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आर्थिक तंगी से परेशान किसान ने की खुदकुशी
Updated Sat, 12 Aug 2017 06:19 PM IST
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हजारा/(पीलीभीत)। थाना क्षेत्र में गन्ना भुगतान न होने के कारण एक किसान द्वारा आत्महत्या करने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था शनिवार आर्थिक तंगी से परेशान एक और किसान गांधीनगर निवासी 35 वर्षीय जसविंदर सिंह ने फांसी लगा जान दे दी। उसका शव मकान से आधा किलोमीटर दूर एक खेत में अमरूद के पेड़ पर लटका मिला। परिवारीजनों से सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
हजारा थाना क्षेत्र के गांधी नगर निवासी जसविंदर पाल सिंह उर्फ रिंपी (35) पुत्र अंग्रेज सिंह खेती कर परिवार का भरण पोषण करते थे। पिछले कुछ दिनों से वह आर्थिक रूप से परेशान चल रहे थे। शनिवार दोपहर वह घर से शौच को जाने की बात कहकर निकले थे। कुछ देर बाद किसान का शव मकान से आधा किलोमीटर की दूरी पर गन्ने के खेत में लगे अमरूद के पेड़ पर फंदे पर लटका मिला। फंदा प्लास्टिक की रस्सी से बना हुआ था और शौच को घर से साथ लाया गया पानी का डिब्बा भी वहीं पर रखा था। आसपास के खेतों पर काम कर रहे लोगों की नजर पेड़ पर लटकते शव पर पड़ी तो चीख पुकार मच गई। कुछ ही देर में परिवारीजन भी मौके पर आ गए। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पर पहुंची हजारा पुलिस ने परिवारीजनों से जानकारी जुटाई। जिसमें परिवार वालों ने आर्थिक तंगी से परेशान होने को कारण बताया। एसएचओ हजारा शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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जैसे -तैसे गुजर बसर कर रहा था जसविंदर
पीलीभीत। आत्महत्या करने वाला किसान जसविंदर एक सुलझे मिजाज का व्यक्ति था। पत्नी मनप्रीत कौर और एक साल की बेटी हरनीम के साथ हंसी -खुशी रहता था। हाल ही में वह अपने भाईयों से अलग अपनी गृहस्थी संग रहने लगा था। उसके पास दो एकड़ जमीन है, जिस पर वह खेती करता था।
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पिछले करीब छह माह से उसकी आर्थिक स्थिति तंग हो गई थी। उसने इस बीच एक प्राइवेट बस में कंडक्टर की नौकरी की, लेकिन वह ज्यादा दिन नहीं चल सकी। एक सप्ताह से वह काफी परेशान हो गया। उस पर सहकारी साधन समिति से 64 हजार रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा से ढाई लाख रुपये का कर्ज है। इसको चुकता करने की चिंता भी कहीं न कहीं उसके मन में रहती थी। परिवार के हालात की बात करें तो किसी तरह से गुजर बसर हो रहा था। शनिवार सुबह ही वह गांव के एक युवक से अनाज मांगकर लाया था। हालांकि इस बीच किसी को उसके आत्महत्या करने का अहसास नहीं था। दोपहर में जब सूचना मिली तो परिवारीजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक साल की बेटी हरनीम के सिर से पिता का साया उठ गया तो वहीं पत्नी मनप्रीत कौर की भरी जवानी में दुनिया ही उजड़ गई। उसका रो-रोकर बुरा हाल है।
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हजारा थाना क्षेत्र के गांधी नगर निवासी जसविंदर पाल सिंह उर्फ रिंपी (35) पुत्र अंग्रेज सिंह खेती कर परिवार का भरण पोषण करते थे। पिछले कुछ दिनों से वह आर्थिक रूप से परेशान चल रहे थे। शनिवार दोपहर वह घर से शौच को जाने की बात कहकर निकले थे। कुछ देर बाद किसान का शव मकान से आधा किलोमीटर की दूरी पर गन्ने के खेत में लगे अमरूद के पेड़ पर फंदे पर लटका मिला। फंदा प्लास्टिक की रस्सी से बना हुआ था और शौच को घर से साथ लाया गया पानी का डिब्बा भी वहीं पर रखा था। आसपास के खेतों पर काम कर रहे लोगों की नजर पेड़ पर लटकते शव पर पड़ी तो चीख पुकार मच गई। कुछ ही देर में परिवारीजन भी मौके पर आ गए। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पर पहुंची हजारा पुलिस ने परिवारीजनों से जानकारी जुटाई। जिसमें परिवार वालों ने आर्थिक तंगी से परेशान होने को कारण बताया। एसएचओ हजारा शैलेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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जैसे -तैसे गुजर बसर कर रहा था जसविंदर
पीलीभीत। आत्महत्या करने वाला किसान जसविंदर एक सुलझे मिजाज का व्यक्ति था। पत्नी मनप्रीत कौर और एक साल की बेटी हरनीम के साथ हंसी -खुशी रहता था। हाल ही में वह अपने भाईयों से अलग अपनी गृहस्थी संग रहने लगा था। उसके पास दो एकड़ जमीन है, जिस पर वह खेती करता था।
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पिछले करीब छह माह से उसकी आर्थिक स्थिति तंग हो गई थी। उसने इस बीच एक प्राइवेट बस में कंडक्टर की नौकरी की, लेकिन वह ज्यादा दिन नहीं चल सकी। एक सप्ताह से वह काफी परेशान हो गया। उस पर सहकारी साधन समिति से 64 हजार रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा से ढाई लाख रुपये का कर्ज है। इसको चुकता करने की चिंता भी कहीं न कहीं उसके मन में रहती थी। परिवार के हालात की बात करें तो किसी तरह से गुजर बसर हो रहा था। शनिवार सुबह ही वह गांव के एक युवक से अनाज मांगकर लाया था। हालांकि इस बीच किसी को उसके आत्महत्या करने का अहसास नहीं था। दोपहर में जब सूचना मिली तो परिवारीजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। एक साल की बेटी हरनीम के सिर से पिता का साया उठ गया तो वहीं पत्नी मनप्रीत कौर की भरी जवानी में दुनिया ही उजड़ गई। उसका रो-रोकर बुरा हाल है।