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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

लेह परिषद चुनाव में इस बार भी 65 फीसदी वोटिंग, नतीजे सोमवार को

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख की लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की 26 सीटों के चुनाव में 65.07 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव मैदान में उतरे 94 उम्मीदवारों के भाग्य के फैसले के लिए कुल 89,789 मतदाताओं में से 58430 ने मतदान किया। चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर होने की उम्मीद है। 

26 अक्तूबर को मतगणना के साथ ही नतीजे भी घोषित होंगे। पिछली बार लेह परिषद चुनाव में 65.01 फीसदी मतदान हुआ था। जिला उपायुक्त लेह सचिन वैश्य ने बताया कि लेह परिषद के चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए हैं। कहीं से कोई गड़बड़ी की सूचना नहीं है। इस बार भी पिछली बार की तरह 65 फीसदी मतदान हुआ है। 

सर्दी के बीच वीरवार सुबह 8 बजे मतदान शुरू होकर शाम चार बजे तक चला। मतदान के लिए सुबह मतदाताओं में कम जोश दिखा, लेकिन दिन चढ़ने के साथ मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ बढ़ने लगी। दोपहर को सबसे ज्यादा संख्या में मतदाता वोट डालने पहुंचे। 

दुर्गम क्षेत्र होने के कारण कई मतदान केंद्रों पर भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर की मदद से मतदान कर्मियों और चुनाव सामग्री को पहुंचाया गया था। कुल 294 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे, जिनके बाहर भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थक जुटे रहे। इस चुनाव के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंककर चार केंद्रीय मंत्रियों को प्रचार के लिए उतारा था। चुनाव पर लेह जिले में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था।
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मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कश्मीर के खिलाफ पाकिस्तानी हकूमत की साजिश पर बनेगा संग्रहालय

कश्मीर के लोगों के खिलाफ 22 अक्तूबर 1947 की पाकिस्तानी हकूमत की साजिश के बारे में जानकारी देने वाला एक संग्रहालय बनेगा। इसमें पाकिस्तान की निर्दयता को इतिहास के जरिये दर्शाया जाएगा। यह बात मिनिस्ट्री ऑफ  कल्चर के सचिव राघवेंद्र सिंह ने कही। 

श्रीनगर के एसकेआईसीसी में शुरू हुई दो दिवसीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी में 73 साल बाद पाकिस्तान के हमले की हकीकत से लोग रूबरू हुए। प्रदर्शनी में उस इतिहास को लोगों के सामने रखा गया, जिनसे वे अभी तक अंजान थे। 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी हकूमत ने साजिश के तहत हमला किया था। 

नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट ऑफ  हिस्ट्री ऑफ  आर्ट्स कंजर्वेशन एंड म्यूजियोलोजी नई दिल्ली द्वारा आयोजित संगोष्ठी और प्रदर्शनी को युवाओं और स्थानीय लोगों ने सराहा। उन्होंने कहा, ऐसे जागरूकता के कार्यक्रम भविष्य में भी होने चाहिएं। 

सांस्कृतिक मंत्रालय के सचिव राघवेंद्र सिंह ने बताया कि 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तानी हकूमत ने साजिश के तहत कश्मीर पर हमला किया था। तब ब्रिगेडियर अकबर खान ने ऑपरेशन की अगुवाई की थी। इस हमले में दोमेल और उड़ी में हजारों हिंदू, सिख और मुसलमान मारे गए थे। इस इतिहास को हमने यहां दिखाने की कोशिश की है। 

उन्होंने कहा कि जैसे जर्मनी में लोग होलोकास्ट को याद करते हैं, वैसे ही हमें यह दिन याद रखने और महसूस करने की जरूरत है, ताकि इसे हम समझें और आगे ऐसा न हो उसके लिए तैयार रहें। राघवेंद्र सिंह ने कहा कि इस संगोष्ठी और प्रदर्शनी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे भी बड़ा यहां एक म्यूजियम बनाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश प्रशासन से बात कर ली है।

‘27 नहीं 22 अक्तूबर का दिन ब्लैक डे है’
वहीं कार्यक्रम में पहुंचे सोशल एक्टिविस्ट चौधरी मोहम्मद असलम ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से पहले जितने भी कार्यक्रम यहां हुए, उनमें से अधिकतर में पाकिस्तान को प्रोत्साहित किया जाता था। यहां के युवाओं ने भी माना कि वह इस इतिहास से बेखबर थे और झूठे प्रचार के जरिये यहां कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया गया जिससे यहां खून खराबा हुआ। उन्होंने कहा कि उम्मीद करते हैं, आने वाली पीढ़ियां इससे सबक सीखेंगी। उन्होंने कहा कि 22 अक्तूबर का दिन ब्लैक डे है क्योंकि इस दिन यहां के लोगों के साथ जुल्म हुआ था और जो 27 अक्तूबर को अलगाववादियों द्वारा मनाया जाता रहा है वो ब्लैक डे नहीं है बल्कि उस दिन सेना हमारी हिफाजत के लिए यहां बुलाई गई थीं। आज यह एतिहासिक कदम पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा है।
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अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा, श्रीनगर में लगे 22 अक्तूबर को ब्लैक डे बताने वाले होर्डिंग 

जम्मू-कश्मीर में बदलाव की बयार का असर नजर आ रहा है। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में पिछले 70 सालों के दौरान पहली बार सड़कों के किनारे 22 अक्तूबर को काला दिवस (ब्लैक डे) लिखे होर्डिंग नजर आए। यह अलगाववादियों के मुंह पर करारा तमाचा है।  इसे 73 वर्ष पहले 22 अकतूबर 1947 को हुए हुए कबाइलियों के हमले की घटना के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। 

 बताया जाता है कि यह होर्डिग मंगलवार रात लगाए गए थे और बुधवार की सुबह जिस किसी ने भी देखा वो हैरान रह गया। इन पोस्टरों को देख कर शुरू हुई गहमा गहमी के चलते कई जगहों से इन पोस्टरों को आनन फानन में हटा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इन होर्डिगों को श्रीनगर नगर निगम से अनुमति के बाद बटवारा, डलगेट, बटमालू, जहांगीर चौक आदि इलाकों में लगाया गया था।

इन होर्डिंग्स पर लिखा था कि 22 अक्तूबर को पाकिस्तान ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत पर हमला किया था। यह पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर के महाराजा के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन था। इन होर्डिंगों पर यह भी लिखा था कि क्या आप लोग जानते हैं कि 22 अक्तूबर 1947 क्या है ? यह दिन जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए ब्लैक डे है। होर्डिगों में इसे लगाने वाली संस्था के रूप में सेंटर फॉर इंक्लूसिव एंड ससटेनेबल डेवलपमेंट्स का नाम अंकित था। गौरतलब है कि इस होर्डिंग में कश्मीर के अवाम को कबाइली हमले (22 अक्तूबर) के दिन को ब्लैक-डे के तौर पर स्वीकार करने को कहा गया था। 

अलगाववादी 27 को मनाते हैं ब्लैक डे
 पुलिस सूत्रों के अनुसार, होर्डिंग किसने लगवाए इसकी कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अलगवादी 27 अक्तूबर को काला दिवस के रूप में मनाते हैं। जिस दिन भारतीय सेना कश्मीर में उतरी थी।
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जम्मू-कश्मीरः जिला विकास परिषद में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित

जिला विकास परिषद की सीधे निर्वाचित होने वाली 14 सीटों में एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। पंचायतों के बाद जिला परिषद में महिलाओं की नुमाइंदगी सुनिश्चित होने से महिला सशक्तीकरण को एक और पायदान मिलेगा। जम्मू-कश्मीर पंचायती राज एक्ट में संशोधन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही प्रदेश में भारतीय संविधान का 73वां संशोधन अधिनियम भी पूरी तरह से लागू हो गया है। 

पंचायत, ब्लॉक के बाद जिला परिषद का त्रिस्तरीय ढांचा ग्रामीण विकास में जवाबदेही के साथ रफ्तार लाएगा। महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण के अलावा जिला परिषद में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग को कुल आबादी में प्रतिशत के हिसाब से आरक्षण मिलेगा। जिला विकास परिषद नामांकन के लिए किसी भी पंचायत में मतदाता के तौर पर नाम दर्ज होना आवश्यक होगा।

पंचायतों की निगरानी के अधिकार, पांच स्टैंडिंग कमेटियां होंगी गठित
जिला विकास परिषदों के पास पंचायत स्तर तक निगरानी के अधिकार होंगे। विकास योजनाएं तैयार करने से लेकर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया में जिला परिषद की अहम भूमिका होगी। परिषद गठन होने पर पांच स्टैंडिंग कमेटियां बनाई जाएंगी। इसमें वित्त, विकास, लोक निर्माण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा और कल्याण कार्यों की कमेटी शामिल होगी।
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लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद का चुनाव आज, 94 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे 89776 मतदाता

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लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की 26 सीटों पर वीरवार 22 अक्तूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक मतदान होगा। कुल 94 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 89776 मतदाता करेंगे। मतगणना 26 को होगी, उसी दिन परिणाम भी आ जाएंगे। लेह प्रशासन ने 294 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के साथ अन्य प्रबंध कर दिए हैं। मतदाताओं में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले ज्यादा है। महिला मतदाताओं की संख्या 45025 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 44750 है।  

चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच ज्यादा सीटों पर सीधा मुकाबला है। 2015 में हुए लेह काउंसिल के चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था और 26 सीटों में से 18 भाजपा ने जीती थीं। कांग्रेस को पांच और नेशनल कांफ्रेंस को दो सीटें मिली थीं। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती थी। 

बता दें, काउंसिल के गठन के बाद से ही यहां पर ज्यादातर कांग्रेस का ही शासन रहा है। केवल 2015 में मोदी लहर में लेह काउंसिल के चुनाव में भाजपा ने पहली बार जीत का परचम लहराया था।
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आतंक के खिलाफ इस साल जम्मू-कश्मीर में 40 जवानों ने दी शहादत : डीजीपी

आतंकवाद के खिलाफ व अन्य हिंसक घटनाओं में जम्मू-कश्मीर में पिछले एक वर्ष में 40 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। इनमें से 13 जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान हैं। यह बात पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने जेवन में पुलिस स्मरण दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने शहीदों की शहादत को सलाम करते हुए कहा कि आज का दिन हमारे लिए गर्व का दिन है। 

डीजीपी ने कहा कि शहीदों में अनंतनाग के पुलिस इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ भी शामिल हैं। जो आतंकियों से मुकाबले में शहीद हुए। उन्होंने कहा कि शहीद इंस्पेक्टर की बच्ची रोते हुए उनसे बोली कि वो उनके पिता की तरह बहादुर बनना चाहती और उनकी ही तरह आतंक के खिलाफ लड़ना चाहती हैं। उन्होने कहा इस जज्बे को सलाम किया। 
 
उन्होंने कहा कि 21 अक्तूबर 1959 में लद्दाख में चीन के हमलावरों के साथ लोहा लेते हुए सीआरपीएफ के 10 जवानों ने अपनी जान न्यौछावर की थी। तब से इस दिन को शहीदों के लिए सम्मान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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पुलवामा मुठभेड़: आतंकी से बोली मां, यहां आ जा नाजिम, मेरी खातिर गन छोड़ दे, वीडियो वायरल

जम्मू-कश्मीरः नार्को टेरर मामले में हिजबुल आतंकी नायकू समेत 10 के खिलाफ चार्जशीट

नार्को आतंक  के मामले में मंगलवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मुठभेड़ में मारे जा चुके हिजबुल कमांडर रियाज नाइकू समेत दस लोगों के खिलाफ मोहाली कोर्ट में 12 हजार पृष्ठों का अभियोग पत्र दाखिल किया है। आरोप पत्र में इन सभी पर देश के विभिन्न हिस्सों में मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को संचालित करने के आरोप हैं।

 आरोपियों में पुलवामा का रहने वाला हिलाल अहमद, गुरदासपुर और अमृतसर के रहने वाले बिक्रम सिंह, मनंदिर सिंह, रंजीत सिंह, गगनदीप सिंह, इकबाल सिंह, रंजीत सिंह, जसवंत सिंह और वर्तमान में पाकिस्तान में रह रहा अनंतनाग निवासी जफर हुसैन भी शामिल है। 25 अप्रैल को पंजाब पुलिस ने 29 लाख रुपये की नकदी के साथ शेरगोजरी को पकड़ा था। 

8 मई को एनआईए ने जांच को अपने हाथ में लिया। शेरगोजरी अमृतसर में नकदी लेने आया था। वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करता है और रियाज नाइकू का करीबी रहा है। इनके पकड़े जाने के बाद पाकिस्तान के नार्को आतंकवाद के बड़े नटवर्क का पता चला। इसमें हवाला का पैसा भी शामिल है। 

जुलाई 2019 को अटारी बार्डर पर 532 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। इसके बाद एनआईए ने पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की 15 लोकेशन पर छापे मारे। कार्रवाई के दौरान आठ वाहन और 98.5 लाख रुपये भी बरामद किए गए। आरोपियों के आतंकियों के साथ सोशल साइट पर हुई चैट को भी सार्वजनिक किया गया था।
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