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'Dharmi Faujis arrive at the Sri Akal Takht Sahib secretariat; demand priority resolution of the June 1984 issue.
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श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय पहुंचे धर्मी फौजी, जून 1984 के मसले को प्राथमिकता से हल करने की मांग
धर्मी फौजियों ने श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय पहुंचकर जून 1984 से जुड़े मसले को प्राथमिकता के आधार पर हल करने और अपने अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई। इस दौरान सिख धर्म फौजी एसोसिएशन के प्रधान बलदेव सिंह ने कहा कि धर्मी फौजियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
बलदेव सिंह ने बताया कि उनकी ओर से 29 जून और 5 जुलाई 2026 को मांगपत्र सौंपे गए थे। उन्होंने कहा कि जून 1984 का मामला सिख कौम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब धर्मी फौजी सिंह साहिबान से मिलने के लिए सचिवालय में जाने का प्रयास करते हैं, तो वहां तैनात टास्क फोर्स उन्हें रोकती है और कथित तौर पर धक्का-मुक्की भी की जाती है। उन्होंने मांग की कि धर्मी फौजियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी समस्याओं को सुना जाए।
बलदेव सिंह ने जून 1984, वर्ष 1997 से 2002 तक के घटनाक्रम और 2 दिसंबर 2024 को सिंह साहिबान की ओर से जारी आदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि धर्मी फौजियों के मुद्दों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने कुछ नेताओं पर धर्मी फौजियों और श्री अकाल तख्त साहिब के नाम पर वोटों की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से पहले धर्मी फौजियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और नौकरियां दी गई थीं। हालांकि, उन्होंने मांग की कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को देखते हुए नियमित पेंशन और उचित सम्मान भी दिया जाए।
बलदेव सिंह ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर वे दोबारा मांगपत्र सौंपेंगे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
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