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UPPSC NEWS: पीसीएस-2020 में पदों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2020 और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ)-2020 के तहत होने वाली भर्ती में पदों की संख्या में बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने कवायद तेज कर दी है। इस बाबत आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों का अधियाचन मांगा है। आयोग अध्यक्ष ने 31 अक्तूबर तक की तिथि नियत की है।
 
पीसीएस-2020 और एसीएफ/आरएफओ-2020 का जब विज्ञापन जारी किया गया था, तब तक आयोग को पीसीएस के 200 पदों का अधियाचन मिला था और एसीएफ/आरएफओ के किसी पद का अधियाचन नहीं प्राप्त नहीं हुआ था। पीसीएस-2020 और एसीएफ/आएफओ-2020 की 11 अक्तूबर को हुई प्रारंभिक परीक्षा से पहले आयोग को शासन से 64 नए पदों का अधियाचन भी मिल गया, जिसमें 54 पद पीसीएस और 12 पद एसीएफ/आरएफओ के हैं।

इस तरह पीसीएस के अब 254 और एसीएफ/आरअरएफओ के 12 पद हैं। आयोग की मंशा है कि विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े अन्य पदों को भी पीसीएस और एसीएफ/आरएफओ में शामिल कर लिया जाए। नियमों के तहत प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने तक जितने नए पदों का अधियाचन आयोग को मिलता है, उन्हें संबंधित भर्ती में शामिल किए जाने का प्रावधान है।
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फूलपुर गैंगरेप पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराए पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फूलपुर की गैंगरेप पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का एसएसपी प्रयागराज को निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने एसएसपी को इस मामले की विवेचना की निगरानी स्वयं करने और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हर आपराधिक घटना खासतौर पर महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्राथमिकी तत्काल दर्ज की जाए।

कोर्ट ने कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता की तीन माह तक शिकायत नहीं दर्ज की और अब विवेचना में लापरवाही कर रहे हैं, उनकी जवाब देही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए। दुष्कर्म पीड़िता की अर्जी पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 

याचिका पर अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व स्थायी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा ने पक्ष रखा। पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि पुलिस ने पीड़िता को थाने में रखा है और परिवार के लोगों को मिलने नहीं दे रही है। इस पर कोर्ट ने पीड़िता को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पीड़िता को अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने  एसएसपी प्रयागराज व एसएचओ फूलपुर को भी तलब किया था। एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि पीड़िता की मां द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं है। 

कोर्ट ने जब पीड़िता से पूछा तो उसने भी पुलिस द्वारा किसी भी प्रताड़ना से इंकार किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़िता की मां ने गलत हलफनामा दाखिल किया है। मगर चूंकि वह गरीब और अशिक्षित है इसलिए अदालत उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने पीड़िता की मां को भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी है। 

एसएसपी ने बताया कि दरोगा प्रमोद कुमार ने संपत्ति के विवाद की रिपोर्ट दी, रेप पर जांच नहीं की तो एसएचओ बृजेश कुमार व दारोगा प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। विभागीय जांच की जा रही है। एएसपी सोरांव जांच करेंगे। एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी है ।
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रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर की स्वार विधान सभा का चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह सीट यहां के विधायक अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने की वजह से रिक्त हो गई है। नगर पालिका परिषद स्वार के पूर्व अध्यक्ष  शफीक अहमद द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया। 

याची के अधिवक्ता विक्रांत पांडेय के मुताबिक स्वार विधान की सीट का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को रद्द कर दिया था। क्योंकि वहां के निर्वाचित निर्वाचित विधायक अब्दुल्ला खान ने गलत जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। वर्तमान में यूपी की सात रिक्त सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।

मगर स्वार विधान सभा को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि जनप्रितिनधित्व कानून के तहत  विधानसभा की सीट छह माह से अधिवक्ता रिक्त नहीं रखी जा सकती है, इसलिए स्वार की रिक्त सीट पर भी चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर आपत्ति की गई कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील लंबित है। दूसरे याची ने चुनाव आयोग को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
 
याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है। हाईकोर्ट को इस मामले में सीधे सुनवाई कर आदेश पारित करने का अनुच्छेद 226 में अधिकार है। राज्य सरकार का कहना था कि चुनाव अधिसूचना जारी करना निर्वाचन आयोग का काम है। राज्य सरकार स्वार सीट को रिक्त घोषित कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने स्वार विधान सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।
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फिल्म एक्टर नवाज़उद्दीन सिद्दीकी और परिवार को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिल्म ऐक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी व परिवार के तीन सदस्यों की यौन शोषण के मामले मे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगायी है और विवेचना मे सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

इनके खिलाफ सामान्य आरोप होने के कारण कोर्ट ने राहत दी है जिसमें नवाज़ुद्दीन के साथ ही उनकी मां मेहरुन्निशा और दो भाइयों फ़ैयाज़ुद्दीन और अयाजुद्दीन शामिल हैं।  बच्ची के साथ दुष्कर्म के मुख्य  आरोपी एक भाई मिनहाज़ुद्दीन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत,नही दी है। इसकी याचिका खारिज कर दी है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने दिया है।  मुज़फ्फरनगर के बुधाना थाने मे नवाज़ुद्दीन की पत्नी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजलि पांडेय ने एफआईआर दर्ज करायी है। इसी साल 27 जुलाई को नवाज़ुद्दीन की पत्नी ने उनके और परिवार के खिलाफ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट के तहत दर्ज करायी है प्राथमिकी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Allahabad university: विश्वविद्यालय का प्रवेश परीक्षा परिणाम घोषित, बीए में सोमनाथ टापर

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) ने रविवार को स्नातक प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया। स्नताक के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा के टॉपरों की लिस्ट में पूर्वांचल के छात्रों दबदबा रहा है। बी प्रवेश परीक्षा में संतकबीर नगर के सोमनाथ गुप्ता ने टॉप किया है। तो मैथ्स की प्रवेश परीक्षा में आजमगढ़ के अविनाश मेधासिया अव्वल रही।

वहीं, बीकॉम प्रवेश परीक्षा में सर्वेश कुमार अधिकांश अंक के साथ मेरिट में शीर्ष स्थान पर रहे। विस्तृत परिणाम इविवि की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। इसके अलावा श्रेणी ऑफ फाइनिंग आर्टिस्ट (बीएफए) में वाराणसी के दिव्यांग कुमार नंदा ने टॉप किया, जबकि OF ऑफ पैरावॉमिंग आर्टिस्ट (बीपीए) की प्रवेश परीक्षा में बक्सर, बिहार की प्रज्ञा कुमारी ने बाजी मारी।कंपनी बायो की मेरिट में अलगंज, प्रयागराज की सौम्या त्रिपाठी शीर्ष स्थान पर बनी हुई है। वहीं, बी होमसाइंस की प्रवेश परीखा में सैदपुर, वाराणसी की अंकिता गुप्ता ने ज्यादातर अंक के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।

स्नातक प्रवेश परीक्षा में शमिल सभी अभ्यर्थियों के स्क कार्ड (अंक पत्र) इविवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। अभ्यर्थी अपने स्कैन कार्ड वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। कोविद -१ ९ के कारण इविवि में इस बार प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। २ नवंबर से बीकॉम में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके बाद स्नातक के अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जाना होगा। विभिन्न पाठ्यक्रमों में ऑफ़लाइन प्रवेश की तिथियों पर सोमवार को अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।

ऑनलाइन प्रवेश शुरू होने से पहले इविवि की वेबसाइट पर कटऑफ अंक जारी किए जाएंगे और अभ्यर्थियों को उसी अंक के आधार पर प्रवेश पत्र जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी।

इन्हीं अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी। इन्हीं अंकों के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे। अभ्यर्थियों को अपने शैक्षिक दस्तावेज में ऑनलाइन अपलोड करने होंगे और दस्तावेजों का सत्यापन भी होगा। इसके बाद की साप्ताहिक फीस जमा होगी और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह से होगी।
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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती : त्रुटि सुधार की अनुमति देने की मांग खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में गलत आवेदन फार्म भरने वाले अभ्यर्थी को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लोक परीक्षाओं में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। कुछ लोगों को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से पूरी चयन  प्रक्र िया प्रभावित होगी। कोर्ट ने  सुप्रीमकोर्ट द्वारा अर्चना चौहान केस में दिए गए निर्णय को सामान्य आदेश न मानते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट का आदेश याची के मामले में विशेष तथ्यों के आधार पर दिया गया है। इस आदेश को नजीर मानते हुए सभी पर लागू नहीं किया जा सकता है।
 
धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश दिया। याची ने अपने बीए रतृतीय वर्ष तथा बीटीसी के रोल नंबर में सुधार करने का आदेश देने की मांग की थी। कोर्टने हाईकोर्ट द्वारा पूर्व राजेंद्र पटेल वर्सेंज स्टेट ऑफ यूपी, पूजा यादव वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी स्पेशल अपील और आरती वर्मा वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी केस में दिए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेशों से स्प्ष्ट है कि चयन के इस स्तर पर त्रुटि सुधार की अनुमति देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी और निर्धारित समय सीमा में उसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। 

कोर्ट ने किया मुकदमों का उल्लेख

1- पूजा यादव केस - में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा याची ने आवेदन में त्रुटि सुधार का तबतक कोई प्रयास नहीं किया जबतक उसे मेडिकल टेस्ट में शामिल कारने से इंकार नहीं कर दिया गया। इस स्तर पर कोई आदेश देने से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसी तरह की और याचिकाएं आएंगी। इस लिए चयन के इस स्तर पर कोई राहत नहीं दी जा सकती है। 

आरती वर्मा केस- में हाईकोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थियों को आवेदन फार्म सही से न भरने का खामियाजा भुगतना होगा। जब आवेदक खुद अपने बारे में सही सूचना देने में नाकाम रहा है तो त्रुटि सुधार का आवेदन निरस्त करने में कोई गलती नहीं दिखाई देती है। याची ने अपने जाति वर्ग को गलत भरा और चयन के इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप से चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी। 

राममनोहर यादव केस- में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भावी शिक्षक अपना एक पेज का आवेदन फार्म भी सही से नहीं भर सकते तो समझा जा सकता है कि यदि वे चयनित हुए तो भावी पीढ़ी को क्या पढ़ाएंगे।
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बदायूं सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव की पत्रावली कोर्ट में तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं की भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव से संबंधित पत्रावलियां तलब की है। संघ मित्रा के चुनाव सपा के धर्मेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारी से पत्रावली हाईकोर्ट भेजने के लिए कहा है।यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव व दिनेश कुमार की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। 

कोर्ट ने  धर्मेन्द्र यादव के अधिवक्ता नरेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा दाखिल गवाहों की सूची रिकार्ड के साथ पेश करने का आदेश दिया है। संघमित्रा की तरफ से अधिवक्ता उदय नंदन ने कहा  कि वह बचाव में कोई गवाह पेश नहीं करना चाहती।याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्याशी दिनेश कुमार का नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया है। यदि त्रुटि थी तो स्क्रूटनी के समय सुधारने का मौका देना चाहिए था।

दूसरे कुल  पड़े मतों से आठ हजार मत अधिक गिना गया है। जिसका कोई लेखा जोखा नहीं है।तीसरे मौर्या ने अपने पति की स्थिति व संपत्ति का व्योरा हलफनामे में नहीं दिया है।चुनाव नामांकन पत्र में पति के बजाय अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम लिखा है। जबकि अभी तक तलाक नहीं हुआ है। याचिका की सुनवाई 4नवंबर को होगी।
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फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते नहीं कर सकते अग्रिम विवेचना का आदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट

संघमित्रा मौर्य-धर्मेंद्र यादव
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मुकदमे की फाइनल रिपोर्ट और उस पर दाखिल प्रोटेस्ट अर्जी लंबित रहते हुए पुलिस अधिकारी अग्रिम विवेचना का आदेश नहीं दे सकते हैं। उनको ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में एसपी गाजीपुर और एडीजी वाराणसी जोन द्वारा पारित आदेशों को विधि विरुद्ध मानते हुए एसएचओ सैदपुर गाजीपुर से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। कहा है कि यदि यह पाया जाता है कि अग्रिम विवेचना का निर्णय इन दोनों अधिकारियों के दबाव में लिया गया है तो अदालत उनको तलब कर स्पष्टीकरण मांगेगी। यह भी कहा है कि यदि एसएचओ सैदपुर हलफनामा नहीं दाखिल करते हैं तो अदालत दोनों अधिकारियों को समन जारी कर तलब करेगी। 

गाजीपुर के गोविंद नारायण की याचिका पर शुक्रवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याची के अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि याची के खिलाफ सैदपुर थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विवेचक ने विवेचना के बाद उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। शिकायतकर्ता ने फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की जो अभी लंबित है। इस बीच कोराना के कारण अदालतें बंद हो गई। 

अधिवक्ता का कहना है कि मामला मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित होने के बावजूद इंस्पेक्टर सैदपुर ने एसपी गाजीपुर के 23 जुलाई 2020 के आदेश से विवेचक को इस मामले में अग्रिम विवेचना करने का आदेश दे दिया। एसपी के आदेश में अपेक्षा की गई थी कि अग्रिम विवेचना कोर्ट की अनुमति लेकर की जाए। और इसके परिणाम से अवगत कराया जाए। मगर उनको अग्रिम विवेचना के परिणाम से अवगत नहीं कराया गया। इस नाराजगी जताते हुए एडीजी वाराणसी जोन ने अग्रिम विवेचना की रिपोर्ट दो दिन में उनके समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पुलिस अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। एडीजी, एसपी और एसएचओ को फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उनका कार्य विधि विरुद्ध है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
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बच्ची चोरी में सरकारी डॉक्टर व पत्नी समेत पांच गिरफ्तार 

कीडगंज से एक वर्षीय बच्ची चोरी होनेे मामले का शनिवार को खुलासा हो गया। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद करते हुए सरकारी डॉक्टर व उसकी पत्नी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। डॉक्टर ने अपने नि:संतान भाई के लिए 60 हजार मेें तीन लोगों को बच्ची चुराने का ठेका दिया था। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है। 

15 अक्तूबर को रामबाग रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले रिजवान की एक वर्षीय बच्ची चोरी हो गई थी। मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश में जुटी थी। अफसरों का दावा है कि सटीक सूचना पर शनिवार को परेड ग्राउंड पुलिया के पास से पांच  लोगों को पकड़ा गया जिनके कब्जे से बच्ची भी बरामद हुई। इनमें नईम अली व जमीला निवासी नहरपुर हंडिया, रामसूरत निवासी बरगढ़ चित्रकूट के अलावा झूंसी निवासी डॉ. रंजन गौतम व उसकी पत्नी वंदना गौतम शामिल हैं।

डॉ. रंजन प्रतापगढ़ स्थित राजकीय होम्योपैथ चिकित्सालय में बतौर सरकारी चिकित्सक तैनात है। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई तो पता चला कि डॉक्टर व उसकी पत्नी के कहने पर अन्य तीन आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया था। उधर, सूत्रों का कहना है कि वारदात के बाद आरोपियों ने बच्ची को आरोपी डॉक्टर दंपती को सौंप दिया था, जिसके एवज में उन्हें 35 हजार रुपये मिले थे और शेष 25 हजार बाद में दिए जाने थे। सर्विलांस से जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने बच्ची को झूंसी से ही बरामद किया। 

अस्पताल में हुई थी मुलाकात

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोते समय बच्ची को चुराकर ले जाने वाले नईम व रामसूरत थे। जिनकी तस्वीर सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुई थी। पूछताछ में दोनों ने बताया कि डॉक्टर रंजन का भाई चितरंजन जो सरकारी अध्यापक है, नि:संतान है। इलाज के लिए हंडिया महिला चिकित्सालय में जाने के दौरान उसकी मुलाकात जमीला से हुई। जिसने 60 हजार में उसे बच्ची देने का वादा किया। जमीला ने अपने परिचित नईम को यह बात बताई, जो रेलवे स्टेशन के आसपास रिक्शा चलाता था। जिसने रामसूरत संग मिलकर वारदात अंजाम दी।
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नशे में धुत सड़क पर गिरे इंस्पेक्टर की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल, निलंबित

यूपीः हाईकोर्ट का आदेश- पार्कों और खेल के मैदानों से हटाया जाए अतिक्रमण, तीन महीने में मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सार्वजनिक पार्कों और खेल के मैदानों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट तीन माह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आदेश पारित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण राज्य का वैधानिक दायित्व है। रोजगार और राजस्व पर लोक स्वास्थ्य, जीवन एवं पर्यावरण को वरीयता दी जानी चाहिए।

राम भजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने कहा है कि सभी पार्कों का स्थानीय निकायों की मार्फत ठीक से रखरखाव किया जाए ताकि आम लोग पार्कों का उपयोग कर सकें। कोर्ट ने कहा कि पार्कों में किसी को भी कूड़ा  डालने, इकट्ठा करने या अन्य उपयोग में लाने की अनुमति न दी जाए।

कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी पार्कों, खेल मैदानों का सही रखरखाव करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। याची का कहना है कि उसके आवास के सामने सेक्टर 11 विजय नगर ,गाजियाबाद में स्थित नगर निगम के पार्क का अतिक्रमण कर लिया गया है। उसका उपयोग वाहन खड़ा करने के लिए किया जा रहा है, जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि पार्क के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि निगम या प्राधिकरण पार्क के रखरखाव करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है। वे अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकते।

कोर्ट ने कानून एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पार्कों, खेल मैदानों के अतिक्रमण पुलिस से हटवाए जाएं और उनका रखरखाव किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पार्क में कूड़ा फेंकना कानूनन अपराध है। ऐसा करने वाले पर अर्थ दंड और एक माह के जेल की सजा दी जा सकती है।

पार्कों, खेल मैदानों की देखभाल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकायों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह पार्कों खेल मैदानों की देखभाल करें। देश के स्वस्थ पर्यावरण के लिए यह जरूरी भी है। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रदूषण मुक्त जीवन का अधिकार देता है। विकास के नाम पर उद्योग लगाकर इस अधिकार में कटौती नही की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51ए नागरिकों के कर्तव्य बताता है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पार्कों, खेल मैदानों की स्वच्छता का ध्यान रखे। 
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भदोही में एक गांव ऐसा जहां आज भी नाला ही है आम रास्ता

प्रदेश के भदोही जिले में एक गांव ऐसा है जहां आजादी के 73 साल बाद भी लोग नाले से होकर आते-जाते हैं। गांव को जोड़ने के लिए यही एक मात्र आम रास्ता है। यह रास्ता राजस्व रिकार्ड में नाले के तौर पर दर्ज है। भदोही के राकेश कुमार ने इस गांव में सड़क बनाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। 

कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए भदोही के डीएम को मौके पर जाकर यथास्थिति देखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीएम को यह भी बताने के लिए कहा है कि गांव वालों को सड़क देने के लिए उनके पास क्या उपाय है। मामला भदोही के डुबही गांव का है। जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी से 23नवम्बर तक व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने को कहा है। 

याची का कहना है कि गांव में प्राइमरी स्कूल भी है।2013में जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया है। गांव में रहने वाले 300 लोग नाले होकर गांव में आते जाते हैं। बरसात  के दिनों में आने जाने का कोई रास्ता नहीं होता है। गांव को संपर्क मार्ग बनाकर जोड़ने के लिए जनप्रतिनधियों को कई प्रत्यावेदन दिए गए मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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