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UPPSC: प्रवक्ता इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के 13 पदों पर हुआ चयन

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा विभाग के तहत प्रवक्ता इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के 13 पदों का सीधी भर्ती का अंतिम चयन परिणाम मंगलवार को जारी कर दिया। इनमें छह पद अनारक्षित, पांच अन्य पिछड़ा वर्ग और दो पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

इन पदों पर भर्ती के लिए इंटरव्यू सात एवं आठ अक्तूबर को आयोजित किया गया था। चयनितों की मेरिट में शेखर सिंह शीर्ष स्थान पर हैं, जबकि अनामिका एवं श्वेता जायसवाल को क्रमश: दूसरा एवं तीसरा स्थान मिला है। इनके अलावा पुनीत राय, नीरज सिंह कुशवाहा, अंकिता गुप्ता, नम्रता सिंह, रजत गुप्ता, जया सिंह, इंदू मौर्या, पूनम यादव, विपिन कुमार एवं अरुण पवार का चयन भी हुआ है। 

मेडिकल कॉलेजों को मिले पांच असिस्टेंट प्रोफेसर

प्रयागराज। चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत मेडिकल कॉलेजों में एपीडेमोलॉजिस्ट कम असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच पदों पर सीधी भर्ती का परिणाम यूपीपीएससी ने जारी कर दिया है। इनमें चार पद अनारक्षित एवं एक पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। इंटरव्यू 14, 15 एवं 16 अक्तूबर को हुआ था। चयनितों में हिमालय सिंह, नेहा प्रियंका, कल्पना कुमारी, भावना जैन एवं अभिषेक कुमार के नाम शामिल हैं। 

शोध अधिकारी के चार पदों का रिजल्ट घोषित

प्रयागराज। यूपीपीएससी ने राज्य वित्तीय योजना और संसाधन निदेशालय के तहत शोध अधिकारी के चार पदों का परिणाम जारी कर दिया। 15 अक्तूबर को हुए इंटरव्यू में 25 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। नौ अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए थे और इनमें शैली तोमर, विनिता गोयल, रीतू गोयल, विवेकानंद का चयन हुआ है।

रसायन के एक पद का परिणाम जारी

यूपीपीएससी ने उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (अभियंता और वैज्ञानिक) सेवा समूह ‘ख’ के तहत रसायन के एक अनारक्षित पद का रिजल्ट जारी किया है। इस पद के लिए मोहित कुमार शर्मा को चयनित घोषित किया गया है।
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गलत आपरेशन करने पर सीएमओ ने जंघई में अस्पताल को किया सील

जंघई में पेट दर्द से परेशान महिला का गलत आपरेशन करने वाले डॉक्टर का अस्पताल मंगलवार को सीएमओ ने सील करा दिया। इस संबंध में दी गई नोटिस का जवाब न देने पर चिकित्साधिकारियों ने पुलिस संग कार्रवाई को अंजाम दिया। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक इस संबंध में भदोही निवासी पुष्पा देवी ने 25 सितंबर को साक्ष्यों के साथ शिकायती पत्र दिया था। जांच कराने पर मामला सही पाया गया। पुष्पा का आरोप है कि वह पेट दर्द का इलाज कराने चौका जंघई स्थित जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल गई थी। वहां डॉ. एचएस यादव ने परीक्षण के बाद बताया कि पथरी है, तुरंत ऑपरेशन करना पडे़गा।

छह अगस्त को उसे भर्ती कर सात अगस्त को ऑपरेशन किया गया। इस दौरान आयुष्मान कार्ड से गलत भुगतान कराने का प्रयास किया गया। 13 अगस्त को उसकी हालत गंभीर हो गई। इलाज करने के बजाय उसे भदोही एक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां भी राहत नहीं मिली तो उन्हें बीएचयू रेफर किया गया। पुष्पा के मुताबिक लापरवाही से किए गए ऑपरेशन के कारण उनके करीब साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो गए। मानसिक प्रताड़ना का शिकार भी होना पड़ा।

शिकायत का संज्ञान लेते हुए सीएमओ की ओर गठित टीम ने 17 सितंबर को जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। वहां पांच मरीज भर्ती थे। इनमें एक महिला ऐसी थी, जिसने ऑपरेशन के बाद बच्चे का जन्म दिया था। अस्पताल में आकस्मिक स्थिति के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। वहां एक्सरे मशीन लगी थी। मेडिकल स्टोर और पैथालॉजी भी संचालित की जा रही थी, लेकिन सीएमओ के यहां पंजीकरण नहीं था।

मौके पर कोई डॉक्टर भी नहीं था। वहां मौजूद मंजू यादव ने खुद को गृहणी बताया। वह संचालक के बारे में जानकारी और पंजीकरण प्रपत्र नहीं दिखा सकीं। यह स्थिति मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ की थी। सीएमओ की टीम ने दो गवाहों की मौजूदगी में अस्पताल संचालक को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा था। जवाब न मिलने पर मंगलवार 20 अक्तूबर को टीम ने सीएचसी अधीक्षक, पुलिस बल की मौजूदगी में अनधिकृत पैथालॉजी के संचालन और कुशल चिकित्सकों के बगैर चिकित्सकीय कार्य करने के आरोप में जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल सील कर दिया गया।
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झूंसी में लाखों का नकली हेयर ऑयल और चाय पत्ती बरामद

थाना क्षेत्र के कटका गांव से इलाकाई पुलिस ने सोमवार की रात एक घर के भीतर से भारी मात्रा में नकली चाय पत्ती, नकली हेयर ऑयल और गुलाब जल समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस ने ब्रांडेड कंपनी का लेबल, रैपर और मोनोग्राम लगाकर झूंसी, गंगापार और शहर के कई हिस्सों में बेचने वाले कारोबारी को भी गिरफ्तार किया है। मौके से उसका साथी भागने में सफल रहा। 

सोमवार की रात झूंसी पुलिस ने कटका गांव के एक मकान से नकली सामान बरामद किया। उस मकान से भारी मात्रा में ब्रांडेड कंपनी की चाय पत्ती, हेयर ऑयल समेत अन्य सामान बरामद किए गए। इंस्पेक्टर झूंसी नरेंद्र प्रसाद और चौकी इंचार्ज मनोज यादव को सोमवार की रात मुखबिर से सूचना मिली कि कटका गांव के एक मकान में नकली सामानों को बनाकर बाजार में सप्लाई किया जा रहा है।

इस पर एसआई मोहम्मद अली, जितेंद्र प्रताप सिंह, अरिवंद कुमार तथा कांस्टेबल मंजीत कुमार, प्रदीप कुमार तथा सर्वेश कुमार के साथ मकान पर दबिश दी। पुलिस टीम को देखते ही मौके से एक कारोबारी फरार हो गया। पुलिस ने अशोक कुमार पुत्र सौदागर राम निवासी बुढ़वा बाबा कटका को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम ने मकान के भीतर जाकर तलाशी ली तो सन्न रह गई। वहां भारी मात्रा में नकली चाय पत्ती, हेयर ऑयल और गुलाब जल ब्रांडेड कंपनी की शीशी व पैकेट में पैक किए जा रहे थे।

इंसपेक्टर नरेंद्र प्रसाद ने बताया कि पैरासूट जैसमीन आयल की 90 एमएल की 3216 भरी और 6219 खाली शीशी, स्टीकर 38219, 200 एमएल बजाज एलमंड आयल की 980 भरी शीशी, डाबर गुलाब जल 60 एमएल की 1942 शीशी, टाटा चाय पत्ती 50 ग्राम पैकेट के 32602 पैकेट तथा 80 किलो खुली चाय पत्ती बरामद की गई। कारोबारी को दोपहर बाद जेल भेज दिया गया।
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exclusive : अमिताभ बच्चन ने कभी नहीं ली पैतृक गांव बाबूपट्टी की सुध, गांव के लोग बोले- इंतेहा हो गई इंतजार की

अमिताभ अमिताभ

विधायक विजय मिश्रा पर दुष्कर्म के आरोप का मामला: चार दिन बीते, एक कदम भी नहीं चली पुलिस

इसे राजनीति का रसूख कहें या फिर पुलिस की ढिलाई कि विधायक विजय मिश्र पर जिस भजन गायिका ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया, चार दिन बाद भी पुलिस कार्रवाई एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। पीड़िता का न तो मेडिकल परीक्षण हुआ और न ही कोर्ट के सामने उसके बयान हुए। इतना ही नहीं इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस ने कोई प्रयास तक नहीं शुरू किए। पुलिस का कहना है कि नियमों के मुताबिक ही विवेचना की जा रही है। 

वाराणसी की रहने वाली एक युवती ने 18 अक्तूबर को गोपीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि विजय मिश्रा डरा धमकाकर 2014 से ही उसका यौन शोषण कर रहा है। वह भजन गायिका है। विजय ने अपने घर एक कार्यक्रम के लिए बुलाया फिर चेंजिंग रूम में जबरन घुसकर उसके साथ दुराचार किया। पहले भदोही फिर प्रयागराज के अल्लापुर में उसे बुलाकर लगातार कई दिन यौन शोषण किया गया। इसी दौरान उसने कई वीडियो भी बना लिए थे। धमकी देता था कि किसी से बताया तो पूरे परिवार समेत जान से मरवा दूंगा।

यौन शोषण के बाद उसने अपने बेटे विष्णु मिश्रा और रिश्तेदार विकास मिश्रा को उसे वाराणसी पहुंचाने के लिए भेजा तो उन लोगों ने उसके साथ एक कमरे में सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने फोन उठाना बंद कर दिया तो विजय मिश्रा ने चार आदमियों को भेजकर भरे बाजार से उसे उठवा लिया था। इसके बाद वह इतना डर गई कि वह मुंबई चली गई, लेकिन विजय मिश्रा ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा। धमकी दी कि जब भी वीडियो कॉल करें तो तुरंत उठना चाहिए। युवती ने इन्हीं वीडियो कॉल का स्क्रीन शाट लेकर पुलिस को भी दिया।

 इस मामले में पुलिस ने 18 अक्तूबर को रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में है। युवती का पुलिस ने आज तक मेडिकल परीक्षण नहीं कराया, बिना मेडिकल के कोर्ट के सामने पीड़िता का बयान भी नहीं होगा। इस मामले में विजय मिश्रा समेत तीन लोगों को नामजद किया गया है। उनमें बेटा विष्णु और रिश्तेदार विकास मिश्रा भी शामिल हैं। पुलिस उन्हें भी अब तक नहीं पकड़ पाई है। युवती ने एफआईआर में बताया था कि भदोही, प्रयागराज और वाराणसी में उसका यौन शोषण किया गया। पुलिस अभी कहीं भी तफ्तीश करने नहीं पहुंची है। इस मामले में जब भदोही के एएसपी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला सब ज्यूडिस है। इसलिए वह इस मामले पर कोई बयान नहीं दे सकते।
  • एफआईआर के बाद अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। कोरोना टेस्ट के बाद लड़की का मेडिकल का परीक्षण होगा। - इंस्पेक्टर गोपीगंज
 

रेप का मुकदमा पहली बार, 60 से अधिक मुकदमे हैं दर्ज

प्रयागराज। विजय मिश्रा पर 60 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। रेप की एफआईआर पहली बार हुई है। एफआईआर के बाद युवती ने बयान दिया था कि उसका इतना आतंक है कि उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की किसी ने हिम्मत नहीं की। अगर पुलिस जांच करे तो कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। जब उसे पता चला कि विजय मिश्रा जेल चला गया तो उसने रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत की है।

कई दलों में रह चुके हैं विजय मिश्रा

विजय मिश्रा ने1990 में कांग्रेस से ब्लाक प्रमुख के रूप में राजनीति की शुरूआत की थी। 2002, 2008 और 2012 में विजय मिश्रा सपा के टिकट से ज्ञानपुर के विधायक चुने गए। 2017 में अखिलेश यादव ने जब टिकट नहीं दिया तो निषाद पार्टी में चले गए और उसी पार्टी के विधायक बने। विजय पर 60 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। मंत्री नंदी पर हमले का आरोप भी उन पर लग चुका है, लेकिन भाजपा सरकार बनने के साढ़े तीन साल तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब शासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
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घर बैठे अथवा एजेंसी पर जाकर ले सकते हैं हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाना कोई कठिन काम नहीं है। परिवहन विभाग ने इसके लिए ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों तरह की सुविधा उपलब्ध कराई है। ऑनलाइन के माध्यम से आप बुकिंग कर एजेंसी पर जाकर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट ले सकते हैं। अगर ऑनलाइन में दिक्कत है तो एजेंसी पर जाकर इसे लिया जा सकता है। सभी वाहनों के लिए परिवहन विभाग ने एक लिंक भी जारी किया है। 

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सियाराम वर्मा के मुताबिक हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए बुक माई एचएसआरपी वेब लिंक पर जाकर लॉगिन करना होगा। लॉगिन करने पर दो ऑप्शन आएंगे। पहले में हाई सिक्योरिटी प्लेट नंबर के लिए क्लिक करना होगा, जबकि दूसरे में फ्यूल स्टीकर बुक करने का ऑप्शन दिया गया है। हाई सिक्योरिटी नंबर के लिए कुल 11 स्टेप भरने होंगे। खास बात यह है कि इसमें आरसी की कॉपी डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है। जब ऑप इस पर लॉगिन करेंगे तो घरेलू या कामर्शियल वाहन का ऑप्शन आएगा।

आपको जरूरत के मुताबिक ऑप्शन को भरना होगा। उसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर, गाड़ी नंबर, मोबाइल नंबर आदि भरना है। इसके पूरा करने के बाद आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी नंबर भी आएगा। इसे भरने के बाद नंबर प्लेट का चार्ज शुल्क शो करेगा। वाहनों की कटेगरी और श्रेणियों के मुताबिक अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। बुकिंग के बाद आपके ईमेल पर पूरा विवरण भी भेजा जाएगा। यदि वाहन संबंधी विवरण गलत भरा गया तो बुकिंग नहीं हो सकेगी। बुकिंग के बाद लोग अपने डीलर्स या वाहन कंपनी की नजदीकी एजेंसी पर जाकर नंबर प्लेट प्राप्त कर सकते हैं। 

ऑफलाइन में वाहन मालिकों को एजेंसी पर जाना होगा। वहां जरूरत के मुताबिक डिटेल देकर नंबर प्लेट प्राप्त कर सकेंगे। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एक खास तरह से बनाई  गई है। नंबर प्लेट के बाईं तरफ क्रोमी बेस्ट होलोग्राम बना हुआ और नीले कॅलर में आईएनडी लिखा रहेगा। इसे परिवहन विभाग की वेबसाइट पर देखा भी जा सकता है।
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आजम खां को झटका, किसानों की जमीन लेने के मामले में जौहर ट्रस्ट की याचिका खारिज 

High security number plate
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौहर विश्वविद्यालय द्वारा किसानों की जमीन का बैनामा कराने के मामले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहम्मद आजम खां की याचिका में हस्तक्षेप करने सें इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका में राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के निर्णय को चुनौती दी गई थी।  कोर्ट ने कहा है  कि राजस्व परिषद के निर्णय में कोई अवैधानिकता नहीं है। इसलिए हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। 

याचिका पर न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की।राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुधांशु श्रीवास्तव का कहना था कि अनुसूचित जाति के किसानों की जमीन बिना कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बैनामा कराना गैरकानूनी है। ऐसा करना  उ प्र जमींदारी उन्मूलन कानून की धारा 157 ए के विपरीत है। ऐसी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार में निहित हो जाता है ।

इससे पहले कोर्ट ने याची के अधिवक्ता सफदर काजमी को वीडियो लिंक न मिल पाने के कारण अदालत में हाजिर होकर बहस करने के लिए कहा था।।केस की  दुबारा पुकार के बाद याची की तरफ से कोई अधिवक्ता नहीं आया तो कोर्ट ने पत्रावली के आधार पर बोर्ड के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है और कहा है कि निचली अदालत के आदेश मे कोई अवैधानिकता नहीं है।
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गाजियाबाद की भोवापुर बस्ती में ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जीडीए से पुनर्वास योजना पर मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद, कौशाम्बी में रैडीसन ब्लू होटल के पीछे भोवापुर श्रमिक बस्ती के लोगों को राहत देते हुए बस्ती के ध्वस्तीकरण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से इनके पूर्ण पुनर्वास योजना के साथ जवाब मांगा है। साथ ही कोर्ट ने बस्ती के लोगों को बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भी कहा है। याचिका की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। 

देवपाल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ का कहना था कि दुनिया भर में कोरोना महामारी फैली है, ऐसे में सभी वर्गों, खास कर कमजोर वर्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों के आवास ध्वस्त किए गए हैं, जिला प्रशासन उनके लिए अस्थायी आवास का इंतजाम करे।

जीडीए भोवापुर बस्ती के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास योजना पर विचार करे। तब तक बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाएं बिजली, पानी, चिकित्सा आदि मुहैया कराई जाए। भोवापुर बस्ती में देश के विभिन्न हस्सों से रोजगार के लिए आने वाले श्रमिकों की बस्ती है। यह बस्ती विकास प्राधिकरण के गठन के समय 1990 से ही अस्तित्व में आ गई थी। उनके पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। याची का कहना है कि अभी तक 150 आवास ध्वस्त किए जा चुके हैं। लोग आसमान के नीचे रह रहे हैं।

जीडीए का कहना है कि अतिक्रमण कर अवैध बस्ती बनाई गई है। हाईकोर्ट ने ही सालिड बेस्ट डिस्पोजल यूनिट स्थापित करने के लिए कार्रवाई का निर्देश दिया है, जिसके तहत ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि पुनर्वास की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना श्रमिकों को बेदखल करना सही नहीं है। कोर्ट ने प्राधिकरण से पूरी योजना तैयार कर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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आईटी एक्ट की धारा 66 ए में मुकदमे क्यों दर्ज कर रही पुलिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से पूछा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधनियम 2000 की धारा 66 ए को सुप्रीमकोर्ट द्वारा असंविधानिक घोषित करने के बाद भी यूपी पुलिस इस धारा में मुकदमे क्यों दर्ज कर रही है। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद इसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। अदालत ने चार सप्ताह में दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। औरैया के हरिओम की याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ सुनवाई कर रही है। 

याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची के खिलाफ बेला थाने में आईटी एक्ट की धारा 66 ए और 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि धारा 66 ए को सुप्रीमकोर्ट ने श्रेया सिंघल केस में असंविधानिक घोषित कर दिया है। तथा इस धारा के तहत मुकदमे दर्ज न करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं बाद में पीपुल्य यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में कोर्ट ने श्रेया सिंघल केस का आदेश देश के सभी उच्च न्यायालयों, जिला न्यायालयों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजने का निर्देश दिया था ताकि आदेश का सभी राज्यों में पालन किया जा सके। 

सुप्रीमकोर्ट के इस स्पष्ठ निर्देश के बावजूद प्रदेश में आईटी एक्ट की धारा 66 ए में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। हाइ्रकोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए महानिबंधक को आदेश दिया है कि उनके आदेश के प्रति मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी जाए तथा दोनों अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि सुप्रीमकोर्ट के निर्देश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने याची के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच और उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
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पुलिस भर्ती 2018 :  पुरुष के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो, हाईकोर्ट ने मंगाया मूल प्रवेश पत्र

पुलिस कांस्टेबल 2018 में अनियमितता को लेकर दाखिल याचिका में सुनवाई के दौरान के दौरान पुरुष अभ्यर्थी के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो लगाए जाने की बात सामने आने पर मूल प्रवेश पत्र तलब कर लिए हैं। फोटो मैच न करने के कारण अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल करने से इंकार करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने दिया। हरिकेश यादव और सात अन्य ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। 

याचीगण का कहना था कि उनको फोटो का मिलान न होने के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया गया जबकि पुरूष के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो था। एक अन्य मामले में अभ्यर्थी ने फोटो लगाया ही नहीं था। उसका फोटो भी मिस मैच कर गया।   सरकार की तरफ से कहा गया कि याचियों के आवेदन में लगी फोटो उनके शारीरिक दक्षता परीक्षा में आने पर मैच नहीं कर रही ।इसलिए उन्हे रोक दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नौ नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने हरिकेश यादव व सात अन्य की याचिका पर दिया है ।याचियों का कहना है  कि लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया। किन्तु उन्हे परीक्षित करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया गया कि उनके फोटोग्राफ उनसे नहीं मिल रहे हैं।
इसके जवाब में याचियों का कहना है कि एक अभ्यर्थी काजल शर्मा ने फोटोग्राफ लगाया नहीं है, जबकि एक अन्य अभ्यर्थी सूरज गौड़ के प्रवेश पत्र पर महिला का फोटो लगा था। सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याचियों का अंगूठा निशान भी नहीं मिल रहा है।कोर्ट ने दो याचियों के प्रवेश पत्र नमूने के तौर पर जमा करने का निर्देश दिया है ।
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कोर्ट का आदेश न मानने पर सचिव ग्राम विकास पर पांच हजार हर्जाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार बार आदेश देने के बाद भी हलफनामा दाखिल न करने पर सचिव ग्राम विकास लखनऊ पर पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है । कोर्ट ने कहा कि यदि वह अपने खाते से चेक द्वारा पांच हजार रुपये राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कर हलफनामा दाखिल नहीं करते हैं तो उन्हें अगली तारीख तीन नवंबर 2020 को कोर्ट में हाजिर होना होगा । यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक  अग्रवाल ने त्रयंबक नाथ की याचिका पर दिया है । 

याचिका के अनुसार याची वर्ष  2003 में रिटायर हो चुका है । उसने गलत मूल वेतन निर्धारण के खिलाफ याचिका दायर की है। याची के अधिवक्ता गिरिज शंकर  मिश्र ने कोर्ट को बताया कि गलत मूल वेतन निर्धारण के चलते याची की पेंशन में  काफी फर्क पड़  रहा है । कोर्ट ने इस याचिका पर कई अलग अलग तिथियों पर सचिव से उनका व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा था। सरकारी वकील का कहना था कि पत्र द्वारा सूचना दी जा चुकी है,  परन्तु कोई हलफनामा दाखिल नहीं हुआ ।

सरकारी वकील ने  एक और अवसर देने की मांग की ताकि  सचिव से बात कर हलफनामा दाखिल किया जा सकें । इस पर कोर्ट ने एक और मौका हलफनामा दाखिल करने का देते हुए सचिव को निर्देश दिया है कि वह अपने खाते से पांच हजार रुपये का चेक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कर हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने आदेश में कहा हैं कि ऐसा न करने पर उन्हें  मुकदमा के सुनवाई की अगली तिथि पर कोर्ट में हाजिर रहना होगा ।
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सीबीएसई बोर्ड के सचिव रिकॉर्ड के साथ हाईकोर्ट में तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी गई जानकारी उपलब्ण न कराने पर सीबीएसई बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज के सचिव को पत्रावलियों के साथ तलब कर लिया है। कोर्ट ने बोर्ड के अधिवक्ता द्वारा मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से करने की मांग अस्वीकार करते हुए सचिव को पांच नवंबर को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।  यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने गौरव कुमार राय की याचिका पर दिया है ।

कोर्ट ने बोर्ड के अधिवक्ता धनंजय अवस्थी से तीन मार्च को याचिका पर जानकारी मांगी थी।सुनवाई के दौरान मांगी गई जानकारी पत्रावली पर नहीं रखी गई और अधिवक्ता ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की मांग की।आदेश का पालन न होने गके कारण कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की मांग अस्वीकार कर दी है। सुनवाई  पांव नवंबर  को होगी।
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