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गैस सिलेंडर का पाइप फटने से लगी आग
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Mon, 23 Nov 2015 10:03 PM IST
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राजीचौराहा (बहराइच)। बरवलिया गांव निवासी एक ग्रामीण के घर में रविवार देर रात खाना बनते समय गैस सिलेंडर का पाइप फटने से आग लग गई। आग बुझाने के प्रयास में दो ग्रामीण भी झुलस गए हैं।
चार लाख से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। घर में रखी नगदी भी आग की भेंट चढ़ गई है। इस मामले में तहसील को सूचना दी गई लेकिन पीड़ितों को सहायता नहीं मिल सकी है।
महसी तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुंसारी निवासी संतोष शुक्ला, नानकून और वेदप्रकाश का मकान बीते वर्ष बाढ़ की कटान में नदी में समाहित हो गया था। गृहस्थी समेटकर सभी ने बरवलिया गांव में शरण ली थी।
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झोपड़ी बनाकर तीनों परिवार रह रहे थे। रविवार देर रात संतोष शुक्ला के घर में महिलाएं खाना बना रही थीं तभी गैस सिलेंडर का पाइप अचानक फट गया। इससे आग लग गई।
परिवार के लोगों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग दौड़े लेकिन तब तक लपटों ने पूरे घर को आगोश में ले लिया। गृहस्थी बचाने में संतोष के हाथ और पैर झुलस गए।
लपटों ने पड़ोसी नानकून और वेदप्रकाश के घर को भी आगोश में ले लिया। नानकून भी आग बुझाने की कोशिश में झुलस गया। चार घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने उस पर काबू पाया।
अग्निकांड में तीनों घरों में रखा कपड़ा, अनाज, बर्तन, जेवरात सब राख गया है। संतोष शुक्ला ने बताया कि उन्होंने मकान निर्माण के लिए 18 हजार रुपये इकट्ठा किए थे, जो लपटों की भेंट चढ़ गए।
वहीं, नानकून के घर में रखा 3500 रुपये भी राख हो गए।
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चार लाख से अधिक की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। घर में रखी नगदी भी आग की भेंट चढ़ गई है। इस मामले में तहसील को सूचना दी गई लेकिन पीड़ितों को सहायता नहीं मिल सकी है।
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महसी तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुंसारी निवासी संतोष शुक्ला, नानकून और वेदप्रकाश का मकान बीते वर्ष बाढ़ की कटान में नदी में समाहित हो गया था। गृहस्थी समेटकर सभी ने बरवलिया गांव में शरण ली थी।
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झोपड़ी बनाकर तीनों परिवार रह रहे थे। रविवार देर रात संतोष शुक्ला के घर में महिलाएं खाना बना रही थीं तभी गैस सिलेंडर का पाइप अचानक फट गया। इससे आग लग गई।
परिवार के लोगों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग दौड़े लेकिन तब तक लपटों ने पूरे घर को आगोश में ले लिया। गृहस्थी बचाने में संतोष के हाथ और पैर झुलस गए।
लपटों ने पड़ोसी नानकून और वेदप्रकाश के घर को भी आगोश में ले लिया। नानकून भी आग बुझाने की कोशिश में झुलस गया। चार घंटे की मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने उस पर काबू पाया।
अग्निकांड में तीनों घरों में रखा कपड़ा, अनाज, बर्तन, जेवरात सब राख गया है। संतोष शुक्ला ने बताया कि उन्होंने मकान निर्माण के लिए 18 हजार रुपये इकट्ठा किए थे, जो लपटों की भेंट चढ़ गए।
वहीं, नानकून के घर में रखा 3500 रुपये भी राख हो गए।