Hindi News
›
Video
›
Bihar
›
Chhath Puja 2025: The grand Chhath festival begins. Know everything about the auspicious time for bathing and
{"_id":"68fb3e1546c34d4c7901cbe2","slug":"chhath-puja-2025-the-grand-chhath-festival-begins-know-everything-about-the-auspicious-time-for-bathing-and-2025-10-24","type":"video","status":"publish","title_hn":"Chhath Puja 2025: छठ महापर्व शुरू.. नहाय-खाय, खरना तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त.. जानिए सब कुछ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chhath Puja 2025: छठ महापर्व शुरू.. नहाय-खाय, खरना तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त.. जानिए सब कुछ
Video Published by: ज्योति चौरसिया Updated Fri, 24 Oct 2025 02:22 PM IST
Link Copied
छठ पूजा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय त्योहार है, जो सूर्य देव और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता और आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख-शांति तथा जीवन की सभी आवश्यकताओं के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने का एक खास अवसर होता है। साल 2025 में छठ पूजा की तिथियां और प्रमुख अनुष्ठान समय के अनुसार तय किए गए हैं, जिनमें व्रत, स्नान, सूर्यदेव की आराधना और प्रसाद वितरण शामिल हैं। इस महापर्व के दौरान लोग साफ-सफाई, संयम और नियमों का विशेष ध्यान रखते हुए, अपने घरों और आस-पास के जलाशयों में जाकर पूजा करते हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं 2025 में छठ पूजा कब और कैसे मनाई जाएगी। छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला पवित्र त्योहार है, जिसे इस वर्ष 25 अक्तूबर से 28 अक्तूबर, 2025 तक मनाया जाएगा। यह पर्व खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे सूर्य षष्ठी, डाला छठ और डाला पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
पहला दिन: नहाय-खाय (25 अक्तूबर, शनिवार)
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती नदी या तालाब में स्नान करते हैं और शुद्ध, सरल भोजन ग्रहण करते हैं। साथ ही घर की साफ-सफाई की जाती है और पूजा के लिए फल, दीये आदि खरीदे जाते हैं। दूसरा दिन: खरना पूजन (26 अक्तूबर, रविवार)
इस दिन व्रती पूरा दिन उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद छठी मैया को प्रसाद चढ़ाकर अपना उपवास तोड़ते हैं। प्रसाद परिवार और मित्रों में बांटा जाता है। तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (27 अक्तूबर, सोमवार)
इस दिन व्रती शाम को नदी या तालाब के किनारे जाकर अस्त होते सूर्य को जल अर्घ्य देते हैं। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम 5:40 बजे है। रात में व्रती छठ पूजा की कथा सुनते और भक्ति गीत गाते हैं। चौथा दिन: उषा अर्घ्य (28 अक्तूबर, मंगलवार)
अंतिम दिन सुबह उगते हुए सूर्य को दूध से अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती अपना निर्जला उपवास तोड़ते हैं और इस महापर्व का समापन होता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।