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त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरल...

6 सितंबर 2020

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Digital Edition

जम्मू-कश्मीरः कुलगाम में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या करने वाले आतंकियों की हुई पहचानः डीजीपी

जम्मू कश्मीर के कुलगाम में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या करने वाले आतंकवादियों की पहचान कर ली गई है। डीजीपी दिलबाग ने इस बात की जानकारी दी है कि ऑल्टो कार से आए तीनों आतंकियों की पहचान कर ली गई है।
 

पुलवामा कबूलनामे के एक दिन बाद ही फिर सामने आया पाकिस्तान का चेहरा-
भाजयुमो नेताओं की हत्या में लश्कर और टीआरएफ का हाथ
पुलवामा हमले के कबूलनामे के एक दिन बाद ही दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम में भाजयुमो के जिला महासचिव समेत तीन कार्यकर्ताओं की हत्या में पाकिस्तान का हाथ सामने आया है। आईजी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि पाकिस्तान के इशारे पर लश्कर ए ताइबा और द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया।

हमले में दो स्थानीय आतंकियों के साथ ही एक पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल था। इनकी शिनाख्त कर ली गई है। साथ ही हमले में इस्तेमाल गाड़ी को भी बरामद कर लिया गया है। ज्ञात हो कि वीरवार को जिले के काजीगुंड इलाके के वाईके पोरा में कार्यकर्ताओं की कार पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थी जिसमें तीन की मौत हो गई थी। 

आईजी ने बताया कि जांच में अब तक जो सबूत हाथ लगे हैं उससे पता चलता है कि वीरवार की शाम लगभग आठ बजे आतंकी स्थानीय अल्ताफ की कार से घटनास्थल पर पहुंचे थे। उस दौरान भाजयुमो महासचिव फिदा हुसैन अपने दो अन्य साथियों के साथ गाड़ी में बैठे थे।
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मारे गए तीनों भाजपा कार्यकर्ता (इनसेट में) मारे गए तीनों भाजपा कार्यकर्ता (इनसेट में)

बदलाव का एक सालः हर भारतीय के लिए खुले जम्मू-कश्मीर के द्वार, भ्रष्टाचार पर कस रही नकेल

राज्य पुनर्गठन कानून लागू होने के एक साल के भीतर जम्मू-कश्मीर में विभिन्न स्तरों पर कई बदलाव हुए हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सामरिक ही नहीं प्रशासनिक मोर्चे को मजबूती मिली है। प्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होने के साथ भ्रष्टाचार पर भी नकेल कस दी गई है। निजाम बदलने के साथ एक साल के दौरान जम्मू-कश्मीर में 86 कानून खत्म हो गए हैं। केंद्र के कानून लागू हुए हैं। प्रदेश में पंद्रह साल रहने वालों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी नागरिक बनने का हक देने और भूमि स्वामित्व कानून में बदलाव कर पूरे देश के लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर के द्वार खोल दिए गए हैं। सामाजिक और आर्थिक ही नहीं परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर राजनीतिक स्तर पर भी संतुलन साधने की कोशिश धरातल पर दिख रही है। 

इसी बीच, त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू करने के लिए नियमों में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर में पहली बार जिला विकास परिषद के गठन का रास्ता साफ कर दिया गया है।
कोरोना संकट के बीच इस अरसे के दौरान प्रदेश में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। एलजी के सीधे नियंत्रण में एसीबी के आ जाने से भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई हो रही है। सीबीआई ने भी अब सीधे भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करना शुरू कर दिया। कई बड़े अधिकारियों पर केस दर्ज हो चुके हैं। नए भूमि कानून से नए उद्योगों का रास्ता भी साफ हो गया है। 

इससे रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। लोगों से संवाद बनाने के लिए बैक टू विलेज की तर्ज पर सरकार ने शहरी इलाकों के लोगों के लिए मेरा शहर, मेरी शान नाम कार्यक्रम शुरू किया है। पूरे राज्य में सड़क, बिजली, पानी, सुरंग के निर्माण की दिशा में कोरोना संकट के बावजूद काम सुचारू किया गया। पीएमजीएसवाई में राज्य का पूरे देश में दूसरा स्थान रहा। कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जेड मोड और जोजिला टनल का काम शुरू हो गया है। जम्मू में एम्स शुरू किया जा रहा है। इसी सत्र से पहला बैच बिठाने की तैयारी है। केंद्रीय कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिला। एसआरओ 202 को समाप्त किया गया, जिसमें कर्मचारी के प्रोबेशन की अवधि पांच साल रखी गई थी। इसे हटाकर देश के अन्य राज्यों की तरह प्रोबेशन अवधि दो साल की गई। 

अलगाववादियों की भी अब नहीं सुन रहे घाटी के लोग
घाटी में अलगाववाद तथा आतंकवाद की लगभग कमर टूट गई। पूरे एक साल में कभी भी अलगाववादियों ने बंद की कॉल नहीं दी। बीते 27 अक्तूबर को विलय दिवस पर इनके आह्वान को आम जनता ने किनारे कर दिया। अधिकांश दुकानें खुलीं रहीं। पत्थरबाजी बीते दिनों की बात हो गई। बीते एक साल में कभी कभार सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जबकि पूर्ववर्ती राज्य में आए दिन हिंसक प्रदर्शनों के दौरान आंसू गैस के गोले चलाने पड़ते थे।

एनआईए का भी शिकंजा भी और कसा
एनआईए ने भी अपना शिकंजा आतंकियों तथा उनके समर्थकों के खिलाफ और कसा। इसके साथ ही अलगाववादियों के समर्थकों पर भी पैनी निगाह रखी।

राजनीतिक गतिविधियां शुरू, सभी प्रमुख नेता रिहा
अनुच्छेद 370 हटने के बाद नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पीपुल्स कांफ्रेंस प्रमुख सज्जाद गनी लोन समेत नेकां, पीडीपी तथा कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को नजरबंद कर दिया गया था। इन सभी को धीरे धीरे रिहा किया गया। अब लगभग सभी प्रमुख नेता रिहा हो चुके हैं और घाटी में सालभर से बंद राजनीतिक गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई हैं। यह अलग बात है कि पीपुल्स एलायंस फार गुपकार डिक्लरेशन (पीएजीडी) नामक नया गठबंधन खड़ा कर कश्मीर केंद्रित पार्टियों ने अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष का संकल्प लिया है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर कश्मीर में नेकां और पीडीपी का विकल्प बनने के लिए जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी का गठन किया गया। 

उप राज्यपाल बदले, राजनीतिक खिलाड़ी मनोज सिन्हा को कमान
पिछले साल 31 अक्तूबर को राज्य के पुनर्गठन के साथ ही एलजी के तौर पर जीसी मुर्मू को राज्य की कमान सौंपी गई। लेकिन उप राज्यपाल प्रशासन आम जनता का विश्वास जीतने में सफल नहीं हो पाया। लोग प्रशासन के समक्ष अपनी फरियाद लेकर पहुंचने से कतराते रहे। आम जनता के प्रशासन से कटने के फीडबैक पर केंद्र सरकार ने राजनीतिक खिलाड़ी मनोज सिन्हा को नया दायित्व सौंपा है। अपने तीन महीने के कार्यकाल में उन्होंने जनता की विश्वास बहाली का प्रयास शुरू किया है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों के साथ मेलमिलाप का कार्यक्रम बढ़ाया है ताकि प्रशासन की सीधे पहुंच बढ़ाई जा सके।

तिरंगा भी फहराने में अब हिचक नहीं
पुनर्गठन के बाद कश्मीर घाटी में भी लोगों ने सार्वजनिक रूप से तिरंगा फहराया। 15 अगस्त, 26 जनवरी के साथ ही विलय दिवस पर 26 अक्तूबर को घाटी के विभिन्न स्थानों पर तिरंगा फहराया गया। घाटी में तिरंगा रैली तक निकाली गई। इसमें भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ ही आम कश्मीरियों ने भी हिस्सेदारी की।
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श्रीनगर में दरबार बंद, अब जम्मू में 9 नवंबर को खुलेगा

श्रीनगर में शुक्रवार को सरकार का दरबार बंद हो गया। अब जम्मू में नौ नवंबर को दरबार सजेगा। 1872 में महाराजा गुलाब सिंह ने दरबार मूव की परंपरा शुरू की थी, जिसके तहत छह महीने जम्मू और छह महीने श्रीनगर में सचिवालय रहता है।  

सचिवालय तथा सप्ताह में पांच दिन वाले कार्यालय शुक्रवार को बंद हो गए। छह दिन वाले कार्यालय शनिवार को बंद होंगे। 145 साल पुरानी इस परंपरा के तहत साल में दो बार रिकार्ड को लाने तथा ले जाने और कर्मचारियों को भत्ता के मद्दे में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। 

इसे देखते हुए इस परंपरा को बंद करने की समय समय पर मांग उठती रही है। साथ ही दोनों स्थानों पर सचिवालय स्थापित करने की मांग की जाती रही है ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके। 

कोरोना की वजह से इस साल गर्मी में श्रीनगर दरबार मूव विलंब से हुआ। जम्मू के कर्मचारियों को जम्मू में ही काम करने को कहा गया, जबकि घाटी के कर्मचारियों को मई से श्रीनगर में काम करने के आदेश दिए गए। दो महीने बाद जुलाई में सभी कर्मचारियों को काम पर आने के निर्देश दिए गए।
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पुलवामा कबूलनामे के एक दिन बाद ही सामने आया पाकिस्तान का असली चेहरा

पुलवामा हमले के कबूलनामे के एक दिन बाद ही दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम में भाजयुमो के जिला महासचिव समेत तीन कार्यकर्ताओं की हत्या में पाकिस्तान का हाथ सामने आया है। आईजी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि पाकिस्तान के इशारे पर लश्कर ए ताइबा और द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया। हमले में दो स्थानीय आतंकियों के साथ ही एक पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल था। इनकी शिनाख्त कर ली गई है।

साथ ही हमले में इस्तेमाल गाड़ी को भी बरामद कर लिया गया है। मालूम हो कि वीरवार को जिले के काजीगुंड इलाके के वाईके पोरा में आतंकियों ने कार पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर भाजयुमो के जिला महासचिव समेत तीन कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी थी। आईजी ने बताया कि जांच में अब तक जो सबूत हाथ लगे हैं उससे पता चलता है कि वीरवार की शाम लगभग आठ बजे आतंकी स्थानीय अल्ताफ की कार से घटनास्थल पर पहुंचे थे। उस दौरान भाजयुमो महासचिव फिदा हुसैन अपने दो अन्य साथियों के साथ गाड़ी में बैठे थे। आतंकियों ने वहां पहुंचते ही अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। इसमें तीनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए।

अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि आतंकी जिस गाड़ी में आए थे उसी में अच्छाबल इलाके की ओर भाग निकले। इलाके के तिलवनी गांव से उस गाड़ी को बरामद कर लिया गया है। एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए हैं। आईजीपी ने बताया कि इस घटना के पीछे लश्कर का हाथ है। घटना में डोरू का निसार अहमद खांडे व खुडवानी का अब्बास शेख शामिल था। अब्बास पहले हिजबुल में था, लेकिन आजकल लश्कर के साथ है। वह अपने आपको टीआरएफ का आतंकी भी बताता है। एक पाकिस्तानी आतंकी भी हमले में शामिल था। जल्द इन आतंकियों को मार गिराया जाएगा।

हमला पहले से प्लान था
उन्होंने बताया कि फि दा हुसैन घर से इतनी दूर आकर क्या कर रहे थे इसकी जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किसी का इंतजार कर रहे थे या कोई और वजह थी। हमला पहले से ही प्लान किया गया था।

आठ स्थानों पर सर्च ऑपरेशन
आईजी के अनुसार हमले के बाद से दक्षिणी कश्मीर में करीब 8 जगहों पर सर्च ऑपरेशन जारी है। उम्मीद है कि बहुत जल्द इस ग्रुप के आतंकियों को आर गिराया जाएगा। बता दें कि वीरवार देर शाम आतंकियों ने काजीगुंड के वाईके पोरा में भाजपा के युवा मोर्चा के महासचिव फिदा हुसैन इतू और उनके दो अन्य साथी पर ताबड़तोड़ फ ायरिंग कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।

अनंतनाग में रजिस्टर्ड है हमलावरों की कार
आतंकी वीरवार को जिस आल्टो कार (जेके 03डी 6126) में सवार होकर आए थे वह खुर्शीद अहमद वानी के नाम रजिस्टर्ड है।

जम्मू-कश्मीर में मारे गए कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा: नड्डा
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को कहा, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा मारे गए पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया,
हम सब शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़े हैं। पार्टी के तीनों कार्यकर्ताओं को ‘देशभक्त’ बताते हुए नड्डा ने कहा, उनका ेबलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। 
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एलओसी पर पाकिस्तानी ने किया संघर्ष विराम का उल्लंघन, सेना ने मार गिराए दो पाक सैनिक, कई चौकियां तबाह

सांकेतिक तस्वीर
पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर संघर्ष विराम के उल्लंघन से बाज नहीं आ रही। वीरवार को पुंछ के शाहपुर सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर की गई गोलाबारी के जवाब में सेना ने पाकिस्तानी सेना की एक  चौकी तबाह कर दी और दो जवान ढेर कर दिए, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए।  

पाकिस्तानी सेना ने वीरवार देर शाम शाहपुर सेक्टर के काईयां क्षेत्र में अचानक गोलाबारी शुरू कर दी थी। सैन्य चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। इससे लोगों में भी दहशत फैल गई थी। सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया और जवाबी कार्रवाई में काईयां क्षेत्र में उस पार स्थित पाकिस्तानी सेना की एक चौकी पूरी तरह तबाह हो गई और दो जवान मौके पर ही ढेर हो गए, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

गोलाबारी के डर से कई घंटे बाद उठाईं जवानों की लाशें
सूत्रों के मुताबिक इसके बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलाबारी बंद कर दी गई, लेकिन जवाबी कार्रवाई से खौफजदा पाकिस्तानी सेना को घंटों तक घायल और मृत जवानों को वहां से निकालने की हिम्मत नहीं हुई। कई घंटों के बाद छुपते-छुपाते घायल और मृत जवानों को वहां से निकाला गया।

आईबी पर भी पाकिस्तान ने रात भर दागे गोले
पाकिस्तान ने वीरवार रात भी आईबी पर हीरानगर सेक्टर में करीब सात घंटे गोलाबारी की। पाकिस्तान की 25 चिनाब रेंजर्स ने पप्पू चक पोस्ट से वीरवार रात दस बजे गोलाबारी शुरू की, जो शुक्रवार सुबह पांच बजे तक रुक-रुक कर जारी रही। इस दौरान बीएसएफ की चांदवां, मनियारी, फकीरा पोस्ट व उसके साथ लगते रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इसमें किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। 

बता दें, पाकिस्तान ने बुधवार रात करीब साढ़े बजे से वीरवार सुबह साढ़े चार बजे तक भी हीरानगर सेक्टर के छन्न टांडा और चक चंगा गांवों में गोलाबारी की थी। इसमें दोनों गांवों के कुल नौ घरों को नुकसान पहुंचा था। सीमा पर चल रहे सुरक्षा बांध के काम को बाधित करने के लिए पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा है।
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जम्मू-कश्मीरः बडगाम में आतंकियों ने सीआरपीएफ कैंप पर किया ग्रेनेड हमला, सेना ने चलाया सर्च ऑपरेशन

जम्मू में आज से 30 नंवबर तक रात 10 से सुबह 5 बजे तक सभी गैर-जरूरी गतिविधियों पर प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध

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