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Worship of Goddess Kushmanda on the fourth day of Navratri; crowds of devotees are thronging the 400-year-old Kali Devi Temple in Hansi.
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चौथे नवरात्र पर मां कूष्मांडा की आराधना, हांसी के 400 साल पुराने काली देवी मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
नवरात्र के पावन पर्व पर देशभर के मंदिरों में मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। वहीं, ऐतिहासिक नगरी हांसी के श्री काली देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही है। करीब 400 साल पुराने इस प्रसिद्ध मंदिर में मां के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर की खास पहचान यहां विराजमान मां काली का सौम्य और शीतल स्वरूप है, जो इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाता है। देश ही नहीं, विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है।
हांसी के काली देवी चौक पर स्थित श्री काली देवी मंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है। नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आ रहा है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर मां के दरबार में पहुंच रहा है, तो कोई अपनी मनोकामना पूरी होने पर माता के चरणों में शीश नवाने आ रहा है।
इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान मां काली का स्वरूप है। आमतौर पर मां काली की प्रतिमाओं में उनका रौद्र रूप और बाहर निकली हुई जीभ दिखाई देती है, लेकिन हांसी के इस मंदिर में माता सौम्य और शीतल स्वरूप में विराजमान हैं। मां के इसी अनूठे स्वरूप के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। यही विशेषता मंदिर को अलग पहचान दिलाती है।
नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। श्रद्धालु मां के दरबार में नारियल, फूल और प्रसाद अर्पित कर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। कई ऐसे भक्त भी हैं, जिनकी वर्षों से इस मंदिर में अटूट आस्था बनी हुई है और वे हर नवरात्र मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर पुजारी ब्रिज भूषण शर्मा ने बताया कि श्री काली देवी मंदिर में मां के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां मां काली का स्वरूप अन्य मंदिरों से अलग है। माता शीतल और सौम्य रूप में विराजमान हैं, जिसके प्रति भक्तों की गहरी आस्था है।
श्रद्धालु मुकेश मित्तल ने बताया कि उन्हें मां काली के प्रति गहरी आस्था है और वे कई वर्षों से लगातार माता के दर्शन करने आ रहे हैं। नवरात्र के दिनों में मां के दरबार में पहुंचकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है।
आस्था, इतिहास और धार्मिक परंपराओं को अपने में समेटे हांसी का श्री काली देवी मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के पावन दिनों में यहां पहुंच रहे भक्त मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मां के दरबार में गूंजते जयकारे और श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ मंदिर की धार्मिक महत्ता को बयां कर रही है।
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