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फिल्म एक्टर नवाज़उद्दीन सिद्दीकी और परिवार को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिल्म ऐक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी व परिवार के तीन सदस्यों की यौन शोषण के मामले मे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगायी है और विवेचना मे सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

इनके खिलाफ सामान्य आरोप होने के कारण कोर्ट ने राहत दी है जिसमें नवाज़ुद्दीन के साथ ही उनकी मां मेहरुन्निशा और दो भाइयों फ़ैयाज़ुद्दीन और अयाजुद्दीन शामिल हैं।  बच्ची के साथ दुष्कर्म के मुख्य  आरोपी एक भाई मिनहाज़ुद्दीन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत,नही दी है। इसकी याचिका खारिज कर दी है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने दिया है।  मुज़फ्फरनगर के बुधाना थाने मे नवाज़ुद्दीन की पत्नी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजलि पांडेय ने एफआईआर दर्ज करायी है। इसी साल 27 जुलाई को नवाज़ुद्दीन की पत्नी ने उनके और परिवार के खिलाफ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट के तहत दर्ज करायी है प्राथमिकी।
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Allahabad university: विश्वविद्यालय का प्रवेश परीक्षा परिणाम घोषित, बीए में सोमनाथ टापर

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने रविवार को स्नातक प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। स्नताक के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा के टॉपरों की लिस्ट में पूर्वांचल के छात्रों दबदबा रहा है। बी प्रवेश परीक्षा में संतकबीर नगर के सोमनाथ गुप्ता ने टॉप किया है। तो मैथ्स की प्रवेश परीक्षा में आजमगढ़ के अविनाश मेधासिया अव्वल रही।

वहीं, बीकॉम प्रवेश परीक्षा में सर्वेश कुमार अधिकांश अंक के साथ मेरिट में शीर्ष स्थान पर रहे। विस्तृत परिणाम इविवि की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इसके अलावा श्रेणी ऑफ फाइनिंग आर्टिस्ट (बीएफए) में वाराणसी के दिव्यांग कुमार नंदा ने टॉप किया, जबकि OF ऑफ पैरावॉमिंग आर्टिस्ट (बीपीए) की प्रवेश परीक्षा में बक्सर, बिहार की प्रज्ञा कुमारी ने बाजी मारी।कंपनी बायो की मेरिट में अलगंज, प्रयागराज की सौम्या त्रिपाठी शीर्ष स्थान पर बनी हुई है। वहीं, बी होमसाइंस की प्रवेश परीखा में सैदपुर, वाराणसी की अंकिता गुप्ता ने ज्यादातर अंक के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।

स्नातक प्रवेश परीक्षा में शमिल सभी अभ्यर्थियों के स्क कार्ड (अंक पत्र) इविवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी अपने स्कैन कार्ड वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। कोविद -१ ९ के कारण इविवि में इस बार प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। २ नवंबर से बीकॉम में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके बाद स्नातक के अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जाना होगा। विभिन्न पाठ्यक्रमों में ऑफ़लाइन प्रवेश की तिथियों पर सोमवार को अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।

ऑनलाइन प्रवेश शुरू होने से पहले इविवि की वेबसाइट पर कटऑफ अंक जारी किए जाएंगे और अभ्यर्थियों को उसी अंक के आधार पर प्रवेश पत्र जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी।

इन्हीं अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी। इन्हीं अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी।
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प्रयागराजः अतीक के 11 बैंक खाते होंगे कुर्क, लेनदेन पर भी लगेगी रोक, कार्रवाई शुरू

अहमदाबाद जेल में बंद माफिया अतीक अहमद की करोड़ों की संपत्ति पर कार्रवाई के बाद पुलिस उसके बैंक खातों को भी कुर्क करने जा रही है। उसके 11 खातों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें सीज कराया जाएगा। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने इस संबंध में संबंधित बैंकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

अतीक पर यह कार्रवाई धूमनगंज थाने में उस पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में धारा 14(1) के तहत की जाएगी। मुकदमे के विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर नीरज वालिया की ओर से उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर बताया गया था कि अतीक के 13 ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली है जो उसके अपराध जगत मेें आने के बाद खोले गए। इनमें से सात प्रयागराज, तीन नई दिल्ली, एक लखनऊ  व दो बलरामपुर स्थित बैंकों में खुलवाए गए।

एसएसपी ने रिपोर्ट के आधार पर खातों को कुर्क करने की संस्तुति करते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। रिपोर्ट व संबंधित साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिलाधिकारी ने खातों को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कुल 11 खातों को कुर्क करने की अनुमति प्रदान की गई है। आदेश में कहा गया है कि दो खाते पूर्व में ही कुर्क किए जाने की वजह से कुल 11 खातों पर कार्रवाई की अनुमति दी जा रही है। उधर अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने खाते कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

बैंकों को भेजा जाएगा पत्र, सीज होंगे खाते

पुलिस सूत्रों का कहना है कि खातों पर कुर्की की कार्रवाई के तहत बैंकों को पत्र भेजकर संबंधित खातों को सीज कराया जाएगा। इसके तहत इन खातों में पड़ी रकम फ्रीज कराकर लेनदेन बंद कराया जाएगा। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के लिए पुलिस को 30 अक्तूबर तक की मोहलत दी गई है। 

किन खातों को किया जाएगा कुर्क
1- खाता संख्या 1363100008822 बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा खुल्दाबाद
2- खाता संख्या 6230100007966 बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा कनाट प्लेस नई दिल्ली
3- खाता संख्या 50114038581 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
4- खाता संख्या 50107884373 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
5- खाता संख्या 20448204075 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
6- खाता संख्या 50106221757 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
7- खाता संख्या 30260753055 एसबीआई संसद भवन शाखा एनेक्सी नई दिल्ली
8- खाता संख्या 33108579911 एसबीआई नुरूल्लाह रोड
9- खाता संख्या 60167042171 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
10- खाता संख्या 60164021028 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
11- खाता संख्या 6177000100011488  पंजाब नेशनल बैंक, शाखा  कचहरी

नोट- कुल चिह्नित 13 में से खाता संख्या 10023823015 एसबीआई संसद भवन शाखा नई दिल्ली व खाता संख्या 10223011721 एसबीआई उप्र सचिवालय शाखा लखनऊ पूर्व मेें ही कुर्क किए जाने के कारण आदेश में सम्मिलित नहीं किए गए हैं।
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कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हटाए जा सकते नगर पंचायत अध्यक्ष : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी निर्वाचित व्यक्ति को पद से हटाने  की प्रक्रिया कानून में निर्धारित की गई है। इसका पालन करके ही उसे पद से हटाया जा सकता है। कोर्ट ने रामपुर के मसवासी नगर पंचायत के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है । कोर्ट ने कहा है कि जनता की ओर से चुने हुए किसी भी प्रतिनिधि को पद से हटाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पंचायत सदस्य याची को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति डा.वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने नगर पंचायत सदस्य महेश चंद्र भारद्वाज की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने ठेकों के आवंटन एवं विकास कार्यो में भारी वित्तीय अनियमितता की है, जिसकी जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। घोटाले रोकने के लिए उन्हें पद से हटाया जाए।

सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 48 में चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गई है। ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है, खारिज की जाए।

कोर्ट ने संविधान के 74वें संशोधन से स्थानीय चुनी हुई जनतांत्रिक सरकार के उपबंधों एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की मंशा निचले स्तर पर जनतंत्र को लागू करने की है। संविधान संशोधन से लोकल सेल्फ गवर्नमेंट की परिकल्पना को साकार करने का सिस्टम बनाया गया है। पंचायत राज को सांविधानिक दर्जा दिया गया है। चुने हुए प्रतिनिधि को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गयी है। ऐसे में कानून के तहत ही किसी को पद से हटाया जा सकता है। प्रशासनिक आदेश से नहीं। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट

टाइनी शाखा संचालक की गला रेतकर हत्या, एक दिन पहले से था गायब

थाना क्षेत्र के लालतारा गांव में टाइनी शाखा संचालक श्रीकांत पटेल 26 की गला रेतकर हत्या कर दी गई। वह बुधवार शाम से लापता था जिस पर परिजनों ने गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि हत्यारे मृतक के पास मौजूद 1.5 लाख रुपये, मोबाइल व बाइक भी लूट ले गए। पुलिस ने बताया कि जांच पड़ताल की जा रही है।

श्रीकांत मेजा व खीरी थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित  सिलौधी गांव में रहने वाले अवध नारायण पटेल के दो बेटों में छोटा था। वह कोहड़ार बाजार में टाइनी शाखा का संचालन करता था। वह रोज बाइक से शाखा पर आता था और शाम को लौट जाता था। बुधवार रात नौ बजे तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। कोहड़ार बाजार के कुछ परिचितों ने बताया कि वह शाम 7.30 बजे केकरीब शाखा बंद कर चला गया था। रात भर खोजबीन के बाद भी कुछ पता नहीं चला तो परिजनों ने सुबह थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस तलाश में जुटी थी कि दोपहर बाद एनटीपीसी के बगल स्थित नहर के पास झाड़ियों में युवक की रक्तरंजित लाश मिली। जानकारी पर आसपास केलोग भी जुट गए और इसी दौरान किसी ने मृतक की शिनाख्त श्रीकांत केरूप में की। तब तक पुलिस भी आ गई। जांच में पता चला कि गला रेतकर उसकी हत्या की गई थी। जानकारी मिली तो परिजन भी आ गए। भाई इंद्रजीत ने बताया कि श्रीकांत ने सुबह ही उससे 1.5 लाख रुपये लिए थे। मौके से उसका मोबाइल व बाइक भी गायब है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल परिवार के लोगों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है।

शाम को हुई थी बात, फिर बंद हो गया मोबाइल

मृतक केपरिजनों ने बताया कि श्रीकांत से उनकी आखिरी बार शाम छह बजे केकरीब बात हुई थी। भाई इंद्रजीत ने बताया कि फोन कर उसने बताया था कि एक घंटे में घर आ जाएगा। आठ बजे तक नहींआया तो लगा कि कहीं रुक गया होगा। नौ बज गए तो खोजबीन शुरू की गई। बताया कि मृतक की दो साल पहले अंजू देवी से शादी हुई थी। पति की मौत पर उसकेआंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर मां फुलवंती व अन्य परिजनों का भी बुरा हाल था। 

मौकेसे मिली शराब की खाली बोतलें, दो संदिग्धों की तलाश

युवक केशव से कुछ दूरी पर शराब की खाली बोतलें मिलीं हैं। उधर जांच पड़ताल में यह भी सामने आया है कि वह कोहड़ार बाजार स्थित टाइनी शाखा से दो युवकों संग बाइक पर जाता दिखा था। हालांकि युवक कौन थे, इसका पता नहीं चल सका है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल परिजनों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है, ऐसे में अज्ञात में केस लिखकर जांच की जा रही है। 
  • दो संदिग्ध युवकों की तलाश की जा रही है। मृतक के पास मौजूद रुपये कहां गए, इसका पता लगाने के लिए उसकेबैंक खाते का विवरण मंगाया जा रहा है। बाइक व मोबाइल का भी पता लगाया जा रहा है। - चक्रेश मिश्रा, एसपी यमुनापार 

पोते ने की थी बुजुर्ग की हत्या, गिरफ्तार

मांडा केभरारी गांव में 72 वर्षीय शोभनाथा यादव की हत्या का बृहस्पतिवार को खुलासा हो गया। पुलिस का दावा है कि वारदात को मृतक केपोते ने ही अंजाम दिया था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शोभनाथ की हत्या नौ सितंबर को रात में सोते समय की गई थी। अफसरों ने बताया कि शक के आधार पर मृतक के पोते नीरज यादव पुत्र रविशंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल ली।

बताया कि वारदात से एक दिन पहले यानी आठ सितंबर को दादा ने उसे खाद लाने केलिए रुपये दिए थे। लेकिन वह खाद लाना भूल गया। यह पता चलने पर दादा ने उसे गालियां देते हुए जमकर पीट दिया। इसी बात पर आपा खोते हुए उसने धक्का मारकर दादा को गिरा दिया जिससे वह चोटिल हो गए। इसकेबाद चक्की का एक पल्ला पैर व दूसरा पल्ला सीने पर रखकर उन्हें मार दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 
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बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हाकिमलाल के बहाने सपा ने साधे कई तीर, चुनाव से पहले दिखाई ताकत

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधायकों के बगावती तेवर को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस बहाने पार्टी ने कई सियासी समीकरणों को साधा है। पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के खिलाफ सपा ही मुख्य विपक्षी दल है। हालांकि विधायकों ने बसपा से बगावत की बात तो स्वीकार की है, लेकिन वह किस तरफ जाएंगे इसे लेकर अभी उन्होंने मौन साध रखा है। उनकी इस चुप्पी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात को नकाराने को विधायकी बचाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सपा के साथ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक दिख रही है। सभी विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत होने की होड़ है, ताकि मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके। इस कवायद के बीच प्रतापपुर के बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद समेत पांच विधायकों की बगावत सपा के लिए लाभकारी मानी जा रही है। प्रयागराज की सियासी समीकरण को देखें तो सपा के पूरे मंडल में एक मात्र विधायक उज्जवल रमण सिंह है। ऐसे में हाकिम लाल और मुज्तबा सिद्दीकी की बसपा से नाराजगी पर सपा नेताओं की नजर रही। ये दोनों नेता पार्टी में लंबे समय से खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव में इन पर बसपा उम्मीदवार के खिलाफ जाने का भी आरोप लगा था। मौजूदा विधायक होने के बावजूद इनके टिकट कटने की बात भी सामने आने लगी थी। इसके अलावा सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती हाथरस समेत कई मुद्दों पर उस तरह से मुखर होकर सामने नहीं आईं, जोकि उनकी पहचान है।

ऐसे में बसपा विधायकों ने दूसरे दलों में संपर्क साधना शुरू कर दिया। इस नाराजगी को बगावती रूप देने के लिए सपा हाईकमान ने कभी बसपा में रहे अपने वरिष्ठ नेता को आगे किया। बताया जा रहा है कि उन्हीं सपा नेता की अगुवाई में बगावत की पूरी पटकथा लिखी गई और दोनों विधायकों की अखिलेश यादव से मुलाकात भी कराई गई। हालांकि राज्यसभा के लिए सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद बसपा समेत अन्य सभी दावेदारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में बसपा विधायकों के इस बगावत का सपा को तात्कालिक तौर तो बड़ा फायदा होने नहीं जा रहा लेकिन 2022 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर इसे बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

जिले की सियासत को देखें तो खासतौर पर, पिछड़ी जाति बहुल वाले हंडिया और प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इन दोनों विधायकों के आने से सपा को अपने परंपरागत मतों के ध्रुवीकरण में मदद मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बसपा से बगावत करने वाले दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता बची रहती है तो सपा जिले में तीन मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में उतरेगी। वहीं अन्य विपक्षी दलों के खाते में एक भी विधायक नहीं होगा। इसका भी सपा को फायदा हो सकता है। ऐसे में बसपा विधायकों के बगावत को सपा के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
  • ‘बहनजी (मायावती)  आज भी हमारी नेता हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है। हमारी नाराजगी पार्टी कोऑर्डिनेटर से है। पार्टी में हमारी उपेक्षा की जा रही है। बैठकों में हमें नहीं बुलाया जाता है। बैठक में पहुंच भी गए तो पीछे की सीट पर बैठाया गया। बहनजी से मिलने की कोशिश की गई लेकिन उनसे भी नहीं मिलने दिया गया। उनसे मिलकर अपनी बात रख लेते तो हमारा दर्द कुछ कम हो जाता। इसके अलावा हम विधायक हैं। इसके बाद भी दूसरे प्रत्याशी की तलाश की जा रही है। दूसरे दल में जाने का हमलोगों का कोई इरादा नहीं है। हम बसपा में हैं और रहेंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की बात भी झूठी है। यदि पार्टी हमारे के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो हम 2021 तक देखेंगे और हमें लगेगा कि बसपा से टिकट नहीं मिलेगा तो दूसरी राह पकड़ने के बारे में भी विचार करेंगे।’ - हाकिम लाल बिंद, विधायक
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पूर्व सांसद अतीक अहमम के करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू 

अतीक अहमद के 11 खाते सीज करने के बाद अब उसके करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू हो गई है। इतना ही नहीं अतीक गिरोह के खास शूटरों और गुर्गों के बैंक लोन का बैंकों से हिसाब किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि अतीक के परिजनों तथा अन्य करीबियों ने उसके रसूख का इस्तेमाल करते हुए संपत्ति अर्जित की है। ऐसे खातों को गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज किया जा सकता है। पुलिस जल्द ही अतीक के परिजनों तथा अन्य गुर्गों के खातों को सीज कर सकती है। 

अतीक अहमद के अलग-अलग बैंकों में 11 खाते थे जिसमें तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा की रकम थी। सभी खातों को सीज कर उन्हें कुर्क कर दिया गया। अब पुलिस अतीक की पत्नी, बच्चों, भाई और अन्य करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू कर दी है। उनके खातों के बारे में बैंकों से जानकारी ली गई है। परिवार वालों के साथ ही खास गुर्गों और शूटरों के खातों के बारे में पुलिस जानकारी इकट्ठी की है।

उनके खाते जिस बैंक में हैं, अधिकारियों से उनका हिसाब-किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि सभी खातों के लेन-देन का विवरण मिल जाने के बाद उनकी आय, उस आय पर दिये गए इनकम टैक्स समेत तमाम बिंदुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद उन्हें सीज कर कुर्क करने के लिए डीएम से अनुमति मांगी जाएगी। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14-1 के तहत अतीक अहमद की संपत्तियों की जांच करने वाले इंस्पेक्टर नीरज वालिया ने बताया कि अतीक के साथ ही उनके करीबी रिश्तेदारों, शूटरों और गुर्गों के खातों की जांच की जा रही है। 

अशरफ, आबिद और तोता की संपत्तियों की भी जांच 

अतीक अहमद के साथ-साथ अशरफ, आबिद प्रधान और तोता की संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। अशरफ के खिलाफ धूमनगंज थाने में गैंगस्टर की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। गैंगस्टर के उसी मामले में पुलिस आबिद प्रधान और जुल्फिकार उर्फ तोता की भी जांच शुरू कर दी गई है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को जांच सौंपी गई है। इंस्पेक्टर ने बताया कि यह जांच अतीक के गैंगस्टर के मुकदमे से अलग है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि अशरफ, आबिद प्रधान और तोता ने अपराध के माध्यम से कितनी संपत्ति बनाई है। 
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आदेश न मिलने से नहीं गिरा विधायक विजय मिश्रा का कांप्लेक्स, दिन भर जुटी रही तमाशबीनों की भीड़

माफिया अतीक अहमद
अल्लापुर पुलिस चौकी के सामने विधायक विजय मिश्रा के पांच मंजिला व्यावसायिक कांप्लेक्स के सामने बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। विजय मिश्रा इन दिनों आगरा जेल में बंद हैं। ध्वस्तीकरण के आदेश के इंतजार में पीडीए अफसर और पुलिस फोर्स भी मुस्तैद रही, लेकिन शाम को ध्वस्तीकरण मामले में रोक के आदेश के बाद सभी लौट गए। 

पीडीए सूत्रों के मुताबिक विजय मिश्रा के कांप्लेक्स को ध्वस्त करने के लिए अफसरों ने पूरी तैयारी कर रखी थी। पुलिस फोर्स भी तैयार थी, इंतजार था तो बस कमिश्नर के आदेश का, जो शाम तक नहीं मिला। बाद में आए आदेश में कार्रवाई से विधायक को राहत देते हुए सुनवाई का मौका दिया गया है। इस मामले में पीडीए अफसर भी तलब किए गए हैं। 

उधर पीडीए में विजय मिश्रा के कांप्लेक्स और मकान की भूमि संबंधी पत्रावलियों को खंगालने काम जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि अभिलेखों में नक्शा स्वीकृति के संबंध में कोई पत्राचार नहीं पाया गया। वहीं जारी नोटिस और उनकी तामीला के बारे में जानकारी एकत्र की गई। पूरे मामले में पीडीए अफसरों ने सिर्फ इतना बताया कि आदेश का अनुपालन किया जाएगा।

चूंकि विजय मिश्रा की अपील कमिश्नर कोर्ट में थी, इसलिए हर अफसर इस बारे में कुछ बोलने से बचते रहे। वहीं पीडीए ने किराए पर मंगाई गई पोकलैंड मशीन देर शाम वापस ले जाने का मौखिक आदेश दिया गया। प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के लिए पीडीए और नगर निगम की जेसीबी मशीनें दिन भर खड़ी रहीं। प्रवर्तन दल के अधिकारी, कर्मचारी वरिष्ठ अफसरों के आदेश का इंतजार करते रहे। इसके कारण बुधवार को शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया जा सका। 

अल्लापुर पुलिस चौकी के पास उस कांप्लेक्स के पास बुधवार को दिन भर तमाशबीन जुटे रहे। वाहनों से आने जाने वाले भी, रुककर कार्रवाई के बारे में पूछते और आगे बढ़ जाते। कांप्लेक्स के सामने भी कुछ लोग जुटे रहे। बताया गया कि वह कारोबारी हैं और विजय मिश्रा के कांप्लेक्स में किराएदार थे। देर शाम तक कार्रवाई न होने के कारण लोग तरह-तरह की चर्चा करने लगे। लोग यह भी कहते  सुने गए कि अतीक समेत अन्य माफियाओं के साथ नोटिस, अपील जैसी राहत की बात सामने नहीं आई। इस मामले में ऐसा क्या हो गया कि तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बीच धवस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
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धोखाधड़ी के मुकदमे में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या दोषमुक्त, सरकार ने वापस लिया मुकदमा

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के खिलाफ धोखाधड़ी के एक प्रकरण में अभियोजन द्वारा मुकदमा वापसी की अर्जी मंजूर कर मुकदमा समाप्त कर दिया है। साथ ही केशव मौर्य सहित 10 लोगों को दोषमुक्त कर दिया है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार गुप्ता डीजीसी जीसी अग्रहरि और कुंज बिहारी मिश्रा को सुनकर दिया है।  

उत्तर प्रदेश शासन की ओर से डीएम कौशांबी को मुकदमा वापस लेने का निर्देश दिया गया था, जिसे अभियोजन ने स्पेशल कोर्ट में प्रस्तुत किया था। इसमें यह मांग की गई थी कि केशव मौर्या के विरुद्ध विचाराधीन मुकदमे को वापस लेने की अनुमति प्रदान की जाए। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में जनता को किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है, इसलिए शासन को यह मुकदमा वापस लेने की अनुमति दी जाती है। 

यह प्रकरण था

कौशांबी के मोहब्बतपुर पइंसा थाने पर 25 अगस्त 2008 को चंद्रशेखर प्रसाद थाना प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोग फर्जी संस्था ‘जय मां  दुर्गा कमेटी’ बनाकर सभा की अनुमति ली और फिर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने का आयोजन करने लगे। लाउडस्पीकर से उद्घोषणाएं की गईं। इस संबंध में जांच की गई तो पता चला कि संस्था फर्जी है। जिस समय यह सभा की गई, उस समय धारा-144 लगी हुई थी और उसका उल्लंघन किया गया था।

पुलिस ने इस प्रकरण में राधेश्यामश, अनिल दुबे, अशोक मौर्य, रामखेलावन, रमेशचंद्र, विनोद पटेल, विद्वान गोस्वामी, राम लोटन, श्याम प्रसाद और केशव मौर्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय भेजा था। कोर्ट ने संज्ञान लेकर कार्यवाही की, जिसमें केशव मौर्य सहित सभी को जमानत पर रिहा किया गया था। शासन ने इस मुकदमे को जनहित में वापस लिए जाने का निर्णय लिया था। 
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प्रधान पुत्र ने तमंचे के बल पर किशोरी का किया अपहरण, हंगामा

थाना क्षेत्र के एक गांव में मंगलवार शाम सात बजे के करीब ग्राम प्रधान के बेटे ने अपने साथी के साथ मिलकर तमंचे के बल पर एक किशोरी को अगवा कर लिया। किशोरी के भाई ने देखा तो वह शोर मचाते हुए घर गया और परिवार वालों को बताया। परिवार के लोग आरोपियों से शिकायत करने पहुंचे तो आरोपियों के घरवालों ने गाली गलौज हुए उन्हें पीट दिया। जिसमें लड़की के पिता व दो भाईयों व अन्य को चोट आई हैं। पुलिस ने दो अपहरणकर्ताओं समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। जिसमें से तीन लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है लेकसिन अपहृत किशोरी और अपहरणकर्ताओं समेत चार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद से गांव में तनाव बना हुुुआ है।  

कौंधियारा थाना क्षेत्र के एक गांव का दलित परिवार मेहनत मजूदरी करके आजीविका चलाता है। उनकी 16 वर्षीय किशोरी मंगलवार की शाम पास की बाजार अकोढ़ा से सब्जी खरीदकर वापस लौट रही थी। गांव से पहले रास्ते में बाइक से दो लड़के आए और तमंचे के बल पर उसे अगवा कर ले गए। लड़की के भाई ने यह देखा तो शोर मचाते हुए घर गया।  

उसके मां-बाप को अपहरण की कहानी पता चली तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। पीड़ित परिवार आरोपी प्रधान पुत्र के घर शिकायत लेकर पहुंचे तो वहां उल्टा आरोपियों के परिवार वालों ने पीड़ितों पर ही हमला बोल दिया। जिसमें लड़की के दो भाई एवं पिता घायल हो गए। पीड़ित परिवार भागकर थाने पहुंचा और शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरणकर्ता महफूज पुत्र मो. हसनैन व मो. सोहराब पुत्र सिराजुद्दीन व मो. इब्राहिम, मो. हसनैन, मो. शहनशाह व खुस्सु के खिलाफ अपहरण, मारपीट समेत विभिन्न संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया। पुलिस ने इनमें से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से अपहरण के मुख्य आरोपी महफूज की मां वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। पुलिस के अनुसार अपहृत किशोरी हाईस्कूल की छात्रा है। उसके घायल परिजनों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। बाकी आरोपियों और अपहृत किशोरी की तलाश की जा रही है। 
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पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत, कोर्ट में पेशी पर रोक, कोर्ट ने अपने ही आदेश पर लगाई रोक

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने पूर्व सांसद अतीक अहमद को राहत देते हुए उसकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेशी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक प्रकरण में आरोप के स्तर पर बचाव पक्ष की बहस नहीं सुन ली जाती है, तब तक अतीक अहमद को व्यक्तिगत रूप से पेश न किया जाए। एक दिन पहले ही अदालत ने अतीक को आरोप तय किए जाने पर सुनवाई के समय हाजिर होने का आदेश दिया था। 

यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज डॉ. बालमुकुंद ने अतीक अहमद की ओर से पेश अर्जी पर उनके अधिवक्ता खान शौकत एवं राधेश्याम पांडे तथा अभियोजन को सुन कर दिया। जानलेवा हमले के प्रकरण में स्पेशल कोर्ट ने 27 अक्तूबर को आदेश दिया था कि आरोप तय होने के लिए अभियुक्त अतीक अहमद की कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी आवश्यक है। कोर्ट ने अतीक अहमद को उपस्थित कराने के लिए गृह सचिव को पत्र लिखे जाने का आदेश दिया था।

बुधवार 28 अक्तूबर को अतीक की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया कि उनके अधिवक्ता बहस के लिए उपस्थित नहीं हो पाए थे। आरोप तय होने के पूर्व उन्हें अपना पक्ष रखना है, जिसके लिए बहस होनी है, इसलिए अतीक अहमद पर आरोप तय किए जाने के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश किए जाने के आदेश को स्थगित रखा जाए और व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाए। कोर्ट ने बचाव पक्ष की अर्जी मंजूर कर ली है।
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पप्पू गंजिया को हाईकोर्ट से राहत : दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक

हाईकोर्ट ने माफिया पप्पू गंजिया को राहत देते हुए उसके दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। पप्पू की पत्नी  नगीना बेगम की याचिका पर कोर्ट ने जहांगीराबाद गंजिया प्रयागराज व चक दोंदी, नैनी, प्रयागराज स्थित भवनों के ध्वस्तीकरण के मामले में पीडीए उपाध्यक्ष को तीन सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अगले चार सप्ताह तक के लिए कोर्ट ने पीडीए को किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई  करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने याची को एक सप्ताह में ध्वस्तीकरण के खिलाफ अपना प्रत्यावेदन पीडीए के उपाध्यक्ष को देने तथा उपाध्यक्ष को उस पर सुनवाई कर तीन सप्ताह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने दशहरे की छुट्टी के दौरान दिया है।

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना था कि अधिकारी लगातार मकान ध्वस्त करने की धमकी दे रहे हैं। याची को उसका पक्ष रखने का मौका दिए बिना मनमानी तरीके से कार्रवाई की जा रही है, जिस पर कोर्ट ने चार सप्ताह की राहत दी है। इससे पूर्व जिला प्रशासन और पीडीए द्वारा पप्पू गंजिया का अवैध रूप से निर्मित गेस्ट हाउस ध्वस्त कर दिया था तथा उसके अन्य मकान के भी ध्वस्तीकरण की तैयारी थी।
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डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य पद की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप से इनकार 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्तूबर को होने जा रही डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और राज्य सरकार व आयोग से याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई चार सप्ताह के बाद होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने डॉ. अनुपम सोनी की याचिका पर दिया है।

याचिका पर आयोग के अधिवक्ता बीएन सिंह ने प्रतिवाद किया। इनका कहना था कि याची को आवेदन भरने का मौका दिया गया, किंतु उसने आवेदन ही नहीं किया है। याची का कहना है कि उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने दो मार्च 19 को प्राचार्य पद भरने का विज्ञापन 49  निकाला। उसने गलती से विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन कर दिया था। 18 अप्रैल 19 को स्पष्टीकरण प्रकाशित किया गया, जिसमें आवेदन की शर्तों को स्पष्ट किया गया है और कहा गया कि विज्ञापन संख्या 48 के अभ्यर्थियों को विज्ञापन संख्या 49 में नए सिरे से आवेदन करना होगा।

विज्ञापन संख्या 48 समाप्त कर नया विज्ञापन जारी किया गया है। याची अपरिहार्य कारणों से आवेदन जमा नहीं कर सका। उसने विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन किया था। उसे 29 अक्तूबर की परीक्षा में बैठने दिया जाय।

कोर्ट ने कहा कि याची यह आधार नहीं ले रहा कि उसे आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण की जानकारी नहीं हुई। उसने जानते हुए नया आवेदन नहीं दिया कि अब विज्ञापन संख्या 48 की जगह 49 में आवेदन करना है। ऐसे में अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार व आयोग से जवाब तलब किया है। याचिका की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
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