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अपराजिता-100 मिलियंस स्माइल: ढलोग स्कूल में छात्राओं को किशोरावस्था, एनीमिया और मासिक धर्म स्वच्छता की जानकारी
Ankesh Dogra
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:08 PM IST
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से राजकीय उच्च पाठशाला ढलोग में वीरवार को अपराजिता-100 मिलियंस स्माइल कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों, एनीमिया तथा मासिक धर्म स्वच्छता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
आयुष विभाग के आयुष्मान आरोग्य मंदिर सूदली की चिकित्सा अधिकारी डॉ. राशि मिश्रा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र में शरीर और मन में कई तरह के बदलाव होते हैं। इन बदलावों को सामान्य प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए और इनके बारे में सही जानकारी हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे शारीरिक बदलावों को लेकर किसी भी तरह की झिझक न रखें। किसी भी समस्या या भ्रम की स्थिति में अभिभावकों, शिक्षकों या स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बातचीत करनी चाहिए। डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस उम्र में शरीर के समुचित विकास के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान एनीमिया के कारणों और बचाव के उपायों की भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि भोजन में आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी से खून की कमी हो सकती है। इससे बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चने, राजमा, गुड़, मौसमी फल और आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। इसलिए भोजन के साथ नींबू, आंवला, संतरा और अन्य विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन लाभकारी हो सकता है।
कार्यक्रम में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर भी छात्राओं को जागरूक किया गया। डॉ. राशि मिश्रा ने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे लेकर संकोच या शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। इस दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
छात्राओं को सैनिटरी पैड के सही इस्तेमाल, समय-समय पर पैड बदलने और इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निस्तारण की जानकारी दी गई। साथ ही पर्याप्त पानी पीने और पौष्टिक आहार लेने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी देकर उनमें जागरूकता बढ़ाना और किशोरावस्था से जुड़े विषयों पर खुलकर बातचीत का वातावरण तैयार करना रहा।
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