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गया: राजद की पूर्व विधायक कुंती देवी को उम्रकैद, 2013 के सुमारिक हत्याकांड में सुनाई गई सजा

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कोरोना काल : समय पर नहीं मिल रहा वेतन, गया नगर निगम कर्मचारी धरने पर बैठे

बिहार के गया में कोरोना संकट में समय पर वेतन नहीं मिलने से नगर निगम कर्मचारियों में बेहद नाराजगी है। नगर निगम के कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर नगर निगम कार्यालय परिसर में सोमवार को एक दिवसीय धरना बिहार लोकल बॉडी एम्पलाई के बैनर तले दिया है। 

बिहार लोकल एम्पलाई के सचिव अमृत प्रसाद ने इस धरना प्रदर्शन का नेतृत्व किया। अमृत प्रसाद ने कहा कि 11 सूत्री मांग को लेकर निगम के कर्मचारी धरना दे रहे हैं। इनमें  बकाया एरियर का भुगतान, मृत कर्मचारियों के आश्रितों की राशि का भुगतान, दैनिक मजदूरों का स्थाई, दैनिक मजदूरों के साल में 12 दिन के छुट्टी, सही समय पर पेंशन का भुगतान सहित कई मांगें शामिल हैं। 

प्रदर्शनकारियों ने लगाए सरकार विरोधी नारे 
अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे निगम के कर्मचारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा खोखले वादे करती है। सरकार ने अपने वादे के मुताबिक,  एक भी कार्य नहीं कराया है। यहां तक की समय पर वेतन का भी भुगतान नहीं हो रहा है। तीन महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण कर्मचारियों में आर्थिक तंगी आ गई है। अगर कुछ दिनों में वेतन नहीं मिला, तो कर्मचारियों को भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। कर्मचारियों के विरोध को सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी साथ मिल रहा है।

धरना को संबोधित करते हुए वक्ता परशुराम पासवान ने कहा कि कर्मचारी कोरोना काल में पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाए, तो ऐसे में कर्मचारियों के बीच बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। मेयर, डिप्टी मेयर एवं नगर आयुक्त के बार-बार आश्वासन के बाद भी कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। मौके पर अशोक राम सत्येंद्र प्रसाद सहित काफी संख्या में कर्मचारी मौजूद है।
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31 दिसंबर से गया में शुरू होगा मिनी पितृपक्ष मेला, दूर-दूर से आते हैं लोग

प्रतीकात्मक तस्वीर
हिंदू धर्म में पितरों के मोक्ष के लिए तर्पण और पिंडदान काफी अहम माना जाता है। ऐसे में सनातन धर्म में बिहार के गया का महत्व काफी ज्यादा है। इसके चलते रोजाना करीब तीन-चार हजार लोग पिंडदान के लिए गया पहुंचते हैं। वहीं, पितृपक्ष के दौरान पिंडदान करने के लिए गया जाने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। दरअसल, 31 दिसंबर से गया में पितृ पक्ष मेला शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी तक चलेगा।

हर साल दो बार लगता है मेला
बता दें कि गया में हर साल दो बार पितृ पक्ष मेला आयोजित किया जाता है। पहला मेला आश्विन महीने में होता है, जबकि दूसरा मेला पौष महीने में होता है। इस बार पौष माह की शुरुआत 31 दिसंबर से हो रही है। 

15 दिन चलेगा मेला
ज्योतिष शास्त्र के जानकार बताते हैं कि इस साल मिनी पितृ पक्ष 31 दिसंबर से शुरू हो रहा है, जो 14 जनवरी मकर संक्रांति तक चलेगा। ज्योतिषियों के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान हजारों लोग गया पहुंचते हैं। इनमें मकर सक्रांति पर स्नान के लिए गंगासागर जाने वाले तीर्थयात्री काफी ज्यादा होते हैं। 

प्रशासन नहीं करता तैयारी
गौरतलब है कि मिनी पितृपक्ष के लिए जिला प्रशासन कोई भी तैयारी नहीं करता है। इस दौरान नगर निगम सिर्फ पिंड वेदियों की सफाई करा देता है। बता दें कि गया शहर में देवघाट, प्रेतशिला, राम शिला, अझयवट और सीता कुंड सहित कई पिंडवेदी हैं। ऐसे में तीर्थ यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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खरमास में सियासत के अहम फैसले: तय होगा सुशील मोदी का भविष्य, एमएलसी मनोनयन और जदयू का विस्तार

हिंदू पंचांग के तहत 15 दिसंबर से खरमास का महीना शुरू हो गया है, जो 14 जनवरी तक रहेगा। इस महीने में भले ही नए काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन बिहार की राजनीति से लेकर केंद्र सरकार के अहम फैसले 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक ही लिए जाएंगे। इस दौरान राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज रहेंगी। दरअसल, बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार होना है, जिसके लिए नए चेहरों का फैसला इसी माह होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार में भी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा जोरों पर है। 

बिहार में होगा मंत्रिमंडल विस्तार

बता दें कि 17वीं विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सिर्फ 15 विधायकों के साथ शपथ ग्रहण की थी। अभी उनकी कैबिनेट में 21 और मंत्रियों को एंट्री होनी है। ऐसे में नए चेहरों पर फैसला इसी महीने किया जा सकता है, जिससे बाकी मंत्रियों पर विभागों का बोझ कम किया जा सके।

राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनयन

गौरतलब है कि राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सदस्यों के मनोनयन की बात भी अटकी हुई है, जिस पर फैसला इसी महीने में होना तय है। दरअसल, अशोक चौधरी और मुकेश सहनी बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्रिमंडल में शामिल हुए। ऐसे में नए एमएलसी के लिए चयन का काम भी इसी महीने होगा।

केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार

रामविलास पासवान के बाद खाली हुए मंत्रालय के लिए केंद्र सरकार को फैसला लेना बाकी है। हालांकि, यहां के लिए सबसे ज्यादा चर्चा सुशील मोदी के नाम की है। किसान आंदोलन का दंश झेल रही केंद्र सरकार भी मंत्रिमंडल का विस्तार करेगी। रामविलास पासवान के मंत्रालय के लिए सबसे ज्यादा चर्चा सुशील मोदी के नाम पर ही है। माना जा रहा है कि सुशील मोदी का भविष्य और कुछ मंत्रालयों के फेरबदल के फैसले इसी महीने ही लिए जाएंगे, लेकिन उन पर मुहर अगले महीने लगेगी।
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