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ऊना: हिमाचल पर बढ़ता कर्ज या विकास की जरूरत? भाजपा ने सुक्खू सरकार से मांगा हिसाब, ₹35,555 करोड़ के नए ऋण का मुद्दा उठाया
Ankesh Dogra
Updated Thu, 24 Sep 2026 03:33 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में बढ़ते कर्ज को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश सचिव सुमीत शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाते हुए सरकार से प्रदेश पर बढ़ते ऋण और उसके इस्तेमाल का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
सुमीत शर्मा ने दावा किया कि 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश का बकाया ऋण ₹1,01,863 करोड़ पहुंच चुका था और अब यह आंकड़ा ₹1.10 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। उन्होंने हाल ही में विधानसभा में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश सरकार ने ₹35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है।
सुमीत शर्मा ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर ऋण लेने के बाद सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस धन से प्रदेश में कितना विकास हुआ।
उन्होंने सरकार से नए उद्योगों, बड़े अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और स्थायी रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल किए। साथ ही महिलाओं को ₹1500 मासिक आर्थिक सहायता, किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास और दूध खरीद से जुड़े वादों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने सड़क निर्माण और रखरखाव समेत आधारभूत ढांचे के लिए किए गए कार्यों तथा प्रदेश की आय बढ़ाने वाली नई परिसंपत्तियों के बारे में भी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
भाजपा प्रदेश सचिव ने दावा किया कि कर्ज लेने की प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष में भी जारी रही। उनके अनुसार जुलाई 2026 तक सरकार ₹2800 करोड़ का अतिरिक्त ऋण उठा चुकी थी।
सुमीत शर्मा ने कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीति पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार कर्ज पर निर्भर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के नाम पर लिया गया प्रत्येक रुपया भविष्य में प्रदेश की जिम्मेदारी बनेगा और इसे ब्याज सहित चुकाना होगा।
सुमीत शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से यह तर्क दिया जाता रहा है कि पूर्व सरकार से मिले ऋण की किस्तें चुकाने के लिए नया ऋण लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस तर्क के बावजूद यह सवाल बना रहता है कि प्रदेश की आय बढ़ाने और कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों के साथ जनता को यह बताना चाहिए कि बढ़ते ऋण के बीच प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि प्रदेश सरकार को केवल पुराने कर्ज का हवाला देने के बजाय ऋण, विकास और राजस्व बढ़ाने के प्रयासों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि हजारों करोड़ रुपये का ऋण लेने के बाद हिमाचल प्रदेश को वास्तविक रूप से क्या मिला और इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कौन-कौन से स्थायी काम किए गए।
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