मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सिंचाई परियोजना में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। केसला ब्लॉक की देवरी (दोंडी झुनकर) उद्वहन सिंचाई परियोजना का काम शुरू नहीं होने से नाराज किसान और आदिवासी ग्रामीण शनिवार शाम पथरौटा स्थित मुख्य तवा नहर में उतरकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक परियोजना का काम शुरू करने को लेकर ठोस निर्णय और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
2023 में मिली मंजूरी, अब तक काम शुरू नहीं
देवरी सिंचाई परियोजना को वर्ष 2023 में 154.33 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। योजना के तहत तवा बांध से पानी लिफ्ट कर क्षेत्र के 35 गांवों के खेतों तक पहुंचाया जाना है। इससे किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है, लेकिन मंजूरी के करीब तीन साल बाद भी काम शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।
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नहर में उतरकर जताया विरोध, लिखित आश्वासन की मांग
परियोजना में हो रही देरी के विरोध में किसान राकेश यादव, दुर्गेश धुर्वे सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि अब केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा। संबंधित अधिकारी या मंत्री की ओर से लिखित भरोसा और परियोजना शुरू करने का ठोस निर्णय मिलने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
अधिकारियों ने दी समझाइश, नहीं बनी सहमति
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से बातचीत कर धरना समाप्त करने की अपील की। अधिकारियों ने किसानों की मांगें वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इससे पहले शुक्रवार शाम करीब 8 बजे भी विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों और आदिवासी नेताओं से चर्चा की थी, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। शनिवार देर रात तक भी गतिरोध बना रहा।
गेहूं की सिंचाई के लिए रविवार को छोड़ा जाना है पानी
प्रदर्शन के दौरान मुख्य तवा नहर में पानी नहीं था। वहीं, रविवार को गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए तवा डैम से नहर में पानी छोड़े जाने का कार्यक्रम है। ऐसे में किसानों का विरोध सिंचाई व्यवस्था और लंबित परियोजना को लेकर क्षेत्र में जारी नाराजगी को सामने लाता है।
35 गांवों के किसानों को इंतजार, अब शासन के कदम पर नजर
देवरी (दोंडी झुनकर) उद्वहन सिंचाई परियोजना से 35 गांवों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है, लेकिन परियोजना का काम शुरू नहीं होने से किसानों को इसके लाभ का इंतजार है। अब सवाल यह है कि 154.33 करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम कब शुरू होगा और किसानों को सिंचाई सुविधा देने की दिशा में शासन तथा विभाग कब ठोस कदम उठाएंगे। फिलहाल, प्रदर्शनकारी लिखित आश्वासन और काम शुरू करने के स्पष्ट निर्णय की मांग पर अड़े हैं।