आस्था, तपस्या और दृढ़ संकल्प का एक अनूठा उदाहरण पेश करते हुए, पूज्य नागा साधु दिगंबर श्री धर्मपुरी जी महाराज इन दिनों अपनी कठिन नर्मदा परिक्रमा को लेकर चर्चा में हैं। अमरकंटक से शुरू हुई उनकी यह यात्रा नर्मदापुरम पहुंच चुकी है, जहां श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर उनका स्वागत किया।
जनकल्याण और विश्व शांति का संकल्प
धर्मपुरी महाराज ने नवंबर 2025 में अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम स्थल से अपनी अनूठी परिक्रमा शुरू की थी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मां नर्मदा की महिमा, आध्यात्मिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाना और जनकल्याण व विश्व शांति का संदेश देना है। अपनी इस कठिन साधना के माध्यम से वे मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्त कर रहे हैं।
हाथों के बल तय हो रहा सफर
महाराज की परिक्रमा की सबसे खास बात यह है कि वे पैरों से चलने के बजाय हाथों के बल यात्रा कर रहे हैं। वे प्रतिदिन लगभग दो से तीन किलोमीटर की दूरी इसी तरह तय करते हैं। इस असाधारण साधना के लिए अत्यधिक शारीरिक क्षमता, धैर्य और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। उनकी इस साधना को देखकर श्रद्धालु आश्चर्यचकित हैं और इसे आस्था व तपस्या का अनूठा उदाहरण मान रहे हैं।
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नर्मदापुरम तक पहुंची यात्रा
महाराज की यह यात्रा अमरकंटक से शुरू होकर डिंडोरी, महाराजपुर, जबलपुर और नरसिंहपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए नर्मदापुरम पहुंची है। करीब एक वर्ष से जारी इस यात्रा के दौरान वे अलग-अलग पड़ाव पार कर रहे हैं। नर्मदापुरम पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर उनका स्वागत किया।
सात से आठ वर्ष में पूरी होगी परिक्रमा
बताया जा रहा है कि अमरकंटक से शुरू हुई इस परिक्रमा की कुल दूरी लगभग 3,500 किलोमीटर है। हाथों के बल यात्रा करने के कारण इसे पूरा करने में करीब सात से आठ वर्ष लगने का अनुमान है। धर्मपुरी महाराज की यह यात्रा केवल लंबी दूरी तय करने का प्रयास नहीं, बल्कि मां नर्मदा के प्रति समर्पण और विश्व शांति के संदेश से जुड़ी एक कठिन आध्यात्मिक साधना है।