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आर्थिक वृद्धि हेतु शरद पूर्णिमा पर कराएं माँ लक्ष्मी का श्री सूक्त पाठ एवं 700 आहुतियों के साथ विशेष हवन - 31 अक्टूबर 2020 - महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर
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आर्थिक वृद्धि हेतु शरद पूर्णिमा पर कराएं माँ लक्ष्मी का श्री सूक्त पाठ एवं 700 आहुतियों के साथ विशेष हवन - 31 अक्टूबर 2020 - महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

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रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर की स्वार विधान सभा का चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह सीट यहां के विधायक अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने की वजह से रिक्त हो गई है। नगर पालिका परिषद स्वार के पूर्व अध्यक्ष  शफीक अहमद द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया। 

याची के अधिवक्ता विक्रांत पांडेय के मुताबिक स्वार विधान की सीट का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को रद्द कर दिया था। क्योंकि वहां के निर्वाचित निर्वाचित विधायक अब्दुल्ला खान ने गलत जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। वर्तमान में यूपी की सात रिक्त सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।

मगर स्वार विधान सभा को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि जनप्रितिनधित्व कानून के तहत  विधानसभा की सीट छह माह से अधिवक्ता रिक्त नहीं रखी जा सकती है, इसलिए स्वार की रिक्त सीट पर भी चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर आपत्ति की गई कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील लंबित है। दूसरे याची ने चुनाव आयोग को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
 
याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है। हाईकोर्ट को इस मामले में सीधे सुनवाई कर आदेश पारित करने का अनुच्छेद 226 में अधिकार है। राज्य सरकार का कहना था कि चुनाव अधिसूचना जारी करना निर्वाचन आयोग का काम है। राज्य सरकार स्वार सीट को रिक्त घोषित कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने स्वार विधान सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में और धार्मिक सद्भाव को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां करने के आरोपी आगरा के अशद खान को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए याचिका खारिज कर दी है। अशद खान ने प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने सुनवाई की। 

याची के खिलाफ आगरा के सचेंद्र शर्मा ने जगदीशपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को लेकर आपत्ति जनक टिप्पणियों को न सिर्फ लाइक और शेयर किया बल्कि कमेंट भी किए। इन टिप्पणियों में दो समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने, साम्प्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने, राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कथन किए गए हैं। इसके लिए उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए और बी तथा 505 (1) (बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

याची का कहना था कि वह छात्र है और उसे झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उसने कोई अपराध नहीं किया है। सिर्फ फेसबुक पर कुछ टिप्पणियों को लाइक किया है। याचिका का विरोध कर रहे शिकायतकर्ता के वकील बाल कृष्ण पांडेय और अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम एके संड ने कहा कि याची ने न सिर्फ पोस्ट लाइक किए हैं बल्कि आपत्ति जनक कमेंट और शेयर भी किए हैं।

कोर्ट में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के रिकार्ड भी पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध किया जाना दिखाई दे रहा है। याचिका पर हस्तक्षेप करने और राहत देने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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 जीआईसी के 3317 एलटी ग्रेड शिक्षकों को आज मिलेगा नियुक्त पत्र

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों (जीआईसी) के 3317 सहायक अध्यापकों (एलटी ग्रेड) को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नियुक्ति पत्र जारी करेंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर होने वाले नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री के एक क्लिक पर सभी चयनित शिक्षकों के मोबाइल पर नियुक्ति पत्र उपलब्ध हो जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित पदस्थापन एवं नियुक्ति वत्र वितरण समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी शामिल होंगी।

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने किया। परीक्षा परिणाम को लेकर लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट के हस्तक्षेप पर एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया गया। प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद शिक्षा निदेशालय से स्कूलों के विकल्प लेने के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटने जा रहे हैं। एलटी ग्रेड शिक्षक कला की अर्हता को लेकर कुछ विवाद के बाद प्रमाण पत्रों के सत्यापन एवं शिक्षा निदेशालय से विकल्प भरे जाने में देरी के चलते उसके चयनित शिक्षकों को बाद में नियुक्ति पत्र का वितरण होगा।

एलटी ग्रेड हिंदी एवं सामाजिक विज्ञान के परिणाम को लेकर प्रतियोगी छात्रों ने लंबा संघर्ष किया, इसके बाद परिणाम घोषित किया गया। अब इन विषयों का सत्यापन पूरा होने और विद्यालयों का विकल्प लेने के बाद निॉुक्ति दी जाएगी। एलटी ग्रेड सामाजिक विज्ञान एवं हिंदी को लेकर लंबा संघर्ष करने वाले विक्की खान ने नियुक्ति पत्र पाने जा रहे चयनित शिक्षकों को बधाई दी है।
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प्रयागराजः अतीक के 11 बैंक खाते होंगे कुर्क, लेनदेन पर भी लगेगी रोक, कार्रवाई शुरू

अहमदाबाद जेल में बंद माफिया अतीक अहमद की करोड़ों की संपत्ति पर कार्रवाई के बाद पुलिस उसके बैंक खातों को भी कुर्क करने जा रही है। उसके 11 खातों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें सीज कराया जाएगा। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने इस संबंध में संबंधित बैंकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

अतीक पर यह कार्रवाई धूमनगंज थाने में उस पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में धारा 14(1) के तहत की जाएगी। मुकदमे के विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर नीरज वालिया की ओर से उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर बताया गया था कि अतीक के 13 ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली है जो उसके अपराध जगत मेें आने के बाद खोले गए। इनमें से सात प्रयागराज, तीन नई दिल्ली, एक लखनऊ  व दो बलरामपुर स्थित बैंकों में खुलवाए गए।

एसएसपी ने रिपोर्ट के आधार पर खातों को कुर्क करने की संस्तुति करते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। रिपोर्ट व संबंधित साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिलाधिकारी ने खातों को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कुल 11 खातों को कुर्क करने की अनुमति प्रदान की गई है। आदेश में कहा गया है कि दो खाते पूर्व में ही कुर्क किए जाने की वजह से कुल 11 खातों पर कार्रवाई की अनुमति दी जा रही है। उधर अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने खाते कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

बैंकों को भेजा जाएगा पत्र, सीज होंगे खाते

पुलिस सूत्रों का कहना है कि खातों पर कुर्की की कार्रवाई के तहत बैंकों को पत्र भेजकर संबंधित खातों को सीज कराया जाएगा। इसके तहत इन खातों में पड़ी रकम फ्रीज कराकर लेनदेन बंद कराया जाएगा। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के लिए पुलिस को 30 अक्तूबर तक की मोहलत दी गई है। 
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Ateeq Ahmed Ateeq Ahmed

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती : त्रुटि सुधार की अनुमति देने की मांग खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में गलत आवेदन फार्म भरने वाले अभ्यर्थी को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लोक परीक्षाओं में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। कुछ लोगों को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से पूरी चयन  प्रक्र िया प्रभावित होगी। कोर्ट ने  सुप्रीमकोर्ट द्वारा अर्चना चौहान केस में दिए गए निर्णय को सामान्य आदेश न मानते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट का आदेश याची के मामले में विशेष तथ्यों के आधार पर दिया गया है। इस आदेश को नजीर मानते हुए सभी पर लागू नहीं किया जा सकता है।
 
धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश दिया। याची ने अपने बीए रतृतीय वर्ष तथा बीटीसी के रोल नंबर में सुधार करने का आदेश देने की मांग की थी। कोर्टने हाईकोर्ट द्वारा पूर्व राजेंद्र पटेल वर्सेंज स्टेट ऑफ यूपी, पूजा यादव वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी स्पेशल अपील और आरती वर्मा वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी केस में दिए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेशों से स्प्ष्ट है कि चयन के इस स्तर पर त्रुटि सुधार की अनुमति देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी और निर्धारित समय सीमा में उसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। 

कोर्ट ने किया मुकदमों का उल्लेख

1- पूजा यादव केस - में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा याची ने आवेदन में त्रुटि सुधार का तबतक कोई प्रयास नहीं किया जबतक उसे मेडिकल टेस्ट में शामिल कारने से इंकार नहीं कर दिया गया। इस स्तर पर कोई आदेश देने से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसी तरह की और याचिकाएं आएंगी। इस लिए चयन के इस स्तर पर कोई राहत नहीं दी जा सकती है। 

आरती वर्मा केस- में हाईकोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थियों को आवेदन फार्म सही से न भरने का खामियाजा भुगतना होगा। जब आवेदक खुद अपने बारे में सही सूचना देने में नाकाम रहा है तो त्रुटि सुधार का आवेदन निरस्त करने में कोई गलती नहीं दिखाई देती है। याची ने अपने जाति वर्ग को गलत भरा और चयन के इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप से चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी। 

राममनोहर यादव केस- में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भावी शिक्षक अपना एक पेज का आवेदन फार्म भी सही से नहीं भर सकते तो समझा जा सकता है कि यदि वे चयनित हुए तो भावी पीढ़ी को क्या पढ़ाएंगे।
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फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते नहीं कर सकते अग्रिम विवेचना का आदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मुकदमे की फाइनल रिपोर्ट और उस पर दाखिल प्रोटेस्ट अर्जी लंबित रहते हुए पुलिस अधिकारी अग्रिम विवेचना का आदेश नहीं दे सकते हैं। उनको ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में एसपी गाजीपुर और एडीजी वाराणसी जोन द्वारा पारित आदेशों को विधि विरुद्ध मानते हुए एसएचओ सैदपुर गाजीपुर से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। कहा है कि यदि यह पाया जाता है कि अग्रिम विवेचना का निर्णय इन दोनों अधिकारियों के दबाव में लिया गया है तो अदालत उनको तलब कर स्पष्टीकरण मांगेगी। यह भी कहा है कि यदि एसएचओ सैदपुर हलफनामा नहीं दाखिल करते हैं तो अदालत दोनों अधिकारियों को समन जारी कर तलब करेगी। 

गाजीपुर के गोविंद नारायण की याचिका पर शुक्रवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याची के अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि याची के खिलाफ सैदपुर थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विवेचक ने विवेचना के बाद उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। शिकायतकर्ता ने फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की जो अभी लंबित है। इस बीच कोराना के कारण अदालतें बंद हो गई। 

अधिवक्ता का कहना है कि मामला मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित होने के बावजूद इंस्पेक्टर सैदपुर ने एसपी गाजीपुर के 23 जुलाई 2020 के आदेश से विवेचक को इस मामले में अग्रिम विवेचना करने का आदेश दे दिया। एसपी के आदेश में अपेक्षा की गई थी कि अग्रिम विवेचना कोर्ट की अनुमति लेकर की जाए। और इसके परिणाम से अवगत कराया जाए। मगर उनको अग्रिम विवेचना के परिणाम से अवगत नहीं कराया गया। इस नाराजगी जताते हुए एडीजी वाराणसी जोन ने अग्रिम विवेचना की रिपोर्ट दो दिन में उनके समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पुलिस अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। एडीजी, एसपी और एसएचओ को फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उनका कार्य विधि विरुद्ध है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
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बच्ची चोरी में सरकारी डॉक्टर व पत्नी समेत पांच गिरफ्तार 

कीडगंज से एक वर्षीय बच्ची चोरी होनेे मामले का शनिवार को खुलासा हो गया। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद करते हुए सरकारी डॉक्टर व उसकी पत्नी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। डॉक्टर ने अपने नि:संतान भाई के लिए 60 हजार मेें तीन लोगों को बच्ची चुराने का ठेका दिया था। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है। 

15 अक्तूबर को रामबाग रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले रिजवान की एक वर्षीय बच्ची चोरी हो गई थी। मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश में जुटी थी। अफसरों का दावा है कि सटीक सूचना पर शनिवार को परेड ग्राउंड पुलिया के पास से पांच  लोगों को पकड़ा गया जिनके कब्जे से बच्ची भी बरामद हुई। इनमें नईम अली व जमीला निवासी नहरपुर हंडिया, रामसूरत निवासी बरगढ़ चित्रकूट के अलावा झूंसी निवासी डॉ. रंजन गौतम व उसकी पत्नी वंदना गौतम शामिल हैं।

डॉ. रंजन प्रतापगढ़ स्थित राजकीय होम्योपैथ चिकित्सालय में बतौर सरकारी चिकित्सक तैनात है। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई तो पता चला कि डॉक्टर व उसकी पत्नी के कहने पर अन्य तीन आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया था। उधर, सूत्रों का कहना है कि वारदात के बाद आरोपियों ने बच्ची को आरोपी डॉक्टर दंपती को सौंप दिया था, जिसके एवज में उन्हें 35 हजार रुपये मिले थे और शेष 25 हजार बाद में दिए जाने थे। सर्विलांस से जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने बच्ची को झूंसी से ही बरामद किया। 

अस्पताल में हुई थी मुलाकात

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोते समय बच्ची को चुराकर ले जाने वाले नईम व रामसूरत थे। जिनकी तस्वीर सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुई थी। पूछताछ में दोनों ने बताया कि डॉक्टर रंजन का भाई चितरंजन जो सरकारी अध्यापक है, नि:संतान है। इलाज के लिए हंडिया महिला चिकित्सालय में जाने के दौरान उसकी मुलाकात जमीला से हुई। जिसने 60 हजार में उसे बच्ची देने का वादा किया। जमीला ने अपने परिचित नईम को यह बात बताई, जो रेलवे स्टेशन के आसपास रिक्शा चलाता था। जिसने रामसूरत संग मिलकर वारदात अंजाम दी।
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यूपीः हाईकोर्ट का आदेश- पार्कों और खेल के मैदानों से हटाया जाए अतिक्रमण, तीन महीने में मांगी रिपोर्ट

prayagraj news : child theft
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सार्वजनिक पार्कों और खेल के मैदानों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट तीन माह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आदेश पारित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण राज्य का वैधानिक दायित्व है। रोजगार और राजस्व पर लोक स्वास्थ्य, जीवन एवं पर्यावरण को वरीयता दी जानी चाहिए।

राम भजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने कहा है कि सभी पार्कों का स्थानीय निकायों की मार्फत ठीक से रखरखाव किया जाए ताकि आम लोग पार्कों का उपयोग कर सकें। कोर्ट ने कहा कि पार्कों में किसी को भी कूड़ा  डालने, इकट्ठा करने या अन्य उपयोग में लाने की अनुमति न दी जाए।

कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी पार्कों, खेल मैदानों का सही रखरखाव करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। याची का कहना है कि उसके आवास के सामने सेक्टर 11 विजय नगर ,गाजियाबाद में स्थित नगर निगम के पार्क का अतिक्रमण कर लिया गया है। उसका उपयोग वाहन खड़ा करने के लिए किया जा रहा है, जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि पार्क के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि निगम या प्राधिकरण पार्क के रखरखाव करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है। वे अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकते।

कोर्ट ने कानून एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पार्कों, खेल मैदानों के अतिक्रमण पुलिस से हटवाए जाएं और उनका रखरखाव किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पार्क में कूड़ा फेंकना कानूनन अपराध है। ऐसा करने वाले पर अर्थ दंड और एक माह के जेल की सजा दी जा सकती है।

पार्कों, खेल मैदानों की देखभाल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकायों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह पार्कों खेल मैदानों की देखभाल करें। देश के स्वस्थ पर्यावरण के लिए यह जरूरी भी है। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रदूषण मुक्त जीवन का अधिकार देता है। विकास के नाम पर उद्योग लगाकर इस अधिकार में कटौती नही की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51ए नागरिकों के कर्तव्य बताता है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पार्कों, खेल मैदानों की स्वच्छता का ध्यान रखे। 
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नशे में धुत सड़क पर गिरे इंस्पेक्टर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल, निलंबित

भदोही में एक गांव ऐसा जहां आज भी नाला ही है आम रास्ता

प्रदेश के भदोही जिले में एक गांव ऐसा है जहां आजादी के 73 साल बाद भी लोग नाले से होकर आते-जाते हैं। गांव को जोड़ने के लिए यही एक मात्र आम रास्ता है। यह रास्ता राजस्व रिकार्ड में नाले के तौर पर दर्ज है। भदोही के राकेश कुमार ने इस गांव में सड़क बनाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। 

कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए भदोही के डीएम को मौके पर जाकर यथास्थिति देखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीएम को यह भी बताने के लिए कहा है कि गांव वालों को सड़क देने के लिए उनके पास क्या उपाय है। मामला भदोही के डुबही गांव का है। जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी से 23नवम्बर तक व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने को कहा है। 

याची का कहना है कि गांव में प्राइमरी स्कूल भी है।2013में जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया है। गांव में रहने वाले 300 लोग नाले होकर गांव में आते जाते हैं। बरसात  के दिनों में आने जाने का कोई रास्ता नहीं होता है। गांव को संपर्क मार्ग बनाकर जोड़ने के लिए जनप्रतिनधियों को कई प्रत्यावेदन दिए गए मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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गांव सभा के प्रस्तावों पर क्यों नहीं होते ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली की गंभीर खामियों को उजागर करने वाली जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि गांव सभा के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य क्यों नहीं हैं।  कोर्ट ने कहा कि संविधान के भाग नौ में  73 वे संविधान संशोधन द्वारा गांव सभा को पूर्ण संवैधानिक दर्जा दिया गया  है । ऐसे में इसके क्रियाकलापों में संविधान की मंशा के अनुरूप कार्य न होकर मनमानी तरीके काम करना आश्चर्यजनक है। 

कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि गांव सभा में पारित हो रहे प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर बगैर उनकी  सहमति कैसे मानी जा सकती है । कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तावों  का दुरुपयोग करने पर जिम्मेदारी कैसे तय होगी ।

जौनपुर के मुकेश सिंह की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। । याची के अधिवक्ता आरके सिंह का कहना था कि गांव सभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए सदस्यों की  उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए और बैठक के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर की अनिवार्यता का प्रावधान रखा जाए ।

कहा गया है कि कानून की इन कमियों का गांव सभा स्तर पर प्रदेश भर में जमकर  दुरुपयोग किया जा रही है ।  यही  वजह है कि गाँव सभा स्तर पर भ्रष्टाचार जैसी आपराधिक घटनाओं में दिनों दिन वृद्धि हो रही है । कहा गया है कि पंचायत राज नियमावली में कमी के कारण संविधान की भावनाओं  के अनुरूप गांव सभा में कार्य नहीं हो रहा है ।कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर यूपी सरकार से जवाब तलब किया है और सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तिथि नियत की है ।
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नशेड़ी व्यक्ति को उसकी मर्जी के खिलाफ नशामुक्ति केंद्र भेजना अवैध : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी नशेड़ी व्यक्ति को  यदि उसका दिमाग ठीक है, तो उसकी मर्जी के खिलाफ नशा मुक्ति केंद्र  भेजना अवैध निरूद्धि मानी जाएगी। किसी को ऐसा करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने मेरठ के अंकुर कुमार को जबरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र भेजने के मामले में एसएसपी मेरठ को दोषी लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में ऐसा किसी के साथ भी नहीं करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने  नशा मुक्ति केंद्र से अदालत में पेश  किए  याची को स्वतंत्र कर दिया है और उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे जाने की छूट दी है। 

कोर्ट ने कहा है कि जीवन रक्षक ड्रग डे एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर मुजफ्फरनगर या जिसने भी याची को केन्द्र में जबरदस्ती भर्ती कराया है ,उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।साथ ही यह सुनिश्चित करे कि  याची को भविष्य में कोई नुकसान न पहुंचाने पाए। अंकुर कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुनवाई की। 

 याचिका में कहा गया कि याची को उसके मामा ने जबरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवा दिया है। उसने रिहाई की मांग की तो कोर्ट ने याची को पेश करने का निर्देश दिया। दरोगा कपिल कुमार ने नशा मुक्ति केंद्र मुजफ्फरनगर से लाकर याची को पेश किया।

29 वर्षीय अंकुर कुमार ने कोर्ट को बताया कि उसे उसके मामा बीरेन्द्र सिंह उर्फ बिल्लू कई लोगों के साथ आए और उसे जबरदस्ती  गाड़ी में बैठाकर नशा मुक्ति केंद्र में मर्जी के खिलाफ भर्ती करा दिया है। जब कि विपक्षी अधिवक्ता का कहना था कि मामा ने नहीं अंकुर की  मां ने उसे भर्ती कराया है।केन्द्र के 21अक्तूर के पत्र से यह स्पष्ट है। अदालत ने इस  तर्क को नहीं माना और कहा कि मामा ने जबरदस्ती उसे केन्द्र में भर्ती कराया है।
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