{"_id":"6a7de5edb43d8d1f49093dc1","slug":"video-1971-war-hero-recounted-story-of-victory-at-maa-tujhe-pranam-felicitation-ceremony-2026-08-13","type":"video","status":"publish","title_hn":"VIDEO: मां तुझे प्रणाम...वीर गाथांए सुन देशभक्ति से भर उठा माहाैल, 1971 के पाकिस्तान युद्ध के हीरो ने बताई जीत की कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
VIDEO: मां तुझे प्रणाम...वीर गाथांए सुन देशभक्ति से भर उठा माहाैल, 1971 के पाकिस्तान युद्ध के हीरो ने बताई जीत की कहानी
शहीदों की अमर गाथाएं जब ऑडिटोरियम में गूंजीं तो माहौल देशभक्ति से भर उठा। किसी की आंखों में आंसू थे तो किसी के चेहरे पर तिरंगे के लिए गर्व। बृहस्पतिवार को खंदारी स्थित आरबीएस ऑडिटोरियम में अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम के तहत वीरांगना सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। शहीदों की वीर नारियों को सम्मानित करते हुए पूरा सभागार उनके त्याग और साहस के आगे नतमस्तक नजर आया। मंच से एक-एक करके जब अमर सपूतों की वीरगाथा सुनाई जा रही तो पूरा हॉल तालियां से गूंज रहा था। इन्हीं में 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध के हीरो भी बैठे हुए थे। उम्र जरूर उनकी हो गई, लेकिन जोश युवाओं जैसा था। 55 साल पहले हुए युद्ध का जिक्र करते ही उनकी आंखें चमक गई और सीना चौड़ाते हुए पूर्व सैन्य अफसर बोले-बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हमने दुश्मन के घर में घुसकर मारा और जीत हासिल की। टक्कर रोड, सदर निवासी कर्नल (सेवानिवृत्त) कंवलजीत सिंह बक्शी ने कहा कि 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में पुल और रेलवे ट्रैक उड़ाने के लिए आदेश मिला। इंजीनियर होने के नाते पुल पर माइंस लगाकर इनको उड़ा दिया। चार दिन तक वे दुश्मन की सीमा के अंदर ही ऑपरेशन करते रहे। सीज फायर होते ही दुश्मनों के हजारों सैनिक भारतीय फौज के आगे नतमस्तक रहे। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) प्रताप दयाल एयरबोर्न असॉल्ट फोर्स में थे। उन्होंने बताया कि 1971 में बांग्लादेश का पुंगली ब्रिज पर कब्जा करने का ऑर्डर मिला। सामरिक दृष्टि से ये बेहद महत्वपूर्ण था, यहां से ही पाकिस्तान के जवान पूर्वी पाकिस्तान जाते थे। हमने हमला बोलकर इस कब्जे में ले लिया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना सरेंडर करने लगी। हम आगे बढ़ते गए और सबसे पहले ढाका पहुंचने वाले भारतीय सैनिकों का दल था। कर्नल (सेवानिवृत्त) आरएस सोढ़ी का भी 1971 युद्ध का हाल बयां करते हुए सीना चौड़ा हो गया। उन्होंने बताया कि पंजाब के फाजिल्का सेक्टर में 4 जाट रेजिमेंट में पोस्ट थे। इसी क्षेत्र के गुरमुख खेड़ा गांव में उनको कमान मिली। वहां से दिनरात 17700 के फायर किए, इससे दुश्मनों के हौसले पस्त हो गए। पाकिस्तान के टैंकों को भी भारी नुकसान पहुंच गया। इसके लिए गैलेंट्री अवॉर्ड भी मिला। आखिरकार हमारी जीत हुई। सभी ने एकसुर में अमर उजाला के वीरांगना सम्मान समारोह की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का पूरे साल इंतजार रहता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।