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यूपी बोर्ड कंपार्टमेंट, इम्प्रूवमेंट परीक्षा का परिणाम जारी

यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट, कंपार्टमेंट और इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा 2020 का परिणाम मंगलवार को जारी कर दिया। तीन अक्तूबर को हुई इम्प्रूवमेंट, कंपार्टमेंट परीक्षा का परिणाम रिकार्ड 14 दिन में 20 अक्तूबर को घोषित किया गया है। यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि हाईस्कूल इंप्रूवमेंट परीक्षा का परिणाम 99.94 फीसदी, हाईस्कूल कंपाटमेंट परीक्षा का परिणाम 93.39 फीसदी तथा इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा का परिणाम 95.07 फीसदी रहा।

सचिव बताया कि हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट परीक्षा में कुल 15639 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, इसमें 14250 परीक्षा में शामिल हुए। कुल 12241 पास हुए, इस प्रकार मात्र नौ परीक्षार्थी फेल हुए। इंम्प्रूवमेंट परीक्षा में बालक, बालिकाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 99.94 फीसदी रहा। हाईस्कूल कंपार्टमेंट परीक्षा में पंजीकृत 155 छात्रों में 121 परीक्षा में शामिल हुए। 113 पास हुए। इस प्रकार 93.39 फीसदी पास हुए।

इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा में पंजीकृत 17504 परीक्षार्थियों में 16884 परीक्षा में शामिल हुए जबकि कुल 16051 पास हुए। इस प्रकार इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा में कुल 95.07 फीसदी पास हुए। परीक्षा परिणाम यूपी बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड कर दी गई है। छात्रों के अंकपत्र सह प्रमाण पत्र बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे जा रहे हैं।

हाईस्कूल कंपार्टमेंट, इम्प्रूवमेंट परीक्षा पास विद्यार्थी 31 तक लें प्रवेश

यूपी बोर्ड की ओर से हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट एवं कंपार्टमेंट परीक्षा पास होने वाले छात्रों से कहा गया है कि वह 31 अक्तूबर तक ग्यारहवीं में प्रवेश ले लें। विद्यालय के प्रधानाचार्य पास छात्रों को निर्धारित तिथि 31 अक्तूबर तक ग्यारहवीं में प्रवेश लेते हुए पंजीकरण शुल्क एवं शैक्षिक विवरणों को बोर्ड की वेबसाइट पर 15 नवंबर तक अपलोड कर दें।
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प्रयागराज सर्किट हाउस उपद्रव मामले में सपा कार्यकर्ताओं को मिली जमानत

जिला न्यायालय ने सर्किट हाउस में घुस कर नारेबाजी और उपद्रव करने के मामले में सपा कार्यकर्ताओं  की जमानत मंजूर कर ली है।  इस मामले में नेहा यादव सहित 12 सपा कार्यकर्ता तीन अक्तूबर से जेल में बंद हैं। यह आदेश अपर जिला जज इंद्रजीत सिंह ने  बचाव पक्ष के अधिवक्ता  को सुन कर दिया है। घटना 3 अक्टूबर 2020 की  सिविल लाइंस थाने की है । अभियुक्त गण पर आरोप है कि सर्किट हाउस के पास सड़क पर 15 से 20 लोगों ने हाथ में लिए पोस्टर  जलाकर सड़क पर गुजर रहे लोगों की तरफ फेंकने, सुरक्षा कर्मियों को धक्का देकर सर्किट हाउस में घुसकर सरकार विरोधी नारा लगाने और बल प्रयोग कर  मीटिंग हॉल में  घुस गए। सभी का पुलिस ने लोक शांति भंग करने में चालान कर जेल भेज दिया था।

जेल में बंद सपा कार्यकर्ता नेहा यादव, निर्मला यादव, शिव यादव, हिमांशु मिश्रा, मोनू यादव, राहुल पटेल, मोहित यादव, अमन पांडे, मोहित पांडे, सुशील कोठारिया, अजय भारती की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।  मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता सैयद इफ्तिखार हुसैन और रविंद्र यादव ने पक्ष रखा और कहा कि राजनीतिक कारणों से कार्यकर्ताओं को झूठा फंसाया गया है

इस प्रकरण में  गिरफ्तार महिला सपा नेता  कमलेश केशरवानी के जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई अपर जिला जज प्रथम रामकिशोर शुक्ला ने की और बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनीष खन्ना को सुनकर जमानत मंजूर कर ली है कोर्ट ने 50000 हजार की दो दो जमानतें और अंडरटेकिंग दिए जाने पर रिहा करने का आदेश दिया है। 
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ईडी जांच में पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल को राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर के पूर्व एम एल सी हाजी इकबाल व परिवार के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है और उनके बेटे मोहम्मद अफजल को दो सप्ताह में  प्रवर्तन निदेशालय लखनऊ में अपना पक्ष रखने का समय दिया है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच मे हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने मोहम्मद अफजल  व अन्य  की याचिका पर दिया है। 

भारत सरकार के सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने प्रवर्तन निदेशालय  का पक्ष रखा।इनका कहना था कि ईडी ने  मनी लांड्रिंग के आरोप में नोटिस जारी कर कुछ कागजात दिखाने के लिए बुलाया है।याची जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसने  नोटिस को चुनौती दी  है। इनके खिलाफ फर्जी कंपनियों के जरिए मनी लांड्रिंग की जांच की जा रही  है। ई डी ने 25 सितंबर को बुलाया था।अब 22 अक्टूबर को बुलाया गया है। 

याची का कहना था कि इसी मामले में कंपनी कोर्ट में केस चल रषहा है। इसचलिए ई डी को अलग से उसी मामले की जांच करने का अधिकादर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह आपत्ति ई डी के समक्ष उठाई जा सकती है।जो कुछ कहना है ई डी के समक्ष हाजिर होकर अपना पक्ष रखें।
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exclusive : केबीसी में अमिताभ बच्चन को याद आया अपना गांव बाबू पट्टी, कहा- वहां स्कूल बनवाने की इच्छा

अमिताभ बच्चन अमिताभ बच्चन

आजम खां को झटका, किसानों की जमीन लेने के मामले में जौहर ट्रस्ट की याचिका खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौहर विश्वविद्यालय द्वारा किसानों की जमीन का बैनामा कराने के मामले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद आजम खां की याचिका में हस्तक्षेप करने सें इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका में राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के निर्णय को चुनौती दी गई थी।  कोर्ट ने कहा है  कि राजस्व परिषद के निर्णय में कोई अवैधानिकता नहीं है। इसलिए हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। 

याचिका पर न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की।राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुधांशु श्रीवास्तव का कहना था कि अनुसूचित जाति के किसानों की जमीन बिना कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बैनामा कराना गैरकानूनी है। ऐसा करना  उ प्र जमींदारी उन्मूलन कानून की धारा 157 ए के विपरीत है। ऐसी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार में निहित हो जाता है ।

इससे पहले कोर्ट ने याची के अधिवक्ता सफदर काजमी को वीडियो लिंक न मिल पाने के कारण अदालत में हाजिर होकर बहस करने के लिए कहा था।।केस की  दुबारा पुकार के बाद याची की तरफ से कोई अधिवक्ता नहीं आया तो कोर्ट ने पत्रावली के आधार पर बोर्ड के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है और कहा है कि निचली अदालत के आदेश मे कोई अवैधानिकता नहीं है।
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पुलिस भर्ती 2018 :  पुरुष के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो, हाईकोर्ट ने मंगाया मूल प्रवेश पत्र

पुलिस कांस्टेबल 2018 में अनियमितता को लेकर दाखिल याचिका में सुनवाई के दौरान के दौरान पुरुष अभ्यर्थी के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो लगाए जाने की बात सामने आने पर मूल प्रवेश पत्र तलब कर लिए हैं। फोटो मैच न करने के कारण अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल करने से इंकार करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने दिया। हरिकेश यादव और सात अन्य ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। 

याचीगण का कहना था कि उनको फोटो का मिलान न होने के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया जबकि पुरूष के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो था। एक अन्य मामले में अभ्यर्थी ने फोटो लगाया ही नहीं था। उसका फोटो भी मिस मैच कर गया।   सरकार की तरफ से कहा गया कि याचियों के आवेदन में लगी फोटो उनके शारीरिक दक्षता परीक्षा में आने पर मैच नहीं कर रही ।इसलिए उन्हे रोक दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नौ नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने हरिकेश यादव व सात अन्य की याचिका पर दिया है ।याचियों का कहना है  कि लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया। किन्तु उन्हे परीक्षित करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया गया कि उनके फोटोग्राफ उनसे नहीं मिल रहे हैं।
इसके जवाब में याचियों का कहना है कि एक अभ्यर्थी काजल शर्मा ने फोटोग्राफ लगाया नहीं है, जबकि एक अन्य अभ्यर्थी सूरज गौड़ के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो लगा था। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचियों का अंगूठा निशान भी नहीं मिल रहा है।कोर्ट ने दो याचियों के प्रवेश पत्र नमूने के तौर पर जमा करने का निर्देश दिया है ।
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आईटी एक्ट की धारा 66 ए में मुकदमे क्यों दर्ज कर रही पुलिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से पूछा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधनियम 2000 की धारा 66 ए को सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंविधानिक घोषित करने के बाद भी यूपी पुलिस इस धारा में मुकदमे क्यों दर्ज कर रही है। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद इसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। अदालत ने चार सप्ताह में दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। औरैया के हरिओम की याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ सुनवाई कर रही है। 

याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची के खिलाफ बेला थाने में आईटी एक्ट की धारा 66 ए और 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि धारा 66 ए को सुप्रीमकोर्ट ने श्रेया सिंघल केस में असंविधानिक घोषित कर दिया है। तथा इस धारा के तहत मुकदमे दर्ज न करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं बाद में पीपुल्य यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में कोर्ट ने श्रेया सिंघल केस का आदेश देश के सभी उच्च न्यायालयों, जिला न्यायालयों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजने का निर्देश दिया था ताकि आदेश का सभी राज्यों में पालन किया जा सके। 

सुप्रीमकोर्ट के इस स्पष्ठ निर्देश के बावजूद प्रदेश में आईटी एक्ट की धारा 66 ए में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। हाइ्रकोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए महानिबंधक को आदेश दिया है कि उनके आदेश के प्रति मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी जाए तथा दोनों अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने याची के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
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कोर्ट का आदेश न मानने पर सचिव ग्राम विकास पर पांच हजार हर्जाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार बार आदेश देने के बाद भी हलफनामा दाखिल न करने पर सचिव ग्राम विकास लखनऊ पर पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है । कोर्ट ने कहा कि यदि वह अपने खाते से चेक द्वारा पांच हजार रुपये राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कर हलफनामा दाखिल नहीं करते हैं तो उन्हें अगली तारीख तीन नवंबर 2020 को कोर्ट में हाजिर होना होगा । यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक  अग्रवाल ने त्रयंबक नाथ की याचिका पर दिया है । 

याचिका के अनुसार याची वर्ष  2003 में रिटायर हो चुका है । उसने गलत मूल वेतन निर्धारण के खिलाफ याचिका दायर की है। याची के अधिवक्ता गिरिज शंकर  मिश्र ने कोर्ट को बताया कि गलत मूल वेतन निर्धारण के चलते याची की पेंशन में  काफी फर्क पड़  रहा है । कोर्ट ने इस याचिका पर कई अलग अलग तिथियों पर सचिव से उनका व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा था। सरकारी वकील का कहना था कि पत्र द्वारा सूचना दी जा चुकी है,  परन्तु कोई हलफनामा दाखिल नहीं हुआ ।

सरकारी वकील ने  एक और अवसर देने की मांग की ताकि  सचिव से बात कर हलफनामा दाखिल किया जा सकें । इस पर कोर्ट ने एक और मौका हलफनामा दाखिल करने का देते हुए सचिव को निर्देश दिया है कि वह अपने खाते से पांच हजार रुपये का चेक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कर हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने आदेश में कहा हैं कि ऐसा न करने पर उन्हें  मुकदमा के सुनवाई की अगली तिथि पर कोर्ट में हाजिर रहना होगा ।
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सीबीएसई बोर्ड के सचिव रिकॉर्ड के साथ हाईकोर्ट में तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी गई जानकारी उपलब्ण न कराने पर सीबीएसई बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज के सचिव को पत्रावलियों के साथ तलब कर लिया है। कोर्ट ने बोर्ड के अधिवक्ता द्वारा मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से करने की मांग अस्वीकार करते हुए सचिव को पांच नवंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।  यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने गौरव कुमार राय की याचिका पर दिया है ।

कोर्ट ने बोर्ड के अधिवक्ता धनंजय अवस्थी से तीन मार्च को याचिका पर जानकारी मांगी थी।सुनवाई के दौरान मांगी गई जानकारी पत्रावली पर नहीं रखी गई और अधिवक्ता ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की मांग की।आदेश का पालन न होने गके कारण कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की मांग अस्वीकार कर दी है। सुनवाई  पांव नवंबर  को होगी।
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Exclusive: पीडीए की ताबड़तोड़ कार्रवाई में माफिया को लगी 400 करोड़ की चोट

शिक्षक भर्ती के 23 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग अब 28 एवं 29 अक्तूबर को

शिक्षक भर्ती के 23 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग अब 28 एवं 29 अक्तूबर को प्रयागराज। 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में पुनर्मूल्यांकन के बाद सफल घोषित किए गए 23 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग के आयोजन एवं नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की तिथि आगे बढ़ा दी गई है।

नई तिथि 28 एवं 29 अक्तूबर निर्धारित की गई है। काउंसलिंग एवं नियुक्ति पत्र जारी करने की तिथि पहले 22 एवं 23 अक्तूबर को प्रस्तावित थी। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि अपरिहार्य कारणों से काउंसलिंग की तिथि में बदलाव किया जा रहा है। अब 28 एवं 29 अक्तूबर को काउंसलिंग होगी और नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती:  यूपी सरकार ने हाई कोर्ट में कहा- कम गुणांक वालों का चयन करेंगे रद्द

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में 31277 पदों पर भर्ती के मामले में प्रदेश सरकार ने कहा है कि यदि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की जगह कम अंक पाने वालों का चयन हुआ है तो इसे सुधारा जाएगा और अधिक अंक वालों को काउंसिलिंग कराकर उनको नियुक्ति दी जाएगी तथा कम अंक वालों की नियुक्तियां रद़्द की जाएंगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर बताया कि एनआईसी से इस बात की पड़ताल की गई है कि कम पदों के बावजूद सूची जारी करने में किस प्रकार से अनियमितता हुई है। एनआईसी की रिपोर्ट आने के बाद यदि  गड़बड़ी मिलती है तो उसे सुधारा जाएगा। 

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह सभी नियुक्तियां अभी अंतिम नहीं  हैं और इस पर पुनर्विचार हो सकता है। नियुक्तियां सुप्रीमकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन हैं। सुप्रीमकोर्ट में कट ऑफ मेरिट और शिक्षामित्रों के समायोजन का प्रकरण अभी लंबित है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कम गुणांक वाले को नियुक्ति देने और अधिक गुणांक वालों को नियुक्ति नहीं देने का सवाल ही उठता है। यदि ऐसा हुआ है तो मेधावी अभ्यर्थी को काउंसलिंग में बुलाकर अवसर दिया जाएगा। महाधिवक्ता ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह यदि कोई जांच रिपोर्ट होगी तो उसे  कोर्ट के समक्ष रखेंगे साथ ही उस पर  राज्य सरकार का स्टैंड भी स्पष्ट करेंगे। 

संजय कुमार यादव व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने महाधिवक्ता के इस बयान के बाद कहा कि इस मामले में फिलहाल कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तिथि नियत की है। 

याची के पक्ष से अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी , अनिल सिंह बिसेन आदि का कहना था कि नियुक्ति पत्र देने के लिए जारी की गई सूची में बहुत से ऐसे मामले हैं जिनमें कम गुणांक वालों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया जबकि अधिक गुणांक पाने वाले चयन से बाहर हैं। याची ओबीसी कटेगरी का अभ्यर्थी है और उससे कम गुणांक वाले को नियुक्ति पत्र दे दिया गया है। । महाधिवक्ता के बयान के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई हेतु 17 नवंबर नियत कर दी है।
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आयोग में प्रतियोगियों का प्रदर्शन, स्केलिंग पर नहीं बनी बात

पीसीएस-2018 में विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप स्केलिंग हुई या नहीं, इस मुद्दे पर मंगलवार को प्रतियोगी छात्रों और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के उप सचिव एवं मीडिया प्रभारी पुष्कर श्रीवास्तव के बीच हुई वार्ता किसी नतीजे पर न हीं पहुंच सकी। इससे पूर्व प्रतियोगी छात्रों ने यूपीपीएससी का घेराव और धरना-प्रदर्शन भी किया। अन्य मांगों पर भी प्रतियोगियों को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।

उत्तर प्रदेश प्रतियोगी छात्र मंच के बैनर तले छात्र सुबह 11 बजे से ही आयोग के बाहर जुटने लगे थे और कुछ ही देर में उनकी संख्या सैकड़ों में पहुंच गई। छात्र आयोग के अध्यक्ष से मिलने के लिए अड़े थे। अध्यक्ष नहीं मिले तो छात्रों ने कहा कि सचिव से मुलाकात कराई जाए। चार घंटे तक चली मशक्कत के बाद पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप से छात्रों की वार्ता आयोग के उप सचिव एवं मीडिया प्रभारी पुष्कर श्रीवास्तव से कराई गई।
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