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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती :  सरकार ने मानी गलती, अधिक मेरिट की जगह कम मेरिट वालों का हुआ चयन

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में 31661 पदों पर भर्ती के मामले में प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया है कि चयन में गलतियां हुई हैं और कुछ कम मेरिट के लोगों को नियुक्ति मिल गई। जबकि अधिक मेरिट वालों को नहीं मिल सकी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर बताया कि एनआईसी और बेसिक शिक्षा परिषद से हुई इस गलती के जांच के लिए सरकार ने कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने कहा कि जो भी गलतियां हुई हैं, उनको सुधारा जाएगा और सरकार गलत चयन रद्द करेगी। 

संजय कुमार यादव व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने जब महाधिवक्ता से पूछा कि क्या अदालत उनका यह बयान रिकार्ड कर दे तो उन्होंने इस पर सहमति देते हुए कहा कि सूची जारी करने में एनआईसी और बेसिक शिक्षा परिषद के स्तर से हुई गलती को सुधारा जाएगा तथा कम गुणांक वालों को दिया गया नियुक्तिपत्र निरस्त कर अधिक गुणांक पाने वालों को दिया जाएगा। 

याची के पक्ष से अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, अनिल सिंह बिसेन आदि का कहना था कि नियुक्ति पत्र देने के लिए जारी की गई सूची में बहुत से ऐसे मामले हैं, जिनमें कम गुणांक वालों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया जबकि अधिक गुणांक पाने वाले चयन से बाहर हैं। इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य सरकार से इस विसंगति के बारे में जवाब मांगा था। महाधिवक्ता के बयान के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई हेतु 17 नवंबर नियत कर दी है।
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सशस्त्र बलों के कर्मी सेवाकाल के दौरान क्यों नहीं कर सकते सिविल पदों पर आवेदन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पूछा है कि क्या एक्स सर्विस मैन (भूतपूर्व सैनिक) सेवा में रहते हुए सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार के क्या निर्देश हैं। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय भारत सरकार और निदेशक पुनर्वास के साथ ही राज्य सरकार को भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। सुधीर सिंह व दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है। 

याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याचीगण ने एक्स सर्विस मैन कोटे के तहत ग्राम विकास अधिकारी के पद लिए 2016 में आवेदन किया था। परीक्षा में सफल होने के बाद उनको नियुक्ति मिल गई और उन्होंने फरवरी 2019 में ज्वाइन कर लिया।

इसके बाद कमिश्नर ने एक आदेश जारी कर कहा कि याचीगण को सुनवाई का मौका देते हुए पद से बर्खास्त कर दिया जाए। मई 2019 में याचीगण को सेवा से यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि ग्राम विकास अधिकारी के पद लिए आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 को वह सेना में कार्यरत थे। बिना सेवानिवृत्त हुए उन्होंने आवेदन किया इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध है। 

अधिवक्ता का कहना था कि सेना के ऐसे कई आदेश हैं जिनके अनुसार सैन्य कर्मी सेवानिवृत्त होने से एक वर्ष पूर्व सिविल पदों के लिए आवेदन कर सकता है। राज्य सरकार का कहना था कि सेना के नियम और आदेश राज्य सरकार पर लागू नहीं होंगे। याची की ओर से यह भी दलील दी गई कि राज्य सरकार के कुछ विभाग सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व का आवेदन स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ विभाग इसे नहीं मानते हैं। 

कोर्ट ने केंद्र और राज्य को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक्स सर्विस मैन को यह लाभ इसलिए भी दिया जाता है कि वह समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। भूतपूर्व सैनिक सेना के कड़े अनुशासन में प्रशिक्षित होते हैं  राज्य सरकार उनकी सेवाओं का लाभ ले सकती है। वह राष्ट्रीय गौरव हैं। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
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दोबारा कोरोना पॉजिटिव हुए एसडीएम कोरांव

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती : यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- कम गुणांक वालों का चयन करेंगे रद्द

69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में 31277 पदों पर भर्ती के मामले में प्रदेश सरकार ने कहा है कि यदि अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की जगह कम अंक पाने वालों का चयन हुआ है तो इसे सुधारा जाएगा और अधिक अंक वालों को काउंसिलिंग कराकर उनको नियुक्ति दी जाएगी तथा कम अंक वालों की नियुक्तियां रद़्द की जाएंगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही इस मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से उपस्थित होकर बताया कि एनआईसी से इस बात की पड़ताल की गई है कि कम पदों के बावजूद सूची जारी करने में किस प्रकार से अनियमितता हुई है। एनआईसी की रिपोर्ट आने के बाद यदि  गड़बड़ी मिलती है तो उसे सुधारा जाएगा। 

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह सभी नियुक्तियां अभी अंतिम नहीं  हैं और इस पर पुनर्विचार हो सकता है। नियुक्तियां सुप्रीमकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन हैं। सुप्रीमकोर्ट में कट ऑफ मेरिट और शिक्षामित्रों के समायोजन का प्रकरण अभी लंबित है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कम गुणांक वाले को नियुक्ति देने और अधिक गुणांक वालों को नियुक्ति नहीं देने का सवाल ही उठता है। यदि ऐसा हुआ है तो मेधावी अभ्यर्थी को काउंसलिंग में बुलाकर अवसर दिया जाएगा। महाधिवक्ता ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह यदि कोई जांच रिपोर्ट होगी तो उसे  कोर्ट के समक्ष रखेंगे साथ ही उस पर  राज्य सरकार का स्टैंड भी स्पष्ट करेंगे। 

संजय कुमार यादव व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने महाधिवक्ता के इस बयान के बाद कहा कि इस मामले में फिलहाल कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने प्रकरण की सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तिथि नियत की है। 

याची के पक्ष से अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी , अनिल सिंह बिसेन आदि का कहना था कि नियुक्ति पत्र देने के लिए जारी की गई सूची में बहुत से ऐसे मामले हैं जिनमें कम गुणांक वालों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया जबकि अधिक गुणांक पाने वाले चयन से बाहर हैं। याची ओबीसी कटेगरी का अभ्यर्थी है और उससे कम गुणांक वाले को नियुक्ति पत्र दे दिया गया है। । महाधिवक्ता के बयान के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई हेतु 17 नवंबर नियत कर दी है।
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महामारी फैलाने के आरोपी बांग्लादेशी जमातियों  को राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी फैलाने के आरोपी 12 बांग्लादेशी जमातियों को राहत देते हुए उनके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है तथा राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। इन सभी के शामली के भवन थाने में महामारी अधिनियम और विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर छह जून 2020 को दाखिल चार्जशीट और 31 जुलाई 2020 को उस पर संज्ञान लेने के आदेश को रद़द करने की मांग की गई है। 

मीर मोहम्मद और 11 अन्य की  याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अनिल कुमार नवम ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ताओं का कहना था कि याचीगण के खिलाफ झूठा मुकदमा कायम किया गया है। महामारी फैलाने में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है। न ही उन्होंने विदेशी नागरिक कानून का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने प्रकरण को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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प्रयागराज सर्किट हाउस उपद्रव मामले में सपा कार्यकर्ताओं को मिली जमानत

जिला न्यायालय ने सर्किट हाउस में घुस कर नारेबाजी और उपद्रव करने के मामले में सपा कार्यकर्ताओं  की जमानत मंजूर कर ली है।  इस मामले में नेहा यादव सहित 12 सपा कार्यकर्ता  तीन अक्तूबर से जेल में बंद हैं। यह आदेश  अपर जिला जज इंद्रजीत सिंह ने  बचाव पक्ष के अधिवक्ता  को सुन कर दिया है। 

घटना 3 अक्टूबर 2020 की  सिविल लाइंस थाने की है । अभियुक्त गण पर आरोप है कि सर्किट हाउस के पास सड़क पर 15 से 20 लोगों ने हाथ में लिए पोस्टर  जलाकर सड़क पर गुजर रहे लोगों की तरफ फेंकने, सुरक्षा कर्मियों को धक्का देकर सर्किट हाउस में घुसकर सरकार विरोधी नारा लगाने और बल प्रयोग कर  मीटिंग हॉल में  घुस गए। सभी का पुलिस ने लोक शांति भंग करने में चालान कर जेल भेज दिया था।

जेल में बंद सपा कार्यकर्ता नेहा यादव, निर्मला यादव, शिव यादव, हिमांशु मिश्रा, मोनू यादव, राहुल पटेल, मोहित यादव, अमन पांडे, मोहित पांडे, सुशील कोठारिया, अजय भारती की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।  मंगलवार को बचाव पक्ष के अधिवक्ता सैयद इफ्तिखार हुसैन और रविंद्र यादव ने पक्ष रखा और कहा कि राजनीतिक कारणों से कार्यकर्ताओं को झूठा फंसाया गया है

इस प्रकरण में  गिरफ्तार महिला सपा नेता  कमलेश केशरवानी के जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई अपर जिला जज प्रथम रामकिशोर शुक्ला ने की और बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनीष खन्ना को सुनकर जमानत मंजूर कर ली है कोर्ट ने 50000 हजार की दो दो जमानतें और अंडरटेकिंग दिए जाने पर रिहा करने का आदेश दिया है। 
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ईडी जांच में पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल को राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर के पूर्व एम एल सी हाजी इकबाल व परिवार के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है और उनके बेटे मोहम्मद अफजल को दो सप्ताह में  प्रवर्तन निदेशालय लखनऊ में अपना पक्ष रखने का समय दिया है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की जांच मे हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने मोहम्मद अफजल  व अन्य  की याचिका पर दिया है। 

भारत सरकार के सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश ने प्रवर्तन निदेशालय  का पक्ष रखा।इनका कहना था कि ईडी ने  मनी लांड्रिंग के आरोप में नोटिस जारी कर कुछ कागजात दिखाने के लिए बुलाया है।याची जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसने  नोटिस को चुनौती दी  है। इनके खिलाफ फर्जी कंपनियों के जरिए मनी लांड्रिंग की जांच की जा रही  है। ई डी ने 25 सितंबर को बुलाया था।अब 22 अक्टूबर को बुलाया गया है। 

याची का कहना था कि इसी मामले में कंपनी कोर्ट में केस चल रषहा है। इसचलिए ई डी को अलग से उसी मामले की जांच करने का अधिकादर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह आपत्ति ई डी के समक्ष उठाई जा सकती है।जो कुछ कहना है ई डी के समक्ष हाजिर होकर अपना पक्ष रखें।
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जीआईसी को मिलीं 927 एलटी ग्रेड महिला शिक्षक, यूपीपीएससी ने जारी किया सामाजिक विज्ञान का अंतिम चयन परिणाम

पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल
राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी) को सामाजिक विज्ञान विषय में एलटी ग्रेड की 927 महिला शिक्षक मिल गईं हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने मंगलवार को एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत सामाजिक विज्ञान महिला वर्ग का अंतिम चयन परिणाम जारी किया और दो साल बाद यह भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई। परीक्षा परिणाम आयोग के सूचना बोर्ड और वेबसाइट पर उपलब्ध है।

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत 15 विषयों में शिक्षकों के 10768 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 29 जुलाई 2018 को आयोजित की गई थी। हिंदी और सामाजिक विज्ञान विषय में पेपर लीक के आरोप लगने के बाद आयोग ने इन दोनों विषयों को छोड़कर बाकी सभी विषयों का परिणाम काफी पहले जारी कर दिया था।

पेपर लीक मामले की जांच कर रही एसटीएफ की ओर से इस साल सितंबर में अंतिम चार्जशीट दाखिल होने के बाद आयोग ने हिंदी के 1433 और सामाजिक विज्ञान के 1854 पदों का रिजल्ट जारी करने का निर्णय लिया था। इनमें हिंदी में पुरुष एवं महिला वर्ग और सामाजिक विज्ञान में पुरुष वर्ग का रिजल्ट कुछ दिनों पहले ही जारी किया गया है। मंगलवार को सामाजिक विज्ञान महिला वर्ग का रिजल्ट भी जारी कर दिया गया। इसके साथ ही तमाम विवादों के बीच आखिरकार भर्ती प्रक्रिया पूरी हो गई।

सामाजिक विज्ञान महिला वर्ग में 928 पदों (464 पद अनारक्षित, 250 अन्य पिछड़ा वर्ग, 195 अनुसूचित जाति और 19 पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित) पर भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। इनमें अनारक्षित वर्ग के एक पद का रिजल्ट उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रखते हुए रोका गया है।

आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार परीक्षा परिणाम से संबंधित प्राप्तांक और श्रेणीवार/पदवार कटऑफ अंक आयोग की वेबसाइट पर शीघ्र प्रदर्शित किए जाएंगे। इस आशय की सूचना अलग से जारी की जाएगी। इस बारे में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त प्रार्थनापत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे और न ही उन पर विचार किया जाएगा।

रेखा रहीं अव्वल, रेनू को दूसरा स्थान

एलटी ग्रेड सामाजिक विज्ञान महिला वर्ग के परिणाम में रेखा कुमारी मेरिट में शीर्ष स्थान पर रहीं। वहीं, रेनू देवी एवं मंजू उपाध्याय को क्रमश: दूसरा एवं तीसरा स्थान मिला। इसके अलावा शशिकला पटेल मेरिट में चौथे, बबली सिंह पांचवें, मीनाक्षी देवी छठवें, मालती देवी सातवें, निवेदिता सिंह आठवें, रीना सैनी नौंवें और अंकिता दसवें स्थान पर रहीं। 

अब अभिलेख सत्यापन की बारी

एलटी ग्रेड सामाजिक विज्ञान का रिजल्ट आने के बाद अभ्यर्थियों को अब अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। आयोग ने 16 अक्तूबर को सामाजिक विज्ञान पुरुष वर्ग के 926 पदों का रिजल्ट जारी किया था, जिनमें 924 पदों पर चयन किया गया था। अब महिला वर्ग का रिजल्ट भी आ गया है।

अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोग अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को भेजेगा। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार परीक्षा का संपूर्ण परिणाम पूर्णतया औपबंधिक है। इसके लिए अभ्यर्थियों को आयोग में आकर अपने मूल अभिलेखों का सत्यापन कराना होगा। इसके लिए आयोग अलग से समय निर्धारित करेगा और अभ्यर्थियों को इस दौरान अपने अभिलेखों का सत्यापन कराना होगा। सत्यापन न कराने पर अभ्यर्थन/चयन निरस्त कर दिया जाएगा।
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ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने नौकरी के नाम पर बुलाकर युवती से किया था दुष्कर्म

ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र पर दर्ज दुष्कर्म मामले की जांच शुरू हो गई है। पीड़िता की ओर से उस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रयागराज में हुई घटना के संबंध में आरोप है कि विधायक ने उसे अल्लापुर स्थित अपने आवास पर नौकरी के बहाने बुलाकर दुष्कर्म किया था। पीड़िता का यह भी आरोप है कि विधायक वीडियो चैट पर उससे अश्लील डिमांड करते थे। 

पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि प्रयागराज में विधायक ने उससे 2015 में दुष्कर्म किया। 2014 मेें धनापुर में दुष्कर्म के बाद विधायक ने उसे कई बार अपने पास बुलवाया लेकिन वह नहीं गई। आरोप है कि 2015 में विधायक ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर अल्लापुर स्थित अपने मकान पर बुलवाया। शक न हो इसके लिए दस्तावेज भी मंगवाए। यहां पहुंचने के बाद उसने डरा-धमकाकर उससे दुष्कर्म किया। इसी दौरान उसका अश्लील वीडियो क्लिप भी बनाया गया। जिसके जरिए उसे बाद में ब्लैकमेल किया गया। 

वीडियो चैट पर करते थे अश्लील डिमांड

पीड़िता का यह भी आरोप है कि उत्पीडन से वह पूरी तरह  टूट चुकी थी। जिसके बाद 2016 में वह मुंबई चली गई। लेकिन विधायक ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। वह लगातार उससे न सिर्फ बात करता रहा बल्कि डरा धमकाकर वीडियो कॉलिंग के जरिए संपर्क करता। वीडियो चैट के दौरान वह अश्लील डिमांड भी करता था। न मानने पर जान से मारने की धमकी देता था। 

थाने में की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

पीड़िता का यह भी आरोप है कि 2014 में हुई घटना के बाद उसने विधायक के खिलाफ वाराणसी स्थित थाने में शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह औराई स्थित थाने में भी गई लेकिन वहां से उसे भगा दिया गया। सत्ता तक पहुंच होने व विधायक की दबंगई के चलते वह भी चुप होकर बैठ गई। 

किरायेदारों में दहशत, खुद खाली कर दिया भवन

माफिया के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के क्रम में विधायक विजय मिश्रा की जिले में स्थित दो संपत्तियों पर भी बुलडोजर चलने की चर्चा है। भले ही अल्लापुर स्थित व्यावसायिक काम्प्लेक्स के ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है लेकिन दहशत में आए किरायेदारों ने भवन को खाली कर दिया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि संपत्तियां चिह्नित की गई हैं लेकिन आगे की कार्रवाई के संबंध में अब तक कोई आदेश उन्हें नहीं मिला है। जिले में चिह्नित माफिया के खिलाफ पिछले कई दिनों से लगातार कार्रवाई चल रही है।

इसके तहत अतीक अहमद, बच्चा पासी, दिलीप मिश्रा व राजेश यादव के साथ ही उनके गुर्गों की भी अवैध संपत्तियों पर बुल्डोजर चलवाया गया। इसी क्रम पुलिस की ओर से विधायक विजय मिश्र की अवैध संपत्तियों को भी चिह्नित किया गया। चर्चा रही कि इन पर भी जल्द ही जिला प्रशासन की अनुमति के बाद कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। बता दें कि इस व्यावसायिक भवन के साथ ही विधायक की आलीशान कोठी भी चिह्नित की गई है। मामले में एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि विधायक की संपत्ति कुर्क करने के संबंध में उन्हेें कोई निर्देश फिलहाल नहीं प्राप्त हुआ है। उच्चाधिकारियों के आदेश के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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महोबा कांड की विवेचना अब जोनल एसआईटी को, एसपी क्राइम प्रयागराज मुख्य विवेचक, आईजी रेंज होंगे पर्यवेक्षण अधिकारी

महोबा के क्रशर प्लांट कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी की मौत के मामले में दर्ज मुकदमे की विवेचना अब जोनल स्तर पर गठित एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम) करेगी। अब तक विवेचना में जुटी रेंज एसआईटी पर मृतक कारोबारी के परिजनों की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। दो सदस्यीय जोनल एसआईटी में प्रयागराज में तैनात एसपी क्राइम आशुतोष मिश्र मुख्य विवेचक जबकि आईजी रेंज केपी सिंह पर्यवेक्षण अधिकारी होंगे। 

क्रशर प्लांट कारोबारी की मौत के मामले में महोबा के पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार समेत अन्य पर आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य आरोपों में मुकदमा चल रहा है। जिसकी विवेचना रेंज स्तर पर गठित एसआईटी कर रही थी। सोमवार को मृतक कारोबारी के भाई और मुकदमा वादी रविकांत त्रिपाठी ने पत्र जारी कर विवेचना में जुटी रेंज एसआईटी की मंशा पर सवाल उठाए। जिसमें आरोप लगाया गया कि एसआईटी की मंशा आरोपियों को गिरफ्तार करने की नहीं है। जिससे पूरा परिवार बेहद निराश व डरा हुआ है।

परिवार ने आईजी चित्रकूट रेंज से यह भी अनुरोध किया कि विवेचना अन्यत्र से कराई जाए। मामला संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों ने परिजनों से बात की। साथ ही उनकी सहमति पर विवेचना जोनल स्तर पर गठित एसआईटी से कराने का निर्णय लिया। दो सदस्यीय टीम में एसपी क्राइम प्रयागराज आशुतोष मिश्र व आईजी रेंज केपी सिंह को शामिल किया गया है। 
  • परिजनों की मांग पर विवेचना जोनल स्तर पर गठित एसआईटी को सौंप दी गई है। प्रयागराज रेंज में तैनात दो अफसरों को इसमें शामिल किया गया है। - प्रेमप्रकाश, एडीजी जोन प्रयागराज

‘पुलिस व बड़ा अधिकारी कभी गिरफ्तार नहीं होता’

मृतक क्रशर व्यापारी के भाई व मुकदमा वादी की ओर से मीडिया को जारी पत्र में रेंज एसआईटी के विवेचक सीओ सदर, महोबा कालू सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि 17 अक्तूबर को उन्हें कबरई थाने में बेवजह बुलाया गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के विषय में पूछने पर कहा गया कि पुलिस व बड़ा अधिकारी कभी गिरफ्तार नहीं होते। गिरफ्तारी के लिए दबिश की खबरों का हवाला देने पर कहा गया कि यह कागजी कार्रवाई है, चलती रहती है। वादी ने बताया कि उन्होंने इसकी जानकारी आईजी चित्रकूट रेंज से भी की। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मृतक कारोबारी के परिजनों के शस्त्र लाइसेंस बनने की कार्रवाई में सीओ सदर बेवजह देरी कर रहे हैं।
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exclusive : प्रयागराज जिले के 13 लाख वाहन स्वामियों को लगवानी होगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

जिले की सड़कों पर दौड़ रही करीब 13 लाख गाड़ियों के मालिकों को अब अपने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी प्लेट लगानी पड़ेगी। ये नंबर प्लेट वाहन कंपनियों की एजेंसियों पर लगेंगी। नंबर प्लेट के लिए लोगों को शुल्क भी देना होगा।  

संभागीय परिवहन अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि जिले में करीब 13 लाख वाहन हैं, जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगनी हैं। ये नंबर प्लेट वाहन कंपनियों की एजेंसियों पर लगेंगी । इसके लिए सरकार की ओर से वाहन कंपनियों के साथ एजेंसियों को भी निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वाहन स्वामी जब एजेंसी पर हाई सिक्योरिटी प्लेट लगवाने जाएंगे तो उसकी डिटेल ऑनलाइन परिवहन विभाग को भी मिल जाएगी। एजेंसी संचालक को पूरी डिटेल ऑनलाइन मुहैया करानी जरूरी है। इससे विभाग को रोजाना का विवरण पता चलता रहेगा कि आखिरकार कितने लोगों ने नंबर प्लेट लगवाईं। 
यह है समयावधि

परिवहन विभाग ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने का शुल्क और समय भी निर्धारित किया है। नंबर प्लेट लगने के बाद ही आरटीओ कार्यालय में सारे काम हो सकेंगे। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए चार पहिया वाहन के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये और दो पहिया के लिए 200 से 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। जो वाहन एक अप्रैल 2005 के पहले के हैं, उन्हें चार महीने में नंबर प्लेट बदलवानी होंगी। जो वाहन एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2010 के बीच वाले हैं, उनके लिए छह माह की अवधि निर्धारित की गई है। इसी तरह जो वाहन एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2015 तक की समयावधि के हैं, उन्हें आठ महीने और जो एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 तक के हैं, उन्हें 10 महीने में हाई सिक्योरिटी वाली नंबर प्लेट लगानी होंगी। 
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शिक्षक भर्ती: धरने पर बैठे अभ्यर्थी देर रात उठाए गए

69000 सहायक अध्यापक भर्ती मेें आवेदन की गलती के कारण चयन प्रक्रिया से बाहर होने पर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर धरना दे रहे अभ्यर्थियों को सोमवार देर रात पुलिस ने हटा दिया। कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस ने आश्वासन दिया जिसके बाद नाराज अभ्यर्थी माने। मंगलवार को इस मुद्दे पर वार्ता होगी। धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना था कि कोर्ट ने आवेदन की गलती सुधारने के पक्ष में आदेश दिया है, इसके बाद भी बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से कुछ नहीं किया गया। कुछ जिलों में आवेदन में गलती होने के बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दे दिया गया।

शनिवार को सचिव ने अभ्यर्थियों से मोबाइल पर बात कर समस्या सोमवार तक हल करने का आश्वासन दिया था, इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। सोमवार को सचिव न तो अपने कार्यालय आए और न ही उन्होंने छात्रों के लिए कुछ किया। उनके इंतजार में प्रदेश के अलग-अलग भागों से कई अभ्यर्थी आए हैं, इसमें महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। बड़ी संख्या में अभ्यथी भूख से परेशान सचिव का इंतजार करते रहे। 

अभ्यर्थियों का कहना था कि सचिव बेसिक शिक्षा परिषद गिनती के चार से पांच दिन ही कार्यालय आए। शेष वह लखनऊ स्थित महानिदेशक कार्यालय से काम करते रहे। पूरी शिक्षक भर्ती खत्म होने के बाद भी वह एक भी दिन कार्यालय नहीं आए। सचिव की अनुपस्थिति में जब धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने संयुक्त सचिव विजय शंकर मिश्र बात की तो उनका कहना था कि हमारे पास किसी जिले का रिकार्ड नहीं है, वह कुछ नहीं कर सकते। छात्रों ने कहा कि हमारी मांग नहीं मानी गई तो भूख हड़ताल होगी।
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प्यार के नाम पर गुजरात ले जाकर नाबालिग की गला घोंटकर हत्या

यमुनापार के मेजा में प्यार के नाम पर धोखे से गुजरात ले जाकर नाबालिग को मौत के घाट उतार दिया गया। किशोरी की हत्या के बाद शव झाडिय़ों में फेंककर आरोपी प्रेमी घर भाग आया। गुजरात पुलिस से हत्या की सूचना मिलने पर मेेजा पुलिस ने आरोपी को पकडक़र पूछताछ की तो उसने जुर्म कबूल लिया। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 

मांडा के खुरमा गांव निवासी रामदास की बेटी मौसम(17) मेजा के नेवरिया गांव स्थित अपने ननिहाल आई थी। 27 सितंबर की शाम वह संदिज्ध हाल में लापता हो गई। परिवारवालों ने गांव के ही विजयशंकर पर किशोरी को बहलाफुसला कर ले जाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया कि गुजरात में निजी कंपनी में काम करने वाला आरोपी उनकी बेटी पर बुरी नीयत रखता था।  अफसरों के मुताबिक, तलाश में जुटी पुलिस को 15 अक्तूबर को लापता किशोरी का शव गुजरात के वलसाड स्थित वापी में मिलने की सूचना प्राप्त हुई।

टीम परिजनों को लेकर पहुंची तो पता चला कि उसकी गला दबाकर हत्या करने के बाद शव झाडिय़ों में फेंक दिया गया था। उधर जांच में पता चला कि आरोपी गुजरात स्थित कंपनी से भी काफी दिनों से गायब है। पुलिस ने बताया कि सोमवार को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर आरोपी विजयशंकर को मेजा क्षेत्र से ही तब पकड़ा गया जब वह कहीं भागने की फिराक में था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसने ही किशोरी की हत्या की और फिर शव फेंककर भाग आया। 

प्रेमिका नहीं मान रही थी बात, इसलिए मार डाला

पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ मेें आरोपी ने बताया है कि वह किशोरी को लेकर गुजरात गया लेकिन वहां आईडी न होने के चलते उन्हें रहने की जगह नहीं मिली। इसी दौरान खुद पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी पर वह बौखला गया। बचने के लिए उसने किशोरी से वापस घर लौटने को कहा लेकिन वह उसके लिए तैयार नहीं हुई। इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और उसने मौका पाकर उसकी हत्या कर दी। एसपी यमुनापार चक्रेश मिश्रा ने बताया कि आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
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