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प्रयागराजः अतीक के 11 बैंक खाते होंगे कुर्क, लेनदेन पर भी लगेगी रोक, कार्रवाई शुरू

अहमदाबाद जेल में बंद माफिया अतीक अहमद की करोड़ों की संपत्ति पर कार्रवाई के बाद पुलिस उसके बैंक खातों को भी कुर्क करने जा रही है। उसके 11 खातों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें सीज कराया जाएगा। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने इस संबंध में संबंधित बैंकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

अतीक पर यह कार्रवाई धूमनगंज थाने में उस पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में धारा 14(1) के तहत की जाएगी। मुकदमे के विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर नीरज वालिया की ओर से उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर बताया गया था कि अतीक के 13 ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली है जो उसके अपराध जगत मेें आने के बाद खोले गए। इनमें से सात प्रयागराज, तीन नई दिल्ली, एक लखनऊ  व दो बलरामपुर स्थित बैंकों में खुलवाए गए।

एसएसपी ने रिपोर्ट के आधार पर खातों को कुर्क करने की संस्तुति करते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। रिपोर्ट व संबंधित साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिलाधिकारी ने खातों को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कुल 11 खातों को कुर्क करने की अनुमति प्रदान की गई है। आदेश में कहा गया है कि दो खाते पूर्व में ही कुर्क किए जाने की वजह से कुल 11 खातों पर कार्रवाई की अनुमति दी जा रही है। उधर अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने खाते कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

बैंकों को भेजा जाएगा पत्र, सीज होंगे खाते

पुलिस सूत्रों का कहना है कि खातों पर कुर्की की कार्रवाई के तहत बैंकों को पत्र भेजकर संबंधित खातों को सीज कराया जाएगा। इसके तहत इन खातों में पड़ी रकम फ्रीज कराकर लेनदेन बंद कराया जाएगा। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के लिए पुलिस को 30 अक्तूबर तक की मोहलत दी गई है। 

किन खातों को किया जाएगा कुर्क
1- खाता संख्या 1363100008822 बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा खुल्दाबाद
2- खाता संख्या 6230100007966 बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा कनाट प्लेस नई दिल्ली
3- खाता संख्या 50114038581 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
4- खाता संख्या 50107884373 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
5- खाता संख्या 20448204075 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
6- खाता संख्या 50106221757 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
7- खाता संख्या 30260753055 एसबीआई संसद भवन शाखा एनेक्सी नई दिल्ली
8- खाता संख्या 33108579911 एसबीआई नुरूल्लाह रोड
9- खाता संख्या 60167042171 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
10- खाता संख्या 60164021028 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
11- खाता संख्या 6177000100011488  पंजाब नेशनल बैंक, शाखा  कचहरी

नोट- कुल चिह्नित 13 में से खाता संख्या 10023823015 एसबीआई संसद भवन शाखा नई दिल्ली व खाता संख्या 10223011721 एसबीआई उप्र सचिवालय शाखा लखनऊ पूर्व मेें ही कुर्क किए जाने के कारण आदेश में सम्मिलित नहीं किए गए हैं।
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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती : त्रुटि सुधार की अनुमति देने की मांग खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में गलत आवेदन फार्म भरने वाले अभ्यर्थी को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लोक परीक्षाओं में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। कुछ लोगों को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से पूरी चयन  प्रक्रिया प्रभावित होगी। कोर्ट ने  सुप्रीमकोर्ट द्वारा अर्चना चौहान केस में दिए गए निर्णय को सामान्य आदेश न मानते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट का आदेश याची के मामले में विशेष तथ्यों के आधार पर दिया गया है। इस आदेश को नजीर मानते हुए सभी पर लागू नहीं किया जा सकता है।
 
धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश दिया। याची ने अपने बीए रतृतीय वर्ष तथा बीटीसी के रोल नंबर में सुधार करने का आदेश देने की मांग की थी। कोर्टने हाईकोर्ट द्वारा पूर्व राजेंद्र पटेल वर्सेंज स्टेट ऑफ यूपी, पूजा यादव वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी स्पेशल अपील और आरती वर्मा वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी केस में दिए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेशों से स्प्ष्ट है कि चयन के इस स्तर पर त्रुटि सुधार की अनुमति देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी और निर्धारित समय सीमा में उसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। 

कोर्ट ने किया मुकदमों का उल्लेख

1- पूजा यादव केस - में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा याची ने आवेदन में त्रुटि सुधार का तबतक कोई प्रयास नहीं किया जबतक उसे मेडिकल टेस्ट में शामिल कारने से इंकार नहीं कर दिया गया। इस स्तर पर कोई आदेश देने से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसी तरह की और याचिकाएं आएंगी। इस लिए चयन के इस स्तर पर कोई राहत नहीं दी जा सकती है। 

आरती वर्मा केस- में हाईकोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थियों को आवेदन फार्म सही से न भरने का खामियाजा भुगतना होगा। जब आवेदक खुद अपने बारे में सही सूचना देने में नाकाम रहा है तो त्रुटि सुधार का आवेदन निरस्त करने में कोई गलती नहीं दिखाई देती है। याची ने अपने जाति वर्ग को गलत भरा और चयन के इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप से चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी। 

राममनोहर यादव केस- में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भावी शिक्षक अपना एक पेज का आवेदन फार्म भी सही से नहीं भर सकते तो समझा जा सकता है कि यदि वे चयनित हुए तो भावी पीढ़ी को क्या पढ़ाएंगे।
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बदायूं सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव की पत्रावली कोर्ट में तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं की भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव से संबंधित पत्रावलियां तलब की है। संघ मित्रा के चुनाव सपा के धर्मेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारी से पत्रावली हाईकोर्ट भेजने के लिए कहा है।यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव व दिनेश कुमार की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। 

कोर्ट ने  धर्मेन्द्र यादव के अधिवक्ता नरेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा दाखिल गवाहों की सूची रिकार्ड के साथ पेश करने का आदेश दिया है। संघमित्रा की तरफ से अधिवक्ता उदय नंदन ने कहा  कि वह बचाव में कोई गवाह पेश नहीं करना चाहती।याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्याशी दिनेश कुमार का नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया है। यदि त्रुटि थी तो स्क्रूटनी के समय सुधारने का मौका देना चाहिए था।

दूसरे कुल  पड़े मतों से आठ हजार मत अधिक गिना गया है। जिसका कोई लेखा जोखा नहीं है।तीसरे मौर्या ने अपने पति की स्थिति व संपत्ति का व्योरा हलफनामे में नहीं दिया है।चुनाव नामांकन पत्र में पति के बजाय अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम लिखा है। जबकि अभी तक तलाक नहीं हुआ है। याचिका की सुनवाई 4नवंबर को होगी।
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विधायक विजय मिश्रा को फिलहाल राहत, मिला पक्ष रखने का मौका

विधायक विजय मिश्रा को बाघंबरी गद्दी स्थित भवन के ध्वस्तीकरण मामले में फिलहाल राहत मिल गई है। बुधवार को सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण का प्रकरण वापस प्रयागराज विकास प्राधिकरण को भेजा और अपीलकर्ता का पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय पारित करने का आदेश दिया। अपीलकर्ता को पक्ष रखने के लिए दो नवंबर तक का समय दिया।

पांच मजिला इस भवन के भूतल पर दुकानें हैं तथा ऊपर के चार मंजिल में फ्लैट हैं। नक्शा स्वीकृति नहीं होने के आधार पर इलाहाबाद (प्रयागराज) विकास प्राधिकरण ने 2007 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। अब गैंगस्टर ऐक्ट के तहत माफियाओं की संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में विजय मिश्रा की इस संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस मामले में दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी के यहां अपील करने का आदेश दिया था।

इसी परिप्रेक्ष्य में अपीलकर्ता ने मंडलायुक्त के यहां अपील की। बुधवार को दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मंडलायुक्त ने अपीलकर्ता को दो नवंबर तक पीडीए के जोनल अधिकारी के सामने पक्ष रखने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया है कि अपीलकर्ता को पूर्व में निर्गत नोटिस तामील कराने में निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके अलावा 2007 यानी, अब 13 वर्ष बाद कार्रवाई के आदेश को अमल में लाया जा रहा है। उन्होंने आदेश दिया कि अब पूरा प्रकरण अपीलकर्ता के संज्ञान में है।

इसलिए अपीलकर्ता दो नवंबर तक जोनल अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित हों। जोनल अधिकारी को भी सुनवाई के बाद छह नवंबर तक संशोधित निर्णय पारित करने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया कि कि अपीलकर्ता यदि दो नवंबर तक अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं होती हैं तो जोनल अधिकारी दिसंबर 2007 में पारित आदेश के क्रम में कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे।
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prayagraj news : विधायक विजय मिश्रा का पांच मंजिला भवन। prayagraj news : विधायक विजय मिश्रा का पांच मंजिला भवन।

बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हाकिमलाल के बहाने सपा ने साधे कई तीर, चुनाव से पहले दिखाई ताकत

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधायकों के बगावती तेवर को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस बहाने पार्टी ने कई सियासी समीकरणों को साधा है। पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के खिलाफ सपा ही मुख्य विपक्षी दल है। हालांकि विधायकों ने बसपा से बगावत की बात तो स्वीकार की है, लेकिन वह किस तरफ जाएंगे इसे लेकर अभी उन्होंने मौन साध रखा है। उनकी इस चुप्पी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात को नकाराने को विधायकी बचाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सपा के साथ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक दिख रही है। सभी विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत होने की होड़ है, ताकि मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके। इस कवायद के बीच प्रतापपुर के बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद समेत पांच विधायकों की बगावत सपा के लिए लाभकारी मानी जा रही है। प्रयागराज की सियासी समीकरण को देखें तो सपा के पूरे मंडल में एक मात्र विधायक उज्जवल रमण सिंह है। ऐसे में हाकिम लाल और मुज्तबा सिद्दीकी की बसपा से नाराजगी पर सपा नेताओं की नजर रही। ये दोनों नेता पार्टी में लंबे समय से खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव में इन पर बसपा उम्मीदवार के खिलाफ जाने का भी आरोप लगा था। मौजूदा विधायक होने के बावजूद इनके टिकट कटने की बात भी सामने आने लगी थी। इसके अलावा सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती हाथरस समेत कई मुद्दों पर उस तरह से मुखर होकर सामने नहीं आईं, जोकि उनकी पहचान है।

ऐसे में बसपा विधायकों ने दूसरे दलों में संपर्क साधना शुरू कर दिया। इस नाराजगी को बगावती रूप देने के लिए सपा हाईकमान ने कभी बसपा में रहे अपने वरिष्ठ नेता को आगे किया। बताया जा रहा है कि उन्हीं सपा नेता की अगुवाई में बगावत की पूरी पटकथा लिखी गई और दोनों विधायकों की अखिलेश यादव से मुलाकात भी कराई गई। हालांकि राज्यसभा के लिए सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद बसपा समेत अन्य सभी दावेदारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में बसपा विधायकों के इस बगावत का सपा को तात्कालिक तौर तो बड़ा फायदा होने नहीं जा रहा लेकिन 2022 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर इसे बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

जिले की सियासत को देखें तो खासतौर पर, पिछड़ी जाति बहुल वाले हंडिया और प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इन दोनों विधायकों के आने से सपा को अपने परंपरागत मतों के ध्रुवीकरण में मदद मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बसपा से बगावत करने वाले दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता बची रहती है तो सपा जिले में तीन मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में उतरेगी। वहीं अन्य विपक्षी दलों के खाते में एक भी विधायक नहीं होगा। इसका भी सपा को फायदा हो सकता है। ऐसे में बसपा विधायकों के बगावत को सपा के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
  • ‘बहनजी (मायावती)  आज भी हमारी नेता हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है। हमारी नाराजगी पार्टी कोऑर्डिनेटर से है। पार्टी में हमारी उपेक्षा की जा रही है। बैठकों में हमें नहीं बुलाया जाता है। बैठक में पहुंच भी गए तो पीछे की सीट पर बैठाया गया। बहनजी से मिलने की कोशिश की गई लेकिन उनसे भी नहीं मिलने दिया गया। उनसे मिलकर अपनी बात रख लेते तो हमारा दर्द कुछ कम हो जाता। इसके अलावा हम विधायक हैं। इसके बाद भी दूसरे प्रत्याशी की तलाश की जा रही है। दूसरे दल में जाने का हमलोगों का कोई इरादा नहीं है। हम बसपा में हैं और रहेंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की बात भी झूठी है। यदि पार्टी हमारे के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो हम 2021 तक देखेंगे और हमें लगेगा कि बसपा से टिकट नहीं मिलेगा तो दूसरी राह पकड़ने के बारे में भी विचार करेंगे।’ - हाकिम लाल बिंद, विधायक
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आदेश न मिलने से नहीं गिरा विधायक विजय मिश्रा का कांप्लेक्स, दिन भर जुटी रही तमाशबीनों की भीड़

अल्लापुर पुलिस चौकी के सामने विधायक विजय मिश्रा के पांच मंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स के सामने बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। विजय मिश्रा इन दिनों आगरा जेल में बंद हैं। ध्वस्तीकरण के आदेश के इंतजार में पीडीए अफसर और पुलिस फोर्स भी मुस्तैद रही, लेकिन शाम को ध्वस्तीकरण मामले में रोक के आदेश के बाद सभी लौट गए। 

पीडीए सूत्रों के मुताबिक विजय मिश्रा के कांप्लेक्स को ध्वस्त करने के लिए अफसरों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। पुलिस फोर्स भी तैयार थी, इंतजार था तो बस कमिश्नर के आदेश का, जो शाम तक नहीं मिला। बाद में आए आदेश में कार्रवाई से विधायक को राहत देते हुए सुनवाई का मौका दिया गया है। इस मामले में पीडीए अफसर भी तलब किए गए हैं। 

उधर पीडीए में विजय मिश्रा के कांप्लेक्स और मकान की भूमि संबंधी पत्रावलियों को खंगालने काम जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि अभिलेखों में नक्शा स्वीकृति के संबंध में कोई पत्राचार नहीं पाया गया। वहीं जारी नोटिस और उनकी तामीला के बारे में जानकारी एकत्र की गई। पूरे मामले में पीडीए अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि आदेश का अनुपालन किया जाएगा।

चूंकि विजय मिश्रा की अपील कमिश्नर कोर्ट में थी, इसलिए हर अफसर इस बारे में कुछ बोलने से बचते रहे। वहीं पीडीए ने किराए पर मंगाई गई पोकलैंड मशीन देर शाम वापस ले जाने का मौखिक आदेश दिया गया। प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के लिए पीडीए और नगर निगम की जेसीबी मशीनें दिन भर खड़ी रहीं। प्रवर्तन दल के अधिकारी, कर्मचारी वरिष्ठ अफसरों के आदेश का इंतजार करते रहे। इसके कारण बुधवार को शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया जा सका। 

अल्लापुर पुलिस चौकी के पास उस कांप्लेक्स के पास बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। वाहनों से आने जाने वाले भी, रुककर कार्रवाई के बारे में पूछते और आगे बढ़ जाते। कांप्लेक्स के सामने भी कुछ लोग जुटे रहे। बताया गया कि वह कारोबारी हैं और विजय मिश्रा के कांप्लेक्स में किराएदार थे। देर शाम तक कार्रवाई न होने के कारण लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोग यह भी कहते  सुने गए कि अतीक समेत अन्य माफियाओं के साथ नोटिस, अपील जैसी राहत की बात सामने नहीं आई। इस मामले में ऐसा क्या हो गया कि तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बीच धवस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
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धोखाधड़ी के मुकदमे में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या दोषमुक्त, सरकार ने वापस लिया मुकदमा

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के खिलाफ धोखाधड़ी के एक प्रकरण में अभियोजन द्वारा मुकदमा वापसी की अर्जी मंजूर कर मुकदमा समाप्त कर दिया है। साथ ही केशव मौर्य सहित 10 लोगों को दोषमुक्त कर दिया है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार गुप्ता डीजीसी जीसी अग्रहरि और कुंज बिहारी मिश्रा को सुनकर दिया है।  

उत्तर प्रदेश शासन की ओर से डीएम कौशांबी को मुकदमा वापस लेने का निर्देश दिया गया था, जिसे अभियोजन ने स्पेशल कोर्ट में प्रस्तुत किया था। इसमें यह मांग की गई थी कि केशव मौर्या के विरुद्ध विचाराधीन मुकदमे को वापस लेने की अनुमति प्रदान की जाए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में जनता को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है, इसलिए शासन को यह मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी जाती है। 

यह प्रकरण था

कौशांबी के मोहब्बतपुर पइंसा थाने पर 25 अगस्त 2008 को चंद्रशेखर प्रसाद थाना प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोग फर्जी संस्था ‘जय मां  दुर्गा कमेटी’ बनाकर सभा की अनुमति ली और फिर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने का आयोजन करने लगे। लाउडस्पीकर से उद्घोषणाएं की गईं। इस संबंध में जांच की गई तो पता चला कि संस्था फर्जी है। जिस समय यह सभा की गई, उस समय धारा-144 लगी हुई थी और उसका उल्लंघन किया गया था।

पुलिस ने इस प्रकरण में राधेश्यामश, अनिल दुबे, अशोक मौर्य, रामखेलावन, रमेशचंद्र, विनोद पटेल, विद्वान गोस्वामी, राम लोटन, श्याम प्रसाद और केशव मौर्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय भेजा था। कोर्ट ने संज्ञान लेकर कार्यवाही की, जिसमें केशव मौर्य सहित सभी को जमानत पर रिहा किया गया था। शासन ने इस मुकदमे को जनहित में वापस लिए जाने का निर्णय लिया था। 
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पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत, कोर्ट में पेशी पर रोक, कोर्ट ने अपने ही आदेश पर लगाई रोक

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य।
स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत देते हुए उसकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेशी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रकरण में आरोप के स्तर पर बचाव पक्ष की बहस नहीं सुन ली जाती है, तब तक अतीक अहमद को व्यक्तिगत रूप से पेश न किया जाए। एक दिन पहले ही अदालत ने अतीक को आरोप तय किए जाने पर सुनवाई के समय हाजिर होने का आदेश दिया था। 

यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने अतीक अहमद की ओर से पेश अर्जी पर उनके अधिवक्ता खान शौकत एवं राधेश्याम पांडे तथा अभियोजन को सुन कर दिया। जानलेवा हमले के प्रकरण में स्पेशल कोर्ट ने 27 अक्तूबर को आदेश दिया था कि आरोप तय होने के लिए अभियुक्त अतीक अहमद की कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी आवश्यक है। कोर्ट ने अतीक अहमद को उपस्थित कराने के लिए गृह सचिव को पत्र लिखे जाने का आदेश दिया था।

बुधवार 28 अक्तूबर को अतीक की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया कि उनके अधिवक्ता बहस के लिए उपस्थित नहीं हो पाए थे। आरोप तय होने के पूर्व उन्हें अपना पक्ष रखना है, जिसके लिए बहस होनी है, इसलिए अतीक अहमद पर आरोप तय किए जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश किए जाने के आदेश को स्थगित रखा जाए और व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाए। कोर्ट ने बचाव पक्ष की अर्जी मंजूर कर ली है।
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प्रधान पुत्र ने तमंचे के बल पर किशोरी का किया अपहरण, हंगामा

थाना क्षेत्र के एक गांव में मंगलवार शाम सात बजे के करीब ग्राम प्रधान के बेटे ने अपने साथी के साथ मिलकर तमंचे के बल पर एक किशोरी को अगवा कर लिया। किशोरी के भाई ने देखा तो वह शोर मचाते हुए घर गया और परिवार वालों को बताया। परिवार के लोग आरोपियों से शिकायत करने पहुंचे तो आरोपियों के घरवालों ने गाली गलौज हुए उन्हें पीट दिया। जिसमें लड़की के पिता व दो भाईयों व अन्य को चोट आई हैं। पुलिस ने दो अपहरणकर्ताओं समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। जिसमें से तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है लेकसिन अपहृत किशोरी और अपहरणकर्ताओं समेत चार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद से गांव में तनाव बना हुुुआ है।  

कौंधियारा थाना क्षेत्र के एक गांव का दलित परिवार मेहनत मजूदरी करके आजीविका चलाता है। उनकी 16 वर्षीय किशोरी मंगलवार की शाम पास की बाजार अकोढ़ा से सब्जी खरीदकर वापस लौट रही थी। गांव से पहले रास्ते में बाइक से दो लड़के आए और तमंचे के बल पर उसे अगवा कर ले गए। लड़की के भाई ने यह देखा तो शोर मचाते हुए घर गया।  

उसके मां-बाप को अपहरण की कहानी पता चली तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। पीड़ित परिवार आरोपी प्रधान पुत्र के घर शिकायत लेकर पहुंचे तो वहां उल्टा आरोपियों के परिवार वालों ने पीड़ितों पर ही हमला बोल दिया। जिसमें लड़की के दो भाई एवं पिता घायल हो गए। पीड़ित परिवार भागकर थाने पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरणकर्ता महफूज पुत्र मो. हसनैन व मो. सोहराब पुत्र सिराजुद्दीन व मो. इब्राहिम, मो. हसनैन, मो. शहनशाह व खुस्सु के खिलाफ अपहरण, मारपीट समेत विभिन्न संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया। पुलिस ने इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से अपहरण के मुख्य आरोपी महफूज की मां वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। पुलिस के अनुसार अपहृत किशोरी हाईस्कूल की छात्रा है। उसके घायल परिजनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। बाकी आरोपियों और अपहृत किशोरी की तलाश की जा रही है। 
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डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य पद की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप से इनकार 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्तूबर को होने जा रही डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और राज्य सरकार व आयोग से याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई चार सप्ताह के बाद होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने डॉ. अनुपम सोनी की याचिका पर दिया है।

याचिका पर आयोग के अधिवक्ता बीएन सिंह ने प्रतिवाद किया। इनका कहना था कि याची को आवेदन भरने का मौका दिया गया, किंतु उसने आवेदन ही नहीं किया है। याची का कहना है कि उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने दो मार्च 19 को प्राचार्य पद भरने का विज्ञापन 49  निकाला। उसने गलती से विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन कर दिया था। 18 अप्रैल 19 को स्पष्टीकरण प्रकाशित किया गया, जिसमें आवेदन की शर्तों को स्पष्ट किया गया है और कहा गया कि विज्ञापन संख्या 48 के अभ्यर्थियों को विज्ञापन संख्या 49 में नए सिरे से आवेदन करना होगा।

विज्ञापन संख्या 48 समाप्त कर नया विज्ञापन जारी किया गया है। याची अपरिहार्य कारणों से आवेदन जमा नहीं कर सका। उसने विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन किया था। उसे 29 अक्तूबर की परीक्षा में बैठने दिया जाय।

कोर्ट ने कहा कि याची यह आधार नहीं ले रहा कि उसे आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण की जानकारी नहीं हुई। उसने जानते हुए नया आवेदन नहीं दिया कि अब विज्ञापन संख्या 48 की जगह 49 में आवेदन करना है। ऐसे में अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार व आयोग से जवाब तलब किया है। याचिका की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
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पप्पू गंजिया को हाईकोर्ट से राहत : दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक

हाईकोर्ट ने माफिया पप्पू गंजिया को राहत देते हुए उसके दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। पप्पू की पत्नी  नगीना बेगम की याचिका पर कोर्ट ने जहांगीराबाद गंजिया प्रयागराज व चक दोंदी, नैनी, प्रयागराज स्थित भवनों के ध्वस्तीकरण के मामले में पीडीए उपाध्यक्ष को तीन सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अगले चार सप्ताह तक के लिए कोर्ट ने पीडीए को किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई  करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने याची को एक सप्ताह में ध्वस्तीकरण के खिलाफ अपना प्रत्यावेदन पीडीए के उपाध्यक्ष को देने तथा उपाध्यक्ष को उस पर सुनवाई कर तीन सप्ताह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने दशहरे की छुट्टी के दौरान दिया है।

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना था कि अधिकारी लगातार मकान ध्वस्त करने की धमकी दे रहे हैं। याची को उसका पक्ष रखने का मौका दिए बिना मनमानी तरीके से कार्रवाई की जा रही है, जिस पर कोर्ट ने चार सप्ताह की राहत दी है। इससे पूर्व जिला प्रशासन और पीडीए द्वारा पप्पू गंजिया का अवैध रूप से निर्मित गेस्ट हाउस ध्वस्त कर दिया था तथा उसके अन्य मकान के भी ध्वस्तीकरण की तैयारी थी।
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अधिकतम नीलामी बोली स्वीकार करने को बाध्य नहीं प्राधिकारी : हाईकोर्ट 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी टेंडर के तहत नीलामी में अधिकतम बोली स्वीकार करने के लिए प्राधिकारी बाध्य नहीं है। यहां तक कि यदि उचित कारण हो तो कम बोली की नीलामी भी स्वीकार की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि  किसी को सबसे अधिक बोली लगाने पर उसे स्वीकार किए जाने का विधिक अधिकार नहीं मिल जाता। बोली नीलामी शर्तों के अधीन होती है। अधिकारी मानने के लिए बाध्य नहीं है। पर्याप्त कारण होने पर नए सिरे से टेंडर जारी करने के लिए स्वतंत्र हैं। 

कोर्ट ने उच्चतम बोली के आधार पर टेंडर मंजूर करने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आगरा के बब्लू की याचिका पर दिया है। याची ने कृषि उत्पादन मंडी समिति, बरौली आगरा ने मंडी स्थल पर बनी 43 दुकानों का नीलामी से आवंटन के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें से सात दुकानें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं।

आरक्षित दुकानों के लिए याची की कंपनी मेसर्स के जी एन ट्रेडिंग कंपनी सहित पांच लोगों ने ही टेंडर भरा। याची ने नीलामी में सर्वाधिक 16 लाख 15 हजार रुपये की बोली लगाई। आवंटन समिति ने इस आधार पर मानने से इनकार कर दिया कि सामान्य व ओबीसी के लिए आरक्षित दुकानों की तुलना में एससी वर्ग की दुकानों की काफी कम बोली लगी है।

नीलामी में कम आवेदकों के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं दिखाई दी। लिहाजा समिति ने याची की बोली स्वीकार करने और दुकान आवंटन से मना कर दिया। समिति के सचिव ने नए सिरे से टेंडर जारी करने का निर्देश दिया है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि उच्चतम बोली स्वीकार करने या न करने करने को लेकर अदालतों के कई फैसले हैं और सब में यही कहा गया है कि प्राधिकारी सबसे ऊंची बोली स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं हैं। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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युवक को पत्थर और धारदार हथियार से घायल कर तेजाब डाला

बहरिया थाना क्षेत्र के जुगनीडीह गांव निवासी एक युवक को बदमाशों ने चेहरे पर पत्थर और धारदार हथियार से वार करके बुरी तरह जख्मी कर तेजाब डाल दिया। युवक को गंभीर स्थिति में एसआरएन में भर्ती कराया गया है।

युवक एक दिन पहले बाइक और 50 हजार रुपये लेकर घर से निकला था। जानकारी के अनुसार बहरिया थाना क्षेत्र के जुगनीडीह गांव निवासी अमित कुमार यादव (22) पुत्र रमेश चंद यादव सोमवार की सुबह करीब 9 बजे बाइक लेकर घर से निकले थे। शाम शाम तक जब वह वापस नहीं लौटा तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। लेकिन उसका पता नहीं चला।

मंगलवार की सुबह कुछ लोगाें ने जुगनीडीह स्थित पिलखिन देवी मंदिर के पीछे मनसैता नदी के पुल पर एक युवक को बुरी तरह जख्मी और तेजाब से झुलसा देखा। थोड़ी देर में वहाँ लोगों की भीड़ लग गई। पता चला कि युवक जुगनीडीह गांव का अमित है। जानकारी होने पर परिजन भी मौके पर पहुंचे।

इंस्पेक्टर बहरिया बाल लाल प्रसाद और चौकी इंचार्ज सिकंदरा शुभनाथ सहनी मौके पर पहुंचे और युवक को सीएचसी मेधा ले गए। जहां से युवक की हालत गंभीर होने पर एसआरएन के लिए रेफर किया गया है। युवक की पत्नी मीरा देवी ने बताया कि अमित रविवार की सुबह करीब 9 बजे बाइक और घर 50 लेकर घर से निकला था। घटना को अंजाम देने वाले कौन थे पता नहीं चल रहा था। सभी प्रकार की छानबीन है और कुछ नहीं बता पा रहा है।
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