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VIDEO: सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन था आगरा, अल्मोड़ा के तांबे से बनते थे हथियार
आगरा। सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास में आगरा और आसपास के क्षेत्रों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिस दौर में सिंधु घाटी सभ्यता विकसित हो रही थी, उसी समय आगरा सहित आसपास का क्षेत्र भी सभ्यता और तकनीकी विकास के मामले में आगे बढ़ रहा था। इटावा, मैनपुरी और आसपास के क्षेत्रों में खुदाई के दौरान मिले तांबे के प्राचीन हथियार इसकी गवाही देते हैं। इन हथियारों से तत्कालीन दक्षिण पांचाल क्षेत्र में धातु विज्ञान और शस्त्र निर्माण की विकसित परंपरा का पता चलता है।
दो दिवसीय इतिहास सेमिनार में सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद्, संग्रहालय वैज्ञानिक और कला इतिहासकार प्रो. डीपी शर्मा ने इन पुरातात्विक साक्ष्यों की जानकारी साझा की। सिंधु घाटी सभ्यता के अध्ययन और उसकी खोज से जुड़े महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहचाने जाने वाले प्रो. शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि प्राचीन काल में आगरा और आसपास का क्षेत्र दक्षिण पांचाल के नाम से जाना जाता था। यहां मिले तांबे के हथियारों को कॉपर होर्ड संस्कृति से जोड़ा जाता है। इनका उल्लेख कॉपर होर्ड वेपन्स इन साउथ एशिया पुस्तक में भी मिलता है।
अल्मोड़ा से आता था तांबा, यहां तैयार होते थे हथियार
प्रो. शर्मा के अनुसार, दक्षिण पांचाल क्षेत्र में मिले कॉपर होर्ड हथियारों को बनाने के लिए उत्तराखंड के अल्मोड़ा क्षेत्र की तांबे की खदानों से प्राप्त धातु का इस्तेमाल किया जाता था। इस क्षेत्र के तांबे में जिंक और आर्सेनिक की मात्रा अपेक्षाकृत कम थी। वहीं सिंधु घाटी सभ्यता में इस्तेमाल किए गए तांबे की संरचना अलग थी। वहां के हथियारों में जिंक की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती थी। इसका संबंध अलग-अलग क्षेत्रों में तांबे के खनिज स्रोतों से था। इससे उस समय विभिन्न क्षेत्रों के बीच धातु और संसाधनों के आदान-प्रदान की जानकारी भी मिलती है।
1961-62 में शुरू हुई खुदाई, इटावा-मैनपुरी में मिले हथियार
उन्होंने बताया कि वर्ष 1961-62 के आसपास इस क्षेत्र में ताम्र हथियारों को लेकर पुरातात्विक अध्ययन और खुदाई शुरू हुई थी। इसके बाद इटावा, मैनपुरी के गणेशपुर और मुरादाबाद सहित कई स्थानों से कॉपर होर्ड हथियार मिले। ये हथियार उस दौर में इस क्षेत्र की तकनीकी दक्षता और सांस्कृतिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
फतेहपुर सीकरी में मिली ओकर कलर पॉटरी भी प्रमाण
प्रो. शर्मा ने फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में मिली ओकर कलर पॉटरी (ओसीपी) का भी उल्लेख किया। यह मिट्टी के बर्तनों की एक विशिष्ट पुरातात्विक संस्कृति है, जो इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा फतेहपुर सीकरी में मिली रॉक पेंटिंग भी प्राचीन मानव जीवन और सांस्कृतिक गतिविधियों के साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के अध्ययन में इन शैलचित्रों का भी उल्लेख किया गया है।
प्रो. शर्मा के अनुसार, इन सभी पुरातात्विक साक्ष्यों को एक साथ देखने पर पता चलता है कि आगरा और आसपास का दक्षिण पांचाल क्षेत्र प्राचीन काल में धातु निर्माण, हथियार बनाने और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा था।
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