहला मुकदमा हत्या के प्रयास के आरोप में धूमनगंज थाने में दर्ज हुआ। जिसमें लंबे समय तक वह फरारी काटता रहा।

2007 में उस पर अपहण, मारपीट, धमकी, बलवा समेत अन्य धाराओं में दूसरा केस दर्ज हुआ। 2008 में चोरी, धोखाधड़ी केसाथ कुल पांच मुकदमे दर्ज हुए जिसमें गैंगस्टर केतहत की गई कार्रवाई भी शामिल थी। इसके बाद उस पर दर्ज मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती चली गई जिसमें हत्या से लेकर हत्या का प्रयास, अपहरण, लूट, चोरी, रंगदारी मांगना व बमबाजी जैसे मामले शामिल थे। आपराधिक वारदातों में लगातार नाम आने के बाद 2018 में  उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत दो मामले धूमनगंज थाने में दर्ज किए गए। धूमनगंज के अलावा उस पर कर्नलगंज, कैंट, खुल्दाबाद व करेली थाने में मुकदमे दर्ज हैं। 

कई मामलों में अतीक संग सहअभियुक्त

जुल्फिकार उर्फ तोता कई आपराधिक मामलों में अतीक अहमद संग सहअभियुक्त भी है। इनमें 2015-16 में धूमनगंज में ट्रैक डिपो के पास जीतेंद्र पटेल हत्याकांड,  मरियाडीह में अल्कमा सुरजीत हत्याकांड, राजूपाल हत्याकांड के गवाह को धमकी, प्रॉपर्टी डीलर को अगवा कर धमकाने जैसे कुछ चर्चित मामले शामिल हैं।

2017 में भेजा गया था जेल 20 हजार का था इनामी

पुलिस ने बताया कि अल्कमा सुरजीत हत्याकांड में नाम आने केबाद तोता फरार हो गया था। जिसके बाद उस पर गैंगस्टर की भी कार्रवाई की गई। 20 हजार का इनाम भी घोषित किया गया। 2017 में धूमनगंज इलाके में मुठभेड़ के दौरान उसे क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया।
 

कबूला था, भाई के लिए करता हूं काम

2017 में गिरफ्तारी केदौरान पुलिस अफसरों ने दावा किया था कि तोता ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह अतीक के लिए काम करता है। उसके लिए रंगदारी, जमीन कब्जाने समेत अन्य आपराधिक वारदातें भी कबूलीं। पुलिस अफसरों ने यह भी दावा किया था कि जीतेंद्र पटेल हत्याकांड के बाबत पूछताछ में भी तोता ने बताया कि उसे पहली गोली अशरफ जबकि दूसरी गोली उसने मारी थी।

गैंगस्टर के सभी मुकदमों में होगी 14(1) की कार्रवाई

पुलिस अफसरों का कहना है कि अतीक अहमद गिरोह के जितने भी सदस्यों पर गैंगस्टर के मामले दर्ज हैं, उन पर 14(1) की कार्रवाई की जाएगी। सीओ अजीत सिंह चौहान ने बताया कि आईएस 227 गिरोह के सदस्यों पर गैंगस्टर के मुकदमों की पड़ताल कराई जा रही है। इनकी अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों को चिह्नित कर जल्द ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के माध्यम से जिला प्रशासन को भेजी जाएगी। अनुमति मिलने के बाद इन संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा। 
... और पढ़ें

पूर्व सांसद अतीक अहमद के सबसे खास करीबी जुल्फिकार उर्फ तोता का मकान पीडीए ने किया ध्वस्त

ग्राम प्रधान के पद पर अस्थायी नियुक्ति का अधिकार किसे, हाईकोर्ट ने डीएम और डीपीआरओ से मांगी जानकारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पदसे हटाए गए ग्राम प्रधान के पद पर किसी सदस्य की अस्थायी नियुक्ति करने के अधिकार पर जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव पंचायत राज से पूछा है कि  ग्राम प्रधान को पदच्युत कर किसी सदस्य की उस पद पर नियुक्ति का अधिकार जिलाधिकारी या जिला पंचायतराज अधिकारी में से किसे है ?

एटा की सीता देवी की याचिका पर सुनवाई कर रहे  न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने यह आदेश दिया।  याचिका पर अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि ग्राम प्रधान को हटाने व सदस्य की इस पद पर अस्थायी नियुक्ति का सक्षम अधिकारी कौन है, यह विचारणीय मुद्दा है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव पंचायतराज से यह बताने को कहा है कि उप्र पंचायतराज अधिनियम के तहत इनमें से सक्षम अधिकारी कौन है। क्योंकि हाईकोर्ट में जिलाधिकारी के ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं आ रही हैं।

ऐसे ही एक मामले में याची ग्राम पंचायत सदस्य सीता देवी का कहना है कि राज्य सरकार की जुलाई 1966 की अधिसूचना के अनुसार प्रधान की नियुक्ति का अधिकार जिला पंचायतराज अधिकारी को है। जबकि जिलाधिकारी ने  कानून के विपरीत ग्राम प्रधान को पदच्युत कर सदस्य को शैक्षिक योग्यता के आधार पर चुनाव होने तक ग्राम प्रधान का दायित्व सौंप दिया है।  जिलाधिकारी एटा के आदेश को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

कोई जवाब न आने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अपर मुख्य सचिव पंचायतराज से सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए व्यक्तिगत हलफ़नामा मांगा है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव से इस संबंध में सरकार की अधिसूचना भी दाखिल करने को कहा है। मामले के तथ्यों के अनुसार एटा के अलीगंज ब्लाक के कंचनपुर आसे  ग्राम पंचायत के टपुआ गांव निवासी वीरेन्द्र सिंह यादव ने ग्राम प्रधान पिंकी यादव पर वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग में शिकायत की। जांच में आरोप की पुष्टि की गई है। प्रधान पर तीन लाख 93 हजार रुपये सरकारी धन के गबन का आरोप है।

जिलाधिकारी एटा ने धारा 95 (1)छह के अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रधान को पदच्युत कर दिया और शैक्षिक रूप से अधिक योग्य सदस्य ऋषि कुमार को 28 जुलाई 2019 को नया प्रधान चुने जाने तक ग्राम प्रधान का दायित्व सौंप दिया। इस आदेश का अनुमोदन जिला पंचायतराज अधिकारी ने भी कर दिया है। याचिका में ग्राम प्रधान की नियुक्ति के अधिकार को लेकर सवाल उठाया गया है।
... और पढ़ें

ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने नौकरी के नाम पर बुलाकर युवती से किया था दुष्कर्म

ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र पर दर्ज दुष्कर्म मामले की जांच शुरू हो गई है। पीड़िता की ओर से उस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रयागराज में हुई घटना के संबंध में आरोप है कि विधायक ने उसे अल्लापुर स्थित अपने आवास पर नौकरी के बहाने बुलाकर दुष्कर्म किया था। पीड़िता का यह भी आरोप है कि विधायक वीडियो चैट पर उससे अश्लील डिमांड करते थे। 

पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि प्रयागराज में विधायक ने उससे 2015 में दुष्कर्म किया। 2014 मेें धनापुर में दुष्कर्म के बाद विधायक ने उसे कई बार अपने पास बुलवाया लेकिन वह नहीं गई। आरोप है कि 2015 में विधायक ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अल्लापुर स्थित अपने मकान पर बुलवाया। शक न हो इसके लिए दस्तावेज भी मंगवाए। यहां पहुंचने के बाद उसने डरा-धमकाकर उससे दुष्कर्म किया। इसी दौरान उसका अश्लील वीडियो क्लिप भी बनाया गया। जिसके जरिए उसे बाद में ब्लैकमेल किया गया। 

वीडियो चौट पर करते थे अश्लील डिमांड

पीड़िता का यह भी आरोप है कि उत्पीडन से वह पूरी तरह  टूट चुकी थी। जिसके बाद 2016 में वह मुंबई चली गई। लेकिन विधायक ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। वह लगातार उससे न सिर्फ बात करता रहा बल्कि डरा धमकाकर वीडियो कॉलिंग के जरिए संपर्क करता। वीडियो चैट के दौरान वह अश्लील डिमांड भी करता था। न मानने पर जान से मारने की धमकी देता था। 

थाने में की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

पीड़िता का यह भी आरोप है कि 2014 में हुई घटना के बाद उसने विधायक के खिलाफ वाराणसी स्थित थाने में शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह औराई स्थित थाने में भी गई लेकिन वहां से उसे भगा दिया गया। सत्ता तक पहुंच होने व विधायक की दबंगई के चलते वह भी चुप होकर बैठ गई। 

किरायेदारों में दहशत, खुद खाली कर दिया भवन

माफिया के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के क्रम में विधायक विजय मिश्रा की जिले में स्थित दो संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलने की चर्चा है। भले ही अल्लापुर स्थित व्यावसायिक काम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है लेकिन दहशत में आए किरायेदारों ने भवन को खाली कर दिया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि संपत्तियां चिह्नित की गई हैं लेकिन आगे की कार्रवाई के संबंध में अब तक कोई आदेश उन्हें नहीं मिला है। जिले में चिह्नित माफिया के खिलाफ पिछले कई दिनों से लगातार कार्रवाई चल रही है।

इसके तहत अतीक अहमद, बच्चा पासी, दिलीप मिश्रा व राजेश यादव के साथ ही उनके गुर्गों की भी अवैध संपत्तियों पर बुल्डोजर चलवाया गया। इसी क्रम पुलिस की ओर से विधायक विजय मिश्र की अवैध संपत्तियों को भी चिह्नित किया गया। चर्चा रही कि इन पर भी जल्द ही जिला प्रशासन की अनुमति के बाद कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। बता दें कि इस व्यावसायिक भवन के साथ ही विधायक की आलीशान कोठी भी चिह्नित की गई है। मामले में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि विधायक की संपत्ति कुर्क करने के संबंध में उन्हेें कोई निर्देश फिलहाल नहीं प्राप्त हुआ है। उच्चाधिकारियों के आदेश के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
... और पढ़ें
विधायक विजय मिश्र। विधायक विजय मिश्र।

exclusive : प्रयागराज जिले के 13 लाख वाहन स्वामियों को लगवानी होगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

जिले की सड़कों पर दौड़ रही करीब 13 लाख गाड़ियों के मालिकों को अब अपने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी प्लेट लगानी पड़ेगी। ये नंबर प्लेट वाहन कंपनियों की एजेंसियों पर लगेंगी। नंबर प्लेट के लिए लोगों को शुल्क भी देना होगा।  

संभागीय परिवहन अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि जिले में करीब 13 लाख वाहन हैं, जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगनी हैं। ये नंबर प्लेट वाहन कंपनियों की एजेंसियों पर लगेंगी । इसके लिए सरकार की ओर से वाहन कंपनियों के साथ एजेंसियों को भी निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वाहन स्वामी जब एजेंसी पर हाई सिक्योरिटी प्लेट लगवाने जाएंगे तो उसकी डिटेल ऑनलाइन परिवहन विभाग को भी मिल जाएगी। एजेंसी संचालक को पूरी डिटेल ऑनलाइन मुहैया करानी जरूरी है। इससे विभाग को रोजाना का विवरण पता चलता रहेगा कि आखिरकार कितने लोगों ने नंबर प्लेट लगवाईं। 
यह है समयावधि

परिवहन विभाग ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने का शुल्क और समय भी निर्धारित किया है। नंबर प्लेट लगने के बाद ही आरटीओ कार्यालय में सारे काम हो सकेंगे। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए चार पहिया वाहन के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये और दो पहिया के लिए 200 से 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। जो वाहन एक अप्रैल 2005 के पहले के हैं, उन्हें चार महीने में नंबर प्लेट बदलवानी होंगी। जो वाहन एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2010 के बीच वाले हैं, उनके लिए छह माह की अवधि निर्धारित की गई है। इसी तरह जो वाहन एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2015 तक की समयावधि के हैं, उन्हें आठ महीने और जो एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 तक के हैं, उन्हें 10 महीने में हाई सिक्योरिटी वाली नंबर प्लेट लगानी होंगी। 
... और पढ़ें

शिक्षक भर्ती: धरने पर बैठे अभ्यर्थी देर रात उठाए गए

69000 सहायक अध्यापक भर्ती मेें आवेदन की गलती के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर होने पर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर धरना दे रहे अभ्यर्थियों को सोमवार देर रात पुलिस ने हटा दिया। कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस ने आश्वासन दिया जिसके बाद नाराज अभ्यर्थी माने। मंगलवार को इस मुद्दे पर वार्ता होगी। धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना था कि कोर्ट ने आवेदन की गलती सुधारने के पक्ष में आदेश दिया है, इसके बाद भी बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से कुछ नहीं किया गया। कुछ जिलों में आवेदन में गलती होने के बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया।

शनिवार को सचिव ने अभ्यर्थियों से मोबाइल पर बात कर समस्या सोमवार तक हल करने का आश्वासन दिया था, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। सोमवार को सचिव न तो अपने कार्यालय आए और न ही उन्होंने छात्रों के लिए कुछ किया। उनके इंतजार में प्रदेश के अलग-अलग भागों से कई अभ्यर्थी आए हैं, इसमें महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। बड़ी संख्या में अभ्यथी भूख से परेशान सचिव का इंतजार करते रहे। 

अभ्यर्थियों का कहना था कि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद गिनती के चार से पांच दिन ही कार्यालय आए। शेष वह लखनऊ स्थित महानिदेशक कार्यालय से काम करते रहे। पूरी शिक्षक भर्ती खत्म होने के बाद भी वह एक भी दिन कार्यालय नहीं आए। सचिव की अनुपस्थिति में जब धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने संयुक्त सचिव विजय शंकर मिश्र बात की तो उनका कहना था कि हमारे पास किसी जिले का रिकार्ड नहीं है, वह कुछ नहीं कर सकते। छात्रों ने कहा कि हमारी मांग नहीं मानी गई तो भूख हड़ताल होगी।
... और पढ़ें

प्यार के नाम पर गुजरात ले जाकर नाबालिग की गला घोंटकर हत्या

यमुनापार के मेजा में प्यार के नाम पर धोखे से गुजरात ले जाकर नाबालिग को मौत के घाट उतार दिया गया। किशोरी की हत्या के बाद शव झाडिय़ों में फेंककर आरोपी प्रेमी घर भाग आया। गुजरात पुलिस से हत्या की सूचना मिलने पर मेेजा पुलिस ने आरोपी को पकडक़र पूछताछ की तो उसने जुर्म कबूल लिया। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 

मांडा के खुरमा गांव निवासी रामदास की बेटी मौसम(17) मेजा के नेवरिया गांव स्थित अपने ननिहाल आई थी। 27 सितंबर की शाम वह संदिज्ध हाल में लापता हो गई। परिवारवालों ने गांव के ही विजयशंकर पर किशोरी को बहलाफुसला कर ले जाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया कि गुजरात में निजी कंपनी में काम करने वाला आरोपी उनकी बेटी पर बुरी नीयत रखता था।  अफसरों के मुताबिक, तलाश में जुटी पुलिस को 15 अक्तूबर को लापता किशोरी का शव गुजरात के वलसाड स्थित वापी में मिलने की सूचना प्राप्त हुई।

टीम परिजनों को लेकर पहुंची तो पता चला कि उसकी गला दबाकर हत्या करने के बाद शव झाडिय़ों में फेंक दिया गया था। उधर जांच में पता चला कि आरोपी गुजरात स्थित कंपनी से भी काफी दिनों से गायब है। पुलिस ने बताया कि सोमवार को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आरोपी विजयशंकर को मेजा क्षेत्र से ही तब पकड़ा गया जब वह कहीं भागने की फिराक में था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने ही किशोरी की हत्या की और फिर शव फेंककर भाग आया। 

प्रेमिका नहीं मान रही थी बात, इसलिए मार डाला

पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ मेें आरोपी ने बताया है कि वह किशोरी को लेकर गुजरात गया लेकिन वहां आईडी न होने के चलते उन्हें रहने की जगह नहीं मिली। इसी दौरान खुद पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी पर वह बौखला गया। बचने के लिए उसने किशोरी से वापस घर लौटने को कहा लेकिन वह उसके लिए तैयार नहीं हुई। इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और उसने मौका पाकर उसकी हत्या कर दी। एसपी यमुनापार चक्रेश मिश्रा ने बताया कि आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
... और पढ़ें

Prayagraj Corona Update: प्रयागराज में कोविड जांच 4915, सिर्फ 148 नए संक्रमित, दो मौत

Murder
जिले में कोविड संक्रमण की हो रही जांच के सापेक्ष संक्रमितों की दर काफी कम हो गई है। सोमवार को कोविड जांच के लिए कुल 4915 सैंपल लिए गए। वहीं संक्रमितों की संख्या 148 ही रही। 24 घंटे में 200 लोगों ने कोरोना को मात दी। उपचार के दौरान दो कोरोना संक्रमितों की मौत भी हुई। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक 24 घंटे में 200 लोग कोविड संक्रमण से मुक्त हुए। इनमें विभिन्न कोविड अस्पतालों से 33 मरीज डिस्चार्ज किए गए। 167 संक्रमितों का होम आइसोलेशन पूरा हुआ। जिले में एक्टिव मरीजों की संख्या 1565 रही। 

सर्वाधिक 85 मरीज एसआरएन अस्पताल में भर्ती

सोमवार को कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों में 218  मरीज भर्ती रहे। इनमें सर्वाधिक 85 कोरोना संक्रमित एसआरएन अस्पताल में उपचार करा रहे हैं। रेलवे हॉस्पिटल में 24, बेली अस्पताल में 58 मरीज, यूनाइटेड मेडिसिटी में 27, साईंनाथ एएमए हॉस्पिटल में 24 संक्रमितों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। 
... और पढ़ें

सीएम बोले, शाहपुर नेवादा के प्रधान ने कायम की मिसाल, बनवाएंगे आदर्श ग्राम पंचायत

होलागढ़ के शाहपुर नेवादा गांव के प्रधान और ग्रामीणों के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा, क्योंकि इस दिन उनके काम को प्रदेश के मुखिया से सम्मान मिला। गांव के पंचायत भवन को पूरे प्रदेश में मॉडल के तौर पर पहले ही चुना जा चुका है, सोमवार को ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधान सुमंत लाल तिवारी से बात भी की। मुख्यमंत्री ने सुमंत लाल के काम की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यों से दूसरे ग्राम प्रधानों के लिए मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री ने सुमंत को आगे भी अच्छे काम के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि नेवादा को आदर्श ग्राम पंचायत के रूप में स्थापित किया जा सके। इसके लिए उन्होंने डीएम को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन कार्यक्रम में पूरे प्रदेश के 18847 सामुदायिक शौचालयों और 377 पंचायत भवनों का लोकार्पण किया। इसी के साथ उन्होंने प्रस्तावित पंचायत भवनों का शिलान्यास किया। इसका यहां कलक्ट्रेट परिसर स्थित एनआईसी में सीधा प्रसारण किया गया। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री ने सुमंत लाल के अलावा अलीगढ़, गोरखपुर, ललितपुर और मिर्जापुर के एक-एक ग्राम प्रधानों से बात की। नेवादा के प्रधान सुमंत लाल से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने गांव में बने भव्य एवं आकर्षक ग्राम पंचायत भवन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पंचायत भवन में ही सभी तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। ग्रामीणों को किसी भी काम के लिए तहसील न जाना पड़े। 

मुख्यमंत्री ने सुमंत से कहा कि आपका यह कार्य दूसरों के लिए एक उदाहरण है। इसी प्रकार कार्य करते रहेेंगे तो नेवादा को एक मानक ग्राम पंचायत के रूप में विकसित कर सकते हैं। जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस उद्देश्य के लिए आगे बढ़ें। इसी क्रम में प्रधान सुमंत लाल ने पंचायत भवन निर्माण के बारे में जानकारी दी। साथ ही भरोसा दिलाया कि आने वाले दिनों में नेवादा आदर्श ग्राम पंचायत के रूप में पहचान बनाएगा। इस अवसर पर सांसद केशरी देवी पटेल, विधायक नीलम करवरिया, राजमणि कौल, मंडलायुक्त आर.रमेश कुमार, डीएम भानु चंद्र गोस्वामी, सीडीओ आशीष कुमार, डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

ओएफसी से जुड़ेगा पंचायत भवन, मिलेंगे सभी प्रमाण पत्र

नेवादा ग्राम पंचायत भवन ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़ेगा। ताकि इंटरनेट नेटवर्क की कोई समस्या न होने पाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि लोगों को निवास, जाति, आय समेत अन्य प्रमाण पत्र मिलने की व्यवस्था पंचायत भवन में ही उपलब्ध कराई जाए। गांव में ही महिला बैंकिंग करेस्पांडेंट की नियुक्ति तथा आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत भवन को ग्राम सचिवालय के रूप में विकसित करने की बात कही। इसके लिए उन्होंने अफसरों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा।

1.28 अरब से बनेंगे 801 नए पंचायत भवन

मुख्यमंत्री ने जिले में नव निर्मित 1151 सामुदायिक शौचालय (पिंक टॉयलेट) का लोकार्पण किया। इनके निर्माण में 40 करोड़ 28 लाख 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा 3.48 करोड़ से बने 20 पंचायत भवन का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने 801 पंचायत भवनों का शिलान्यास भी किया। इन पंचायत भवनों के निर्माण में कुल एक अरब 28 करोड़ 16 लाख रुपये खर्च होंगे।

मैं क्या बोलता, पहली बार बोलना था ... वह भी मुख्यमंत्री के सामने

नेवादा के प्रधान सुमंत लाल के लिए सोमवार का दिन काफी उत्साह बढ़ाने और भावुक करने वाला रहा। कार्यक्रम से निकलने के बाद सुमंत का कहना था,‘मैं क्या बोल पाता..., पहली बार किसी इतने बड़े मंच पर बोलने का मौका मिला वह भी मुख्यमंत्री के सामने। पहली बार चुनाव लड़ा और जीत गया। इसलिए ऐसे स्थानों पर बोलने की आदत नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने क्या बोलता।’

 मुख्यमंत्री के सवाल पर सुमंत ने बताया, पहले एक पंचायत भवन के निर्माण की इच्छा थी। इसके लिए जमीन पहले से तय थी, जो शासन की गाइडलाइन के अनुसार है। इतना बड़ा भूखंड मिलने के बाद जिले में सबसे अच्छा पंचायत भवन बनाए जाने का संकल्प लिया गया, जो पूरे प्रदेश में मॉडल बन गया।

प्रधान ने बताया कि इसमें सात कक्ष, एक हॉल, ग्राम सचिव और प्रधान के कक्ष तथा महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय हैं। भवन निर्माण में 17.46 लाख रुपये खर्च हुए। इसके अलावा मनरेगा के तहत इंटरलॉकिंग कराई गई। विद्युत समेत अन्य विभागों की ओर से टाइल्स बिछाने समेत अन्य काम कराए गए। इस तरह से पंचायत भवन के निर्माण में कुल 32 लाख रुपये खर्च हुए। अब भी करीब 10 फीसदी काम शेष है। उसे भी जल्द पूरा किया जाएगा।
... और पढ़ें

Ateeq Ahmed News : चार और मुकदमों में पूर्व सांसद अतीक अहमद की जमानतें निरस्त

स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने सोमवार को चार और आपराधिक मुकदमों में अतीक अहमद को पूर्व में मिली जमानत निरस्त कर दी है। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास गवाहों को धमकाने और कचहरी  परिसर में पेशी के दौरान बम हमला करवाने का मुकदमा शामिल है। इससे पूर्व गवाह को धमकाने के एक मामले में अतीक की जमानत स्पेशल कोर्ट से निरस्त हो चुकी है।

इस प्रकार से अभियोजन कुल पांच मुकदमों में जमानतें निरस्त कराने में कामयाब रहा है। सभी प्रकरण में अतीक अहमद को पूर्व में  जमानत मिली थी। अभियोजन द्वारा अतीक के जमानत निरस्त करने की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई थी। जमानत निरस्तीकरण अर्जी पर यह आदेश स्पेशल जज डॉ बालमुकुंद ने डीजीसी जीसी अग्रहरी, विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुन कर दिया है। 

पूर्व डीजीसी राम अभिलाष सिंह ने अतीक अहमद के खिलाफ कर्नलगंज, करेली, धूमनगंज और खुल्दाबाद थानों में दर्ज पांच मुकदमों जिसमें अतीक अहमद को पूर्व में जमानत मिली चुकी थी, के संबंध में मार्च 2017 को जमानत निरस्त करने की अर्जी प्रस्तुत की थी। वर्तमान में जमानत निरस्त करने के संबंध में दाखिल सभी प्रार्थना पत्र स्पेशल जज एमपी एमएलए कोर्ट में लंबित हैं। 

शुक्रवार को जमानत निरस्त करने के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई हुई थी। जिसमें करेली थाने के मुकदमे में आदेश घोषित कर दिया था। शेष चार  मामलों में सोमवार को आदेश घोषित किया गया है। अभियोजन की ओर से कहा गया कि अभियुक्त अतीक अहमद के खिलाफ 2017 तक कुल 75 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे।  पुलिस रिपोर्ट के अनुसार जमानत पाने के बाद अतीक अहमद आपराधिक गतिविधियों में संलग्न रहे। अभियोजन का कहना था कि अतीक अहमद ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने जमानत पर रहने के दौरान नैनी स्थित शुआट्स में घुसकर मारपीट की। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। 

कोर्ट ने विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए चारों प्रकरणों में अभियोजन की अर्जी मंजूर कर ली है। कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा है कि अभियुक्त का पक्ष रखने कोई उपस्थित नहीं हुआ जबकि, उन्हें कई बार अवसर दिया जा चुका है। 
... और पढ़ें

विधायक विजय मिश्र के बहुमंजिला काम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण पर रोक

बाहुबली विधायक विजय मिश्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने बाघम्बरी हाउसिंग स्कीम अल्लापुर स्थित उनके बहुमंजिला कॉम्पलेक्स के ध्वस्तीकरण पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने याची को ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की छूट दी है और अपील पर एक सप्ताह में सुनवाई करने का निर्देश दिया है। इंद्रकली व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने सुनवाई की। 

याचिका में मकान संख्या 13/16 के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस भवन के ध्वस्तीकरण आदेश 12 दिसंबर 2007 को जारी किया जा चुका है। इसका नोटिस भी याची को आदेश जारी होने से पूर्व ही दिया जा चुका है।

यह एक पांच मंजिला भवन है, जो व्यवसायिक उद्देश्य से बनाया गया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने का अधिकार है। इस पर राज्य सरकार और पीडीए के अधिवक्ता ने कहा कि याची चाहें तो एक सप्ताह के भीतर स्थगन अर्जी के साथ अपील दाखिल कर सकते हैं। उसके एक सप्ताह में अपील पर निर्णय होगा। इसलिए तीन सप्ताह तक ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा। 

कोर्ट ने याची को एक सप्ताह में अपील दाखिल करने और अपीलीय अधिकारी को उसके एक सप्ताह में उस पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है बाघम्बरी हाउसिंग स्थित यह भवन भदोही विधायक विजय मिश्रा का ही बताया जाता है। हालांकि यह उनके नाम से नहीं है।
... और पढ़ें

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती :  सरकार ने मानी गलती, अधिक मेरिट की जगह कम मेरिट वालों का हुआ चयन

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में 31661 पदों पर भर्ती के मामले में प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया है कि चयन में गलतियां हुई हैं और कुछ कम मेरिट के लोगों को नियुक्ति मिल गई। जबकि अधिक मेरिट वालों को नहीं मिल सकी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर बताया कि एनआईसी और बेसिक शिक्षा परिषद से हुई इस गलती के जांच के लिए सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने कहा कि जो भी गलतियां हुई हैं, उनको सुधारा जाएगा और सरकार गलत चयन रद्द करेगी। 

संजय कुमार यादव व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने जब महाधिवक्ता से पूछा कि क्या अदालत उनका यह बयान रिकार्ड कर दे तो उन्होंने इस पर सहमति देते हुए कहा कि सूची जारी करने में एनआईसी और बेसिक शिक्षा परिषद के स्तर से हुई गलती को सुधारा जाएगा तथा कम गुणांक वालों को दिया गया नियुक्तिपत्र निरस्त कर अधिक गुणांक पाने वालों को दिया जाएगा। 

याची के पक्ष से अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, अनिल सिंह बिसेन आदि का कहना था कि नियुक्ति पत्र देने के लिए जारी की गई सूची में बहुत से ऐसे मामले हैं, जिनमें कम गुणांक वालों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया जबकि अधिक गुणांक पाने वाले चयन से बाहर हैं। इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य सरकार से इस विसंगति के बारे में जवाब मांगा था। महाधिवक्ता के बयान के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई हेतु 17 नवंबर नियत कर दी है।
... और पढ़ें

सशस्त्र बलों के कर्मी सेवाकाल के दौरान क्यों नहीं कर सकते सिविल पदों पर आवेदन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि क्या एक्स सर्विस मैन (भूतपूर्व सैनिक) सेवा में रहते हुए सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार के क्या निर्देश हैं। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय भारत सरकार और निदेशक पुनर्वास के साथ ही राज्य सरकार को भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। सुधीर सिंह व दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है। 

याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याचीगण ने एक्स सर्विस मैन कोटे के तहत ग्राम विकास अधिकारी के पद लिए 2016 में आवेदन किया था। परीक्षा में सफल होने के बाद उनको नियुक्ति मिल गई और उन्होंने फरवरी 2019 में ज्वाइन कर लिया।

इसके बाद कमिश्नर ने एक आदेश जारी कर कहा कि याचीगण को सुनवाई का मौका देते हुए पद से बर्खास्त कर दिया जाए। मई 2019 में याचीगण को सेवा से यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि ग्राम विकास अधिकारी के पद लिए आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 को वह सेना में कार्यरत थे। बिना सेवानिवृत्त हुए उन्होंने आवेदन किया इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध है। 

अधिवक्ता का कहना था कि सेना के ऐसे कई आदेश हैं जिनके अनुसार सैन्य कर्मी सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पूर्व सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। राज्य सरकार का कहना था कि सेना के नियम और आदेश राज्य सरकार पर लागू नहीं होंगे। याची की ओर से यह भी दलील दी गई कि राज्य सरकार के कुछ विभाग सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व का आवेदन स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ विभाग इसे नहीं मानते हैं। 

कोर्ट ने केंद्र और राज्य को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक्स सर्विस मैन को यह लाभ इसलिए भी दिया जाता है कि वह समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। भूतपूर्व सैनिक सेना के कड़े अनुशासन में प्रशिक्षित होते हैं  राज्य सरकार उनकी सेवाओं का लाभ ले सकती है। वह राष्ट्रीय गौरव हैं। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
... और पढ़ें
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X